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डॉट कॉम क्रैश से खतरनाक हो सकता है एआई बबल:दामोदरन की चेतावनी; एआई बूम में गिरावट आई तो संभलना नामुमकिन

डॉट कॉम क्रैश से खतरनाक हो सकता है एआई बबल:दामोदरन की चेतावनी; एआई बूम में गिरावट आई तो संभलना नामुमकिन

दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की रेस में आगे निकलने के लिए ट्रिलियन (लाखों करोड़ रुफए) डॉलर का निवेश कर रही हैं। इसे इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी निवेशों में से एक माना जा रहा है। लेकिन इस बीच कॉर्पोरेट जगत में ‘डीन ऑफ वैल्यूएशन’ के नाम से मशहूर न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के फाइनेंस प्रोफेसर अश्वथ दामोदरन ने एक बड़ी चेतावनी दी है। भारतीय-अमेरिकी मूल के प्रोफेसर दामोदरन का मानना है कि भविष्य में आने वाला एआई मार्केट करेक्शन साल 2000 के डॉट-कॉम क्रैश से भी कहीं ज्यादा दर्दनाक हो सकता है। ‘एक्सेस रिटर्न्स’ यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी बाजार में किसी चीज को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साह होता है, तो उसके बाद गिरावट जरूर आती है। एआई में भी मंदी आने की पूरी आशंका है, जिसका असर केवल वॉल स्ट्रीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सोसाइटी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। भारी कर्ज, डिफॉल्ट और प्राइवेट कैपिटल का संकट आम जनता की जेब तक पहुंच सकता है। डॉट-कॉम एआई- इस बार जोखिम इतना बड़ा क्यों है? जानें तीन बड़ी वजह डॉट कॉम में सीमित खर्च था, लेकिन एआई में इतिहास का बड़ा निवेश अश्वथ दामोदरन ने दोनों दौर के अंतर को समझाते हुए बताया कि डॉट-कॉम के दौर में कंपनियों के पास सिर्फ वेबसाइट्स, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट आधारित आइडिया थे। लेकिन एआई में अब तक का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च हो रहा है। इसकी तुलना 100 साल पहले के ऑटोमोबाइल बिजनेस की शुरुआत से की जा सकती है। डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग पावर और भारी ऊर्जा खपत वाले सिस्टम पर भारी-भरकम पूंजी लगाई जा रही है। पूंजी का यह आकार ही सबसे बड़ा खतरा है। 2008 का सबक- कर्ज न चुका पाना सबसे ज्यादा दर्दनाक प्रोफेसर दामोदरन ने साफ किया कि वह 2008 जैसी वैश्विक आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं, पर 2008 की मंदी का टेकअवे यह है कि जब कर्ज देने वाले जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ जाते हैं और कम ब्याज दरों पर पैसा बांटते हैं, तो सुधार आने पर दर्द पूरी दुनिया को झेलना पड़ता है। यदि आप समय पर कर्ज नहीं चुकाते हैं, तो सामाजिक लागत बहुत बड़ी होती है। यह स्थिति शेयर 90% टूटने के दर्द से कहीं ज्यादा भयानक होती है। लोन के पैसे से खड़ी हो रही है एआई की इमारत, ये बड़ी चिंता डॉट-कॉम बबल जब 2000-01 में फूटा, तो टेक शेयरों की वैल्यू जरूर गिरी और निवेशकों को 70 से 90% तक का नुकसान हुआ। इसके चलते कई टेक कंपनियां पूरी तरह खत्म हो गई। लेकिन यह नुकसान सिर्फ शेयरधारकों तक सीमित रहा। बैंक और आम बिजनेस सुरक्षित रहे। इसके विपरीत, मौजूदा एआई एक्सपेंशन के लिए कर्ज लिया जा रहा है। यह बैंकों के बजाय प्राइवेट कैपिटल मार्केट्स से आ रहा है।

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दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की रेस में आगे निकलने के लिए ट्रिलियन (लाखों करोड़ रुफए) डॉलर का निवेश कर रही हैं। इसे इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी निवेशों में से एक माना जा रहा है। लेकिन इस बीच कॉर्पोरेट जगत में ‘डीन ऑफ वैल्यूएशन’ के नाम से मशहूर न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के फाइनेंस प्रोफेसर अश्वथ दामोदरन ने एक बड़ी चेतावनी दी है। भारतीय-अमेरिकी मूल के प्रोफेसर दामोदरन का मानना है कि भविष्य में आने वाला एआई मार्केट करेक्शन साल 2000 के डॉट-कॉम क्रैश से भी कहीं ज्यादा दर्दनाक हो सकता है। ‘एक्सेस रिटर्न्स’ यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी बाजार में किसी चीज को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साह होता है, तो उसके बाद गिरावट जरूर आती है। एआई में भी मंदी आने की पूरी आशंका है, जिसका असर केवल वॉल स्ट्रीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सोसाइटी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। भारी कर्ज, डिफॉल्ट और प्राइवेट कैपिटल का संकट आम जनता की जेब तक पहुंच सकता है। डॉट-कॉम एआई- इस बार जोखिम इतना बड़ा क्यों है? जानें तीन बड़ी वजह डॉट कॉम में सीमित खर्च था, लेकिन एआई में इतिहास का बड़ा निवेश अश्वथ दामोदरन ने दोनों दौर के अंतर को समझाते हुए बताया कि डॉट-कॉम के दौर में कंपनियों के पास सिर्फ वेबसाइट्स, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट आधारित आइडिया थे। लेकिन एआई में अब तक का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च हो रहा है। इसकी तुलना 100 साल पहले के ऑटोमोबाइल बिजनेस की शुरुआत से की जा सकती है। डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग पावर और भारी ऊर्जा खपत वाले सिस्टम पर भारी-भरकम पूंजी लगाई जा रही है। पूंजी का यह आकार ही सबसे बड़ा खतरा है। 2008 का सबक- कर्ज न चुका पाना सबसे ज्यादा दर्दनाक प्रोफेसर दामोदरन ने साफ किया कि वह 2008 जैसी वैश्विक आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं, पर 2008 की मंदी का टेकअवे यह है कि जब कर्ज देने वाले जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ जाते हैं और कम ब्याज दरों पर पैसा बांटते हैं, तो सुधार आने पर दर्द पूरी दुनिया को झेलना पड़ता है। यदि आप समय पर कर्ज नहीं चुकाते हैं, तो सामाजिक लागत बहुत बड़ी होती है। यह स्थिति शेयर 90% टूटने के दर्द से कहीं ज्यादा भयानक होती है। लोन के पैसे से खड़ी हो रही है एआई की इमारत, ये बड़ी चिंता डॉट-कॉम बबल जब 2000-01 में फूटा, तो टेक शेयरों की वैल्यू जरूर गिरी और निवेशकों को 70 से 90% तक का नुकसान हुआ। इसके चलते कई टेक कंपनियां पूरी तरह खत्म हो गई। लेकिन यह नुकसान सिर्फ शेयरधारकों तक सीमित रहा। बैंक और आम बिजनेस सुरक्षित रहे। इसके विपरीत, मौजूदा एआई एक्सपेंशन के लिए कर्ज लिया जा रहा है। यह बैंकों के बजाय प्राइवेट कैपिटल मार्केट्स से आ रहा है।

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