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वर्ल्ड अपडेट्स:दक्षिण चीन सागर को लेकर 14 देशों के बयान पर भड़का चीन, जापानी राजनयिक को तलब किया

वर्ल्ड अपडेट्स:दक्षिण चीन सागर को लेकर 14 देशों के बयान पर भड़का चीन, जापानी राजनयिक को तलब किया

दक्षिण चीन सागर पर 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले की 10वीं वर्षगांठ पर जापान समेत 14 देशों द्वारा चीन के समुद्री दावों को खारिज किए जाने के बाद बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने रविवार को बीजिंग स्थित जापानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि दक्षिण चीन सागर पर उसकी संप्रभुता कभी नहीं बदली है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फिलीपींस, कनाडा, जर्मनी, इटली, न्यूजीलैंड समेत कुल 14 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर 12 जुलाई 2016 को द हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायाधिकरण (PCA) के फैसले को अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी बताया। बयान में कहा गया कि चीन के ‘नाइन-डैश लाइन’ दावों का संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत कोई कानूनी आधार नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान पर क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप और दक्षिण चीन सागर में शांति व स्थिरता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि जापान इस विवाद का पक्षकार नहीं है और उसे इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि चीन द्वारा 2016 के फैसले को अस्वीकार करना विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन के विपरीत है। चीन ने इस टिप्पणी को खारिज करते हुए जापान पर ऐतिहासिक विस्तारवाद की मानसिकता का भी आरोप लगाया। इस बीच, 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ ने भी 2016 के फैसले को शांतिपूर्ण विवाद समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया। चीन ने यूरोपीय संघ की टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई। चीन लगातार 2016 के मध्यस्थता फैसले को “अवैध, अमान्य और गैर-बाध्यकारी” बताता रहा है। उसका कहना है कि न्यायाधिकरण को इस मामले में अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं था और दक्षिण चीन सागर पर उसके ऐतिहासिक अधिकार बरकरार हैं।

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वर्ल्ड अपडेट्स:दक्षिण चीन सागर को लेकर 14 देशों के बयान पर भड़का चीन, जापानी राजनयिक को तलब किया

वर्ल्ड अपडेट्स:दक्षिण चीन सागर को लेकर 14 देशों के बयान पर भड़का चीन, जापानी राजनयिक को तलब किया

दक्षिण चीन सागर पर 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले की 10वीं वर्षगांठ पर जापान समेत 14 देशों द्वारा चीन के समुद्री दावों को खारिज किए जाने के बाद बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने रविवार को बीजिंग स्थित जापानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि दक्षिण चीन सागर पर उसकी संप्रभुता कभी नहीं बदली है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फिलीपींस, कनाडा, जर्मनी, इटली, न्यूजीलैंड समेत कुल 14 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर 12 जुलाई 2016 को द हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायाधिकरण (PCA) के फैसले को अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी बताया। बयान में कहा गया कि चीन के ‘नाइन-डैश लाइन’ दावों का संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत कोई कानूनी आधार नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान पर क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप और दक्षिण चीन सागर में शांति व स्थिरता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि जापान इस विवाद का पक्षकार नहीं है और उसे इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि चीन द्वारा 2016 के फैसले को अस्वीकार करना विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन के विपरीत है। चीन ने इस टिप्पणी को खारिज करते हुए जापान पर ऐतिहासिक विस्तारवाद की मानसिकता का भी आरोप लगाया। इस बीच, 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ ने भी 2016 के फैसले को शांतिपूर्ण विवाद समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया। चीन ने यूरोपीय संघ की टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई। चीन लगातार 2016 के मध्यस्थता फैसले को “अवैध, अमान्य और गैर-बाध्यकारी” बताता रहा है। उसका कहना है कि न्यायाधिकरण को इस मामले में अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं था और दक्षिण चीन सागर पर उसके ऐतिहासिक अधिकार बरकरार हैं।

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