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America Iran war Iranians pay for bread in installments

America Iran war Iranians pay for bread in installments

तेहरान7 मिनट पहले

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ईरान की राजधानी तेहरान के एक सुपरमार्केट की तस्वीर।

मैंने मोहल्ले की दुकान से उधार राशन लिया। अगले दिन पैसा देने गया तो बिल दोगुना हो चुका था।’ तेहरान के 52 साल के सरकारी कर्मचारी मेहदी की यह बात ईरान में महंगाई की तस्वीर को बयां करती है। तेहरान, इस्फहान, अहवाज और मशहद के लोगों से बात करने पर पाया कि उनकी आवाजों में अब बमों से ज्यादा रसोई का डर दिख रहा है।

मेहदी ने बताया कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब तनख्वाह महीने के बीच में ही खत्म हो जाती है। कई इलाकों में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि लोग रोटी, राशन, और सुपरमार्केट पैकेज तक ईएमआई में खरीद रहे हैं।

इजराइल और अमेरिका के हमलों के बाद कुछ ईरानियों को लगा था कि सरकार गिर जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सरकार समर्थक हों या विरोधी, सभी युद्ध, महंगाई और अनिश्चितता से टूट रहे हैं। युद्ध के बाद से देश में कुकिंग ऑयल 430%, अंडे 345%, चावल 287% और दूध 139% तक महंगे हो गए हैं।

अब विरोधी बोले- बातचीत ही देश ​बचाने का आखिरी रास्ता

कई अब युद्ध को बदलाव का रास्ता नहीं मान रहे। वे बातचीत को देश बचाने का आखिरी साधन समझने लगे हैं। सरकार विरोधी तेहरान की 44 साल की पर्यावरण विशेषज्ञ लीदा, ने कहा कि वे बातचीत के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ईरान ने बहुत जानें गंवाईं। इंफ्रास्ट्रक्चर टूटा। युद्ध देश हित में नहीं है। विश्लेषक एली के मुताबिक यह विरोधियों के लिए कड़वा हिसाब लगाने का समय है। उन्हें मानना पड़ रहा है कि उम्मीदों के उलट यह शासन बचा रहा।

इंटरनेट लौटा तो पता चला कि घर के 12 लोग मारे जा चुके हैं

ईरान में युद्ध शुरू होते ही इंटरनेट बंद हो गया था। मई के अंत तक लोग दुनिया से भी कटे रहे और एक-दूसरे से भी। जब इंटरनेट लौटा, तो राहत नहीं आई। सोशल मीडिया पर टूटे घरों, बिछड़े परिवारों और दहशत की कहानियां उमड़ पड़ीं। इन्हीं में हामेद मिर्जाई की कहानी सबसे दर्दनाक है। उन्होंने लिखा कि मार्च में तेहरान के रेसालत स्क्वायर पर इजराइली हमला हुआ। इसमें उनकी पत्नी, माता-पिता समेत 12 लोग मारे गए। इसकी जानकारी उन्हें इंटरनेट शुरू होने के बाद मिल पाई।

ईरान की राजधानी तेहरान में एक हमले से क्षतिग्रस्त हुई एक अपार्टमेंट इमारत।

ईरान की राजधानी तेहरान में एक हमले से क्षतिग्रस्त हुई एक अपार्टमेंट इमारत।

दवाएं भी राशन की तरह दे रही हैं फार्मेसियां

  • युद्ध की मार अब ईरान के उत्पादन व इलाज तक पहुंच चुकी है। मशहद के पास मौजूद एक फैक्ट्री के मैनेजर ने बताया कि उत्पादन बंद है और कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। वजह कच्चे माल की कमी है।
  • इजराइली हमलों से पेट्रोकेमिकल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • इस्फहान के डॉक्टर ने बताया कि फार्मेसियां दवाएं राशन की तरह दे रही हैं।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों से कहा है कि वे कमी के कारण सिर्फ जरूरी दवाएं लिखें। ईरान के हीमोफीलिया एसोसिएशन के प्रमुख अमीन अफशार ने कहा कि रक्तस्राव संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों की जरूरी दवाओं का कोई रिजर्व नहीं बचा। दवाओं का आयात भी बेहद मुश्किल हो गया है।

जंग से पहले ही महंगाई से जूझ रहा है ईरान

ईरान में बढ़ती महंगाई और मुद्रा संकट के खिलाफ दिसंबर 2025 में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के चलते सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारियों और दुकानदारों ने प्रदर्शन किया था। महंगाई के खिलाफ इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे बड़े शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए।

प्रदर्शन उस वक्त तेज हुए, जब ईरान की मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी। इससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतें काफी बढ़ गईं थीं।

ईरान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में महंगाई दर 42 फीसदी से ज्यादा रही, जबकि खाने की चीजों की कीमतें 70 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी थीं।

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ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

होर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू:ईरान बोला- अब इजराइल पर हमले नहीं

होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरी खबर पढ़ें…

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मैंने मोहल्ले की दुकान से उधार राशन लिया। अगले दिन पैसा देने गया तो बिल दोगुना हो चुका था।’ तेहरान के 52 साल के सरकारी कर्मचारी मेहदी की यह बात ईरान में महंगाई की तस्वीर को बयां करती है। तेहरान, इस्फहान, अहवाज और मशहद के लोगों से बात करने पर पाया कि उनकी आवाजों में अब बमों से ज्यादा रसोई का डर दिख रहा है।

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अब विरोधी बोले- बातचीत ही देश ​बचाने का आखिरी रास्ता

कई अब युद्ध को बदलाव का रास्ता नहीं मान रहे। वे बातचीत को देश बचाने का आखिरी साधन समझने लगे हैं। सरकार विरोधी तेहरान की 44 साल की पर्यावरण विशेषज्ञ लीदा, ने कहा कि वे बातचीत के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ईरान ने बहुत जानें गंवाईं। इंफ्रास्ट्रक्चर टूटा। युद्ध देश हित में नहीं है। विश्लेषक एली के मुताबिक यह विरोधियों के लिए कड़वा हिसाब लगाने का समय है। उन्हें मानना पड़ रहा है कि उम्मीदों के उलट यह शासन बचा रहा।

इंटरनेट लौटा तो पता चला कि घर के 12 लोग मारे जा चुके हैं

ईरान में युद्ध शुरू होते ही इंटरनेट बंद हो गया था। मई के अंत तक लोग दुनिया से भी कटे रहे और एक-दूसरे से भी। जब इंटरनेट लौटा, तो राहत नहीं आई। सोशल मीडिया पर टूटे घरों, बिछड़े परिवारों और दहशत की कहानियां उमड़ पड़ीं। इन्हीं में हामेद मिर्जाई की कहानी सबसे दर्दनाक है। उन्होंने लिखा कि मार्च में तेहरान के रेसालत स्क्वायर पर इजराइली हमला हुआ। इसमें उनकी पत्नी, माता-पिता समेत 12 लोग मारे गए। इसकी जानकारी उन्हें इंटरनेट शुरू होने के बाद मिल पाई।

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ईरान की राजधानी तेहरान में एक हमले से क्षतिग्रस्त हुई एक अपार्टमेंट इमारत।

दवाएं भी राशन की तरह दे रही हैं फार्मेसियां

  • युद्ध की मार अब ईरान के उत्पादन व इलाज तक पहुंच चुकी है। मशहद के पास मौजूद एक फैक्ट्री के मैनेजर ने बताया कि उत्पादन बंद है और कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। वजह कच्चे माल की कमी है।
  • इजराइली हमलों से पेट्रोकेमिकल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • इस्फहान के डॉक्टर ने बताया कि फार्मेसियां दवाएं राशन की तरह दे रही हैं।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों से कहा है कि वे कमी के कारण सिर्फ जरूरी दवाएं लिखें। ईरान के हीमोफीलिया एसोसिएशन के प्रमुख अमीन अफशार ने कहा कि रक्तस्राव संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों की जरूरी दवाओं का कोई रिजर्व नहीं बचा। दवाओं का आयात भी बेहद मुश्किल हो गया है।

जंग से पहले ही महंगाई से जूझ रहा है ईरान

ईरान में बढ़ती महंगाई और मुद्रा संकट के खिलाफ दिसंबर 2025 में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के चलते सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारियों और दुकानदारों ने प्रदर्शन किया था। महंगाई के खिलाफ इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे बड़े शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए।

प्रदर्शन उस वक्त तेज हुए, जब ईरान की मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी। इससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतें काफी बढ़ गईं थीं।

ईरान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में महंगाई दर 42 फीसदी से ज्यादा रही, जबकि खाने की चीजों की कीमतें 70 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी थीं।

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ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

होर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू:ईरान बोला- अब इजराइल पर हमले नहीं

होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरी खबर पढ़ें…

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