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निमाड़ में गणगौर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में:14 मार्च से जवारे बोए जाएंगे, 22 को माता की होगी विदाई

निमाड़ में गणगौर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में:14 मार्च से जवारे बोए जाएंगे, 22 को माता की होगी विदाई

बड़वानी जिले के अंजड़ नगर सहित समूचे निमाड़ अंचल में प्रमुख आस्था पर्व गणगौर को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। पर्व के आगमन से पहले ही श्रद्धालु माता के स्वागत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार करने का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। अंजड़ के कारीगर हिमांशु चौहान पिछले दो-तीन वर्षों से गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार कर रहे हैं। वे पीओपी और लकड़ी की सहायता से आकर्षक रथ बनाते हैं और उन्हें पारंपरिक ढंग से सजाते हैं। उनके द्वारा बनाए गए रथों की मांग निमाड़ के कई कस्बों और शहरों में रहती है। बड़वानी और खरगोन जिले के ठीकरी, खरगोन, सनावद सहित अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु रथ लेने पहुंचते हैं। हिमांशु चौहान ने बताया कि एक रथ की कीमत करीब 7 हजार रुपये रखी गई है। यदि कोई श्रद्धालु गणगौर माता और ईश्वर राजा के दोनों रथ एक साथ लेता है, तो उन्हें 13 हजार रुपये में उपलब्ध कराए जाते हैं। पर्व के नजदीक आते ही रथों की मांग बढ़ जाती है और कारीगर इन्हें समय पर तैयार करने में जुटे रहते हैं। गणगौर पर्व निमाड़ क्षेत्र की आस्था और परंपरा से जुड़ा एक प्रमुख त्योहार है। पूरे निमाड़ अंचल में सैकड़ों स्थानों पर गणगौर माता की मूठ स्थापित की जाती है, जहां श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष पर्व की परंपराओं के अनुसार 14 मार्च को जवारे बोए जाएंगे। इसके बाद सात दिनों तक पंडितों द्वारा माता की सेवा की जाएगी और जवारों को सींचा जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन सुबह और शाम श्रद्धालु सामूहिक रूप से माता की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 21 मार्च को बाड़ी के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस दिन भक्त रथ लेकर माता के दर्शन करने पहुंचेंगे और विधि-विधान से पूजा कर माता को अपने घर ले जाएंगे। इसी दिन रथ बौड़ाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर माता की पूजा कर जोड़े जिमाने की परंपरा का पालन करेंगे। पर्व का समापन 22 मार्च को गणगौर घाट पर माता के विसर्जन के साथ होगा।

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