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यूरोप की सिलिकॉन वैली बना विलनियस:शहर की आबादी 29 लाख, 6 यूनिकॉर्न काम कर रहीं; स्टार्टअप के मामले में दुनिया में 13वें नंबर पर

यूरोप की सिलिकॉन वैली बना विलनियस:शहर की आबादी 29 लाख, 6 यूनिकॉर्न काम कर रहीं; स्टार्टअप के मामले में दुनिया में 13वें नंबर पर

सुबह के करीब दस बजे हैं। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस की साइबर सिटी में कांच की ऊंची इमारतों के बीच तेज कदमों से युवा प्रोफेशनल्स गुजर रहे हैं। एक तरफ नॉर्ड सिक्योरिटी जैसे दुनियाभर में मशहूर यूनिकॉर्न का दफ्तर है, तो कुछ ही कदम पर हॉस्टिंगर का। हॉस्टिंगर यानी एक ऐसा स्टार्टअप जिसके यूजर 150 से ज्यादा देशों में हैं। यहां फ्यूचर, एआई और स्टार्टअप जैसे शब्द हर बातचीत में सुनाई देते हैं। विलनियस को अब यूरोप की ‘सिलिकॉन वैली’ भी कहा जाने लगा है। यूरोप के इस छोटे से देश लिथुआनिया की आबादी मात्र 29 लाख के करीब है, लेकिन यहां हजारों स्टार्टअप काम कर रहे हैं। आकार और आबादी में भले ही यह देश छोटा है, लेकिन सोच बड़ी और ग्लोबल है। यूनिकॉर्न लिथुआनिया की सीईओ गिन्तारे वेरबिकाइते बताती हैं कि आज विलनियस यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती स्टार्टअप सिटी है। इस मामले में दुनिया में भी ये 13वें नंबर पर है। यहां कारोबार स्थानीय नहीं, वैश्विक सोच के साथ शुरू होता है। यहां के लोग कहते हैं कि जब हम कोई स्टार्टअप शुरू करते हैं तो उसे दुनिया की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाते हैं, क्योंकि हम सिर्फ लिथुआनिया तक सीमित रहना नहीं चाहते हैं। आबादी यानी प्रति व्यक्ति के हिसाब से लिथुआनिया दुनिया के सबसे अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप वाले देशों में है। यहां विंटेड, नॉर्ड सिक्योरिटी, बीसीजी, फ्लो, कास्ट एआई और ऑक्सीलैब्स, छह यूनिकॉर्न कंपनियां हैं। विंटेड ने यूनिकॉर्न बिल्ड करने का एक अलग मॉडल पेश किया है। उसने पुराने कपड़े खरीदने और बेचने का ऑनलाइन मॉडल शुरू किया और वो यहां की पहली यूनिकॉर्न बनी। इन्वेस्ट लिथुआनिया की स्ट्रैटजिस्ट डायना गिरडेनाइट कहती हैं कि बढ़ती स्किल्ड वर्कफोर्स, फाइनेंशियल इन्सेंटिव और सरकार की नीतियां जैसे प्रमुख कारण हैं, जिनके कारण लिथुआनिया स्टार्टअप पावरहाउस बन रहा है। सीखने-सिखाने का कल्चर, भारत इनका बड़ा बाजार चार कारण… लिथुआनिया कैसे बन रहा स्टार्टअप पावरहाउस 1. तेजी से बढ़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम देश में 300 से ज्यादा फिनटेक कंपनियां काम कर रही हैं। 2020 से 2025 के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम का मूल्य 5.9 गुना बढ़कर करीब 1.56 लाख करोड़ रु. हो गया। 2025 में स्टार्टअप्स ने करीब 2400 करोड़ रु. की वेंचर कैपिटल जुटाई। 2. वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा एक्सेल, जनरल कैटलिस्ट, इनसाइट पार्टनर जैसी विश्व की प्रमुख निवेशक कंपनियां, जिन्होंने फेसबुक, स्पाॅटिफाई, एयर बीएनबी जैसी कंपनियों में निवेश किया है, वे भी लिथुआनिया के स्टार्टअप्स में निवेश कर रही हैं। सार्वजनिक वाई-फाई स्पीड में लिथुआनिया पहले स्थान पर व साइबर सुरक्षा सूचकांक में छठे स्थान पर है। 3. एआई प्रतिभा से बनी मजबूत नींव देश में 77,600 से अधिक आईसीटी (सूचना और संचार तकनीक) विशेषज्ञ कार्यरत हैं। सरकार ने एआई विकास के लिए करीब 457 करोड़ रु. से अधिक का निवेश किया और 2018 में ही राष्ट्रीय एआई रणनीति लागू कर दी। 13 हजार छात्र आईसीटी की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर रीस्किलिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 4. कंपनी शुरू करना आसान यहां नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन कुछ ही दिनों में हो जाता है। सरकारी प्रक्रियाएं सरल और ऑनलाइन होने से उद्यमियों का समय और लागत दोनों बचते हैं। कॉर्पोरेट प्रॉफिट टैक्स 0-16% के बीच, फ्री इकोनॉमिक जोन में पहले 10 वर्षों तक 0% टैक्स, RD प्रोत्साहन, पेटेंट बॉक्स, तेज लाइसेंसिंग प्रक्रिया, विश्वस्तरीय डिजिटल नेटवर्क और 2030 तक 100% रिन्यूएबल बिजली का लक्ष्य- ये तमाम ऐसे कारण हैं जिनके कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

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यूरोप की सिलिकॉन वैली बना विलनियस:शहर की आबादी 29 लाख, 6 यूनिकॉर्न काम कर रहीं; स्टार्टअप के मामले में दुनिया में 13वें नंबर पर

सुबह के करीब दस बजे हैं। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस की साइबर सिटी में कांच की ऊंची इमारतों के बीच तेज कदमों से युवा प्रोफेशनल्स गुजर रहे हैं। एक तरफ नॉर्ड सिक्योरिटी जैसे दुनियाभर में मशहूर यूनिकॉर्न का दफ्तर है, तो कुछ ही कदम पर हॉस्टिंगर का। हॉस्टिंगर यानी एक ऐसा स्टार्टअप जिसके यूजर 150 से ज्यादा देशों में हैं। यहां फ्यूचर, एआई और स्टार्टअप जैसे शब्द हर बातचीत में सुनाई देते हैं। विलनियस को अब यूरोप की ‘सिलिकॉन वैली’ भी कहा जाने लगा है। यूरोप के इस छोटे से देश लिथुआनिया की आबादी मात्र 29 लाख के करीब है, लेकिन यहां हजारों स्टार्टअप काम कर रहे हैं। आकार और आबादी में भले ही यह देश छोटा है, लेकिन सोच बड़ी और ग्लोबल है। यूनिकॉर्न लिथुआनिया की सीईओ गिन्तारे वेरबिकाइते बताती हैं कि आज विलनियस यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती स्टार्टअप सिटी है। इस मामले में दुनिया में भी ये 13वें नंबर पर है। यहां कारोबार स्थानीय नहीं, वैश्विक सोच के साथ शुरू होता है। यहां के लोग कहते हैं कि जब हम कोई स्टार्टअप शुरू करते हैं तो उसे दुनिया की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाते हैं, क्योंकि हम सिर्फ लिथुआनिया तक सीमित रहना नहीं चाहते हैं। आबादी यानी प्रति व्यक्ति के हिसाब से लिथुआनिया दुनिया के सबसे अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप वाले देशों में है। यहां विंटेड, नॉर्ड सिक्योरिटी, बीसीजी, फ्लो, कास्ट एआई और ऑक्सीलैब्स, छह यूनिकॉर्न कंपनियां हैं। विंटेड ने यूनिकॉर्न बिल्ड करने का एक अलग मॉडल पेश किया है। उसने पुराने कपड़े खरीदने और बेचने का ऑनलाइन मॉडल शुरू किया और वो यहां की पहली यूनिकॉर्न बनी। इन्वेस्ट लिथुआनिया की स्ट्रैटजिस्ट डायना गिरडेनाइट कहती हैं कि बढ़ती स्किल्ड वर्कफोर्स, फाइनेंशियल इन्सेंटिव और सरकार की नीतियां जैसे प्रमुख कारण हैं, जिनके कारण लिथुआनिया स्टार्टअप पावरहाउस बन रहा है। सीखने-सिखाने का कल्चर, भारत इनका बड़ा बाजार चार कारण… लिथुआनिया कैसे बन रहा स्टार्टअप पावरहाउस 1. तेजी से बढ़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम देश में 300 से ज्यादा फिनटेक कंपनियां काम कर रही हैं। 2020 से 2025 के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम का मूल्य 5.9 गुना बढ़कर करीब 1.56 लाख करोड़ रु. हो गया। 2025 में स्टार्टअप्स ने करीब 2400 करोड़ रु. की वेंचर कैपिटल जुटाई। 2. वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा एक्सेल, जनरल कैटलिस्ट, इनसाइट पार्टनर जैसी विश्व की प्रमुख निवेशक कंपनियां, जिन्होंने फेसबुक, स्पाॅटिफाई, एयर बीएनबी जैसी कंपनियों में निवेश किया है, वे भी लिथुआनिया के स्टार्टअप्स में निवेश कर रही हैं। सार्वजनिक वाई-फाई स्पीड में लिथुआनिया पहले स्थान पर व साइबर सुरक्षा सूचकांक में छठे स्थान पर है। 3. एआई प्रतिभा से बनी मजबूत नींव देश में 77,600 से अधिक आईसीटी (सूचना और संचार तकनीक) विशेषज्ञ कार्यरत हैं। सरकार ने एआई विकास के लिए करीब 457 करोड़ रु. से अधिक का निवेश किया और 2018 में ही राष्ट्रीय एआई रणनीति लागू कर दी। 13 हजार छात्र आईसीटी की पढ़ाई कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर रीस्किलिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 4. कंपनी शुरू करना आसान यहां नई कंपनी का रजिस्ट्रेशन कुछ ही दिनों में हो जाता है। सरकारी प्रक्रियाएं सरल और ऑनलाइन होने से उद्यमियों का समय और लागत दोनों बचते हैं। कॉर्पोरेट प्रॉफिट टैक्स 0-16% के बीच, फ्री इकोनॉमिक जोन में पहले 10 वर्षों तक 0% टैक्स, RD प्रोत्साहन, पेटेंट बॉक्स, तेज लाइसेंसिंग प्रक्रिया, विश्वस्तरीय डिजिटल नेटवर्क और 2030 तक 100% रिन्यूएबल बिजली का लक्ष्य- ये तमाम ऐसे कारण हैं जिनके कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

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