‘काठमांडू से निकलते ही हमें अंदाजा हो गया था कि हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। पानी का फ्लो अचानक तेजी से बढ़ गया था। हमारी गाड़ी से करीब 500 मीटर की दूरी पर देखते ही देखते एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। उस मंजर को देखकर हम लोग घबरा गए थे।’ उस वक्त लगा कि अब हम लोगों की बारी है। हमारी गाड़ी भी पानी में बह सकती है। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचकर यहां तक पहुंच पाएंगे। भगवान और बिहार सरकार ने ही हमारी जान बचाई है।’ नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों ने ये बातें बताईं। 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित उनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। नेपाल से बिहार लौटे भारतीयों ने क्या बताया? दो दिन उन्होंने किन हालात में गुजारे? अपनी आंखों के सामने उन्होंने क्या-क्या देखा? अब भी उनके मन में किस बात का डर है? पढ़िए नेपाल की आंखों देखी… नेपाल से सही सलामत लोग सीतामढ़ी पहुंचे, 3 फोटोज… ‘बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे’ नेपाल घूमने और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए महाराष्ट्र के करीब 106 यात्रियों का ग्रुप काठमांडू से भारत लौट आया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये दो दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में बदल जाएंगे। जब वे काठमांडू से बिहार आ रहे थे तो रास्ते में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया था। सड़कें टूट चुकी थीं। नदियां उफान पर थीं। जिस पुल को पार कर वे बिहार की सीमा में दाखिल हुए, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। हालांकि, बिहार प्रशासन की मदद से सभी लोग सुरक्षित बचाए लिए गए। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सभी सुरक्षित भारतीयों से बात की। नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने बताया, ‘नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। पानी लगातार बढ़ रहा था और बहाव बेहद तेज था। डर के बीच हम लोगों ने किसी तरह पुल पार किया, लेकिन इसके करीब आधे घंटे बाद हमें खबर मिली की पानी का लेवल और बढ़ गया है। जिस पुल को हमने क्रॉस किया, वो पूरी तरह डूब चुका है।’ योगेश ने ये भी कहा कि जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। सुरक्षित निकल पाएंगे, इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते। भारत सरकार ने हमारा बहुत साथ दिया। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाए और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद। ‘महाराष्ट्र और बिहार अलग-अलग नहीं, हम सब भारतीय हैं’ योगेश ने कहा, बिहार प्रशासन और यहां के लोगों के व्यवहार से हमें बहुत अच्छा लगा। हम सभी भारतीय हैं। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र अलग है और बिहार अलग। हम सब एक ही देश के हैं। आज यहां आकर यह बात और ज्यादा महसूस हो रही है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा होता है। हम लोगों का ग्रुप 19 अगस्त को महाराष्ट्र से नेपाल पहुंचा था। सबसे पहले हम लोग पोखरा गए, वहां से मुक्तिनाथ और फिर काठमांडू पहुंचे थे। इसी दौरान ग्लेशियर से आई तबाही और बाढ़ के कारण कई रास्ते पूरी तरह टूट गए और बंद हो गए। इसके चलते हमलोग भारत वापस नहीं आ पा रहे थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तत्काल मदद की गई और नेपाल से भारत तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था कराई गई। ’50 सीटर बस पहाड़ में फंसी, छोटी गाड़ियों से निकाला’ पुणे निवासी नारायण रेशमा बाजपेयी ने बताया, हम लोगों का ग्रुप करीब 50 सीटर बस से नेपाल गया था। शुरुआत के 7-8 दिन यात्रा सामान्य रही, लेकिन वापसी के समय रास्ते बंद होने लगे। 50 सीटर बस के लिए पहाड़ी और टूटे हुए रास्तों से आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मदद मांगी गई। छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई। इन्हीं छोटी गाड़ियों से यात्रियों को आगे निकाला गया। जिस जगह बाद में सबसे ज्यादा तबाही हुई, उसी जगह से हम लोग एक दिन पहले ही निकल चुके थे। इस वजह से हमने तबाही का सबसे भयानक रूप सामने से नहीं देखा, लेकिन वापसी के दौरान रास्तों की हालत देखकर हमें खतरे का अंदाजा हो गया था। काठमांडू में दो दिनों तक बिना खाए रहे लोग आशा पांडे ने बताया, हमलोग 2 दिनों से बहुत ही मुश्किल में थे। भूखे-प्यासे सिर्फ जान की परवाह कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि कब और कैसे इस भयानक तबाही से निकल पाएंगे।’ एक अन्य यात्री सरला ने बताया, ‘नेपाल से निकलकर जब हम लोग भारतीय सीमा तक पहुंचे तो यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की। हमें बॉर्डर से आगे लाने, गाड़ी तक पहुंचाने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से पहले नाश्ता और भोजन कराया गया। रहने की भी व्यवस्था की गई। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘आज राखी का दिन है और ऐसा लग रहा है कि हमें यहां भाई मिल गए। हमारी बहुत बड़ी मदद हुई है। जिस तरह से प्रशासन और लोगों ने हमारा साथ दिया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।’ सरला की मौसेरी बहन निर्मला पांडे ने बताया, हम लोग नेपाल घूमने गए थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंस गए। इस बीच मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। नेपाल के हालात को देखकर वे घबरा गईं और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। फिलहाल, उनका इलाज नेपाल के काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। वहां की सरकार और मेरा भाई उनका ध्यान रख रहे हैं।’ ये सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में नौकरी करते हैं। ‘नेपाल बॉर्डर पर यात्रियों को रिसीव किया, खाना दिया, आगे की व्यवस्था की’ आपदा के ADM बृज किशोर पांडेय ने कहा, भारत से नेपाल घूमने गए ये यात्री बाढ़ की तबाही में फंस गए थे। 28 अगस्त को करीब 3 बजे दोपहर में मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ भारतीय बिहार बॉर्डर पर आ रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बॉर्डर पर पहुंचकर यात्रियों को रिसीव किया। गाड़ी नहीं होने पर प्रशासन ने अपने साधनों से उन्हें थाने तक पहुंचाया। थाने पहुंचने पर यात्रियों को नाश्ता, फल, पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया। एक-दो यात्रियों ने कमजोरी और चक्कर की शिकायत की, जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रशासन के अनुसार करीब 110 यात्री लौट रहे थे, जिनमें कुछ निजी साधनों से आगे निकल गए। फिलहाल 106 यात्रियों का ग्रुप प्रशासन के पास पहुंचा है। सभी को उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने के साथ पटना आने-जाने की व्यवस्था भी की गई। महाराष्ट्र के CM ने सीतामढ़ी सांसद से किया कॉन्टैक्ट सभी यात्रियों ने गुरुवार, 27 अगस्त को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साधा था। इसके बाद फडणवीस ने तुरंत सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को पूरी स्थिति बताई। सांसद देवेश ठाकुर ने गुरुवार रात काठमांडू सांसद संदीप राणा से कॉन्टैक्ट किया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह विशेष बसों की व्यवस्था कर सभी को वहां से रवाना किया गया। रास्ते में दो बसें बदलकर तीर्थयात्री किसी तरह सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ सीमा पहुंचे। यहां सीतामढ़ी जिला प्रशासन की टीम पहले से मुस्तैद थी। सीमा पर पुपरी एसडीओ गौरव कुमार, सीओ सतीश कुमार, बीडीओ कर्मवीर कुमार प्रभाकर, आरओ ब्रजेश मिश्र और भिट्ठा थानाध्यक्ष दीपक पटेल सहित अधिकारियों ने सभी का स्वागत किया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की देखरेख में सभी का हेल्थ चेकअप कराया गया। सभी को खाना खिलाया और आराम करने की व्यवस्था की। महाराष्ट्र की महिलाओं ने सीतामढ़ी SDM के साथ मनाई राखी ——————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची, VIDEO नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पूरी खबर पढ़ें…















































