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NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy

NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy
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5 मिनट पहले

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यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे।

क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विवाद पर NCERT ने बुधवार को पहली प्रतिक्रिया दी। NCERT ने कहा कि वे ज्यूडिशियरी का बहुत सम्मान करते हैं। किताब में गलती अनजाने में हुई है और NCERT को उस चैप्टर में गलत मटीरियल शामिल करने का अफसोस है।

NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था।

किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि, विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा।

किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है।

किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है।

अब पढ़िए NCERT का पूरा बयान

‘तय प्रोसेस के अनुसार, NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II निकाली। टेक्स्टबुक मिलने पर यह देखा गया कि कुछ गलत टेक्स्ट मटीरियल अनजाने में चैप्टर नंबर 4 में आ गया। मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन ने भी ऐसा ही ऑब्ज़र्वेशन किया और निर्देश दिया कि अगले ऑर्डर तक इस किताब का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह से रोक दिया जाए।

NCERT दोहराता है कि नई टेक्स्टबुक्स का मकसद संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना है। स्टूडेंट्स के बीच लिटरेसी, इंस्टीट्यूशनल रिस्पेक्ट, और डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन की जानकारी देना था। हमारा किसी भी कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी के अधिकार पर सवाल उठाने या उसे कम करने का कोई इरादा नहीं है। NCERT कंस्ट्रक्टिव फीडबैक के लिए तैयार है। इसलिए विवादित चैप्टर को सही अथॉरिटी से सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और एकेडमिक सेशन 2026-27 के शुरू होने पर क्लास 8 के स्टूडेंट्स को अवेलेबल कराया जाएगा। NCERT एक बार फिर इस फैसले की गलती पर अफसोस जताता है।’

नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स…

  • इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है।
  • करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है।
  • ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
  • किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं।
  • किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है।
  • बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
  • चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है।
  • यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है।

किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र

किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”

CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे

सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं।

इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते।

NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं

NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। CJI की टिप्‍पणी के बाद ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है। एक न्‍यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक NCERT की तरफ इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है।

NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है।

NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं।

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यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे।

क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विवाद पर NCERT ने बुधवार को पहली प्रतिक्रिया दी। NCERT ने कहा कि वे ज्यूडिशियरी का बहुत सम्मान करते हैं। किताब में गलती अनजाने में हुई है और NCERT को उस चैप्टर में गलत मटीरियल शामिल करने का अफसोस है।

NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था।

किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि, विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा।

किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है।

किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है।

अब पढ़िए NCERT का पूरा बयान

‘तय प्रोसेस के अनुसार, NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II निकाली। टेक्स्टबुक मिलने पर यह देखा गया कि कुछ गलत टेक्स्ट मटीरियल अनजाने में चैप्टर नंबर 4 में आ गया। मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन ने भी ऐसा ही ऑब्ज़र्वेशन किया और निर्देश दिया कि अगले ऑर्डर तक इस किताब का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह से रोक दिया जाए।

NCERT दोहराता है कि नई टेक्स्टबुक्स का मकसद संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना है। स्टूडेंट्स के बीच लिटरेसी, इंस्टीट्यूशनल रिस्पेक्ट, और डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन की जानकारी देना था। हमारा किसी भी कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी के अधिकार पर सवाल उठाने या उसे कम करने का कोई इरादा नहीं है। NCERT कंस्ट्रक्टिव फीडबैक के लिए तैयार है। इसलिए विवादित चैप्टर को सही अथॉरिटी से सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और एकेडमिक सेशन 2026-27 के शुरू होने पर क्लास 8 के स्टूडेंट्स को अवेलेबल कराया जाएगा। NCERT एक बार फिर इस फैसले की गलती पर अफसोस जताता है।’

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  • इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है।
  • करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है।
  • ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
  • किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं।
  • किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है।
  • बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
  • चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है।
  • यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है।

किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र

किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”

CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे

सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं।

इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते।

NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं

NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। CJI की टिप्‍पणी के बाद ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है। एक न्‍यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक NCERT की तरफ इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है।

NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है।

NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं।

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