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Global Tensions Fuel Oil Price Hike Fear; Govt Absorbs Rs 1 Lakh Cr Burden

Global Tensions Fuel Oil Price Hike Fear; Govt Absorbs Rs 1 Lakh Cr Burden
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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं।

सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। PTI के सूत्रों के मुताबिक, पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

कंपनियों को रोज ₹1,700 करोड़ का घाटा

इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की बिक्री पर रोज ₹1,600 से ₹1,700 करोड़ का नुकसान हो रहा है। कच्चे तेल की लागत बढ़ने के बाद भी पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर के पुराने रेट पर ही मिल रहा है।

सरकार ने ड्यूटी घटाकर कीमतों को काबू में रखा

भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल, 90% एलपीजी और 65% नेचुरल गैस आयात करता है। युद्ध की वजह से सप्लाई लाइन बाधित हुई है और लागत बढ़ गई है। जापान और ब्रिटेन जैसे देशों ने ईंधन की कीमतें 30% तक बढ़ा दी हैं, लेकिन भारत में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर कीमतों को काबू में रखा है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 और डीजल पर ₹10 से घटाकर जीरो कर दी गई है।

कंपनियों की बैलेंस शीट पर बढ़ रहा है दबाव

तेल कंपनियों की कमाई का एकमात्र जरिया ईंधन की बिक्री है, जिससे वे कच्चा तेल खरीदती हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाती हैं। भारी नुकसान के कारण अब कंपनियों को वर्किंग कैपिटल के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है।

जानकारों का कहना है कि अगर कीमतें लंबे समय तक ऐसे ही बनी रहीं, तो भविष्य के प्रोजेक्ट्स जैसे रिफाइनिंग विस्तार और क्लीन फ्यूल मिशन पर असर पड़ सकता है।

अब सरकार के हाथ में कीमतें बढ़ाने का फैसला

सूत्रों का कहना है कि अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई है। हालांकि, यह एक राजनीतिक फैसला है, इसलिए दाम कब और कितने बढ़ाए जाएंगे, इसका अंतिम फैसला केंद्र सरकार को ही लेना है।

सरकार फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए हर महीने ₹14,000 करोड़ का बोझ खुद उठा रही है।

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं।

सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। PTI के सूत्रों के मुताबिक, पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

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सरकार ने ड्यूटी घटाकर कीमतों को काबू में रखा

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