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10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को मंजूरी:वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे, ये 30 साल तक चलेंगे

10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को मंजूरी:वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे, ये 30 साल तक चलेंगे

सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सफल ट्रायल के बाद नियमित जारी होंगे नोट RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। ट्रायल सफल होने के बाद इन दोनों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। RBI के मुताबिक, पॉलीमर नोट कागज से बने नोटों के साथ जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पॉलीमर नोटों की खरीद की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए फिलहाल इनके जारी होने की सही समय सीमा बता पाना संभव नहीं है। सवाल-जवाब में जानें इस खबर से जुड़ी जरूरी बातें… सवाल 1: पॉलीमर नोट क्या होते हैं और सरकार इन्हें क्यों ला रही? जवाब: पॉलीमर बैंकनोट्स कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में बताया था कि ये नोट दुनिया के कई देशों जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में पॉलीमर करेंसी नोट 30 साल से भी अधिक समय तक सफलतापूर्वक उपयोग में रहे हैं। इन्हें लाने की मुख्य वजहें- लंबी उम्र: ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं। नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। छपाई खर्च में बचत: कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं, जिससे छपाई का खर्च बढ़ता है। FY25 में आरबीआई ने कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे चलेंगे, जिससे बार-बार छापने का खर्च घटेगा। सवाल 2: क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे? जवाब: बिल्कुल नहीं। सरकार और आरबीआई ने पूरी तरह साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने से पुराने कागजी नोट चलन से बाहर नहीं होंगे। सर्कुलेशन जारी रहेगा: जब तक नए नोट पूरी तरह स्थापित नहीं होते, तब तक कागजी नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे। सवाल 3: पॉलीमर नोट का प्रस्ताव कब आया था? जवाब: भारत ने 2012 में पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी वजहों से प्रोजेक्ट रुक गया था। मई-जून : मीडिया रिपोर्ट्स और आरबीआई की रिपोर्ट में शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों पर विचार की बात आई। जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन किया जा रहा है। सवाल 4: दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं? दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। सवाल 5: भारत में कब-कब नोट बदले गए? जवाब: आजादी से लेकर अब तक भारत में बड़े पैमाने पर 3 बार नोटबंदी या बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया है… 1. पहली बार – जनवरी 1946 (ब्रिटिश काल/आजादी से ठीक पहले): क्या हुआ: तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया था। मकसद: काले धन और युद्ध के दौरान हुई अवैध कमाई को बाहर निकालना। बाद में: 1954 में सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट फिर से शुरू किए थे। 2. दूसरी बार – जनवरी 1978 (मोरारजी देसाई सरकार): क्या हुआ: जनता पार्टी की सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया। मकसद: चुनाव में होने वाले काले धन के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार को रोकना। 3. तीसरी बार – 8 नवंबर 2016 (नरेंद्र मोदी सरकार): क्या हुआ: रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने देश में चल रहे ₹500 और ₹1,000 के नोटों को रातों-रात अमान्य घोषित कर दिया। बदलाव: इनकी जगह ₹500 का नया नोट और पहली बार ₹2,000 का नया नोट जारी किया गया। ₹2000 के नोट की वापसी (मई 2023): 19 मई 2023 को RBI ने ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत ₹2,000 के नोट को चलन (सर्कुलेशन) से वापस लेने का ऐलान किया। हालांकि इसे नोटबंदी नहीं कहा गया क्योंकि इसे बैंक में जमा करने या बदलने का समय दिया गया था।

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सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सफल ट्रायल के बाद नियमित जारी होंगे नोट RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। ट्रायल सफल होने के बाद इन दोनों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। RBI के मुताबिक, पॉलीमर नोट कागज से बने नोटों के साथ जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पॉलीमर नोटों की खरीद की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए फिलहाल इनके जारी होने की सही समय सीमा बता पाना संभव नहीं है। सवाल-जवाब में जानें इस खबर से जुड़ी जरूरी बातें… सवाल 1: पॉलीमर नोट क्या होते हैं और सरकार इन्हें क्यों ला रही? जवाब: पॉलीमर बैंकनोट्स कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में बताया था कि ये नोट दुनिया के कई देशों जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में पॉलीमर करेंसी नोट 30 साल से भी अधिक समय तक सफलतापूर्वक उपयोग में रहे हैं। इन्हें लाने की मुख्य वजहें- लंबी उम्र: ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं। नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। छपाई खर्च में बचत: कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं, जिससे छपाई का खर्च बढ़ता है। FY25 में आरबीआई ने कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे चलेंगे, जिससे बार-बार छापने का खर्च घटेगा। सवाल 2: क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे? जवाब: बिल्कुल नहीं। सरकार और आरबीआई ने पूरी तरह साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने से पुराने कागजी नोट चलन से बाहर नहीं होंगे। सर्कुलेशन जारी रहेगा: जब तक नए नोट पूरी तरह स्थापित नहीं होते, तब तक कागजी नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे। सवाल 3: पॉलीमर नोट का प्रस्ताव कब आया था? जवाब: भारत ने 2012 में पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी वजहों से प्रोजेक्ट रुक गया था। मई-जून : मीडिया रिपोर्ट्स और आरबीआई की रिपोर्ट में शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों पर विचार की बात आई। जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन किया जा रहा है। सवाल 4: दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं? दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। सवाल 5: भारत में कब-कब नोट बदले गए? जवाब: आजादी से लेकर अब तक भारत में बड़े पैमाने पर 3 बार नोटबंदी या बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया है… 1. पहली बार – जनवरी 1946 (ब्रिटिश काल/आजादी से ठीक पहले): क्या हुआ: तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया था। मकसद: काले धन और युद्ध के दौरान हुई अवैध कमाई को बाहर निकालना। बाद में: 1954 में सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट फिर से शुरू किए थे। 2. दूसरी बार – जनवरी 1978 (मोरारजी देसाई सरकार): क्या हुआ: जनता पार्टी की सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया। मकसद: चुनाव में होने वाले काले धन के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार को रोकना। 3. तीसरी बार – 8 नवंबर 2016 (नरेंद्र मोदी सरकार): क्या हुआ: रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने देश में चल रहे ₹500 और ₹1,000 के नोटों को रातों-रात अमान्य घोषित कर दिया। बदलाव: इनकी जगह ₹500 का नया नोट और पहली बार ₹2,000 का नया नोट जारी किया गया। ₹2000 के नोट की वापसी (मई 2023): 19 मई 2023 को RBI ने ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत ₹2,000 के नोट को चलन (सर्कुलेशन) से वापस लेने का ऐलान किया। हालांकि इसे नोटबंदी नहीं कहा गया क्योंकि इसे बैंक में जमा करने या बदलने का समय दिया गया था।

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