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Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

नई दिल्ली35 मिनट पहले

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इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजा। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार कंपनी को 7 दिन में इस नोटिस का जबाव देना होगा। ये नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था।

BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा

  • BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
  • इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं।
  • BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया।
  • Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती।

भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध

सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है?

जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है।

सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है?

जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना।

सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है?

जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं।

सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें?

जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें।

सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है?

जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है।

सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है?

जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं।

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मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था।

BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा

  • BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
  • इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं।
  • BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया।
  • Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती।

भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध

सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है?

जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है।

सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है?

जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना।

सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है?

जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं।

सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें?

जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें।

सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है?

जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है।

सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है?

जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं।

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