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Fraud in auto check clearing; names erased with chemicals

Fraud in auto check clearing; names erased with chemicals

वॉशिंगटन14 मिनट पहले

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विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है।- प्रतीकात्मक फोटो

अमेरिका में पुराने जमाने का एक स्कैम नए और खतरनाक रूप में लौट आया है। जालसाज केमिकल से चेक पर लिखा नाम और रकम मिटाकर उसे अपने नाम कर ले रहे हैं। इससे चेक फ्रॉड के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।

एफबीआई और यूएस पोस्टल सर्विस ने चेतावनी जारी कर लोगों से कागजी चेक की जगह डिजिटल पेमेंट अपनाने की अपील की है। जालसाज एसीटोन या ब्लीच जैसे आम घरेलू केमिकल से चेक पर लिखी जानकारी मिटाकर उसे दोबारा अपने नाम पर जारी कर देते हैं। यह तरीका अब सिर्फ निजी चेकबुक तक सीमित नहीं रहा, बिजनेस पेमेंट, टैक्स रिफंड और सोशल सिक्योरिटी जैसी सरकारी सुविधाओं से जुड़े चेक भी जालसाजों के निशाने पर हैं।

कैलिफोर्निया के एक दंपती के साथ हुई घटना इस स्कैम की गंभीरता बताती है। दंपती को आईआरएस से नोटिस मिला कि उन्होंने 12,000 डॉलर (11.3 लाख रुपए) का तिमाही टैक्स पेमेंट नहीं किया, जबकि उनके चेस बैंक स्टेटमेंट में यह चेक क्लियर दिखा रहा था। बाद में स्कैन कॉपी देखने पर पता चला कि ‘पे टू द ऑर्डर’ लाइन से आईआरएस का नाम मिटाकर किसी और व्यक्ति का नाम लिख दिया गया था।

दंपती ने चेस बैंक से शिकायत की, लेकिन बैंक ने शुरू में यह कहकर मदद करने से मना कर दिया कि फ्रॉड रिपोर्ट करने की तय समय-सीमा खत्म हो चुकी है, क्योंकि चेक एक साल पहले ही चोरी होकर जमा हो गया था। बैंक की डिपॉजिट पॉलिसी और कानूनी नियमों के तहत तय समय सीमा बीतने पर नुकसान की जिम्मेदारी आम तौर पर ग्राहक पर ही आती है।

लेकिन दंपती के दबाव और मामला सामने आने के बाद चेस बैंक ने दोबारा जांच शुरू की और उस फर्जी खाते का पता लगाया, जिसमें चोरी की रकम भेजी गई थी। उस खाते में तब भी करीब 11,000 डॉलर (10.4 लाख रुपए) बचे हुए थे। इससे दंपती को लगभग पूरी रकम वापस मिल गई। बैंक प्रवक्ता जैरी डुब्रोव्स्की ने कहा कि वे इस मामले को सुलझाने पर संतुष्ट हैं और ग्राहकों को सलाह दी कि वे डाक से चेक भेजने से बचें। हर महीने अपना बैंक स्टेटमेंट जरूर जांचें।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है। ऑटो क्यिरिंग सिस्टम में चेक से छेड़छाड़, रंग में बदलाव या लिखावट में मिसमैच जैसी गड़बड़ियां पकड़ में नहीं आतीं। इसका सीधा फायदा जालसाजों को मिल रहा है।

आसान जालसाजी के चलते अमेरिका में चेक फ्रॉड के मामले 13 साल में 2,000% बढ़े

अमेरिका में चेक फ्रॉड की शिकायतें 2021 के 3.5 लाख से बढ़कर 2022 में 6.8 लाख हो गईं। हाई-वॉल्यूम मेल चोरी के मामले 2010 में सिर्फ 2,200 थे, जो 2023 में 49,000 से ज्यादा हो गए, यानी करीब 2,000% की बढ़ोतरी। पोस्टल पुलिस अधिकारी संघ के प्रेसिडेट फ्रैंक अल्बर्गो के मुताबिक, यह अब संगठित डाक अपराध का दौर है। एफबीआई और पोस्टल सर्विस की सलाह है कि चेक की जगह ई-चेक और डिजिटल पेमेंट करें।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है।- प्रतीकात्मक फोटो

अमेरिका में पुराने जमाने का एक स्कैम नए और खतरनाक रूप में लौट आया है। जालसाज केमिकल से चेक पर लिखा नाम और रकम मिटाकर उसे अपने नाम कर ले रहे हैं। इससे चेक फ्रॉड के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।

एफबीआई और यूएस पोस्टल सर्विस ने चेतावनी जारी कर लोगों से कागजी चेक की जगह डिजिटल पेमेंट अपनाने की अपील की है। जालसाज एसीटोन या ब्लीच जैसे आम घरेलू केमिकल से चेक पर लिखी जानकारी मिटाकर उसे दोबारा अपने नाम पर जारी कर देते हैं। यह तरीका अब सिर्फ निजी चेकबुक तक सीमित नहीं रहा, बिजनेस पेमेंट, टैक्स रिफंड और सोशल सिक्योरिटी जैसी सरकारी सुविधाओं से जुड़े चेक भी जालसाजों के निशाने पर हैं।

कैलिफोर्निया के एक दंपती के साथ हुई घटना इस स्कैम की गंभीरता बताती है। दंपती को आईआरएस से नोटिस मिला कि उन्होंने 12,000 डॉलर (11.3 लाख रुपए) का तिमाही टैक्स पेमेंट नहीं किया, जबकि उनके चेस बैंक स्टेटमेंट में यह चेक क्लियर दिखा रहा था। बाद में स्कैन कॉपी देखने पर पता चला कि ‘पे टू द ऑर्डर’ लाइन से आईआरएस का नाम मिटाकर किसी और व्यक्ति का नाम लिख दिया गया था।

दंपती ने चेस बैंक से शिकायत की, लेकिन बैंक ने शुरू में यह कहकर मदद करने से मना कर दिया कि फ्रॉड रिपोर्ट करने की तय समय-सीमा खत्म हो चुकी है, क्योंकि चेक एक साल पहले ही चोरी होकर जमा हो गया था। बैंक की डिपॉजिट पॉलिसी और कानूनी नियमों के तहत तय समय सीमा बीतने पर नुकसान की जिम्मेदारी आम तौर पर ग्राहक पर ही आती है।

लेकिन दंपती के दबाव और मामला सामने आने के बाद चेस बैंक ने दोबारा जांच शुरू की और उस फर्जी खाते का पता लगाया, जिसमें चोरी की रकम भेजी गई थी। उस खाते में तब भी करीब 11,000 डॉलर (10.4 लाख रुपए) बचे हुए थे। इससे दंपती को लगभग पूरी रकम वापस मिल गई। बैंक प्रवक्ता जैरी डुब्रोव्स्की ने कहा कि वे इस मामले को सुलझाने पर संतुष्ट हैं और ग्राहकों को सलाह दी कि वे डाक से चेक भेजने से बचें। हर महीने अपना बैंक स्टेटमेंट जरूर जांचें।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है। ऑटो क्यिरिंग सिस्टम में चेक से छेड़छाड़, रंग में बदलाव या लिखावट में मिसमैच जैसी गड़बड़ियां पकड़ में नहीं आतीं। इसका सीधा फायदा जालसाजों को मिल रहा है।

आसान जालसाजी के चलते अमेरिका में चेक फ्रॉड के मामले 13 साल में 2,000% बढ़े

अमेरिका में चेक फ्रॉड की शिकायतें 2021 के 3.5 लाख से बढ़कर 2022 में 6.8 लाख हो गईं। हाई-वॉल्यूम मेल चोरी के मामले 2010 में सिर्फ 2,200 थे, जो 2023 में 49,000 से ज्यादा हो गए, यानी करीब 2,000% की बढ़ोतरी। पोस्टल पुलिस अधिकारी संघ के प्रेसिडेट फ्रैंक अल्बर्गो के मुताबिक, यह अब संगठित डाक अपराध का दौर है। एफबीआई और पोस्टल सर्विस की सलाह है कि चेक की जगह ई-चेक और डिजिटल पेमेंट करें।

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