Monday, 15 Jun 2026 | 08:02 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Not every popular brand makes investors rich; learn the story of Hasbro and Games Workshop.

Not every popular brand makes investors rich; learn the story of Hasbro and Games Workshop.
  • Hindi News
  • Business
  • Not Every Popular Brand Makes Investors Rich; Learn The Story Of Hasbro And Games Workshop.

लंदन17 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया।- प्रतीकात्मक फोटो

अगर ‘नर्ड इकोनॉमी’ (दिमागी और शौकिया खेलों का बाजार) के लिए कोई सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, तो वह यकीनन लॉकडाउन का दौर था। उस वक्त घरों में बंद उपभोक्ताओं के पास पर्याप्त समय और खर्च करने के लिए पैसा थे। लेकिन हर कंपनी लॉकडाउन के बाद मिले इस मौके को भुनाने में कामयाब नहीं रही।

एक ही उभरते बाजार ने एक कंपनी ने निवेशकों का पैसा पांच साल तीन गुना कर दिया, जबकि दूसरी का रिटर्न सिर्फ 2% रहा। गेम्स वर्कशॉप और हैस्ब्रो की कहानी बताती है कि किसी भी बिजनेस की सबसे बड़ी पूंजी ग्राहकों की वफादारी और प्रोडक्ट्स की कमी बनाए रखने की क्षमता होती है। दरअसल, लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया। लेकिन सभी इस बूम का फायदा बराबर नहीं उठा पाए।

ब्रिटिश कंपनी ‘गेम्स वर्कशॉप’ और अमेरिकी दिग्गज है हैस्ब्रो, दोनों एक ही बाजार में थे, लेकिन तकदीर और हालात इन्हें बिल्कुल अलग-अलग मुकाम पर ले गई। गेम्स वर्कशॉप साई-फाई (साइंस फिक्शन) और फैंटेसी थीम पर आधारित मिनिएचर फिगर गेम्स बनाती है। यह एक ऐसा शौक है, जो एक बार लग जाए तो छूटता नहीं है। हैस्ब्रो के पास मैजिक: द गैदरिंग (एमटीजी) और डंजन्स एंड ड्रैगन्स (डी एंड डी) जैसे ब्रांड हैं, जिनके दीवाने दुनियाभर में करोड़ों में हैं। इस दशक में गेम्स वर्कशॉप के निवेशकों ने डिविडेंड समेत अपना पैसा तीन गुना किया और कंपनी लंदन के एफटीएसई 100 ब्लू-चिप इंडेक्स में शामिल हो गई। दूसरी तरफ हैस्ब्रो में 2020 की शुरुआत में लगाया 1 डॉलर आज भी सिर्फ 1.02 डॉलर ही है। यानी पांच साल में लगभग शून्य रिटर्न।

हैस्ब्रो की सबसे बड़ी गलती थी स्कारसिटी यानी संसाधनों की कमी की इकोनॉमी को न समझना। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों ने 2022 में कहा था कि कंपनी बहुत ज्यादा एमटीजी कार्ड छाप रही है। इससे सेकंडरी मार्केट बर्बाद हो रहा है और खिलाड़ियों का उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इस कार्ड-प्रिंटिंग रणनीति पर कुछ शेयरधारकों ने इस साल कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी किया है। हैस्ब्रो की एक और समस्या यह है कि वह अब भी बच्चों के खिलौनों के कारोबार से बंधी है। नर्फ गन, स्क्रैबल और माई लिट्ल पोनी इसमें शामिल है। यह बाजार मुश्किल दौर में है। इस डिवीजन की बिक्री पिछले 15 में से 14 तिमाहियों में घटी है। हालांकि ‘विजार्ड्स ऑफ द कोस्ट’ डिवीजन, जो एमटीजी डी एंड डी बनाती है, का पहली तिमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन 51% रहा और एमटीजी की आमदनी सालाना एक-तिहाई से ज्यादा बढ़ी। लेकिन नर्ड इकॉनमी में सफलता का रास्ता नाजुक है। यहां के ग्राहक वफादार हैं, मगर बगावत पर उतर आएं तो बॉयकॉट से भी नहीं चूकते। एआई से दूर, ट्रेंड की परवाह नहीं, फिर भी शानदार रिटर्न

गेम्स वर्कशॉप के सीईओ केविन राउंट्री ने जनवरी में निवेशकों को बताया था कि उनकी टीम का कोई भी अधिकारी अभी एआई को लेकर उत्साहित नहीं है। इस हफ्ते कंपनी को सफाई देनी पड़ी कि उनके वॉरहैमर स्पेस मरीन की फिगर में दिखी छठी उंगली एआई जनरेटेड नहीं थी। इसके बावजूद या शायद इसीलिए गेम्स वर्कशॉप का शेयर 32 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड करता है। दूसरी तरफ हैस्ब्रो सिर्फ 15 गुना पर है। नर्ड्स भीड़ के पीछे नहीं चलते। अभी तक यही रणनीति काम आ रही है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भवानीपुर से फिर मैदान में नैतिकता, नामांकित के लिए अखण्ड अखण्ड, नैतिकता हुई तेज

April 8, 2026/
11:27 am

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए...

इंदौर में टेलीग्राम रेटिंग के नाम पर ठगी:होटल की फाइव स्टार रेंटिग करने के लिए कमीशन के नाम पर 3.12 लाख ऐंठे

March 30, 2026/
2:21 pm

शहर में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लसूड़िया क्षेत्र में टेलीग्राम के जरिए होटल और प्रॉपर्टी...

उज्जैन में नौका विहार महोत्सव शुरू:राधा-कृष्ण ने किया सरोवर में नौका विहार, उमड़े श्रद्धालु

April 30, 2026/
9:18 pm

धार्मिक नगरी उज्जैन के इस्कॉन मंदिर में श्री श्री राधा-कृष्ण के दिव्य नौका विहार महोत्सव का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन...

सलमान ने उधार लेकर पिता के लिए घड़ी खरीदी थी:9 लाख रुपए कीमत थी, देखते ही सलीम खान ने डांट लगाई थी

May 17, 2026/
12:23 pm

सलमान खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने सबसे पहली महंगी चीज अपने पिता के लिए खरीदी थी। एक्टर...

कचरा मैनेजमेंट में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर:भोपाल केस में SC की सख्ती, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना; सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

May 5, 2026/
11:58 am

सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट...

CBSE 12th Result 2026 soon at cbseresults.nic.in and cbse.gov.in. (File/Representative Image)

April 30, 2026/
10:01 am

आखरी अपडेट:30 अप्रैल, 2026, 10:01 IST बैठक में कम उपस्थिति के कारण आंतरिक असंतोष और 2027 के पंजाब चुनाव से...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Not every popular brand makes investors rich; learn the story of Hasbro and Games Workshop.

Not every popular brand makes investors rich; learn the story of Hasbro and Games Workshop.
  • Hindi News
  • Business
  • Not Every Popular Brand Makes Investors Rich; Learn The Story Of Hasbro And Games Workshop.

लंदन17 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया।- प्रतीकात्मक फोटो

अगर ‘नर्ड इकोनॉमी’ (दिमागी और शौकिया खेलों का बाजार) के लिए कोई सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, तो वह यकीनन लॉकडाउन का दौर था। उस वक्त घरों में बंद उपभोक्ताओं के पास पर्याप्त समय और खर्च करने के लिए पैसा थे। लेकिन हर कंपनी लॉकडाउन के बाद मिले इस मौके को भुनाने में कामयाब नहीं रही।

एक ही उभरते बाजार ने एक कंपनी ने निवेशकों का पैसा पांच साल तीन गुना कर दिया, जबकि दूसरी का रिटर्न सिर्फ 2% रहा। गेम्स वर्कशॉप और हैस्ब्रो की कहानी बताती है कि किसी भी बिजनेस की सबसे बड़ी पूंजी ग्राहकों की वफादारी और प्रोडक्ट्स की कमी बनाए रखने की क्षमता होती है। दरअसल, लॉकडाउन के दौर ने हमें जो कुछ दिया उनमें ‘नर्ड इकोनॉमी’ यानी गेम्स, कॉमिक्स और फैंटेसी के शौकीनों की जेब से चलने वाली अर्थव्यवस्था का उभार शामिल है। लोगों ने बोर्ड गेम्स, फैंटेसी फिगर्स और कार्ड गेम्स पर खर्च किया। लेकिन सभी इस बूम का फायदा बराबर नहीं उठा पाए।

ब्रिटिश कंपनी ‘गेम्स वर्कशॉप’ और अमेरिकी दिग्गज है हैस्ब्रो, दोनों एक ही बाजार में थे, लेकिन तकदीर और हालात इन्हें बिल्कुल अलग-अलग मुकाम पर ले गई। गेम्स वर्कशॉप साई-फाई (साइंस फिक्शन) और फैंटेसी थीम पर आधारित मिनिएचर फिगर गेम्स बनाती है। यह एक ऐसा शौक है, जो एक बार लग जाए तो छूटता नहीं है। हैस्ब्रो के पास मैजिक: द गैदरिंग (एमटीजी) और डंजन्स एंड ड्रैगन्स (डी एंड डी) जैसे ब्रांड हैं, जिनके दीवाने दुनियाभर में करोड़ों में हैं। इस दशक में गेम्स वर्कशॉप के निवेशकों ने डिविडेंड समेत अपना पैसा तीन गुना किया और कंपनी लंदन के एफटीएसई 100 ब्लू-चिप इंडेक्स में शामिल हो गई। दूसरी तरफ हैस्ब्रो में 2020 की शुरुआत में लगाया 1 डॉलर आज भी सिर्फ 1.02 डॉलर ही है। यानी पांच साल में लगभग शून्य रिटर्न।

हैस्ब्रो की सबसे बड़ी गलती थी स्कारसिटी यानी संसाधनों की कमी की इकोनॉमी को न समझना। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषकों ने 2022 में कहा था कि कंपनी बहुत ज्यादा एमटीजी कार्ड छाप रही है। इससे सेकंडरी मार्केट बर्बाद हो रहा है और खिलाड़ियों का उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इस कार्ड-प्रिंटिंग रणनीति पर कुछ शेयरधारकों ने इस साल कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी किया है। हैस्ब्रो की एक और समस्या यह है कि वह अब भी बच्चों के खिलौनों के कारोबार से बंधी है। नर्फ गन, स्क्रैबल और माई लिट्ल पोनी इसमें शामिल है। यह बाजार मुश्किल दौर में है। इस डिवीजन की बिक्री पिछले 15 में से 14 तिमाहियों में घटी है। हालांकि ‘विजार्ड्स ऑफ द कोस्ट’ डिवीजन, जो एमटीजी डी एंड डी बनाती है, का पहली तिमाही में ऑपरेटिंग मार्जिन 51% रहा और एमटीजी की आमदनी सालाना एक-तिहाई से ज्यादा बढ़ी। लेकिन नर्ड इकॉनमी में सफलता का रास्ता नाजुक है। यहां के ग्राहक वफादार हैं, मगर बगावत पर उतर आएं तो बॉयकॉट से भी नहीं चूकते। एआई से दूर, ट्रेंड की परवाह नहीं, फिर भी शानदार रिटर्न

गेम्स वर्कशॉप के सीईओ केविन राउंट्री ने जनवरी में निवेशकों को बताया था कि उनकी टीम का कोई भी अधिकारी अभी एआई को लेकर उत्साहित नहीं है। इस हफ्ते कंपनी को सफाई देनी पड़ी कि उनके वॉरहैमर स्पेस मरीन की फिगर में दिखी छठी उंगली एआई जनरेटेड नहीं थी। इसके बावजूद या शायद इसीलिए गेम्स वर्कशॉप का शेयर 32 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड करता है। दूसरी तरफ हैस्ब्रो सिर्फ 15 गुना पर है। नर्ड्स भीड़ के पीछे नहीं चलते। अभी तक यही रणनीति काम आ रही है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.