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Iran Regime Still Standing After 15 Days of War as Trump Eyes Victory Declaration

Iran Regime Still Standing After 15 Days of War as Trump Eyes Victory Declaration

वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले

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दो हफ्ते तक ईरान के खिलाफ युद्ध चलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द ही जीत का ऐलान कर सकते हैं। हालांकि आखिरी परिणाम इस बात पर भी निर्भर करेगा कि ईरान आगे क्या करता है।

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अगर ईरान लड़ाई जारी रखता है, जहाजों पर हमले करता है या जवाबी कार्रवाई करता है, तो युद्ध वास्तव में खत्म नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया गया है। उसकी कई मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं और उसके कई टॉप लीडर्स मारे जा चुके हैं।

इसके बावजूद ट्रम्प के वे बड़े राजनीतिक मकसद अब तक पूरे नहीं हुए हैं जिनकी उन्होंने कई बार बात की थी। ईरान में अभी भी पुराना शासन ही कायम है। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल के समुद्री रास्ते को बाधित करके वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान में अभी भी खेल पलटने की ताकत है।

होर्मुज स्ट्रेट के पास 11 मार्च को तेल टैंकर गुजरते हुए दिखाई दिए।

होर्मुज स्ट्रेट के पास 11 मार्च को तेल टैंकर गुजरते हुए दिखाई दिए।

अमेरिका में भी दिखने लगा जंग का असर

यह स्थिति ट्रम्प के लिए मुश्किल पैदा करती है, क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी के लोग अब उनसे युद्ध खत्म करके अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। इसी साल नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं।

युद्ध का असर अमेरिका के अंदर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इजराइल के हमले शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है। किसानों के लिए खाद महंगे हो गए हैं और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 13 पहुंच गया है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पर एक सैनिक के पार्थिव शरीर को सलामी देते हुए। सैनिक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले में मारा गया था।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पर एक सैनिक के पार्थिव शरीर को सलामी देते हुए। सैनिक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले में मारा गया था।

अकेले जंग रोककर तेल की बढ़ती कीमतें नहीं रोक सकते ट्रम्प

ईरान ने यह भी दिखाया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की क्षमता रखता है। इस वजह से यह साफ नहीं है कि अमेरिका अगर अकेले युद्ध रोक भी दे, तो क्या तेल की कीमतों में तुरंत कमी आएगी।

ईरानी हमलों ने फारस की खाड़ी के उन देशों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है जो लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे हैं और जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं।

इसके बावजूद ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि युद्ध पर उनका पूरा कंट्रोल है। उन्होंने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि युद्ध तब खत्म होगा जब उन्हें लगेगा कि अब इसे खत्म करने का समय आ गया है।

भारत आ रहे थाईलैंड के एक कार्गो शिप ‘मयूरी नारी’ पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

भारत आ रहे थाईलैंड के एक कार्गो शिप ‘मयूरी नारी’ पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

परमाणु हथियार और तेजी से बना सकता है ईरान

एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि युद्ध में जीत हासिल करना और किसी देश के खतरे को लंबे समय तक खत्म करना दो अलग-अलग बातें हैं। कुछ को यह भी डर है कि युद्ध के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में वे परमाणु हथियार बनाने की दिशा में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ने का फैसला कर सकते हैं। ईरान के पास अब भी करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक बड़ा खतरा मानते हैं।

यह यूरेनियम ईरान के लिए एक तरह की रणनीतिक ताकत भी है, जिससे वह अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच खुद को बचाने की कोशिश कर सकता है।

यह भी साफ नहीं है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार तक पहुंच सकता है या नहीं। माना जाता है कि जून में अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु ठिकानों पर गिरा मलबा इन गैस के कंटेनरों को ढक चुका है।

यह भी अनिश्चित है कि ईरानी वैज्ञानिक इस यूरेनियम गैस को किसी अस्थायी परमाणु हथियार या रेडियो एक्टिव बम में बदल सकते हैं या नहीं।

एक्सपर्ट बोले- जंग से हालात और मुश्किल हुए

मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट ब्रायन कातुलिस ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि इस युद्ध ने स्थिति को और ज्यादा मुश्किल बना दिया है।

ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौती रहा है। राष्ट्रपति जिमी कार्टर से लेकर अब तक लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके क्षेत्रीय सहयोगियों और आतंकवाद के समर्थन जैसे मुद्दों से जूझना पड़ा है।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2015 में ईरान के साथ एक परमाणु समझौता किया था, जिसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नियंत्रण लगाए गए थे। लेकिन ट्रम्प ने 2017 में सत्ता में आने के बाद इस समझौते को खत्म कर दिया था।

उस समय डेमोक्रेट नेताओं ने चेतावनी दी थी कि समझौता खत्म करने से भविष्य में ईरान के साथ युद्ध हो सकता है। हालांकि ट्रम्प के सहयोगियों ने उस आरोप को खारिज कर दिया था।

होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने से परेशानी बढ़ी

ईरान जंग की वजह से कई ऐसे खतरे भी सामने आ गए हैं जो पहले केवल आशंका माने जाते थे। सबसे बड़ा खतरा होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमले का है।

यह 21 मील चौड़ा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यहीं से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे तेल उत्पादक देशों से दुनियाभर में तेल भेजा जाता है।

जंग से पहले तक होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े खतरे को केवल एक रणनीतिक आशंका माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। एक्सपर्ट ब्रायन कातुलिस का कहना है कि अब यह खतरा पहले से कहीं ज्यादा तात्कालिक और लगातार बना हुआ है।

उनका कहना है कि अभी युद्ध की शुरुआत ही है, लेकिन इससे ईरान का शासन और ज्यादा अप्रत्याशित हो सकता है। ऐसे में वह किसी भी समय इस स्ट्रेट में जहाजों पर अचानक हमले कर सकता है।

अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने में नाकाम

व्हाइट हाउस का कहना है कि जब अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की योजना बनाई थी, तब यह भी माना गया था कि ईरान इस समुद्री रास्ते को निशाना बना सकता है।

अब जब युद्ध शुरू हो चुका है, तो अमेरिका अभी तक इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह खुला रखने में सफल नहीं हुआ है। इस वजह से अमेरिका इस युद्ध में और गहराई से खिंचता हुआ दिखाई दे रहा है।

——————————————

ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

ईरान में अभी सरकार नहीं गिरा पाएगा अमेरिका:मौजूदा लीडरशिप का जनता पर पूरा कंट्रोल; ट्रम्प जल्द ऑपरेशन खत्म कर सकते हैं

अमेरिका और इजराइल लगातार दो हफ्ते से ईरान में एयरस्ट्राइक कर रहे हैं, इसके बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है।

यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई है। इस मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी है।

एक सूत्र के मुताबिक कई खुफिया रिपोर्टों में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अभी भी देश की जनता पर कंट्रोल बनाए हुए है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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दो हफ्ते तक ईरान के खिलाफ युद्ध चलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द ही जीत का ऐलान कर सकते हैं। हालांकि आखिरी परिणाम इस बात पर भी निर्भर करेगा कि ईरान आगे क्या करता है।

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अगर ईरान लड़ाई जारी रखता है, जहाजों पर हमले करता है या जवाबी कार्रवाई करता है, तो युद्ध वास्तव में खत्म नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया गया है। उसकी कई मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं और उसके कई टॉप लीडर्स मारे जा चुके हैं।

इसके बावजूद ट्रम्प के वे बड़े राजनीतिक मकसद अब तक पूरे नहीं हुए हैं जिनकी उन्होंने कई बार बात की थी। ईरान में अभी भी पुराना शासन ही कायम है। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल के समुद्री रास्ते को बाधित करके वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान में अभी भी खेल पलटने की ताकत है।

होर्मुज स्ट्रेट के पास 11 मार्च को तेल टैंकर गुजरते हुए दिखाई दिए।

होर्मुज स्ट्रेट के पास 11 मार्च को तेल टैंकर गुजरते हुए दिखाई दिए।

अमेरिका में भी दिखने लगा जंग का असर

यह स्थिति ट्रम्प के लिए मुश्किल पैदा करती है, क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी के लोग अब उनसे युद्ध खत्म करके अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। इसी साल नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं।

युद्ध का असर अमेरिका के अंदर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इजराइल के हमले शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है। किसानों के लिए खाद महंगे हो गए हैं और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 13 पहुंच गया है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पर एक सैनिक के पार्थिव शरीर को सलामी देते हुए। सैनिक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले में मारा गया था।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पर एक सैनिक के पार्थिव शरीर को सलामी देते हुए। सैनिक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले में मारा गया था।

अकेले जंग रोककर तेल की बढ़ती कीमतें नहीं रोक सकते ट्रम्प

ईरान ने यह भी दिखाया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की क्षमता रखता है। इस वजह से यह साफ नहीं है कि अमेरिका अगर अकेले युद्ध रोक भी दे, तो क्या तेल की कीमतों में तुरंत कमी आएगी।

ईरानी हमलों ने फारस की खाड़ी के उन देशों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है जो लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे हैं और जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं।

इसके बावजूद ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि युद्ध पर उनका पूरा कंट्रोल है। उन्होंने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि युद्ध तब खत्म होगा जब उन्हें लगेगा कि अब इसे खत्म करने का समय आ गया है।

भारत आ रहे थाईलैंड के एक कार्गो शिप ‘मयूरी नारी’ पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

भारत आ रहे थाईलैंड के एक कार्गो शिप ‘मयूरी नारी’ पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

परमाणु हथियार और तेजी से बना सकता है ईरान

एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि युद्ध में जीत हासिल करना और किसी देश के खतरे को लंबे समय तक खत्म करना दो अलग-अलग बातें हैं। कुछ को यह भी डर है कि युद्ध के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में वे परमाणु हथियार बनाने की दिशा में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ने का फैसला कर सकते हैं। ईरान के पास अब भी करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक बड़ा खतरा मानते हैं।

यह यूरेनियम ईरान के लिए एक तरह की रणनीतिक ताकत भी है, जिससे वह अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच खुद को बचाने की कोशिश कर सकता है।

यह भी साफ नहीं है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार तक पहुंच सकता है या नहीं। माना जाता है कि जून में अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु ठिकानों पर गिरा मलबा इन गैस के कंटेनरों को ढक चुका है।

यह भी अनिश्चित है कि ईरानी वैज्ञानिक इस यूरेनियम गैस को किसी अस्थायी परमाणु हथियार या रेडियो एक्टिव बम में बदल सकते हैं या नहीं।

एक्सपर्ट बोले- जंग से हालात और मुश्किल हुए

मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट ब्रायन कातुलिस ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि इस युद्ध ने स्थिति को और ज्यादा मुश्किल बना दिया है।

ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौती रहा है। राष्ट्रपति जिमी कार्टर से लेकर अब तक लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके क्षेत्रीय सहयोगियों और आतंकवाद के समर्थन जैसे मुद्दों से जूझना पड़ा है।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2015 में ईरान के साथ एक परमाणु समझौता किया था, जिसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नियंत्रण लगाए गए थे। लेकिन ट्रम्प ने 2017 में सत्ता में आने के बाद इस समझौते को खत्म कर दिया था।

उस समय डेमोक्रेट नेताओं ने चेतावनी दी थी कि समझौता खत्म करने से भविष्य में ईरान के साथ युद्ध हो सकता है। हालांकि ट्रम्प के सहयोगियों ने उस आरोप को खारिज कर दिया था।

होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने से परेशानी बढ़ी

ईरान जंग की वजह से कई ऐसे खतरे भी सामने आ गए हैं जो पहले केवल आशंका माने जाते थे। सबसे बड़ा खतरा होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमले का है।

यह 21 मील चौड़ा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यहीं से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे तेल उत्पादक देशों से दुनियाभर में तेल भेजा जाता है।

जंग से पहले तक होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े खतरे को केवल एक रणनीतिक आशंका माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। एक्सपर्ट ब्रायन कातुलिस का कहना है कि अब यह खतरा पहले से कहीं ज्यादा तात्कालिक और लगातार बना हुआ है।

उनका कहना है कि अभी युद्ध की शुरुआत ही है, लेकिन इससे ईरान का शासन और ज्यादा अप्रत्याशित हो सकता है। ऐसे में वह किसी भी समय इस स्ट्रेट में जहाजों पर अचानक हमले कर सकता है।

अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने में नाकाम

व्हाइट हाउस का कहना है कि जब अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की योजना बनाई थी, तब यह भी माना गया था कि ईरान इस समुद्री रास्ते को निशाना बना सकता है।

अब जब युद्ध शुरू हो चुका है, तो अमेरिका अभी तक इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह खुला रखने में सफल नहीं हुआ है। इस वजह से अमेरिका इस युद्ध में और गहराई से खिंचता हुआ दिखाई दे रहा है।

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ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

ईरान में अभी सरकार नहीं गिरा पाएगा अमेरिका:मौजूदा लीडरशिप का जनता पर पूरा कंट्रोल; ट्रम्प जल्द ऑपरेशन खत्म कर सकते हैं

अमेरिका और इजराइल लगातार दो हफ्ते से ईरान में एयरस्ट्राइक कर रहे हैं, इसके बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है।

यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई है। इस मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी है।

एक सूत्र के मुताबिक कई खुफिया रिपोर्टों में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह अभी भी देश की जनता पर कंट्रोल बनाए हुए है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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