Thursday, 27 Aug 2026 | 08:16 AM

Trending :

The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.

The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.
  • Hindi News
  • Career
  • The High Cost Of Digital Education In The US Has Had The Opposite Effect.

वॉशिंगटन4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। – सिम्बॉलिक इमेज

अमेरिका ने स्कूलों में किताबों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर 2024 में 2.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर उल्टा पड़ा। न्यूरोसाइंटिस्ट जेरेड कूनी होर्वाथ के मुताबिक, तकनीक तक अभूतपूर्व पहुंच के बावजूद जेन जी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले संज्ञानात्मक रूप से कम सक्षम दिख रहे हैं और कॉमन टेस्ट में भी स्कोर गिरे हैं।

होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि पिछले दस सालों में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता कम हुई है। दुनियाभर के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में कंप्यूटर और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर खराब रहे हैं।

उनके मुताबिक, पढ़ाई के दौरान तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल और 2007 में आईफोन आने के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बच्चों की मानसिक एकाग्रता और सीखने की शक्ति पर बुरा असर पड़ा है। होर्वाथ ने कहा, यह बहस तकनीक को खारिज करने की नहीं है, बल्कि यह देखने की है कि शैक्षिक टूल्स को इंसानी सीखने के तरीके के साथ कैसे जोड़ा जाए।

सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बच्चों में अवसाद

सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जीन ट्वेंगे के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता खत्म कर रहा है, जो सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक बांधे रखें।

नवंबर 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, टिकटॉक अपने सहज इस्तेमाल के कारण सबसे ज्यादा लत साबित हुआ है। इस डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेटा और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 1,600 से अधिक परिवारों और स्कूलों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं।

जेनरेटिव एआई का जेन-जी पर नकारात्मक प्रभाव

जेन-जी पर जेनरेटिव एआई और गिरती मानसिक क्षमता का दोहरा दबाव है। स्टैनफोर्ड के अध्ययन के अनुसार, एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों (एंट्री-लेवल) पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ा है। न्यूरोसाइंटिस्ट होर्वाथ ने चेतावनी दी है कि सीखने-समझने की क्षमता में कमी केवल करियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भविष्य की जटिल वैश्विक समस्याओं को सुलझाने की मानवीय शक्ति को भी कमजोर कर देगी।

संकट का समाधान

होर्वाथ ने सुझाव दिया है कि सरकार को क्लासरूम में केवल उन्हीं डिजिटल टूल्स की अनुमति देनी चाहिए जो वास्तव में प्रभावी साबित हों। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक अमेरिका के 17 राज्यों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर सख्ती की है। होर्वाथ इसे बच्चों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नीतिगत विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि पूरी शिक्षा कंप्यूटर के भरोसे छोड़ना एक गलत प्रयोग था, और अब छात्रों को इस पर सवाल उठाने चाहिए।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ध्रुव राठी बोले- मोदी जहां भी जाएं, उन्हें शर्मिंदा करें:भड़कीं एक्ट्रेस गुल पनाग; बोलीं- विदेशी धरती पर प्रधानमंत्री पद का मजाक उड़ाना गलत

May 22, 2026/
5:30 pm

बॉलीवुड एक्ट्रेस गुल पनाग ने सोशल मीडिया पर यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक पोस्ट की आलोचना की है। ध्रुव राठी...

बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

March 16, 2026/
12:38 pm

जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे...

2026 की दुनियाभर की टॉप-10 फिल्मों में शामिल हुई धुरंधर-2:क्रिस हेम्सवर्थ और जेंडया की फिल्मों को पीछे छोड़ा, ₹1656 करोड़ हुआ वर्ल्डवाइड कलेक्शन

April 9, 2026/
5:45 pm

आदित्य धर की स्पाई ड्रामा फिल्म धुरंधर: द रिवेंज इस साल दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप 10...

सुष्मिता देव का कहना है कि वह टीएमसी के इस्तीफे के बाद असम से राजनीति करने की इच्छुक हैं विशेष | न्यूज18

June 10, 2026/
6:39 pm

एक विशेष बातचीत में, सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस से अपने इस्तीफे और अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में खुलकर...

तमिलनाडु चुनाव 2026: 99 साल के एआईएडीएमके के पूर्व नेताओं ने किया वोट, जानें ट्वीट कर आखिर क्या बोले मोदी

April 23, 2026/
8:30 pm

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित मोदी ने पूर्व मंत्री के वोट पोस्ट को...

Vinesh Phogat Returns to Wrestling

April 28, 2026/
7:01 pm

Hindi News Sports Vinesh Phogat Returns To Wrestling | Gonda Open Ranking Tournament स्पोर्ट्स डेस्क9 मिनट पहले कॉपी लिंक विनेश...

अमेरिका 32 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप के नॉकआउट में पहुंचा:ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया; साइबारी का सबसे तेज गोल, मोरक्को ग्रुप-सी के टॉप पर

June 20, 2026/
6:35 am

मेजबान अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर लिया है। उसने शनिवार के पहले मैच...

राजनीति

The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.

The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.
  • Hindi News
  • Career
  • The High Cost Of Digital Education In The US Has Had The Opposite Effect.

वॉशिंगटन4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। – सिम्बॉलिक इमेज

अमेरिका ने स्कूलों में किताबों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर 2024 में 2.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर उल्टा पड़ा। न्यूरोसाइंटिस्ट जेरेड कूनी होर्वाथ के मुताबिक, तकनीक तक अभूतपूर्व पहुंच के बावजूद जेन जी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले संज्ञानात्मक रूप से कम सक्षम दिख रहे हैं और कॉमन टेस्ट में भी स्कोर गिरे हैं।

होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि पिछले दस सालों में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता कम हुई है। दुनियाभर के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में कंप्यूटर और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर खराब रहे हैं।

उनके मुताबिक, पढ़ाई के दौरान तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल और 2007 में आईफोन आने के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बच्चों की मानसिक एकाग्रता और सीखने की शक्ति पर बुरा असर पड़ा है। होर्वाथ ने कहा, यह बहस तकनीक को खारिज करने की नहीं है, बल्कि यह देखने की है कि शैक्षिक टूल्स को इंसानी सीखने के तरीके के साथ कैसे जोड़ा जाए।

सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बच्चों में अवसाद

सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जीन ट्वेंगे के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता खत्म कर रहा है, जो सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक बांधे रखें।

नवंबर 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, टिकटॉक अपने सहज इस्तेमाल के कारण सबसे ज्यादा लत साबित हुआ है। इस डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेटा और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 1,600 से अधिक परिवारों और स्कूलों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं।

जेनरेटिव एआई का जेन-जी पर नकारात्मक प्रभाव

जेन-जी पर जेनरेटिव एआई और गिरती मानसिक क्षमता का दोहरा दबाव है। स्टैनफोर्ड के अध्ययन के अनुसार, एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों (एंट्री-लेवल) पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ा है। न्यूरोसाइंटिस्ट होर्वाथ ने चेतावनी दी है कि सीखने-समझने की क्षमता में कमी केवल करियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भविष्य की जटिल वैश्विक समस्याओं को सुलझाने की मानवीय शक्ति को भी कमजोर कर देगी।

संकट का समाधान

होर्वाथ ने सुझाव दिया है कि सरकार को क्लासरूम में केवल उन्हीं डिजिटल टूल्स की अनुमति देनी चाहिए जो वास्तव में प्रभावी साबित हों। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक अमेरिका के 17 राज्यों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर सख्ती की है। होर्वाथ इसे बच्चों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नीतिगत विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि पूरी शिक्षा कंप्यूटर के भरोसे छोड़ना एक गलत प्रयोग था, और अब छात्रों को इस पर सवाल उठाने चाहिए।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.