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Diljit Dosanjh Film Removed From ZEE5

Diljit Dosanjh Film Removed From ZEE5

दिलजीत की फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म से हटाई गई।

पंजाब 95 नाम बदलकर ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज की गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को दो दिन बाद प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। इस पर दिलजीत का कहना है कि जो फिल्म के साथ हुआ है, वही खालड़ा साहब के साथ हुआ था।

.

वहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, अगले आदेश तक ‘सतलुज’ उपलब्ध नहीं रहेगा। हम कानूनी प्रक्रिया के तहत हर उचित विकल्प तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि जल्द से जल्द इस फिल्म को फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है।

तीन दिन पहले हुई रिलीज

दरअसल, तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद पंजाब 95 फिल्म को सतलुज नाम से रिलीज किया गया था। फिल्म चली, इस बीच अचानक इसे हटा दिया गया। कंपनी की तरफ से कहा गया, “सतलुज” को दर्शकों से बहुत प्यार और अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म देखने और समर्थन करने वाले सभी लोगों का हम दिल से धन्यवाद करते हैं।

आपका प्यार और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। ZEE5 को “सतलुज” और इसे बनाने वाली टीम पर पूरा भरोसा है। हमारा मानना है कि अच्छी कहानियां लोगों पर गहरा असर छोड़ती हैं। इसलिए हम आगे भी ऐसी बेहतरीन कहानियां लाते रहेंगे। फिलहाल कुछ परिस्थितियों के कारण “सतलुज” ZEE5 पर उपलब्ध नहीं होगी।

हम इसे दोबारा जल्द से जल्द वापस लाने के लिए सभी जरूरी कानूनी और अन्य प्रयास कर रहे हैं। हम अच्छी और सच्ची कहानियों के साथ हमेशा मजबूती से खड़े रहेंगे।

फिल्म को इस तरह चुप नहीं करवाया जा सकता

शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि भारत में ZEE5 से सतलुज को अचानक हटाए जाने की खबर से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। पंजाब के दर्दनाक इतिहास को सामने लाने और सरदार जसवंत सिंह जी खालड़ा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाली इस दमदार फिल्म को इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता।

यह सिर्फ सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक यादों, सच और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस फैसले की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, उसे दबाया नहीं जाना चाहिए।

शिरोमणि अकाली दल ने फिल्म को हटाने पर ऐतराज जताया है।

अब तक फिल्म के सफर को चार प्वाइंट में जानिए

1. अधिकतर शूटिंग पंजाब में हुई

2022 फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।

2. मंजूरी मिलने से पहले नाम बदलने का सुझाब

साल 2023 में फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ रखा गया।

3.फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहना हुई

साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।

4. 127 कट लगाने को कहा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा, जिनके जीवन पर सतलुज फिल्म् आधारित है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा, जिनके जीवन पर सतलुज फिल्म् आधारित है।

श्मशान घाटों का दौरा कर जुटाई जानकारियां

खालड़ा ने पंजाब पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही इन गुमशुदगियों और हत्याओं को उजागर किया था। उन्होंने उस समय अमृतसर के श्मशान घाटों का दौरा कर यह जानकारी जुटाई कि वहां 6,000 से अधिक शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार किया गया था। यह जानकारी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साझा की, जिससे भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए।

1995 में हुई थी हत्या

खालड़ा को सिखों के हकों के लिए लड़ने का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ा था। परिवार का आरोप है कि 6 सितंबर, 1995 को पुलिस ने खालड़ा का उनके घर से अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।

पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की, जिसके बाद जसवंत की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।

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दिलजीत की फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म से हटाई गई।

पंजाब 95 नाम बदलकर ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज की गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को दो दिन बाद प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। इस पर दिलजीत का कहना है कि जो फिल्म के साथ हुआ है, वही खालड़ा साहब के साथ हुआ था।

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वहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, अगले आदेश तक ‘सतलुज’ उपलब्ध नहीं रहेगा। हम कानूनी प्रक्रिया के तहत हर उचित विकल्प तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि जल्द से जल्द इस फिल्म को फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है।

तीन दिन पहले हुई रिलीज

दरअसल, तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद पंजाब 95 फिल्म को सतलुज नाम से रिलीज किया गया था। फिल्म चली, इस बीच अचानक इसे हटा दिया गया। कंपनी की तरफ से कहा गया, “सतलुज” को दर्शकों से बहुत प्यार और अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म देखने और समर्थन करने वाले सभी लोगों का हम दिल से धन्यवाद करते हैं।

आपका प्यार और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। ZEE5 को “सतलुज” और इसे बनाने वाली टीम पर पूरा भरोसा है। हमारा मानना है कि अच्छी कहानियां लोगों पर गहरा असर छोड़ती हैं। इसलिए हम आगे भी ऐसी बेहतरीन कहानियां लाते रहेंगे। फिलहाल कुछ परिस्थितियों के कारण “सतलुज” ZEE5 पर उपलब्ध नहीं होगी।

हम इसे दोबारा जल्द से जल्द वापस लाने के लिए सभी जरूरी कानूनी और अन्य प्रयास कर रहे हैं। हम अच्छी और सच्ची कहानियों के साथ हमेशा मजबूती से खड़े रहेंगे।

फिल्म को इस तरह चुप नहीं करवाया जा सकता

शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि भारत में ZEE5 से सतलुज को अचानक हटाए जाने की खबर से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। पंजाब के दर्दनाक इतिहास को सामने लाने और सरदार जसवंत सिंह जी खालड़ा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाली इस दमदार फिल्म को इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता।

यह सिर्फ सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक यादों, सच और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस फैसले की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, उसे दबाया नहीं जाना चाहिए।

शिरोमणि अकाली दल ने फिल्म को हटाने पर ऐतराज जताया है।

अब तक फिल्म के सफर को चार प्वाइंट में जानिए

1. अधिकतर शूटिंग पंजाब में हुई

2022 फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।

2. मंजूरी मिलने से पहले नाम बदलने का सुझाब

साल 2023 में फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ रखा गया।

3.फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहना हुई

साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।

4. 127 कट लगाने को कहा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा, जिनके जीवन पर सतलुज फिल्म् आधारित है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा, जिनके जीवन पर सतलुज फिल्म् आधारित है।

श्मशान घाटों का दौरा कर जुटाई जानकारियां

खालड़ा ने पंजाब पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही इन गुमशुदगियों और हत्याओं को उजागर किया था। उन्होंने उस समय अमृतसर के श्मशान घाटों का दौरा कर यह जानकारी जुटाई कि वहां 6,000 से अधिक शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार किया गया था। यह जानकारी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साझा की, जिससे भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए।

1995 में हुई थी हत्या

खालड़ा को सिखों के हकों के लिए लड़ने का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ा था। परिवार का आरोप है कि 6 सितंबर, 1995 को पुलिस ने खालड़ा का उनके घर से अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।

पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की, जिसके बाद जसवंत की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।

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