पेरू के नाज्का शहर के बाहर शनिवार को पर्यटकों को ले जा रहा एक छोटा प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन ने पास के इका शहर से उड़ान भरी थी। नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के बाद प्लेन खेत में जाकर गिरा। इसमें आग लग गई। प्लेन में 2 पायलट्स के अलावा 11 पर्यटक थे। हादसे के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे। दरअसल, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स को पूरी तरह से केवल प्लेन या व्यूइंग टावर से ही देखा जा सकता है। इसलिए प्लेन पर्यटकों को लेकर निकला था। मरने वाले कहां से थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव… 14 साल से सीनिक फ्लाइट्स ऑर्गनाइज कर रही थी कपंनी जो प्लेन हादसे का शिकार हुआ, उसे पेरू की कंपनी ‘एरोडियाना’ ऑपरेट कर रही थी। एयरलाइन की वेबसाइट के मुताबिक, वह पिछले 14 साल से सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल करके नाज्का लाइन्स के ऊपर सीनिक फ्लाइट्स (नजारे दिखाने वाली उड़ानें) की सुविधा दे रहे हैं। हादसे की जांच की जा रही है। एरोडियाना ने कोई कमेंट नहीं दिया। पेरू के मूल निवासियों ने बनाईं थीं नाज्का लाइन्स पेरू की राजधानी लीमा से लगभग 400 किमी दक्षिण में पेरू के नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में कुछ आकृतियां बनी हैं। माना जाता है कि इन्हें 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने बनाया। रेगिस्तान की गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को दिखाया गया, जिससे ये आकृतियां बन गईं। कई आकृतियां 100 से 300 मीटर और उससे भी बड़ी हैं। कुछ सीधी रेखाएं कई किलोमीटर तक जाती हैं। इन्हें क्यों बनाया गया, यह आज भी रहस्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये धार्मिक अनुष्ठान, वॉटर सोर्स, अंतरिक्ष की गणनाओं या फिर संस्कृति से जुड़ी हो सकती हैं। यहां बहुत कम बारिश और शुष्क जलवायु होने के कारण ये आकृतियां करीब 2,000 साल से सुरक्षित बनी हुई हैं। नाज्का में पहले भी हो चुके हैं हादसे पिछले कुछ दशकों में इस मशहूर हैरिटेज साइट पर विमान दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है।














































