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क्विक कॉमर्स का बदलता ट्रेंड:दूध-सब्जी छोड़ अब फैशन-ब्यूटी पर बड़ा दांव; हाई-मार्जिन लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स का नया ठिकाना बने क्विक डिलीवरी ऐप्स

क्विक कॉमर्स का बदलता ट्रेंड:दूध-सब्जी छोड़ अब फैशन-ब्यूटी पर बड़ा दांव; हाई-मार्जिन लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स का नया ठिकाना बने क्विक डिलीवरी ऐप्स

देश में ऑनलाइन शॉपिंग का एक नया चैनल ‘रैपिड कॉमर्स’ तेजी से अपनी जगह बना रहा है। यह मॉडल क्विक कॉमर्स की तेज रफ्तार और पारंपरिक ई-कॉमर्स की वैरायटी को एक साथ लेकर आया है। अब उपभोक्ता उन उत्पादों के लिए भी दो से चार घंटे का इंतजार करने को तैयार हैं, जिनकी उन्हें तुरंत जरूरत नहीं है, लेकिन वे दिनों तक प्रतीक्षा भी नहीं करना चाहते। डीटीडीसी एक्सप्रेस के सीईओ अभिषेक चक्रवर्ती के मुताबिक, यह मॉडल एक ‘स्वीट स्पॉट’ पर काम करता है। यहां उपभोक्ता थोड़ा इंतजार करने को राजी होते हैं, जिससे कंपनियां लॉजिस्टिक्स को बेहतर बना पाती हैं। इससे ब्रांड्स कई ऑर्डर्स को एक ही ट्रिप में भेजकर खर्च घटा रहे हैं और डिलीवरी में भी तेजी बनाए रख पा रहे हैं। यह बदलाव केवल मांग को शिफ्ट नहीं कर रहा, बल्कि कुल ई-कॉमर्स बाजार का विस्तार कर रहा है। उपभोक्ता अब उन श्रेणियों में भी खरीदारी कर रहे हैं, जो पहले उनके लिए ऑनलाइन उपलब्ध नहीं थीं। क्विक कॉमर्स की सीमा यह है कि वहां केवल 80 से 200 उत्पाद ही होते हैं, जो फैशन और ज्वेलरी के हजारों विकल्पों की मांग पूरी करने के लिए नाकाफी हैं। ज्वेलरी ब्रांड गिवा के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अनिरुद्ध कुडवा बताते हैं कि उनकी कंपनी ने बेंगलुरु स्थित अपने मुख्यालय से संचालित नेटवर्क में 360 से अधिक रिटेल स्टोर्स को हाइपरलोकल सेंटर में बदल दिया है। इसका फायदा यह है कि ग्राहक दो से चार घंटे के भीतर 1,500 से 2,000 डिजाइनों में से चयन कर सकते हैं। यह मॉडल गति के साथ-साथ व्यापक विकल्प देता है, जो उन श्रेणियों के लिए जरूरी है जहां उपभोक्ता खरीदने से पहले ब्राउजिंग पसंद करते हैं। ज्वेलरी ब्रांड पल्मोनस की सीईओ पल्लवी मोहाडीकर के अनुसार, रैपिड कॉमर्स अब उनकी ऑनलाइन बिक्री का 25-30% योगदान दे रहा है। यह तेजी त्योहारों, गिफ्टिंग और आखिरी समय की खरीदारी से प्रेरित है। ब्रांड्स ने इसके लिए अपनी इन्वेंट्री प्लानिंग और डिमांड फोरकास्टिंग रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। बेस्टसेलिंग उत्पादों को उपभोक्ताओं के नजदीक वेयरहाउस में रखने के लिए टेक्नोलॉजी और थर्ड-पार्टी पार्टनरशिप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे चंद घंटों में डिलीवरी संभव हो रही है।’ ऐसे रिहायशी इलाकों के पास छोटे-छोटे डार्क स्टोर बनाए जा रहे हैं, जहां मांग ज्यादा लॉजिस्टिक्स के नजरिए से देखें तो शैडोफैक्स के को-फाउंडर और चीफ बिजनेस ऑफिसर प्रहर्ष चंद्र का मानना है कि रैपिड कॉमर्स नए खपत के मौके खोल रहा है। कंपनी ने सात किमी के दायरे में 30-45 मिनट में डिलीवरी के लिए डार्क स्टोर्स का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। तेज फुलफिलमेंट से न केवल ग्राहक का भरोसा बढ़ रहा है, बल्कि रिटर्न और ऑर्डर कैंसिलेशन की दर में भी 5-9% की गिरावट आई है। इससे ब्रांड्स की बिक्री बढ़ रही है और मुनाफा भी।

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