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सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए

सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए

फिल्म हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट के कलाकार मिमोह चक्रवर्ती और चेतना पांडे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, फिल्म और निजी अनुभव साझा किए। चेतना ने बताया कि वह एक्टिंग का सपना लगभग छोड़ चुकी थीं, लेकिन विक्रम भट्ट के एक फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। मिमोह ने फिल्म की कहानी को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों कलाकारों ने शूटिंग के किस्से, हॉरर फिल्मों के अनुभव, मिथुन चक्रवर्ती से मिली सीख और फिल्म की खासियतों पर बात की। सवाल: ‘हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा? जवाब/चेतना पांडे: इस फिल्म से मेरा जुड़ाव किस्मत जैसा है। मुंबई आए मुझे काफी समय हो गया है और मेरी संघर्षभरी यात्रा रही है। आउटसाइडर होने पर बहुत मेहनत और ऑडिशन देने के बाद भी कई बार लगता है कि बड़े सपने पूरे नहीं होंगे। मैं नैनीताल से हूं। इंडस्ट्री में आने के बाद समझ आया कि यहां जगह बनाना आसान नहीं है। मैंने छोटे-छोटे रोल किए, जैसे शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में काम किया। कई बार लगा कि अब वह मौका नहीं मिलेगा, जिसका मैं इंतजार कर रही हूं। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। करीब तीन साल पहले मेरी मुलाकात विक्रम भट्ट सर से हुई थी। उस समय मैं लगभग अपने सपने छोड़ चुकी थी। मैंने उनसे कहा था कि मैंने बहुत मेहनत की है, लेकिन अब लगता है कि मुझे वह मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं टैलेंटेड हूं और एक दिन बड़ा काम करूंगी। फिर करीब एक साल तक हमारी बात नहीं हुई। मैं खतरों के खिलाड़ी सीजन 12 कर रही थी, तभी उनका फोन आया। उन्होंने कहा कि मुझसे मिलो, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है। उस समय हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और दूसरी अभिनेत्री फिल्म कर रही थी। विक्रम सर ने मेरी तस्वीर देखी और उन्हें लगा कि उन्हें उनकी ‘सुनहरी’ मिल गई है। अगले दिन उन्होंने मुझे बुलाया और मेरा कॉन्ट्रैक्ट साइन हो गया। दूसरे दिन से मैंने शूटिंग शुरू कर दी। पहले दिन के बाद सर ने मेरी तारीफ की। तभी मुझे लगा कि यह फिल्म मुझे ही करनी थी। सवाल: मिमोह, आप पहले भी हॉन्टेड का हिस्सा रह चुके हैं। इस फिल्म की कौन-सी बात आपको सबसे खास लगी? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: सबसे खास इसकी कहानी लगी। ‘हॉन्टेड 3डी’ 15 साल पहले आई थी और भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3डी फिल्म थी। उसके गाने और कहानी दर्शकों को पसंद आए थे। जब विक्रम सर ने मुझे इसके सीक्वल की कहानी सुनाई तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। इसमें हॉरर, शानदार गाने और मजबूत कहानी है। मुझे लगता है कि इस फिल्म का असली हीरो इसकी कहानी है। हमने कलाकारों के तौर पर अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश की है, लेकिन दर्शकों को सबसे ज्यादा इसकी कहानी पसंद आएगी। इसी वजह से मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कर दी। सवाल: चेतना को फिल्म में लेने से पहले तीन दिन की शूटिंग किसी और अभिनेत्री के साथ हो चुकी थी। फिर सब कुछ दोबारा शूट करना पड़ा। उस समय क्या महसूस हुआ? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: विक्रम सर इस फिल्म को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हॉन्टेड के प्रशंसकों की उम्मीदें बड़ी हैं। लोग आज भी पूछते हैं कि क्या यह पहली फिल्म जैसी होगी, इसके गाने कैसे होंगे और प्रेम कहानी कैसी होगी। विक्रम सर के दिमाग में ‘सुनहरी’ का किरदार पूरी तरह साफ था। जब चेतना ने पहला सीन किया, तब हम सभी को लगा कि हमें हमारी सुनहरी मिल गई है। सवाल: चेतना, फिल्म का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब/चेतना पांडे: वह सीन टीजर में भी दिखाया गया है। उसमें मेरी पहली मुलाकात देव से होती है। उस सीन में मुझे बिना कुछ बोले आंखों और एक्सप्रेशंस से बताना था कि क्या हो रहा है और सामने वाले को कैसे व्यवहार करना है, क्योंकि वहां एक भूत मौजूद होता है। यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण सीन था। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन-सा सीन सबसे डरावना था और किस सीन में सबसे ज्यादा हंसी आई? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: हंसी वाला किस्सा एक गाने की शूटिंग के दौरान हुआ था। एक सीन में मुझे चेतना को देखते हुए बाहर निकलना था और कैमरे से नजर नहीं हटानी थी। मैं सीन में इतना डूबा था कि दीवार पर ध्यान नहीं गया। बाहर निकलते ही सीधे दीवार से टकरा गया और सिर लग गया। चेतना ने यह देखा तो जोर-जोर से हंसने लगीं। फिर पूरे सेट पर हंसी का माहौल बन गया। पूरे दिन हम लोग हंसते रहे। मजेदार बात यह थी कि हम हॉरर फिल्म शूट कर रहे थे, लेकिन उस दिन कॉमेडी ज्यादा हो गई। जहां तक डरावने सीन की बात है, हमारी फिल्म सिर्फ जंप स्केयर पर निर्भर नहीं करती। इसमें डर का एहसास माहौल और कहानी से आता है। फिल्म देखते समय दर्शकों को लगातार लगेगा कि कुछ बुरा होने वाला है और यही इसकी खासियत है। सवाल: चेतना, आपके लिए ‘सुनहरी’ का किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/चेतना पांडे: मेरे लिए इस फिल्म का हर सीन चुनौतीपूर्ण था। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में फिर कभी इतना मुश्किल और परतदार किरदार मिलेगा। असल जिंदगी में मैं बहुत बातूनी और चंचल हूं, लेकिन सुनहरी बिल्कुल अलग है। वह शांत है, कम बोलती है और उसकी भावनाएं चेहरे और आंखों में नजर आती हैं। मैंने विक्रम सर से कई बार पूछा कि उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर जो है, शायद मैं खुद भी नहीं जानती, लेकिन वह उसे देख सकते हैं। यह बात मेरे लिए बहुत खास थी। सवाल: क्या आप भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों पर विश्वास करती हैं? जवाब/चेतना पांडे: पहले मैं इन चीजों पर ज्यादा विश्वास नहीं करती थी, लेकिन मेरे पिता ने अपने कुछ अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि एक बार उनके साथ ऐसी घटना हुई थी, जिसमें उन्हें कुछ समय तक याद नहीं रहा कि क्या हुआ था। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। मैंने आसपास भी कुछ घटनाएं देखी हैं, इसलिए अब मैं इन चीजों पर विश्वास करती हूं। हालांकि मेरे साथ अभी तक ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ है। सवाल: अगर सच में किसी भूत से सामना हो जाए, तो उससे क्या मांगेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मैं उससे कुछ नहीं मांगूंगा, मैं तो वहां से भाग जाऊंगा। (हंसते हुए) मेरी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है, मुझे उससे कुछ लेने की जरूरत नहीं है। लोग कहते हैं कि काश ऐसा अनुभव हो, लेकिन सच में अगर सामने भूत आ जाए तो हालत खराब हो जाएगी। फिल्म में मैं भूत से लड़ रहा हूं, लेकिन रियल लाइफ में भूत दिख गया तो सबसे पहले मैं ही भागूंगा। सवाल: चेतना, अगर आपको किसी हॉन्टेड जगह पर जाना पड़े, तो अपने साथ किसे लेकर जाएंगी? जवाब/चेतना पांडे: मैं विक्रम भट्ट सर को अपने साथ लेकर जाऊंगी। (हंसते हुए) क्योंकि अगर वहां सच में कोई हॉरर घटना होने लगी, तो सर तुरंत कहेंगे- “ये तो बहुत रियल है, इस पर एक और फिल्म बनाते हैं।” वहीं नई फिल्म की तैयारी शुरू हो जाएगी। सवाल: विक्रम भट्ट की कौन-सी फिल्म आपको सबसे ज्यादा पसंद है? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मुझे विक्रम सर की लगभग सभी फिल्में पसंद हैं। गुलाम मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है। हॉन्टेड भी मुझे पसंद थी। बचपन में मैं अपने पिता के साथ हॉरर फिल्में देखता था और बहुत डर जाता था। कई बार आंखें बंद करके उंगलियों के बीच से स्क्रीन देखता था। तब सोचता था कि कलाकार ऐसे सीन कैसे शूट करते होंगे। अब हॉरर फिल्म करने के बाद समझ आया कि यह कितना मुश्किल काम है। सवाल: अगर इस फिल्म का कोई सीन दोबारा शूट करने का मौका मिले तो कौन-सा सीन करना चाहेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: देव और सुनहरी के लगभग सभी सीन खास हैं। उनकी प्रेम कहानी सीधी-सादी नहीं है। जितना वे करीब आना चाहते हैं, हालात उतना ही उन्हें दूर धकेलते हैं। अगर मौका मिले तो मैं गुफा वाला सीन दोबारा करना चाहूंगा। वह खूबसूरत और भावनात्मक सीन था। चेतना पांडे: उस दिन मिमोह के पिता मिथुन चक्रवर्ती भी सेट पर मौजूद थे। मैं बहुत नर्वस थी, लेकिन सीन खत्म होने के बाद उन्होंने और विक्रम सर ने हमारी तारीफ की। वह पल मैं कभी नहीं भूलूंगी। सवाल: मिथुन चक्रवर्ती आपको काम को लेकर क्या सलाह देते हैं? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: पापा हमेशा कहते हैं कि जो भी किरदार निभाओ, पूरी ईमानदारी से निभाओ। अगर आप किरदार के प्रति ईमानदार नहीं होंगे तो दर्शक तुरंत पकड़ लेंगे। वह कहते हैं कि सेट पर मिमोह नहीं, सिर्फ किरदार नजर आना चाहिए। यही उनकी सबसे बड़ी सीख है, जिसे मैं हमेशा याद रखता हूं। सवाल: अपने पिता मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ी कोई खास याद साझा करना चाहेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मेरे लिए सबसे खास याद वह है, जब मुझे हॉन्टेड की पहली फिल्म मिली थी। मैं विक्रम भट्ट सर से मिला था। उसी शाम घर लौटते समय उनका मैसेज आया कि मैं फिल्म का हीरो हूं। पहले मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने सर को फोन करके पूछा कि क्या सच में मैं ही फिल्म कर रहा हूं। उन्होंने कहा, “कल ऑफिस आओ और कॉन्ट्रैक्ट साइन करो।” जब मैं घर पहुंचा, तो मां और पापा दोनों वहीं थे। मैंने उन्हें बताया कि मुझे फिल्म मिल गई है और मैं उसका हीरो हूं। उस पल उनके चेहरे की खुशी मैं कभी नहीं भूल सकता। खासकर पापा की आंखों में जो गर्व और खुशी थी, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती है। उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा। आज भी उनकी वह मुस्कान मुझे याद है। मेरे लिए वह किसी भी अवॉर्ड से बड़ी बात थी। पापा से जुड़ी यादें सिर्फ इसी एक पल तक सीमित नहीं हैं। बचपन में मैं उनसे काफी डरता था। उनकी पर्सनैलिटी इतनी मजबूत है कि उनके सामने हर कोई थोड़ा नर्वस हो जाता है। लेकिन समय के साथ हमारा रिश्ता बदल गया। आज वह सिर्फ मेरे पिता नहीं, बल्कि मेरे दोस्त भी हैं। हम ऊटी में होटल बिजनेस भी साथ संभालते हैं। कई फैसले मिलकर लेते हैं और जिंदगी की कई बातें शेयर करते हैं। वह अब मुझसे दोस्त की तरह बात करते हैं, सलाह देते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं। इसलिए मेरे लिए कोई एक याद चुनना मुश्किल है, लेकिन हॉन्टेड मिलने के बाद उनके चेहरे पर जो गर्व और खुशी मैंने देखी थी, वह पल मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत और भावुक यादों में हमेशा शामिल रहेगा।

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जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: सबसे खास इसकी कहानी लगी। ‘हॉन्टेड 3डी’ 15 साल पहले आई थी और भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3डी फिल्म थी। उसके गाने और कहानी दर्शकों को पसंद आए थे। जब विक्रम सर ने मुझे इसके सीक्वल की कहानी सुनाई तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। इसमें हॉरर, शानदार गाने और मजबूत कहानी है। मुझे लगता है कि इस फिल्म का असली हीरो इसकी कहानी है। हमने कलाकारों के तौर पर अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश की है, लेकिन दर्शकों को सबसे ज्यादा इसकी कहानी पसंद आएगी। इसी वजह से मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कर दी। सवाल: चेतना को फिल्म में लेने से पहले तीन दिन की शूटिंग किसी और अभिनेत्री के साथ हो चुकी थी। फिर सब कुछ दोबारा शूट करना पड़ा। उस समय क्या महसूस हुआ? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: विक्रम सर इस फिल्म को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हॉन्टेड के प्रशंसकों की उम्मीदें बड़ी हैं। लोग आज भी पूछते हैं कि क्या यह पहली फिल्म जैसी होगी, इसके गाने कैसे होंगे और प्रेम कहानी कैसी होगी। विक्रम सर के दिमाग में ‘सुनहरी’ का किरदार पूरी तरह साफ था। जब चेतना ने पहला सीन किया, तब हम सभी को लगा कि हमें हमारी सुनहरी मिल गई है। सवाल: चेतना, फिल्म का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब/चेतना पांडे: वह सीन टीजर में भी दिखाया गया है। उसमें मेरी पहली मुलाकात देव से होती है। उस सीन में मुझे बिना कुछ बोले आंखों और एक्सप्रेशंस से बताना था कि क्या हो रहा है और सामने वाले को कैसे व्यवहार करना है, क्योंकि वहां एक भूत मौजूद होता है। यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण सीन था। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन-सा सीन सबसे डरावना था और किस सीन में सबसे ज्यादा हंसी आई? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: हंसी वाला किस्सा एक गाने की शूटिंग के दौरान हुआ था। एक सीन में मुझे चेतना को देखते हुए बाहर निकलना था और कैमरे से नजर नहीं हटानी थी। मैं सीन में इतना डूबा था कि दीवार पर ध्यान नहीं गया। बाहर निकलते ही सीधे दीवार से टकरा गया और सिर लग गया। चेतना ने यह देखा तो जोर-जोर से हंसने लगीं। फिर पूरे सेट पर हंसी का माहौल बन गया। पूरे दिन हम लोग हंसते रहे। मजेदार बात यह थी कि हम हॉरर फिल्म शूट कर रहे थे, लेकिन उस दिन कॉमेडी ज्यादा हो गई। जहां तक डरावने सीन की बात है, हमारी फिल्म सिर्फ जंप स्केयर पर निर्भर नहीं करती। इसमें डर का एहसास माहौल और कहानी से आता है। फिल्म देखते समय दर्शकों को लगातार लगेगा कि कुछ बुरा होने वाला है और यही इसकी खासियत है। सवाल: चेतना, आपके लिए ‘सुनहरी’ का किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/चेतना पांडे: मेरे लिए इस फिल्म का हर सीन चुनौतीपूर्ण था। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में फिर कभी इतना मुश्किल और परतदार किरदार मिलेगा। असल जिंदगी में मैं बहुत बातूनी और चंचल हूं, लेकिन सुनहरी बिल्कुल अलग है। वह शांत है, कम बोलती है और उसकी भावनाएं चेहरे और आंखों में नजर आती हैं। मैंने विक्रम सर से कई बार पूछा कि उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर जो है, शायद मैं खुद भी नहीं जानती, लेकिन वह उसे देख सकते हैं। यह बात मेरे लिए बहुत खास थी। सवाल: क्या आप भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों पर विश्वास करती हैं? जवाब/चेतना पांडे: पहले मैं इन चीजों पर ज्यादा विश्वास नहीं करती थी, लेकिन मेरे पिता ने अपने कुछ अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि एक बार उनके साथ ऐसी घटना हुई थी, जिसमें उन्हें कुछ समय तक याद नहीं रहा कि क्या हुआ था। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। मैंने आसपास भी कुछ घटनाएं देखी हैं, इसलिए अब मैं इन चीजों पर विश्वास करती हूं। हालांकि मेरे साथ अभी तक ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ है। सवाल: अगर सच में किसी भूत से सामना हो जाए, तो उससे क्या मांगेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मैं उससे कुछ नहीं मांगूंगा, मैं तो वहां से भाग जाऊंगा। (हंसते हुए) मेरी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है, मुझे उससे कुछ लेने की जरूरत नहीं है। लोग कहते हैं कि काश ऐसा अनुभव हो, लेकिन सच में अगर सामने भूत आ जाए तो हालत खराब हो जाएगी। फिल्म में मैं भूत से लड़ रहा हूं, लेकिन रियल लाइफ में भूत दिख गया तो सबसे पहले मैं ही भागूंगा। सवाल: चेतना, अगर आपको किसी हॉन्टेड जगह पर जाना पड़े, तो अपने साथ किसे लेकर जाएंगी? जवाब/चेतना पांडे: मैं विक्रम भट्ट सर को अपने साथ लेकर जाऊंगी। (हंसते हुए) क्योंकि अगर वहां सच में कोई हॉरर घटना होने लगी, तो सर तुरंत कहेंगे- “ये तो बहुत रियल है, इस पर एक और फिल्म बनाते हैं।” वहीं नई फिल्म की तैयारी शुरू हो जाएगी। सवाल: विक्रम भट्ट की कौन-सी फिल्म आपको सबसे ज्यादा पसंद है? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मुझे विक्रम सर की लगभग सभी फिल्में पसंद हैं। गुलाम मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है। हॉन्टेड भी मुझे पसंद थी। बचपन में मैं अपने पिता के साथ हॉरर फिल्में देखता था और बहुत डर जाता था। कई बार आंखें बंद करके उंगलियों के बीच से स्क्रीन देखता था। तब सोचता था कि कलाकार ऐसे सीन कैसे शूट करते होंगे। अब हॉरर फिल्म करने के बाद समझ आया कि यह कितना मुश्किल काम है। सवाल: अगर इस फिल्म का कोई सीन दोबारा शूट करने का मौका मिले तो कौन-सा सीन करना चाहेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: देव और सुनहरी के लगभग सभी सीन खास हैं। उनकी प्रेम कहानी सीधी-सादी नहीं है। जितना वे करीब आना चाहते हैं, हालात उतना ही उन्हें दूर धकेलते हैं। अगर मौका मिले तो मैं गुफा वाला सीन दोबारा करना चाहूंगा। वह खूबसूरत और भावनात्मक सीन था। चेतना पांडे: उस दिन मिमोह के पिता मिथुन चक्रवर्ती भी सेट पर मौजूद थे। मैं बहुत नर्वस थी, लेकिन सीन खत्म होने के बाद उन्होंने और विक्रम सर ने हमारी तारीफ की। वह पल मैं कभी नहीं भूलूंगी। सवाल: मिथुन चक्रवर्ती आपको काम को लेकर क्या सलाह देते हैं? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: पापा हमेशा कहते हैं कि जो भी किरदार निभाओ, पूरी ईमानदारी से निभाओ। अगर आप किरदार के प्रति ईमानदार नहीं होंगे तो दर्शक तुरंत पकड़ लेंगे। वह कहते हैं कि सेट पर मिमोह नहीं, सिर्फ किरदार नजर आना चाहिए। यही उनकी सबसे बड़ी सीख है, जिसे मैं हमेशा याद रखता हूं। सवाल: अपने पिता मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ी कोई खास याद साझा करना चाहेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मेरे लिए सबसे खास याद वह है, जब मुझे हॉन्टेड की पहली फिल्म मिली थी। मैं विक्रम भट्ट सर से मिला था। उसी शाम घर लौटते समय उनका मैसेज आया कि मैं फिल्म का हीरो हूं। पहले मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने सर को फोन करके पूछा कि क्या सच में मैं ही फिल्म कर रहा हूं। उन्होंने कहा, “कल ऑफिस आओ और कॉन्ट्रैक्ट साइन करो।” जब मैं घर पहुंचा, तो मां और पापा दोनों वहीं थे। मैंने उन्हें बताया कि मुझे फिल्म मिल गई है और मैं उसका हीरो हूं। उस पल उनके चेहरे की खुशी मैं कभी नहीं भूल सकता। खासकर पापा की आंखों में जो गर्व और खुशी थी, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती है। उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा। आज भी उनकी वह मुस्कान मुझे याद है। मेरे लिए वह किसी भी अवॉर्ड से बड़ी बात थी। पापा से जुड़ी यादें सिर्फ इसी एक पल तक सीमित नहीं हैं। बचपन में मैं उनसे काफी डरता था। उनकी पर्सनैलिटी इतनी मजबूत है कि उनके सामने हर कोई थोड़ा नर्वस हो जाता है। लेकिन समय के साथ हमारा रिश्ता बदल गया। आज वह सिर्फ मेरे पिता नहीं, बल्कि मेरे दोस्त भी हैं। हम ऊटी में होटल बिजनेस भी साथ संभालते हैं। कई फैसले मिलकर लेते हैं और जिंदगी की कई बातें शेयर करते हैं। वह अब मुझसे दोस्त की तरह बात करते हैं, सलाह देते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं। इसलिए मेरे लिए कोई एक याद चुनना मुश्किल है, लेकिन हॉन्टेड मिलने के बाद उनके चेहरे पर जो गर्व और खुशी मैंने देखी थी, वह पल मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत और भावुक यादों में हमेशा शामिल रहेगा।

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