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Odisha Hostel Protest | Students Walk 12km Over Poor Food & Conditions

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4 मिनट पहले

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ओडिशा के एक हॉस्टल में लगभग 180 छात्र रह रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया है। खाने की क्वालिटी खराब है। यहां तक कि चावल-दाल में कीड़े मिलने की शिकायत भी की। यह घटना ओडिशा के नबरंगपुर जिले के झरिगांव ब्लॉक स्थित सांतेमारा सरकारी उच्च विद्यालय के हॉस्टल से जुड़ी है।

अधिकारियों ने दिया समस्या के समाधान का आश्वासन

हॉस्टल की छत से बारिश का पानी टपकने, गंदे टॉयलेट और पानी की समस्याओं व खेल सामग्री की कमी की भी शिकायत की गई। नाराज छात्र अपने बैग लेकर हॉस्टल छोड़कर घरों की ओर निकल पड़े।

ये सब देखकर शिक्षा एवं जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर छात्रों और उनके माता-पिता से बातचीत की। उन्हें समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

12 किमी तक पैदल चले छात्र

हॉस्टल के बदतर हालातों को बताते हुए छात्रों ने कहा – हॉस्टल में कमरों की संख्या कम होने के कारण कई छात्रों को भीड़भाड़ के बीच रहना पड़ता है। इन छात्रों ने हॉस्टल से अपने गांव तक का 12 किमी सफर पैदल चलकर तय किया।

ओडिशा के नबरंगपुर जिले के झरिगांव ब्लॉक स्थित सांतेमारा सरकारी उच्च विद्यालय के मेन गेट की फोटो

ओडिशा के नबरंगपुर जिले के झरिगांव ब्लॉक स्थित सांतेमारा सरकारी उच्च विद्यालय के मेन गेट की फोटो

प्रिंसिपल ने खराब खाने की बात से किया इंकार

सूचना मिलने के बाद कई अभिभावक भी मौके पर पहुंचे और अपने बच्चों को अपने साथ घर ले गए। इस घटना के बाद राज्य में सरकारी आवासीय छात्रावासों की व्यवस्था और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस बारे में जब स्कूल की प्रिंसिपल राजलक्ष्मी महाराणा से बात की तो उन्होंने छात्रों के अधिकांश आरोपों से इनकार किया। हालांकि उन्होंने हॉस्टल में कुछ अव्यवस्थाओं की बात जरूर स्वीकार की। इस बात को उन्होंने खारिज कर दिया कि हॉस्टल में छात्रों को सड़ा हुआ चावल परोसे जाता है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी हॉस्टलों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और खाने की क्वालिटी पर बहस छेड़ दी है।

हॉस्टल छोड़कर घर के लिए निकले 180 छात्रों का समूह

हॉस्टल छोड़कर घर के लिए निकले 180 छात्रों का समूह

नए प्रिंसिपल की नियुक्ति की गई

असिस्टेंट ब्लॉक ऑफिसर दशरथ गोंड ने घटना के बारे में बताते हुए कहा, “हमें जब सूचना मिली तो हम तुरंत मौके पर पहुंचे। हमनें देखा कि बच्चे चल चलकर आ रहे थे। हमनें उन्हें दुकलपाड़ा स्कूल में रुकने को कहा। वहां उन्हें खाने पीने की सुविधा दी गई।

बच्चों से बात करने के बाद हमनें प्रिंसिपल का ट्रांसफर कर दिया है। यहां नए प्रिंसिपल की नियुक्ति की गई है जिनका नाम जिनका नाम गणेशराम नायक है। इसके बाद बच्चों के लिए गाड़ी की व्यवस्था कर उन्हें वापस स्कूल भेजा गया।

हॉस्टल में मूक-बधिर छात्रों के हालात भी बदतर

जयपुर के राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक स्कूल में भी दो दिन पहले हंगामा हुआ। दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने स्कूल में टॉयलेट की बदहाल स्थिति, पानी का संकट और जर्जर भवन की समस्या से परेशान होकर प्रदर्शन किया।

मामले की सूचना पर शिक्षा विभाग की टीम, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी स्कूल पहुंचे। गहलोत ने कहा कि बच्चों की समस्या को लेकर मैं खुद सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखूंगा। उन्हें बताऊंगा कि स्कूल में ऐसे टीचर्स की नियुक्ति की गई है, जिन्हें खुद साइन लैंग्वेज नहीं आती है। वहीं हालात भी बद से बदतर है।

निरीक्षण में कई खामियां सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल प्रिंसिपल को हटा दिया। वहीं एक टीचर और एक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी को भी APO कर दिया गया।

क्लासरूम की दीवारों पर दरार

जवाहरलाल नेहरू मार्ग में स्थित राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार स्कूल के छात्र प्रदर्शन करते गेट पर बैठ गए। छात्रों का कहना है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कई क्लासरूम की दीवारों और कमरों में दरारें पड़ चुकी हैं।

इसके साथ ही पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्टूडेंट्स का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल को अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ा।

विशेष कमेटी का भी गठन, स्कूल में होगा काम

शिक्षा विभाग ने स्कूल में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी का भी गठन किया है। यह कमेटी स्कूल की सफाई व्यवस्था, पेयजल, भवन की स्थिति और अन्य मूलभूत सुविधाओं का आकलन कर जल्द रिपोर्ट देगी।

रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य कराए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूल में सामने आई कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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12 किमी तक पैदल चले छात्र

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प्रिंसिपल ने खराब खाने की बात से किया इंकार

सूचना मिलने के बाद कई अभिभावक भी मौके पर पहुंचे और अपने बच्चों को अपने साथ घर ले गए। इस घटना के बाद राज्य में सरकारी आवासीय छात्रावासों की व्यवस्था और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस बारे में जब स्कूल की प्रिंसिपल राजलक्ष्मी महाराणा से बात की तो उन्होंने छात्रों के अधिकांश आरोपों से इनकार किया। हालांकि उन्होंने हॉस्टल में कुछ अव्यवस्थाओं की बात जरूर स्वीकार की। इस बात को उन्होंने खारिज कर दिया कि हॉस्टल में छात्रों को सड़ा हुआ चावल परोसे जाता है। फिलहाल इस घटना ने सरकारी हॉस्टलों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और खाने की क्वालिटी पर बहस छेड़ दी है।

हॉस्टल छोड़कर घर के लिए निकले 180 छात्रों का समूह

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नए प्रिंसिपल की नियुक्ति की गई

असिस्टेंट ब्लॉक ऑफिसर दशरथ गोंड ने घटना के बारे में बताते हुए कहा, “हमें जब सूचना मिली तो हम तुरंत मौके पर पहुंचे। हमनें देखा कि बच्चे चल चलकर आ रहे थे। हमनें उन्हें दुकलपाड़ा स्कूल में रुकने को कहा। वहां उन्हें खाने पीने की सुविधा दी गई।

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निरीक्षण में कई खामियां सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल प्रिंसिपल को हटा दिया। वहीं एक टीचर और एक फोर्थ ग्रेड कर्मचारी को भी APO कर दिया गया।

क्लासरूम की दीवारों पर दरार

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इसके साथ ही पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्टूडेंट्स का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल को अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ा।

विशेष कमेटी का भी गठन, स्कूल में होगा काम

शिक्षा विभाग ने स्कूल में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी का भी गठन किया है। यह कमेटी स्कूल की सफाई व्यवस्था, पेयजल, भवन की स्थिति और अन्य मूलभूत सुविधाओं का आकलन कर जल्द रिपोर्ट देगी।

रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य कराए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूल में सामने आई कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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