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Movie review- welcome to the jungle, dont find logic and laugh out loud, akshay kumar and raveena tondon stolling heart with chemistry

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18 मिनट पहले

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स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस

डायरेक्टर- अहमद खान

रेटिंग- 3.5 स्टार्स

अवधि- 2 घंटे 44 मिनट ‘वेलकम टू द जंगल’ का मकसद सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन करना है और फिल्म शुरुआत से ही यह बात साफ कर देती है, यहां लॉजिक भी छुट्टी पर है और हंसी ड्यूटी पर। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह कॉमेडी हर कुछ मिनट बाद नया किरदार, कॉमेडी और बवाल लेकर आती है। कहानी कई बार तर्क से दूर जरूर जाती है, लेकिन अगर आप लॉजिक को थोड़ी देर के लिए किनारे रख दें (या पॉपकॉर्न के साथ निगल लें) तो अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग, रवीना टंडन के साथ उनकी केमिस्ट्री और बाकी कलाकारों की मस्ती आपको लगातार हंसाती रहती है।

कैसी है फिल्म की कहानी?

कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है।

इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है।

यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक ‘बजरंगी भाईजान’ की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है ।

कैसी है कलाकारों की एक्टिंग?

अक्षय कुमार अपने पुराने कॉमिक अवतार में लौटे हैं और पूरी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी वही हैं। खास बात यह है कि संवादों में कई बार उन्होंने खुद अपनी छवि का मजाक भी उड़ाया है और वही दृश्य सबसे ज्यादा हंसी लेकर आते हैं, जैसे वो खुद भी जानते हों कि यहां लॉजिक नहीं, टाइमिंग काम आएगी।

रवीना टंडन का स्क्रीन टाइम भले कम हो, लेकिन जब भी वह पर्दे पर आती हैं, पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। लंबे समय बाद अक्षय और रवीना को साथ देखना फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है। सुनील शेट्टी और अरशद वारसी अपनी पुरानी छवि में खूब जमे हैं। ‘आवारा पागल दीवाना’ वाले अंदाज में सुनील शेट्टी फिर से मजा देते हैं। परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल और किरण कुमार अपने छोटे छोटे किरदारों में भी जमकर हंसाते हैं। जैकी श्रॉफ खलनायक के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं।

डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है?

दिवंगत नीरज वोहरा की कहानी का विचार दिलचस्प है। निर्देशक अहमद खान की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने इतने बड़े कलाकारों की फौज को संतुलित तरीके से संभाला है और लगभग हर कलाकार को चमकने का मौका दिया है। फिल्म के संवाद लगातार हंसाते हैं और कई कॉमिक पंच लंबे समय तक याद रहते हैं।

हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां लगता है कि एडिटिंग भी शायद छुट्टी पर चली गई थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और कसी होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं।

हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और टाइट होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। VFX ठीक ठाक ही है।

कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है, लेकिन ऐसा कोई गाना नहीं है जो सिनेमाघर से निकलने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। बैकग्राउंड संगीत कॉमेडी के माहौल को जरूर मजबूत करता है।

फाइनल वर्डिक्ट- फिल्म देखें या नहीं?

‘वेलकम टू द जंगल’ ऐसी फिल्म नहीं है जिसमें हर सीन का तर्क तलाशा जाए, क्योंकि अगर आप ढूंढेंगे, तो शायद हंसी छूट जाएगी। यह उन दर्शकों के लिए बनी है जो परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खुलकर हंसना चाहते हैं। अक्षय कुमार का पुराना कॉमिक अंदाज, रवीना टंडन के साथ उनकी शानदार केमिस्ट्री और सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल जैसे कलाकार मिलकर फिल्म को मनोरंजक बना देते हैं।

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डायरेक्टर- अहमद खान

रेटिंग- 3.5 स्टार्स

अवधि- 2 घंटे 44 मिनट ‘वेलकम टू द जंगल’ का मकसद सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन करना है और फिल्म शुरुआत से ही यह बात साफ कर देती है, यहां लॉजिक भी छुट्टी पर है और हंसी ड्यूटी पर। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह कॉमेडी हर कुछ मिनट बाद नया किरदार, कॉमेडी और बवाल लेकर आती है। कहानी कई बार तर्क से दूर जरूर जाती है, लेकिन अगर आप लॉजिक को थोड़ी देर के लिए किनारे रख दें (या पॉपकॉर्न के साथ निगल लें) तो अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग, रवीना टंडन के साथ उनकी केमिस्ट्री और बाकी कलाकारों की मस्ती आपको लगातार हंसाती रहती है।

कैसी है फिल्म की कहानी?

कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है।

इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है।

यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक ‘बजरंगी भाईजान’ की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है ।

कैसी है कलाकारों की एक्टिंग?

अक्षय कुमार अपने पुराने कॉमिक अवतार में लौटे हैं और पूरी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी वही हैं। खास बात यह है कि संवादों में कई बार उन्होंने खुद अपनी छवि का मजाक भी उड़ाया है और वही दृश्य सबसे ज्यादा हंसी लेकर आते हैं, जैसे वो खुद भी जानते हों कि यहां लॉजिक नहीं, टाइमिंग काम आएगी।

रवीना टंडन का स्क्रीन टाइम भले कम हो, लेकिन जब भी वह पर्दे पर आती हैं, पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। लंबे समय बाद अक्षय और रवीना को साथ देखना फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है। सुनील शेट्टी और अरशद वारसी अपनी पुरानी छवि में खूब जमे हैं। ‘आवारा पागल दीवाना’ वाले अंदाज में सुनील शेट्टी फिर से मजा देते हैं। परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल और किरण कुमार अपने छोटे छोटे किरदारों में भी जमकर हंसाते हैं। जैकी श्रॉफ खलनायक के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं।

डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है?

दिवंगत नीरज वोहरा की कहानी का विचार दिलचस्प है। निर्देशक अहमद खान की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने इतने बड़े कलाकारों की फौज को संतुलित तरीके से संभाला है और लगभग हर कलाकार को चमकने का मौका दिया है। फिल्म के संवाद लगातार हंसाते हैं और कई कॉमिक पंच लंबे समय तक याद रहते हैं।

हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां लगता है कि एडिटिंग भी शायद छुट्टी पर चली गई थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और कसी होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं।

हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और टाइट होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। VFX ठीक ठाक ही है।

कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है, लेकिन ऐसा कोई गाना नहीं है जो सिनेमाघर से निकलने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। बैकग्राउंड संगीत कॉमेडी के माहौल को जरूर मजबूत करता है।

फाइनल वर्डिक्ट- फिल्म देखें या नहीं?

‘वेलकम टू द जंगल’ ऐसी फिल्म नहीं है जिसमें हर सीन का तर्क तलाशा जाए, क्योंकि अगर आप ढूंढेंगे, तो शायद हंसी छूट जाएगी। यह उन दर्शकों के लिए बनी है जो परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खुलकर हंसना चाहते हैं। अक्षय कुमार का पुराना कॉमिक अंदाज, रवीना टंडन के साथ उनकी शानदार केमिस्ट्री और सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल जैसे कलाकार मिलकर फिल्म को मनोरंजक बना देते हैं।

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