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Puri Jagannath Temple Ratna Bhandar Counting Begins March 25

Puri Jagannath Temple Ratna Bhandar Counting Begins March 25
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पुरी13 घंटे पहलेलेखक: प्रियंका साहू

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तस्वीर 14 जुलाई 2024 की है। हाईकोर्ट के आदेश पर रत्न भंडार खोलने से पहले लकड़ी के 6 बड़े-बड़े संदूक लाए गए। बाहरी रत्न भंडार से निकले आभूषण इन्हीं में रखे गए हैं।

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित गिनती और लिस्ट बनाने की प्र​क्रिया आखिर शुरू होने जा रही है। ओडिशा सरकार ने 25 मार्च को दोपहर 12.12 बजे से 1.45 बजे का शुभ मुहूर्त तय किया है।

‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का खजाना है। 1978 की गिनती के अनुसार, यहां 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी के आभूषण हैं। ये गिनती 72 दिन चली थी।

रत्न भंडार काउंटिंग की पूरी प्र​क्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त करने पर सहमति जताई है, जबकि राष्ट्रीयकृत बैंक पंजीकृत सुनार उपलब्ध कराएंगे।

मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस बार गि​नती कितने दिन चलेगी, यह कहना जल्दबाजी होगा। राज्य सरकार दो रत्नविज्ञानी भी उपलब्ध कराएगी, जो आभूषणों में लगे बेशकीमती रत्नों की पहचान करेंगे। बाहरी रत्न भंडार में भगवान के दैनिक उपयोग के आभूषण रखे जाते हैं।

खजाने से रोज चाबी लाएंगे मजिस्ट्रेट, उसी दिन जमा भी करनी होगी

गहनों की गिनती के लिए राज्य सरकार ने एसओपी जारी की है। तीन सदस्यीय पैनल प्र​क्रिया की निगरानी करेगा। सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के लिए अलग-अलग बॉक्स होंगे। 10 लोग आभूषणों को बॉक्स में रखेंगे। मजिस्ट्रेट खजाने से रोज रत्न भंडार की चाभी लेकर आएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन वापस जमा करेंगे।

अप्रैल 2024: चाबियां गुमीं, नहीं खुल सका रत्न भंडार

ओडिशा हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे। हालांकि, 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर जब 16 लोगों की टीम रत्न भंडार के चेंबर तक पहुंची तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि ये दावा किया गया कि रत्न भंडार की चाबी खो गई है।

चाबी नहीं मिली तो हंगामा हुआ जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच कमेटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया और चाबी का कुछ पता नहीं चल सका।

2018 में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में बताया था कि रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं। इनमें कीमती पत्थर लगे हैं। साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं। पिछले साल अगस्त में जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि रत्न भंडार 2024 की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान खोला जाए।

जुलाई 2024: जगन्नाथ मंदिर में 46 साल बाद खजाना निकला

18 जुलाई को ओडिशा के पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार में रखा खजाना निकाला गया था। इस काम के लिए राज्य सरकार की तरफ से गठित हाई कमेटी के 11 सदस्य गुरुवार सुबह 9:15 बजे भीतरी भंडार के अंदर गए थे।

उन्हें यहां मोटे कांच की तीन और लोहे की एक (6.50 फुट ऊंची, 4 फुट चौड़ी) अलमारियां मिलीं थीं। इसके अलावा 3 फीट ऊंचे और 4 फीट चौड़े लकड़ी के दो संदूक और एक लोहे का संदूक था। सभी के अंदर कई सारे बॉक्स रखे हुए थे, जिनमें सोना था।

टीम के एक सदस्य ने एक बॉक्स को खोलकर देखा गया था। इसके बाद अलमारी और संदूकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो इतने भारी थे कि जगह से हिले तक नहीं। फिर तय हुआ कि सभी बॉक्स से खजाने को निकालकर महाप्रभु के शयन कक्ष में शिफ्ट किया जाए। टीम को इस काम को करने में 7 घंटे लग गए थे। पूरी खबर पढ़ें…

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तस्वीर 14 जुलाई 2024 की है। हाईकोर्ट के आदेश पर रत्न भंडार खोलने से पहले लकड़ी के 6 बड़े-बड़े संदूक लाए गए। बाहरी रत्न भंडार से निकले आभूषण इन्हीं में रखे गए हैं।

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित गिनती और लिस्ट बनाने की प्र​क्रिया आखिर शुरू होने जा रही है। ओडिशा सरकार ने 25 मार्च को दोपहर 12.12 बजे से 1.45 बजे का शुभ मुहूर्त तय किया है।

‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का खजाना है। 1978 की गिनती के अनुसार, यहां 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी के आभूषण हैं। ये गिनती 72 दिन चली थी।

रत्न भंडार काउंटिंग की पूरी प्र​क्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त करने पर सहमति जताई है, जबकि राष्ट्रीयकृत बैंक पंजीकृत सुनार उपलब्ध कराएंगे।

मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस बार गि​नती कितने दिन चलेगी, यह कहना जल्दबाजी होगा। राज्य सरकार दो रत्नविज्ञानी भी उपलब्ध कराएगी, जो आभूषणों में लगे बेशकीमती रत्नों की पहचान करेंगे। बाहरी रत्न भंडार में भगवान के दैनिक उपयोग के आभूषण रखे जाते हैं।

खजाने से रोज चाबी लाएंगे मजिस्ट्रेट, उसी दिन जमा भी करनी होगी

गहनों की गिनती के लिए राज्य सरकार ने एसओपी जारी की है। तीन सदस्यीय पैनल प्र​क्रिया की निगरानी करेगा। सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के लिए अलग-अलग बॉक्स होंगे। 10 लोग आभूषणों को बॉक्स में रखेंगे। मजिस्ट्रेट खजाने से रोज रत्न भंडार की चाभी लेकर आएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन वापस जमा करेंगे।

अप्रैल 2024: चाबियां गुमीं, नहीं खुल सका रत्न भंडार

ओडिशा हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे। हालांकि, 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर जब 16 लोगों की टीम रत्न भंडार के चेंबर तक पहुंची तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि ये दावा किया गया कि रत्न भंडार की चाबी खो गई है।

चाबी नहीं मिली तो हंगामा हुआ जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच कमेटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया और चाबी का कुछ पता नहीं चल सका।

2018 में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में बताया था कि रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं। इनमें कीमती पत्थर लगे हैं। साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं। पिछले साल अगस्त में जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि रत्न भंडार 2024 की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान खोला जाए।

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