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FPIs Return with ₹20,200 Crore Investment

FPIs Return with ₹20,200 Crore Investment

नई दिल्ली35 मिनट पहले

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी करते हुए इक्विटी में करीब ₹20,200 करोड़ का नेट इन्वेस्टमेंट किया है। इसके साथ ही पिछले 4 महीनों से लगातार जारी बिकवाली का सिलसिला थम गया है। आकर्षक वैल्युएशन, कॉरपोरेट कमाई में सुधार और वैश्विक दबाव कम होने से घरेलू शेयरों में विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर से शुरू हुआ है।

4 महीने की बिकवाली पर लगा ब्रेक: जून में निकले थे ₹49,340 करोड़

जुलाई में हुआ यह निवेश बाजार के लिए एक बड़ा टर्नअराउंड है। इससे पहले लगातार 4 महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में भारी बिकवाली की थी।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPIs ने:

मार्च: ₹1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की थी।

अप्रैल: ₹60,847 करोड़ निकाले थे।

मई: ₹32,963 करोड़ की निकासी की थी।

जून: ₹49,340 करोड़ शेयर बाजार से बाहर निकाले थे।

2026 में अब तक कुल ₹2.54 लाख करोड़ की निकासी: 2025 का रिकॉर्ड टूटा

जुलाई की ताजा खरीदारी से बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन इससे लंबे समय से चली आ रही बिकवाली का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से कुल ₹2.54 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी कर चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे साल 2025 के दौरान हुई ₹1.66 लाख करोड़ की कुल निकासी से भी ज्यादा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तुलनात्मक स्थिरता, लार्ज-कैप शेयरों में वाजिब वैल्युएशन और कॉरपोरेट अर्निंग्स में सुधार के संकेतों ने विदेशी निवेशकों के बीच भारत का आकर्षण फिर से बढ़ाया है।

एक्सपर्ट व्यू: ‘साउथ कोरिया और ताइवान में अस्थिरता का फायदा भारत को मिला’

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने बताया कि साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता और “चिप ट्रेड” में ज्यादा कंसंट्रेशन के जोखिमों ने विदेशी निवेशकों को भारत जैसे अपेक्षाकृत स्थिर बाजारों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया है।

विजयकुमार के अनुसार, भारतीय रुपए की मजबूती और स्थिरता के साथ-साथ भारत के लार्ज-कैप सेगमेंट में वाजिब वैल्युएशन ने विदेशी पूंजी की वापसी में अहम भूमिका निभाई है।

IT शेयरों में तेजी: बेहतर तिमाही नतीजों ने दूर की AI की चिंताएं

इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ‘ट्रैक’ (Trackk) के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते के मुताबिक, जून तिमाही के नतीजों ने कई अहम सेक्टरों में शुरुआती रिकवरी के संकेत दिए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

विशेष रूप से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) शेयरों में मजबूत री-रेटिंग देखी गई। उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों ने आईटी उद्योग के लंबे समय के ग्रोथ आउटलुक पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित असर की चिंताओं को शांत करने में मदद की है।

इसके अलावा, ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक हालात भी इमर्जिंग मार्केट्स के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। गुप्ते ने बताया कि अमेरिकी डॉलर पर दबाव कम होने और अमेरिकी ब्याज दरों के अपने पीक के करीब पहुंचने की उम्मीदों ने भारत जैसे बाजारों के लिए निवेश का माहौल बेहतर किया है।

डेट मार्केट में भी बढ़ा भरोसा: जुलाई में आए ₹32,245 करोड़

विदेशी निवेशकों का यह नया रुझान केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डेट मार्केट में भी उनकी खरीदारी देखी गई।

जनरल रूट: FPIs ने जुलाई में जनरल रूट के जरिए भारतीय डेट सिक्योरिटीज में ₹29,212 करोड़ का निवेश किया।

फुल्ली एक्सेसिबल रूट (FAR): इसके जरिए डेट मार्केट में ₹3,033 करोड़ का अतिरिक्त निवेश आया।

दोनों रूटों को मिलाकर जुलाई में डेट मार्केट में कुल ₹32,245 करोड़ का विदेशी निवेश दर्ज किया गया।

आगे क्या: कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और RBI पॉलिसी पर नजर

विदेशी निवेशकों की यह खरीदारी आगे भी जारी रहेगी या नहीं, यह ग्लोबल रिस्क फैक्टर्स और घरेलू बाजार के घटनाक्रमों के तालमेल पर निर्भर करेगा।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पवित्र मुखर्जी ने कहा कि निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और जारी अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) की स्थिति पर पैनी नजर रखेंगे।

घरेलू मोर्चे पर, Q1FY27 के नतीजों का सीजन बाजार के लिए एक प्रमुख ट्रिगर बना रहेगा। वहीं 5 अगस्त को आने वाला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का मॉनेटरी पॉलिसी फैसला भी बाजार की भावी दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होगा।

जुलाई में हुई यह वापसी महीनों की भारी बिकवाली के बाद राहत देती है, लेकिन 2026 में हुई कुल निकासी का बड़ा आंकड़ा दिखाता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बहाल होना अभी बाकी है। भविष्य का फंड फ्लो इस बात पर निर्भर करेगा कि अर्निंग्स की रफ्तार कितनी मजबूत रहती है और ग्लोबल अनिश्चितताएं कितनी कम होती हैं।

‘FPI और डेट मार्केट क्या होते हैं?’

FPI (फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टमेंट): जब विदेशी निवेशक, संस्थाएं या फंड किसी दूसरे देश के शेयर, डिबेंचर या बॉन्ड में पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहा जाता है। ये निवेशक सीधे कंपनियों का संचालन नहीं करते, बल्कि सिर्फ रिटर्न के लिए वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं।

डेट मार्केट (Debt Market): यह एक ऐसा वित्तीय बाजार है जहां सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड, डिबेंचर और अन्य फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज की खरीद-बिक्री होती है। इसमें शेयर बाजार की तुलना में जोखिम कम होता है और तय ब्याज दर पर रिटर्न मिलता है।

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी करते हुए इक्विटी में करीब ₹20,200 करोड़ का नेट इन्वेस्टमेंट किया है। इसके साथ ही पिछले 4 महीनों से लगातार जारी बिकवाली का सिलसिला थम गया है। आकर्षक वैल्युएशन, कॉरपोरेट कमाई में सुधार और वैश्विक दबाव कम होने से घरेलू शेयरों में विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर से शुरू हुआ है।

4 महीने की बिकवाली पर लगा ब्रेक: जून में निकले थे ₹49,340 करोड़

जुलाई में हुआ यह निवेश बाजार के लिए एक बड़ा टर्नअराउंड है। इससे पहले लगातार 4 महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में भारी बिकवाली की थी।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPIs ने:

मार्च: ₹1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की थी।

अप्रैल: ₹60,847 करोड़ निकाले थे।

मई: ₹32,963 करोड़ की निकासी की थी।

जून: ₹49,340 करोड़ शेयर बाजार से बाहर निकाले थे।

2026 में अब तक कुल ₹2.54 लाख करोड़ की निकासी: 2025 का रिकॉर्ड टूटा

जुलाई की ताजा खरीदारी से बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन इससे लंबे समय से चली आ रही बिकवाली का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से कुल ₹2.54 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी कर चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे साल 2025 के दौरान हुई ₹1.66 लाख करोड़ की कुल निकासी से भी ज्यादा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तुलनात्मक स्थिरता, लार्ज-कैप शेयरों में वाजिब वैल्युएशन और कॉरपोरेट अर्निंग्स में सुधार के संकेतों ने विदेशी निवेशकों के बीच भारत का आकर्षण फिर से बढ़ाया है।

एक्सपर्ट व्यू: ‘साउथ कोरिया और ताइवान में अस्थिरता का फायदा भारत को मिला’

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने बताया कि साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता और “चिप ट्रेड” में ज्यादा कंसंट्रेशन के जोखिमों ने विदेशी निवेशकों को भारत जैसे अपेक्षाकृत स्थिर बाजारों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया है।

विजयकुमार के अनुसार, भारतीय रुपए की मजबूती और स्थिरता के साथ-साथ भारत के लार्ज-कैप सेगमेंट में वाजिब वैल्युएशन ने विदेशी पूंजी की वापसी में अहम भूमिका निभाई है।

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विशेष रूप से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) शेयरों में मजबूत री-रेटिंग देखी गई। उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों ने आईटी उद्योग के लंबे समय के ग्रोथ आउटलुक पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित असर की चिंताओं को शांत करने में मदद की है।

इसके अलावा, ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक हालात भी इमर्जिंग मार्केट्स के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। गुप्ते ने बताया कि अमेरिकी डॉलर पर दबाव कम होने और अमेरिकी ब्याज दरों के अपने पीक के करीब पहुंचने की उम्मीदों ने भारत जैसे बाजारों के लिए निवेश का माहौल बेहतर किया है।

डेट मार्केट में भी बढ़ा भरोसा: जुलाई में आए ₹32,245 करोड़

विदेशी निवेशकों का यह नया रुझान केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डेट मार्केट में भी उनकी खरीदारी देखी गई।

जनरल रूट: FPIs ने जुलाई में जनरल रूट के जरिए भारतीय डेट सिक्योरिटीज में ₹29,212 करोड़ का निवेश किया।

फुल्ली एक्सेसिबल रूट (FAR): इसके जरिए डेट मार्केट में ₹3,033 करोड़ का अतिरिक्त निवेश आया।

दोनों रूटों को मिलाकर जुलाई में डेट मार्केट में कुल ₹32,245 करोड़ का विदेशी निवेश दर्ज किया गया।

आगे क्या: कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव और RBI पॉलिसी पर नजर

विदेशी निवेशकों की यह खरीदारी आगे भी जारी रहेगी या नहीं, यह ग्लोबल रिस्क फैक्टर्स और घरेलू बाजार के घटनाक्रमों के तालमेल पर निर्भर करेगा।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पवित्र मुखर्जी ने कहा कि निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और जारी अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) की स्थिति पर पैनी नजर रखेंगे।

घरेलू मोर्चे पर, Q1FY27 के नतीजों का सीजन बाजार के लिए एक प्रमुख ट्रिगर बना रहेगा। वहीं 5 अगस्त को आने वाला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का मॉनेटरी पॉलिसी फैसला भी बाजार की भावी दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होगा।

जुलाई में हुई यह वापसी महीनों की भारी बिकवाली के बाद राहत देती है, लेकिन 2026 में हुई कुल निकासी का बड़ा आंकड़ा दिखाता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बहाल होना अभी बाकी है। भविष्य का फंड फ्लो इस बात पर निर्भर करेगा कि अर्निंग्स की रफ्तार कितनी मजबूत रहती है और ग्लोबल अनिश्चितताएं कितनी कम होती हैं।

‘FPI और डेट मार्केट क्या होते हैं?’

FPI (फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टमेंट): जब विदेशी निवेशक, संस्थाएं या फंड किसी दूसरे देश के शेयर, डिबेंचर या बॉन्ड में पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहा जाता है। ये निवेशक सीधे कंपनियों का संचालन नहीं करते, बल्कि सिर्फ रिटर्न के लिए वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं।

डेट मार्केट (Debt Market): यह एक ऐसा वित्तीय बाजार है जहां सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड, डिबेंचर और अन्य फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज की खरीद-बिक्री होती है। इसमें शेयर बाजार की तुलना में जोखिम कम होता है और तय ब्याज दर पर रिटर्न मिलता है।

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