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Oil Price Crosses $100 | US-Iran-Israel War; Fuel Not Expensive Govt

Oil Price Crosses $100 | US-Iran-Israel War; Fuel Not Expensive Govt

नई दिल्ली5 घंटे पहले

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अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम साढ़े तीन साल के हाई पर पहुंच गए हैं। आज यानी 9 मार्च को कारोबार के दौरान ये 25% बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। हालांकि बाद में ये थोड़ा नीचे आया और ये अब 105 डॉलर के करीब है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकला था।

क्रूड ऑयल बढ़ने की दो वजहें

1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना

क्रूड ऑयल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

2. ऑयल रिफाइनरियों पर हमले

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में, ईरान ने कतर, सऊदी अरब और कुवैत की ऑयल फैसिलिटीज पर ड्रोन हमले किए हैं।

इन हमलों के कारण इन देशों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने धमकी दी है कि वे क्षेत्र के अन्य ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाएंगे।

2 मार्च को ईरान ने ड्रोन से सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक है।

2 मार्च को ईरान ने ड्रोन से सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक है।

कच्चा तेल 10 दिन में 60% चढ़ा

ब्रेंट क्रूड आज 10% से ज्यादा चढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से 10 दिन में कच्चा तेल करीब 50% महंगा हो चुका है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग के दौरान ये 100 डॉलर के पार निकला था।

जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता है। ये 5 से 6 रुपए लीटर तक महंगा हो सकता है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त तेल है।

एक रिपोर्ट के अनुसार यह बैकअप इतना है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए तो भी देश की पूरी सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक आसानी से चल सकती है। यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी की ज्यादा चिंता नहीं है।

रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया था कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट दी जा रही है।

इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन अमेरिका भारत पर इसकी खरीद रोकने का दबाव बनाता रहा है।

पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। हालांकि, इस साल ट्रेड डील के ऐलान के बाद उन्होंने इस टैरिफ को हटा दिया । ट्रम्प ने कहा था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा।

4 साल से स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत में पिछले चार सालों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इसके उलट पाकिस्तान में पेट्रोल 55% और जर्मनी में 22% महंगा हुआ है।

घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़े

इस बीच सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा किया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रहा है। पहले यह 853 रुपए की थी।

वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है।

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क्रूड ऑयल बढ़ने की दो वजहें

1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना

क्रूड ऑयल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

2. ऑयल रिफाइनरियों पर हमले

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में, ईरान ने कतर, सऊदी अरब और कुवैत की ऑयल फैसिलिटीज पर ड्रोन हमले किए हैं।

इन हमलों के कारण इन देशों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने धमकी दी है कि वे क्षेत्र के अन्य ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाएंगे।

2 मार्च को ईरान ने ड्रोन से सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक है।

2 मार्च को ईरान ने ड्रोन से सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों में से एक है।

कच्चा तेल 10 दिन में 60% चढ़ा

ब्रेंट क्रूड आज 10% से ज्यादा चढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है। 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से 10 दिन में कच्चा तेल करीब 50% महंगा हो चुका है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग के दौरान ये 100 डॉलर के पार निकला था।

जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता है। ये 5 से 6 रुपए लीटर तक महंगा हो सकता है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त तेल है।

एक रिपोर्ट के अनुसार यह बैकअप इतना है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए तो भी देश की पूरी सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक आसानी से चल सकती है। यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी की ज्यादा चिंता नहीं है।

रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया था कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट दी जा रही है।

इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन अमेरिका भारत पर इसकी खरीद रोकने का दबाव बनाता रहा है।

पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। हालांकि, इस साल ट्रेड डील के ऐलान के बाद उन्होंने इस टैरिफ को हटा दिया । ट्रम्प ने कहा था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा।

4 साल से स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत में पिछले चार सालों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इसके उलट पाकिस्तान में पेट्रोल 55% और जर्मनी में 22% महंगा हुआ है।

घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़े

इस बीच सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा किया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रहा है। पहले यह 853 रुपए की थी।

वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है।

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