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FSSAI Notices Nestle, KFC, Flipkart Over Worms in Products

FSSAI Notices Nestle, KFC, Flipkart Over Worms in Products

नई दिल्ली2 मिनट पहले

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FSSAI मैगी पर 2015 में कार्रवाई कर चुका है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सोशल मीडिया पर आई शिकायतों के बाद एक्शन लेते हुए नेस्ले सहित कई बड़ी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नेस्ले को यह नोटिस उसके सबसे लोकप्रिय प्रोडक्ट मैगी के एक पैकेट में कीड़े (लार्वा) मिलने की शिकायत के बाद दिया गया है। FSSAI ने इस मामले में कंपनी से तुरंत एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

FSSAI ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई अन्य शिकायतों पर भी एक्शन लेते हुए हाइजीन (साफ-सफाई) से जुड़े मुद्दों को लेकर फास्ट-फूड चेन KFC को भी नोटिस दिया है। इसके अलावा, खजूर के एक प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट कंपनी को भी रेगुलेटर ने जवाब देने को कहा है।

FSSAI ने नेस्ले से 3 खास बिंदुओं पर मांगा जवाब

खाद्य नियामक (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया से जो डिटेल्ड एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है, इसमें तीन मुख्य क्षेत्रों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं:

  • सोर्स और क्वालिटी चेक लॉग: नेस्ले को सबसे पहले उस खास बैच (ग्रुप) का पता लगाना होगा, जिसमें गड़बड़ी की शिकायत मिली है। कंपनी को यह बताना होगा कि इस बैच का कच्चा माल किस वेंडर से आया था और पैकेट ग्राहकों तक पहुंचने से पहले कंपनी के अंदर इसकी क्वालिटी की जो जांच हुई थी, उसके पूरे रिकॉर्ड (कागजात) पेश करना होगा।
  • सप्लाई चेन से स्टॉक हटाना: कंपनी को यह साबित करना होगा कि शिकायत वाले बैच या संभावित रूप से प्रभावित स्टॉक को बाजार और सप्लाई चेन से हटाने के लिए उसने तुरंत क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं, ताकि यह ग्राहकों तक न पहुंचे।
  • भविष्य के लिए पुख्ता इंतजाम: रेगुलेटर ने नेस्ले से उन सिस्टेमिक बदलावों और कदमों की रूपरेखा मांगी है जो कंपनी अपने क्वालिटी कंट्रोल प्रोसेस में करने जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोबारा पुनरावृत्ति न हो सके।

नेस्ले के लिए क्यों संवेदनशील है यह मामला?

मैगी नूडल्स नेस्ले इंडिया के सबसे बड़े और व्यावसायिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ब्रांड्स में से एक है। कंपनी के लिए यह नोटिस इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि साल 2015 में भी नेस्ले एक बड़े रेगुलेटरी संकट का सामना कर चुकी है। उस वक्त FSSAI ने लेड (सीसा) की मात्रा ज्यादा होने और MSG लेबलिंग विवाद के कारण मैगी के देशव्यापी रिकॉल (बाजार से वापस मंगाने) का आदेश दिया था।

उस विवाद ने कंपनी की बिक्री और ब्रांड के भरोसे को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसे कंपनी ने सालों की मेहनत के बाद दोबारा हासिल किया है। ऐसे में सोशल मीडिया की शिकायत पर आया यह नया नोटिस कंपनी की साख के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल शिकायतों के बाद कार्रवाई

नेस्ले, KFC, फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट को एक साथ जारी हुए नोटिसों से फूड सेफ्टी रेगुलेशन का एक नया पैटर्न दिखाई दे रहा है। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने वाली उपभोक्ताओं की शिकायतें सीधे आधिकारिक रेगुलेटरी नोटिस में बदल रही हैं।

इससे किसी व्यक्तिगत शिकायत और कंपनी से मांगी जाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट के बीच का समय बहुत कम हो गया है। भारत में काम कर रही खाद्य और क्विक सर्विस कंपनियों के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क (कामकाजी जोखिम) बन चुका है, जहां एक सिंगल वायरल पोस्ट कंपनी के लिए कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

———————

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एक ग्राहक को 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं: कॉमर्शियल यूजर रिटेल पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं खरीद पाएंगे, इनके लिए डीजल करीब ₹40 महंगा

आम ग्राहक एक दिन में अधिकतम 200 लीटर ही डीजल खरीद पाएंगे। इस डीजल को दोबारा बेचने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा अब फैक्ट्रियों और कॉमर्शियल यूजर्स को रिटेल आउटलेट से ईंधन नहीं मिलेगा। केंद्र सरकार ने 11 जून 2026 को इसे लेकर आदेश जारी किया है। अब इन बड़े उपभोक्ताओं को केवल बल्क सेल पॉइंट्स से ही ईंधन खरीदना होगा।

सरकार ने यह कदम देश के कुछ हिस्सों में रिटेल पंपों पर अचानक बढ़ी असामान्य बिक्री को देखते हुए उठाया है। यह पाबंदी शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की किल्लत नहीं होगी। पूरी खबर पढ़ें…

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FSSAI ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई अन्य शिकायतों पर भी एक्शन लेते हुए हाइजीन (साफ-सफाई) से जुड़े मुद्दों को लेकर फास्ट-फूड चेन KFC को भी नोटिस दिया है। इसके अलावा, खजूर के एक प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट कंपनी को भी रेगुलेटर ने जवाब देने को कहा है।

FSSAI ने नेस्ले से 3 खास बिंदुओं पर मांगा जवाब

खाद्य नियामक (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया से जो डिटेल्ड एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है, इसमें तीन मुख्य क्षेत्रों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं:

  • सोर्स और क्वालिटी चेक लॉग: नेस्ले को सबसे पहले उस खास बैच (ग्रुप) का पता लगाना होगा, जिसमें गड़बड़ी की शिकायत मिली है। कंपनी को यह बताना होगा कि इस बैच का कच्चा माल किस वेंडर से आया था और पैकेट ग्राहकों तक पहुंचने से पहले कंपनी के अंदर इसकी क्वालिटी की जो जांच हुई थी, उसके पूरे रिकॉर्ड (कागजात) पेश करना होगा।
  • सप्लाई चेन से स्टॉक हटाना: कंपनी को यह साबित करना होगा कि शिकायत वाले बैच या संभावित रूप से प्रभावित स्टॉक को बाजार और सप्लाई चेन से हटाने के लिए उसने तुरंत क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं, ताकि यह ग्राहकों तक न पहुंचे।
  • भविष्य के लिए पुख्ता इंतजाम: रेगुलेटर ने नेस्ले से उन सिस्टेमिक बदलावों और कदमों की रूपरेखा मांगी है जो कंपनी अपने क्वालिटी कंट्रोल प्रोसेस में करने जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोबारा पुनरावृत्ति न हो सके।

नेस्ले के लिए क्यों संवेदनशील है यह मामला?

मैगी नूडल्स नेस्ले इंडिया के सबसे बड़े और व्यावसायिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ब्रांड्स में से एक है। कंपनी के लिए यह नोटिस इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि साल 2015 में भी नेस्ले एक बड़े रेगुलेटरी संकट का सामना कर चुकी है। उस वक्त FSSAI ने लेड (सीसा) की मात्रा ज्यादा होने और MSG लेबलिंग विवाद के कारण मैगी के देशव्यापी रिकॉल (बाजार से वापस मंगाने) का आदेश दिया था।

उस विवाद ने कंपनी की बिक्री और ब्रांड के भरोसे को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसे कंपनी ने सालों की मेहनत के बाद दोबारा हासिल किया है। ऐसे में सोशल मीडिया की शिकायत पर आया यह नया नोटिस कंपनी की साख के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल शिकायतों के बाद कार्रवाई

नेस्ले, KFC, फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट को एक साथ जारी हुए नोटिसों से फूड सेफ्टी रेगुलेशन का एक नया पैटर्न दिखाई दे रहा है। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने वाली उपभोक्ताओं की शिकायतें सीधे आधिकारिक रेगुलेटरी नोटिस में बदल रही हैं।

इससे किसी व्यक्तिगत शिकायत और कंपनी से मांगी जाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट के बीच का समय बहुत कम हो गया है। भारत में काम कर रही खाद्य और क्विक सर्विस कंपनियों के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क (कामकाजी जोखिम) बन चुका है, जहां एक सिंगल वायरल पोस्ट कंपनी के लिए कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

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सरकार ने यह कदम देश के कुछ हिस्सों में रिटेल पंपों पर अचानक बढ़ी असामान्य बिक्री को देखते हुए उठाया है। यह पाबंदी शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की किल्लत नहीं होगी। पूरी खबर पढ़ें…

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