15 मिनट पहले
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महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी MPSC के खिलाफ बीते एक महीने से लगातार कैंडिडेट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। पुणे में प्रदर्शनकारियों ने MPSC मुर्दाबाद के नारे लगाए और विरोध जताते हुए MPSC आयोग की अर्थी भी निकाली।
आज 7 अक्टूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई की और 70 हजार खाली पदों और भर्ती प्रक्रिया पर महाराष्ट्र सरकार से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा। सरकार को तीन सप्ताह के भीतर भर्ती का रोडमैप पेश करना होगा। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयोग की जांच कराने की बात कही।
साथ ही कोर्ट ने कहा- ‘हम कैंडिडेट्स की समस्या को समझ रहे हैं लेकिन उन्हें आंदोलन के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।’

इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा है।
MNS नेता राज ठाकरे पहुंचे, राहुल गांधी भी हो सकते हैं शामिल
इससे पहल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी प्रोटेस्ट में पहुंचे थे और 30 सितंबर को सीएम देवेंद्र फडणवीस से भी कैंडिडेट्स ने मुलाकात की थी।
NCP विधायक रोहित पवार के मुताबिक राहुल गांधी 7-8 अक्टूबर को कैंडिडेट्स से मिल सकते हैं।
MPSC आयोग के खिलाफ पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कैंडिडेट्स लंबे समय से प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा है।
MPSC आयोग के खिलाफ 5 महीनों से अलग-अलग विरोध प्रदर्शन
30 जून को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC की परीक्षाओं को CBT (कंप्युटर बेस्ड टेस्ट) कराने के फैसले के खिलाफ कैंडिडेट्स ने आंदोलन शुरू किया था।
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) ने ऑनलाइन मोड में परीक्षाएं करवाने के फैसले का नोटिफिकेशन फाड़कर विरोध किया और परीक्षाएं ऑफलाइन कराने की मांग की थी।
इसके बाद 16 जुलाई को संभाजीनगर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स ने ऑफलाइन एग्जाम कराने की मांग को लेकर दोबारा प्रदर्शन शुरू किया था।

ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा इंटरव्यू के बाद रद्द हुई
अगस्त में ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामला सामने आया था। MPSC ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-B पोस्ट के लिए भर्ती प्रक्रिया पेपर लीक के बाद रद्द कर दी थी।
ये परीक्षा 22 मार्च 2026 को हुई थी और जुलाई में इसका रिजल्ट जारी होने के बाद इंटरव्यू हुए थे। इसके बाद प्रशासन के खिलाफ कैंडिडेट्स का आक्रोश ओर बढ़ गया।
27 अगस्त को विधायक रोहित पवार ने पेपर लीक मामले को लेकर 1 सितंबर को MPSC कार्यालय के बाहर आंदोलन की चेतावनी दी थी।
पेपर लीक, परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन
MPSC आयोग के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन जारी है, जहां पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस की युवा इकाई के नेता भी आंदोलन में शामिल हैं।
ये कैंडिडेट्स पिछले कुछ समय से परीक्षा प्रक्रिया, भर्ती में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल कर रहे हैं। कैंडिडेट्स का गुस्सा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता है।
पुणे में MPSC कैंडिडेट्स का आंदोलन फिलहाल तीन अलग-अलग जगहों पर चल रहा है और इन जगहों पर छात्रों की मांगें भी अलग हैं।
आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग
परीक्षा रद्द होने के बाद कैंडिडेट्स ने आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की जवाबदेही तथा इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
उम्मीदवारों का कहना है कि महाराष्ट्र की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी है। छात्रों ने परीक्षा पैटर्न में गड़बड़ियों और कुछ पदों में कटौती को भी अपना मुद्दा बनाया।
इन कैंडिडेट्स की मुख्य मांगों में MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच शामिल थी।
सितंबर के आखिर में आंदोलन बड़ा हो गया और कैंडिडेट्स ने 2 अक्टूबर को बड़े प्रोटेस्ट का ऐलान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैंडिडेट्स से बातचीत की और आंदोलन स्थगित किया गया।

इसके साथ ही कैंडिडेट्स ने स्टेनोग्राफर पद को बहाल करने की भी मांग की है। पेपर लीक मामले में आरोपी रहे अधिकारी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की है।
कई बड़े नेताओं और चेहरों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया
शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे पुणे पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलकर उनके आंदोलन का समर्थन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों का समर्थन किया। सांसद सुप्रिया सुले राज्य सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे ने भी छात्रों के एक समूह से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की।
MPSC चेयरमैन- मैं गुनहगार, तो तुरंत पद छोड़ूंगा
आरोपों का जवाब देते हुए, MPSC के चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने कहा कि कमीशन और राज्य सरकार ने ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अलग-अलग हाई-लेवल कमेटियां बनाई हैं। पेपर लीक के मामले में पुलिस केस भी दर्ज किया गया है।
एक बयान में भीमन्वार ने कहा, ‘मुझे इस बात का बहुत दुख है कि सच्चाई साफ होने के बावजूद, मेरी छवि खराब करने के मकसद से मुझ पर निजी और राजनीतिक कारणों से आरोप लगाए जा रहे हैं। पद संभालने के बाद से मैंने MPSC में कई सुधार किए हैं।’
साथ ही उन्होंने कहा कि हमने कुल 84 परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं। हालांकि, अगर मेरे खिलाफ एक भी सबूत मिलता है, तो मैं एक पल के लिए भी इस पद पर नहीं रहूंगा। मैंने पहले ही साफ कर दिया है कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना मेरे पद संभालने से पहले की है।
आयोग- ग्रुप C की परीक्षा में पद बढ़ाए जाएंगे
सरकार की MPSC विवाद को लेकर सफाई है कि MPSC के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही कराए जाने या किसी भी तरह के बदलाव के प्रस्ताव पर कैंडिडेट्स से चर्चा जरूर की जाएगी।
इसके साथ ही सरकार ने कैंडिडेट्स की मांग पर ग्रुप C की 3 जनवरी को होने वाली परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने, तीन साल की भर्तियों की योजना बनाने और रिटायरमेंट से खाली होने वाले पदों को भरने से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी बात कही।
साथ ही कैंडिडेट्स के लिए एक सिंगल कार्ड सिस्टम लाने का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि हर परीक्षा के लिए बार-बार डॉक्युमेंट्स जमा न करने पड़ें।
इन आश्वासनों के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग को लेकर दोबारा आंदोलन शुरू हो गए हैं।
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