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अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

आने वाला समय इंटरएक्टिव, कस्टमाइज्ड और इमर्सिव सिनेमा का है। दर्शक सिर्फ फिल्म देखेंगे नहीं, बल्कि महसूस करेंगे।
फर्ज कीजिए थिएटर में एक दृश्य में रेगिस्तान का बैकग्राउंड है। आप इसे लद्दाख की बर्फीली वादियों में देखना चाहते हैं। रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही दृश्य बदल जाएगा। दृश्य 360 डिग्री घुमाकर किसी भी एंगल से देख सकेंगे। थियेटर में अगर 40 दर्शक हैं तो सब अपनी पसंद के एंगल से फिल्म देख सकेंगे। 8 साल पहले आई हॉलीवुड फिल्म रियल प्लेयर वन में दिखाई विशाल वर्चुअल दुनिया ओएसिस की तरह दर्शक स्पर्श, कंपन, गर्मी, सर्दी, हवा और दूरी का अहसास कर पाएंगे। इसके लिए बॉडी सूट, ग्लव्ज और वीआर हेडसेट पहनने होंगे। यह अभी उपलब्ध 4डी सिनेमा से अलग है, जहां सीट हिलती है, पानी के छींटे पड़ते हैं या खुशबू आती है। इमर्सिव सिनेमा में वर्चुअल एक्शन का असर होगा, जिसमें एवीजीसी एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट, गेमिंग, कॉमिक्स व एक्सटेंडेट रियलिटी) का हर पहलू शामिल है। मुंबई के एनएफडीसी कैंपस​ स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) में एवीजीसी एक्सआर के हर पहलू के लिए आधुनिक लैब व स्टूडियो हैं। सीईओ निनाद रायकर कहते हैं कि डीम्ड यूनिवर्सिटी दर्जे के बाद एनिमेशन, गेमिंग जैसे स्पेशलाइज्ड यूजी-पीजी कोर्स शुरू होंगे। अभी 19 डिप्लोमा-सर्टिफिकेट कोर्स हैं। संस्थान ने करिकुलम, रिसर्च व इनोवेशन के लिए नेटफ्लिक्स, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा समेत 24 संस्थानों को भागीदार बनाया है। 2030 तक 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत 2030 तक इस इंडस्ट्री को 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत होगी। ऑरेंज इकोनॉमी के लिए बजट में घोषित 15 हजार स्कूलों व 500 कॉलेजों में छात्रों को एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स जैसे क्षेत्रों में कुशल बनाने के लिए एवीजीसी कंटेंट क्रिएशन लैब का खाका जल्द तैयार होगा। सरकार की योजना एक मॉडल आईआईसीटी विकसित करने के बाद आईआईटी व आईआईएम की तर्ज पर देश में अलग-अलग जगह आईआईसीटी स्थापित करने की है। हॉलीवुड की 60% फिल्मों का प्रोसेस भारत में- सलिल देशपांडे फैकल्टी, आईआईसीटी भारत में भी एवीजीसी एक्सआर सेक्टर के लैब हैं। हॉलीवुड की 60% फिल्मों के कुछ हिस्से और दुनिया की 10% फिल्मों का एवीजीसी एक्सआर जॉब बैकएंड वर्क भारत में होता है। राजामौली जैसे फिल्मकार हैदराबाद की अन्नपूर्णा लैब इस्तेमाल करते हैं। भारत में अभी रोटोमेशन, रोटोस्कॉपिंग, मैचमूव, ट्रैकिंग, क्लीनअप, पेंट, क्राउड सिमुलेशन, लाइटिंग सपोर्ट का काम होता है। भारत बैकएंड पर काम करता है। करीब 80 लाख लोग जुड़े हैं। पर, भारत कॉन्सेप्ट डिजाइन यानी कहानी, कैरेक्टर, क्रिएटिव कंट्रोल, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) पर मालिकाना हक नहीं रखता। ऑरेंज इकोनॉमी में हिस्सेदारी बढ़ाने का लाभ बैकएंड से फ्रंटफुट पर जाने में मिलेगा। आईआईसीटी की क्षमता आज ही अवतार जैसी फिल्मों के 40-50 फीसदी निर्माण की है। अभी आईआईसीटी 10 स्टार्टअप को इंक्यूबेट भी कर रही है।

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