Friday, 03 Jul 2026 | 02:41 PM

Trending :

मूवी रिव्यू – 'अल्फा':धुरंधर की छाप लिए आगे बढ़ती है आलिया की फिल्म, लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले रफ्तार खो देती है मूवी रिव्यू – 'अल्फा':दमदार एक्शन, फीका इमोशन… आलिया की फिल्म में बॉबी देओल का नेगेटिव अवतार छाया, ऋतिक रोशन का कैमियो देता है सरप्राइज स्पोर्ट्स अपडेट:दूसरे टेस्ट से पहले श्रीलंका की मुश्किलें बढ़ीं, सिर्फ 13 फिट खिलाड़ी बचे ओटीटी रिव्यू: प्रीतम एंड पेड्रो:दमदार स्टारकास्ट, दिलचस्प कॉन्सेप्ट… लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले फीका कर गया राजकुमार हिरानी का OTT डेब्यू Travel insurance prices rise 10% annually, with young people leading the way बारिश की जगह अब गर्मी से रोके जा रहे खेल:ब्रिटेन की भीषण गर्मी विम्बलडन और महिला टी20 वर्ल्ड कप पर डाल रही असर
EXCLUSIVE

EPF Contribution Rule Change: ₹1,800 Limit Set

EPF Contribution Rule Change: ₹1,800 Limit Set
  • Hindi News
  • Business
  • EPF Contribution Rule Change: ₹1,800 Limit Set | Employee Company Can Continue 12% Contribution

नई दिल्ली7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अगर आप एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, तो ये खबर आपके लिए है। अभी तक ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के करीब 8 करोड़ कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी का 12% अंशदान करना पड़ता था और कंपनी के लिए भी इतना ही योगदान करना अनिवार्य था। मगर, केंद्र ने 29 जून को नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 को अधिसूचित कर दिया।

इसने पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 की जगह ले ली है। इसके तहत, अनिवार्य कर्मचारी योगदान को स्पष्ट रूप से 15 हजार रुपए की वैधानिक वेतन सीमा से जोड़ दिया गया है। यानी अब कंपनियों के लिए सिर्फ 15 हजार रुपए का 12% यानी 1,800 रुपए ही ईपीएफ अंशदान लेना जरूरी है। 1,800 रुपए से अधिक का योगदान तभी जारी रह सकता है, जब कर्मचारी स्वेच्छा से ऐसा करना चाहे।

अगर आप अपने रिटायरमेंट फंड के लिए ज्यादा बचत करना चाहते हैं, तो ईपीएफ में 1,800 रुपए से ज्यादा का अंशदान जारी रख सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनियों के लिए इस अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान के बराबर योगदान देना अनिवार्य नहीं है, जब तक कि वे किसी रोजगार अनुबंध या कंपनी की नीति के तहत ऐसा करने के लिए सहमत न हों।

मतलब ये कि ईपीएफ में कर्मचारी का योगदान कुछ भी हो, लेकिन कंपनियां अपनी ओर से ईपीएफ में केवल 1,800 रुपए देने के लिए ही कानूनी रूप से बाध्य होंगी। इसके अलावा, पीएफ निकासी, पेंशन या बीमा का दावा 20 दिन के भीतर निपटाना होगा। बिना किसी ठोस वजह के देरी होने पर कमिश्नर पर कार्रवाई होगी और 12% सालाना दंडात्मक ब्याज देना होगा, जो अधिकारी की सैलरी से कटेगा।

फायदा ये कि इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है, पर नुकसान ये कि ‘बचत’ घट जाएगी

1. कर्मचारियों पर सीधा क्या असर पड़ेगा? क्या ज्यादा कटने वाला पैसा अब सैलरी में मिलेगा?

अभी ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी का 12% पीएफ में काटती थीं। मान लीजिए बेसिक सैलरी 30,000 रुपए है, तो अभी 3,600 रुपए कटते थे। नए नियम के बाद इसमें से सिर्फ 1,800 रुपए कटना जरूरी है। बाकी 1,800 रुपए अब ‘मर्जी’ की बात है यानी अगर कर्मचारी और कंपनी दोनों राजी हों तो यह रकम पीएफ की बजाय हाथ में मिलने वाली सैलरी में जोड़ी जा सकती है। पर यह अपने आप नहीं होगा, इसके लिए कंपनी की नीति और आपसी सहमति जरूरी है।

2. क्या कंपनियां 12% वाला योगदान देना बंद कर देंगी? क्या वो पैसा अब सैलरी में जुड़ जाएगा?

कंपनी पर भी अब सिर्फ 1,800 रुपए देने की कानूनी बाध्यता है। इससे ज्यादा देना कंपनी और कर्मचारी की मर्जी पर है, कोई कानून उसे मजबूर नहीं करता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां तुरंत ज्यादा योगदान देना बंद कर देंगी। कई कंपनियां कर्मचारियों को बांधे रखने के लिए पुरानी व्यवस्था जारी भी रख सकती हैं। फैसला हर कंपनी अपने हिसाब से लेगी।

3. सरकार को इस बदलाव से क्या फायदा होगा?

सरकार का मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि पुराने और उलझे हुए पीएफ कानून (जो 1952 से चला आ रहा था) को नए श्रम कानूनों के हिसाब से साफ-सुथरा बनाना है। इससे नियम स्पष्ट होंगे, कागजी काम कम होगा और पीएफ से जुड़े विवाद घटने की उम्मीद है।

4. इससे कंपनियों को फायदा होगा या नुकसान?

ज्यादातर कंपनियों के लिए यह फायदे की बात है। जो कंपनियां ज्यादा सैलरी वाले कर्मचारियों पर भी पूरे 12% के हिसाब से पीएफ काट रही थीं, अब वे चाहें तो 1,800 रु. तक सीमित रह सकती हैं। उन पर कानूनी बोझ कम होगा। सैलरी का ढांचा बनाने में ज्यादा आजादी मिलेगी। इसमें नुकसान जैसी कोई बात नहीं दिख रही है।

5. ईपीएफ में 1,800 रुपए के अंशदान से कर्मचारियों की भविष्य की बचत पर क्या असर पड़ेगा?

अगर कोई कर्मचारी सिर्फ 1,800 रुपए महीना ही पीएफ में डालेगा, तो रिटायरमेंट तक जमा होने वाली रकम पहले से बहुत कम होगी। पीएफ पर अच्छा ब्याज मिलता है (करीब 8.25%), और यह ब्याज जितनी बड़ी रकम पर लगे, उतना फायदा होता है। हां, जो कर्मचारी चाहें, वे पहले जितना ही पैसा जमा करना जारी रख सकते हैं। असली खतरा उन्हें है, जो जानकारी के अभाव में या ज्यादा इन-हैंड सैलरी के लालच में कम पीएफ अंशदान का विकल्प चुनेंगे। उन्हें रिटायरमेंट के समय बहुत कम राशि मिलेगी।

6. सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलाव दिख सकते हैं?

खासकर उन कंपनियों में बदलाव दिख सकता है जो सैलरी का पूरा पैकेज (सीटीसी) तय करके देती हैं। हो सकता है कि कंपनी और कर्मचारी मिलकर तय करें कि ज्यादा पीएफ काटने की बजाय वह पैसा इन-हैंड मिलने वाली सैलरी या दूसरे भत्तों में जोड़ दिया जाए। इससे महीने की सैलरी थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला पैसा कम हो सकता है। यह बदलाव सभी जगह एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग तरीके से होगा।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
टी-20 को नया मॉडल दे रही टीम इंडिया:लगातार जीत, कड़े फैसले, प्रयोग, कई मैच विनर, इससे बनी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टी-20 टीम

March 14, 2026/
7:56 am

टी-20 क्रिकेट का स्वभाव हमेशा से अनिश्चित रहा है। यह वह फॉर्मेट है, जहां एक दिन की खराब बल्लेबाजी या...

ईरान को सुबह धमकी दी, रात में कहा- डील साइन:ईरान से समझौते के दिन कैसे बदलता रहा ट्रम्प का मिजाज; 12 PHOTOS

June 18, 2026/
2:41 pm

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के...

शादी की खुशियां मातम में बदलीं:चंद घंटों बाद भारतीय मूल के पायलट की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत, दुल्हन बची

June 1, 2026/
12:26 pm

अमेरिका के जॉर्जिया में शादी के कुछ घंटों बाद भारतीय मूल के पायलट डेव फिजी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत...

IPL से पहले CSK का मेगा रीयूनियन होगा:22 मार्च को चेपॉक स्टेडियम में इवेंट, रैना-हेडन समेत कई दिग्गज जुटेंगे

March 17, 2026/
8:41 pm

IPL 2026 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) 22 मार्च को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में एक खास रीयूनियन...

ask search icon

May 14, 2026/
9:53 pm

Last Updated:May 14, 2026, 21:53 IST भारत में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं जिनका उपयोग आयुर्वेद और पारंपरिक...

Reliance-Meta AI Data Center | Jamnagar Gujarat 168MW

June 10, 2026/
2:34 pm

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक मेटा भारत में अपना पहला एआई-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के...

Indian Army BrahMos Missile Upgrade

March 27, 2026/
12:15 am

नई दिल्ली44 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय सेना 800 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की...

राजनीति

EPF Contribution Rule Change: ₹1,800 Limit Set

EPF Contribution Rule Change: ₹1,800 Limit Set
  • Hindi News
  • Business
  • EPF Contribution Rule Change: ₹1,800 Limit Set | Employee Company Can Continue 12% Contribution

नई दिल्ली7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अगर आप एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, तो ये खबर आपके लिए है। अभी तक ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के करीब 8 करोड़ कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी का 12% अंशदान करना पड़ता था और कंपनी के लिए भी इतना ही योगदान करना अनिवार्य था। मगर, केंद्र ने 29 जून को नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 को अधिसूचित कर दिया।

इसने पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 की जगह ले ली है। इसके तहत, अनिवार्य कर्मचारी योगदान को स्पष्ट रूप से 15 हजार रुपए की वैधानिक वेतन सीमा से जोड़ दिया गया है। यानी अब कंपनियों के लिए सिर्फ 15 हजार रुपए का 12% यानी 1,800 रुपए ही ईपीएफ अंशदान लेना जरूरी है। 1,800 रुपए से अधिक का योगदान तभी जारी रह सकता है, जब कर्मचारी स्वेच्छा से ऐसा करना चाहे।

अगर आप अपने रिटायरमेंट फंड के लिए ज्यादा बचत करना चाहते हैं, तो ईपीएफ में 1,800 रुपए से ज्यादा का अंशदान जारी रख सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनियों के लिए इस अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान के बराबर योगदान देना अनिवार्य नहीं है, जब तक कि वे किसी रोजगार अनुबंध या कंपनी की नीति के तहत ऐसा करने के लिए सहमत न हों।

मतलब ये कि ईपीएफ में कर्मचारी का योगदान कुछ भी हो, लेकिन कंपनियां अपनी ओर से ईपीएफ में केवल 1,800 रुपए देने के लिए ही कानूनी रूप से बाध्य होंगी। इसके अलावा, पीएफ निकासी, पेंशन या बीमा का दावा 20 दिन के भीतर निपटाना होगा। बिना किसी ठोस वजह के देरी होने पर कमिश्नर पर कार्रवाई होगी और 12% सालाना दंडात्मक ब्याज देना होगा, जो अधिकारी की सैलरी से कटेगा।

फायदा ये कि इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है, पर नुकसान ये कि ‘बचत’ घट जाएगी

1. कर्मचारियों पर सीधा क्या असर पड़ेगा? क्या ज्यादा कटने वाला पैसा अब सैलरी में मिलेगा?

अभी ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी का 12% पीएफ में काटती थीं। मान लीजिए बेसिक सैलरी 30,000 रुपए है, तो अभी 3,600 रुपए कटते थे। नए नियम के बाद इसमें से सिर्फ 1,800 रुपए कटना जरूरी है। बाकी 1,800 रुपए अब ‘मर्जी’ की बात है यानी अगर कर्मचारी और कंपनी दोनों राजी हों तो यह रकम पीएफ की बजाय हाथ में मिलने वाली सैलरी में जोड़ी जा सकती है। पर यह अपने आप नहीं होगा, इसके लिए कंपनी की नीति और आपसी सहमति जरूरी है।

2. क्या कंपनियां 12% वाला योगदान देना बंद कर देंगी? क्या वो पैसा अब सैलरी में जुड़ जाएगा?

कंपनी पर भी अब सिर्फ 1,800 रुपए देने की कानूनी बाध्यता है। इससे ज्यादा देना कंपनी और कर्मचारी की मर्जी पर है, कोई कानून उसे मजबूर नहीं करता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां तुरंत ज्यादा योगदान देना बंद कर देंगी। कई कंपनियां कर्मचारियों को बांधे रखने के लिए पुरानी व्यवस्था जारी भी रख सकती हैं। फैसला हर कंपनी अपने हिसाब से लेगी।

3. सरकार को इस बदलाव से क्या फायदा होगा?

सरकार का मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि पुराने और उलझे हुए पीएफ कानून (जो 1952 से चला आ रहा था) को नए श्रम कानूनों के हिसाब से साफ-सुथरा बनाना है। इससे नियम स्पष्ट होंगे, कागजी काम कम होगा और पीएफ से जुड़े विवाद घटने की उम्मीद है।

4. इससे कंपनियों को फायदा होगा या नुकसान?

ज्यादातर कंपनियों के लिए यह फायदे की बात है। जो कंपनियां ज्यादा सैलरी वाले कर्मचारियों पर भी पूरे 12% के हिसाब से पीएफ काट रही थीं, अब वे चाहें तो 1,800 रु. तक सीमित रह सकती हैं। उन पर कानूनी बोझ कम होगा। सैलरी का ढांचा बनाने में ज्यादा आजादी मिलेगी। इसमें नुकसान जैसी कोई बात नहीं दिख रही है।

5. ईपीएफ में 1,800 रुपए के अंशदान से कर्मचारियों की भविष्य की बचत पर क्या असर पड़ेगा?

अगर कोई कर्मचारी सिर्फ 1,800 रुपए महीना ही पीएफ में डालेगा, तो रिटायरमेंट तक जमा होने वाली रकम पहले से बहुत कम होगी। पीएफ पर अच्छा ब्याज मिलता है (करीब 8.25%), और यह ब्याज जितनी बड़ी रकम पर लगे, उतना फायदा होता है। हां, जो कर्मचारी चाहें, वे पहले जितना ही पैसा जमा करना जारी रख सकते हैं। असली खतरा उन्हें है, जो जानकारी के अभाव में या ज्यादा इन-हैंड सैलरी के लालच में कम पीएफ अंशदान का विकल्प चुनेंगे। उन्हें रिटायरमेंट के समय बहुत कम राशि मिलेगी।

6. सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलाव दिख सकते हैं?

खासकर उन कंपनियों में बदलाव दिख सकता है जो सैलरी का पूरा पैकेज (सीटीसी) तय करके देती हैं। हो सकता है कि कंपनी और कर्मचारी मिलकर तय करें कि ज्यादा पीएफ काटने की बजाय वह पैसा इन-हैंड मिलने वाली सैलरी या दूसरे भत्तों में जोड़ दिया जाए। इससे महीने की सैलरी थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला पैसा कम हो सकता है। यह बदलाव सभी जगह एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग तरीके से होगा।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.