Saturday, 19 Sep 2026 | 11:18 PM

Trending :

EXCLUSIVE

दुनियाभर में फूड कंपनियों की मुकदमेबाजी में लगे 600 साल:डब्ल्यूएचओ का आरोप; अदालती चक्करों में फंसाकर मोटापे की मुहिम कमजोर कर रहे ब्रांड्स

दुनियाभर में फूड कंपनियों की मुकदमेबाजी में लगे 600 साल:डब्ल्यूएचओ का आरोप; अदालती चक्करों में फंसाकर मोटापे की मुहिम कमजोर कर रहे ब्रांड्स

दुनिया की सबसे बड़ी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (पैकेज्ड चिप्स, नम्कीन, क्रिस्प्स) कंपनियां सेहतमंद खान-पान को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों को अदालतों में घसीटकर मोटापे के खिलाफ वैश्विक मुहिम को कमजोर कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस का तो कम से कम यही मानना है। उनका कहना है कि इन कंपनियों की मुकदमेबाजी की वजह से देशों को स्वास्थ्य और कानूनी खर्च के मद में हजारों करोड़ रुपए गंवाने पड़ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि ज्यादातर मुकदमे कंपनियां हार जाती हैं। फिर भी मुकदमा ठोकना नहीं छोड़तीं। एक नई मल्टी-कंट्री (कई देश) जांच के मुताबिक, जितने भी मुकदमों का फैसला आ चुका है, उनमें से तीन-चौथाई में सरकारों की ही जीत हुई। लेकिन गेब्रेयेसस के मुताबिक, हारी हुई कंपनियां भी असल में बड़ा दांव जीत जाती हैं क्योंकि मुकदमा लड़ते-लड़ते ही नीति वर्षों तक अटकी रहती है। जांच में सामने आया कि दुनियाभर में इस तरह की मुकदमेबाजी में अब तक 600 साल लग हो चुके हैं, यानी हर मुकदमे में औसतन ढाई साल लग रहे हैं। यह जांच ‘द गार्जियन’ ने रॉबर्ट एंड एथेल कैनेडी ह्यूमन राइट्स सेंटर, सिडनी यूनिवर्सिटी, साओ पाउलो यूनिवर्सिटी और काल्डास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर की। जांच के मुताबिक, पैकेट के आगे लगने वाले वॉर्निंग लेबल पर सबसे ज्यादा, फिर जंक फूड पर टैक्स और इसके बाद विज्ञापन-मार्केटिंग पर लगी पाबंदियों को लेकर कंपनियों ने सबसे ज्यादा सरकारों को अदालत तक घसीटा। गेब्रेयेसस ने कहा, ‘अगर कंपनियां सच में मोटापे से लड़ने में मदद करना चाहती हैं, तो उन्हें मुकदमेबाजी छोड़नी होगी।’ 2024 में दुनियाभर में करीब 1 अरब लोग, यानी हर सातवां इंसान, मोटापे का शिकार था। गेब्रेयेसस के मुताबिक, जिन देशों ने वॉर्निंग लेबल, टैक्स और विज्ञापन पाबंदी जैसी नीतियां लागू कीं, वहां नतीजे बेहतर मिले हैं। 38% मुकदमे कोका-कोला, पेप्सिको जैसी सिर्फ 8 कंपनियों ने किए जिन मुकदमों में कंपनी की पहचान जाहिर हुई, उनमें से 38% सिर्फ आठ बड़ी पैरेंट कंपनियों से जुड़े थे। कोका-कोला, पेप्सिको, मोंडेलेज, केलॉग्स, डैनोन, फेरेरो, जिग्नक्स और हार्टलैंड फूड प्रोडक्ट्स ग्रुप इनमें शामिल हैं। यानी दुनिया की मुट्ठीभर बड़ी फूड कंपनियां ही सरकारों के खिलाफ सबसे ज्यादा कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो अदालत से अपनी पहचान गुप्त रखने की गुजारिश भी की, ताकि जनता को यह पता ही न चले कि मुकदमा किसने दायर किया है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Trump G7 Zelensky Snub | White House Clash VIDEO

June 16, 2026/
8:48 pm

नई दिल्ली32 मिनट पहले कॉपी लिंक यूक्रेनी प्रेसिडेंट जेलेंस्की ने जब हैलो कहा तो डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें इग्नोर किया।...

केजरीवाल बोले- मोदी बतौर पीएम 2026 पूरा नहीं कर पाएंगे:मोदी और शाह का साम्राज्य खत्म होने वाला है, पॉपुलैरिटी पाताललोक में पहुंची

March 24, 2026/
2:44 am

दिल्ली के पूर्व सीएम और AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर...

विद्रोही खेमे में हलचल: ममता बनर्जी के लिए आगे क्या है? | विस्फोटक सप्ताहांत बहस | न्यूज18

June 14, 2026/
9:41 pm

सीएनएन नाम, लोगो और सभी संबंधित तत्व ® और © 2026 केबल न्यूज नेटवर्क एलपी, एलएलएलपी। एक टाइम वार्नर कंपनी।...

Gold Silver Prices Drop ₹15,508 & ₹1,963 Amid Iran War Fears

March 16, 2026/
12:48 pm

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी में आज लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन...

अमेरिका में मिलने वाले प्रति घंटा वेतन में गिरावट जारी:मध्यम वर्ग की आय धीमी गति से बढ़ रही, एआई से भी बढ़ी समस्या

June 16, 2026/
5:02 pm

अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय एक विरोधाभास से गुजर रही है, जहां एक ओर अरबपतियों की संपत्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंच...

Gold Prices Surge ₹368, Silver ₹2.41 Lakh; 2026 Updates

April 10, 2026/
1:51 pm

नई दिल्ली13 मिनट पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में शुक्रवार को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA)...

शिक्षा विभाग के 18 कर्मचारियों के वेतन काटने के आदेश:उज्जैन में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित थे कर्मचारी

April 28, 2026/
9:24 pm

उज्जैन शिक्षा विभाग के डीईओ एवं डीपीसी ने मंगलवार को आकस्मिक निरीक्षण कर बड़ी कार्यवाही करते हुए 18 कर्मचारियों के...

सिंगरौली के सुदागांव में मिला युवक का शव:खेत में संदिग्ध हालत में मिला; चेहरे-सिर पर चोट के निशान, हत्या की आशंका

April 24, 2026/
3:13 pm

सिंगरौली जिले के सुदा गांव में शुक्रवार को 35 वर्षीय भुवनेश्वर कोल का शव मिला। युवक का शव उसके घर...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

दुनियाभर में फूड कंपनियों की मुकदमेबाजी में लगे 600 साल:डब्ल्यूएचओ का आरोप; अदालती चक्करों में फंसाकर मोटापे की मुहिम कमजोर कर रहे ब्रांड्स

दुनियाभर में फूड कंपनियों की मुकदमेबाजी में लगे 600 साल:डब्ल्यूएचओ का आरोप; अदालती चक्करों में फंसाकर मोटापे की मुहिम कमजोर कर रहे ब्रांड्स

दुनिया की सबसे बड़ी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (पैकेज्ड चिप्स, नम्कीन, क्रिस्प्स) कंपनियां सेहतमंद खान-पान को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों को अदालतों में घसीटकर मोटापे के खिलाफ वैश्विक मुहिम को कमजोर कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस का तो कम से कम यही मानना है। उनका कहना है कि इन कंपनियों की मुकदमेबाजी की वजह से देशों को स्वास्थ्य और कानूनी खर्च के मद में हजारों करोड़ रुपए गंवाने पड़ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि ज्यादातर मुकदमे कंपनियां हार जाती हैं। फिर भी मुकदमा ठोकना नहीं छोड़तीं। एक नई मल्टी-कंट्री (कई देश) जांच के मुताबिक, जितने भी मुकदमों का फैसला आ चुका है, उनमें से तीन-चौथाई में सरकारों की ही जीत हुई। लेकिन गेब्रेयेसस के मुताबिक, हारी हुई कंपनियां भी असल में बड़ा दांव जीत जाती हैं क्योंकि मुकदमा लड़ते-लड़ते ही नीति वर्षों तक अटकी रहती है। जांच में सामने आया कि दुनियाभर में इस तरह की मुकदमेबाजी में अब तक 600 साल लग हो चुके हैं, यानी हर मुकदमे में औसतन ढाई साल लग रहे हैं। यह जांच ‘द गार्जियन’ ने रॉबर्ट एंड एथेल कैनेडी ह्यूमन राइट्स सेंटर, सिडनी यूनिवर्सिटी, साओ पाउलो यूनिवर्सिटी और काल्डास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर की। जांच के मुताबिक, पैकेट के आगे लगने वाले वॉर्निंग लेबल पर सबसे ज्यादा, फिर जंक फूड पर टैक्स और इसके बाद विज्ञापन-मार्केटिंग पर लगी पाबंदियों को लेकर कंपनियों ने सबसे ज्यादा सरकारों को अदालत तक घसीटा। गेब्रेयेसस ने कहा, ‘अगर कंपनियां सच में मोटापे से लड़ने में मदद करना चाहती हैं, तो उन्हें मुकदमेबाजी छोड़नी होगी।’ 2024 में दुनियाभर में करीब 1 अरब लोग, यानी हर सातवां इंसान, मोटापे का शिकार था। गेब्रेयेसस के मुताबिक, जिन देशों ने वॉर्निंग लेबल, टैक्स और विज्ञापन पाबंदी जैसी नीतियां लागू कीं, वहां नतीजे बेहतर मिले हैं। 38% मुकदमे कोका-कोला, पेप्सिको जैसी सिर्फ 8 कंपनियों ने किए जिन मुकदमों में कंपनी की पहचान जाहिर हुई, उनमें से 38% सिर्फ आठ बड़ी पैरेंट कंपनियों से जुड़े थे। कोका-कोला, पेप्सिको, मोंडेलेज, केलॉग्स, डैनोन, फेरेरो, जिग्नक्स और हार्टलैंड फूड प्रोडक्ट्स ग्रुप इनमें शामिल हैं। यानी दुनिया की मुट्ठीभर बड़ी फूड कंपनियां ही सरकारों के खिलाफ सबसे ज्यादा कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो अदालत से अपनी पहचान गुप्त रखने की गुजारिश भी की, ताकि जनता को यह पता ही न चले कि मुकदमा किसने दायर किया है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.