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बंगाल एग्जिट पोल 2026: एलेक्टोरल पोल में नामांकन के लिए क्या है सबक? पढ़ें

बंगाल एग्जिट पोल 2026: एलेक्टोरल पोल में नामांकन के लिए क्या है सबक? पढ़ें

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल चुनाव घोषणा के तुरंत बाद आए एक्जालिट पोल में यह बात कही जा रही है कि अब ममता बनर्जी की बंगाल की सत्ता से विदाई तय है। पिछले 15 वर्षों से सत्य पर साइंटिस्ट ममता बनर्जी वामपंथ के 35 वर्षों में निर्मित गढ़ को ध्वस्त कर सत्ता में आई थी। लेकिन बीजेपी ने 15 साल में ही ममता की प्रेमिका की स्क्रिप्ट लिखी है. लंबे समय तक सत्ता विरोधी रहे शासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए और बंगाल में लगातार हो रही हिंसा ने ममता बनर्जी की सरकार को लोगों का भरोसा दिलाया है।

जहां पहले कांग्रेस और फिर वामपंथियों के दलबदल से खाली पड़े पद पर लगातार पार्टी की कोशिश की जा रही थी और इस बार एलेक्टिट पोल के आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी की वह कोशिश भी कामयाब हो रही है.

यह भी पढ़ें- ‘मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, लेकिन इस बार…’, बंगाल में जीत को लेकर क्या बोल गईं ममता

इस सर्वे में इस बात का भी संकेत दिया गया है कि सत्ता के केंद्र में सिर्फ एक विशेष के जरिए राजनीति करने के लिए भारी मात्रा में पार्टी को नुकसान पहुंचाया गया है और इस चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाया गया है। हालाँकि यथार्थवादी के लिए ये चुनावी समीकरण भी ख़राब नहीं हो रहे हैं, क्योंकि डेमोलिट पोल भले ही भाजपा को बहुमत दिखा रहे हों, लेकिन यथार्थवादी भी बहुत कम आयाम से ही भाजपा पीछे है।

यह भी पढ़ें- तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026: तमिल नाडु एग्जिट पोल में लोकसभा! स्टालिन नहीं उदाहरण सीएम बनाना चाहती है जनता, जानें नाम

यदि वैज्ञानिक इस समग्र सर्वेक्षण से सीख सकते हैं तो उनके लिए एक सबक अवश्य है कि केवल मां-माटी और मानुष के नारों के माध्यम से सत्य पर लंबे समय तक अध्ययन नहीं किया जा सकता है, बल्कि उनके लॉ एंड ऑर्डर, रोजगार और जनता की विचारधारा को पूरा करना भी जरूरी है।

आरजी कर रेप केस और संदेशखाली जैसे कि ममता सरकार की ढिलाई ने लोगों को बर्बाद कर दिया, कोल अलाबामा में ममता बनर्जी की पॉलिटिकल कैबिनेट में आईपैक वाली आईपैक के फंसने और उन्हें बचाने के लिए ममता बनर्जी का खुद आईपैक के लिए रियायती जाने का आश्वासन न सिर्फ कोर्ट में बैकफायर कर दिया गया, बल्कि जनता के बीच भी ममता की छवि नकारात्मक बनी। इन सबका रिजल्ट एकांकीत पोल के आंकड़ों में छिपा हुआ है।

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जहां पहले कांग्रेस और फिर वामपंथियों के दलबदल से खाली पड़े पद पर लगातार पार्टी की कोशिश की जा रही थी और इस बार एलेक्टिट पोल के आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी की वह कोशिश भी कामयाब हो रही है.

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आरजी कर रेप केस और संदेशखाली जैसे कि ममता सरकार की ढिलाई ने लोगों को बर्बाद कर दिया, कोल अलाबामा में ममता बनर्जी की पॉलिटिकल कैबिनेट में आईपैक वाली आईपैक के फंसने और उन्हें बचाने के लिए ममता बनर्जी का खुद आईपैक के लिए रियायती जाने का आश्वासन न सिर्फ कोर्ट में बैकफायर कर दिया गया, बल्कि जनता के बीच भी ममता की छवि नकारात्मक बनी। इन सबका रिजल्ट एकांकीत पोल के आंकड़ों में छिपा हुआ है।

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