Monday, 03 Aug 2026 | 09:40 AM

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विजय के सीएम बने ज्वालामुखी प्लांट? 108 विधायक का समर्थन, राज्यपाल बोले 118 लेके विद्यार्थी, क्या कहते हैं संविधान

विजय के सीएम बने ज्वालामुखी प्लांट? 108 विधायक का समर्थन, राज्यपाल बोले 118 लेके विद्यार्थी, क्या कहते हैं संविधान

तमिलनाडु सरकार का गठन: तमिलनाडु में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध गहराता जा रहा है। रेजिडेंट विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके) के पास अभी सरकार बनाने के लिए बहुमत की आवश्यकता नहीं है। विजय के पास क्या विकल्प है? 234 लेकिन रथयात्रा विधानसभा में टीवीके 108 के साथ सबसे बड़ी पार्टी उभरकर सामने आ रही है, बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़ों से वह पीछे है। कांग्रेस के 5 समर्थकों की बैठक के बावजूद पार्टी को अभी और सहयोगियों की जरूरत है। इसी कारण टीवीके ने वाम आश्रम, वीसीके और आईयू प्रोटोटाइप से समर्थन मांगा है और ये दल अगले दो दिनों में अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं। वहीं वीसीके नेता थोल थिरुमावलवन ने कहा कि उनकी पार्टी वाम विचारधारा के बाद ही यह निर्णय लिया गया। टीवीके नेता सी एरियल कुमार ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एम. वीरपांडियन और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पी. मुशनगम से मुलाकात कर समर्थन माँगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विजय से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि सत्ता में भागीदारी जरूरी है, ताकि सहयोगी दल-अपने सहयोगियों और सहयोगियों को अपने-अपने काम में लागू कर सकें। नमूना पात्र कैसे? कुमार के अनुसार, टीवीके ने वाम आश्रम, विदुथलाई चिरुथिगल काची (सीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयू प्रोटोटाइप) को ईमेल और प्रस्ताव पत्र के माध्यम से समर्थन का प्रस्ताव भेजा जाता है। वे भरोसेमंद समर्थकों की पार्टी तमिलनाडु में सरकार बनाने में सफल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीवीके ने किसी से संपर्क नहीं किया और ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं है। वहीं कांग्रेस ने, जो 5 शेयर बाजार हैं, सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की है. कुमार ने कहा कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. उनका दावा है कि प्रतिष्ठा टीवी के पक्ष में है और इसी आधार पर विजय को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए। किसको पहले अवसर मिलना चाहिए? दूसरी ओर, कांग्रेस, वामपंथियों और वीसीके ने गवर्नर पर जोरदार दावा किया है कि सबसे बड़ी पार्टी की पार्टियों को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। एम के स्टालिन बने रहने की सलाह वाली टीचर्स ने भी अपने सहयोगियों से गठबंधन की अपील की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि सरकार का गठन पूरी तरह प्रक्रियात्मक तरीके से संवैधानिक तरीकों से होगा और राज्यपाल पद का फैसला उसी के आधार पर होगा। यानी, तमिल में स्थिति स्थिर बनी हुई है। अब बिजनेसमैन इस बात पर विचार कर रहे हैं कि किस विक्ट्री के लिए समर्थन प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है या राज्य में कोई नया राजनीतिक समीकरण बना है। ये भी पढ़ें: गवर्नर ने TVK को बुलाया, थलपति ने किया दावा, लेफ्ट का साथ मिला, तमिलनाडु में क्या चल रहा था? मंदी की 5 बड़ी बातें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु के राज्यपाल(टी)विजय(टी)टीवीके सरकार गठन(टी)टीवीके समाचार(टी)टीवीके तमिलनाडु विवाद(टी)टीवीके सरकार गठन विवाद(टी)टीवीके तमिलनाडु सरकार गठन समाचार(टी)राजेंद्र आर्लेकर राज्यपाल विवेक(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वेक्षण(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026

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स्कॉर्पियों की सेट्रों कार से ओवरटेकिंग, बिना नंबर बाइक की एंट्री और धड़धड़ा हथियार... शुभेंदु पीए प्रधानमंत्री की ऐसी लिखी गई स्क्रिप्ट

स्कॉर्पियों की सेट्रों कार से ओवरटेकिंग, बिना नंबर बाइक की एंट्री और धड़धड़ा हथियार… शुभेंदु पीए प्रधानमंत्री की ऐसी लिखी गई स्क्रिप्ट

उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम की सड़कों पर रोज की तरह 6 मई की रात करीब सवा दस बजे हलचल थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह शानदार एक क्राइम सीन में बदलाव वाला था। ब्लैक स्कॉर्पियो, खून से सनी दर्शनीय स्थल और रोड पर पादरियों की गाड़ी- पुलिस स्टेशन के माने तो यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सु वैज्ञानिक ‘एग्जीक्यूशन’ का संकेत दे रही थी। मारे गए पूर्व राष्ट्रपति चंद्रनाथ रथ भाजपा नेता और सेंचुरी के नए सिरमौर के प्रबल दावेदार शुभेंदु अधिकारी के अत्यंत करीबी सहयोगी और निजी सहायक थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में साफ कहा गया है कि यह हत्या नहीं, ‘ऑपरेशन’ था। पीछा शुरू हुआ शहर से, अंजाम घर के पास अध्ययन शास्त्र के अनुसार, चंद्रनाथ रथ की गाड़ी कोलकाता से ही ट्रैक की जा रही थी। सीसीटीवी फुटेज में एक सिल्वर कलर की सैंट्रो कार (WB74AX2270) और एक मोटरसाइकिल कॉन्स्टेंट के पीछे उनकी स्कार्पियो दिखाई दे रही है। जैसे ही गाड़ी मध्यमग्राम के दोहाड़िया इलाके में दक्षिणी घर से 100 मीटर दूर का खेल शुरू हो गया था। सैंट्रो कार ने ओवरटेक कार स्कॉर्पियो को मॉडल स्लो किया। अगले ही पल बिना नंबर प्लेट वाली बाइक पास आई और फिर शुरू हुई बारिश की बारिश। 10 से अधिक गोल आग, छाती-सर पर फ़्लोरिडा प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एलिजाबेथ ने सीधे हथियार के पास से उड़ान भरी थी। पुलिस के मुताबिक कम से कम 10 गोलियां चलाईं। हालाँकि यह संख्या बहुत अधिक भी हो सकती है. चंद्रनाथ रथ को घोड़े, पेट और सिर में स्टॉक स्टॉक। उनके संगीत पर ही गंभीर संकट आ गया। संयुक्त उद्यम में सहयोगी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वो दम तोड़ चुके थे। अस्पताल के वकीलों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनका ड्राइवर बुद्धदेव बेड़ा भी शूटिंग में घायल हो गया और अभी भी कोलकाता के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। रेकी से एस्केप रूट तक पूरी तरह से पुलिस का कहना है कि राठौड़ ने पहले इलाके की रेकी रोज की, चंद्रनाथ रथ केना के रूट और टाइमिंग को समझाया और फिर पूरी तरह से काम किया। वसीयत के बाद बाइक सवार दो दिशाओं में बरात हो गए। एक जेसोर रोड की ओर और दूसरा किंगरहॉट का सबसे बड़ा निर्माण कार्य निकल गया। जिस स्कार्पियो कार को छोड़ा गया था, उसे मशीन पर छोड़ दिया गया था। पुलिस ने गाड़ी को कब्जे में लेकर जांच की, जिसमें सामने आया कि कार का नंबर प्लेट फर्जी था, जबकि असली मालिक सिलीगुड़ी का एक व्यक्ति है, जिसने गाड़ी के लिए अपनी तस्वीरें ऑनलाइन डाली थीं। ग्लॉक नोट का शक ‘प्रोफ़ेशनल हिट’ का संकट फ़ोरेंसिक टीम को मशीन से खोखे, जिंदा कार्ट्रिज और कलाकृतियों के निशान मिले हैं। आरंभिक जांच में शक है कि ग्रैब्स ने ऑस्ट्रियन ग्लॉक जैसे आधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया था। एक वयोवृद्ध अधिकारी का कहना है, “ऐसे हथियार आम बाजारों के पास नहीं होते। इससे पेशेवर फिल्मों की हानि और मजबूती होती है।” सीसीटीवी में कैद हर निकल गया, लेकिन डाकू चोर पुलिस अब जेसोर रोड और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। कई अभिलेख बनाए गए हैं और तीन स्थानीय क्लिज़ोरिज़ोन से पूछताछ हो रही है। अतुल सिद्ध नाथ गुप्ता ने बताया, “एक ग़रीब गाड़ी को ज़ब्त कर लिया गया है। नंबर प्लेट से चोरी की गई थी। कई सीसीटीवी फुटेज की जांच हो रही है।” फिर भी, मुख्य व्यापारी अभी भी बच्चा है और यही जांच की सबसे बड़ी चुनौती है। यथार्थ की शुरूआत: आरोप-प्रत्यारोप तेज इस हत्या ने राजनीतिक पारा भी बढ़ाया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे प्री-प्लांड म्युचुअल और व्यक्तिगत क्षति का वर्णन किया और सोशियलिटी से शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “अभिषेक बनर्जी ने इस हत्या की साजिश रची है… वे संदेश देना चाहते हैं कि सत्य में कोई अस्तित्व नहीं है और वे इसकी साजिश रच रहे हैं।” दूसरी तरफ कैथोलिक कांग्रेस ने इन वामपंथियों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है और मामले की अदालत में जांच की मांग की जा रही है। जांच के सामने बड़ा सवाल मध्यमग्राम के इस विश्वविद्यालय में शिलालेखों के सामने कई अभिलेख वाले प्रश्न दिए गए हैं। सबसे पहला सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्वियों का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? जिस तरह के दस्तावेज़ों को ट्रैक किया गया था, रास्ता निकाला गया और उत्खनन से उत्खनन किया गया, वह सामान्य अपराध की तरह नहीं दिखता है। दूसरा अहम किरदार- क्या इस हमले में प्रोफेशनल स्टूडियो शामिल थे? प्रारंभिक संकेत हथियार और हमलों का साधन किसी भी शिक्षण नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। सबसे बड़ा सवाल- चंद्रनाथ रथ को सबसे पहले क्या कहा जा रहा था? अगर हां तो क्या सुरक्षा में कोई खराबी हुई? यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है, बल्कि एक सु नियोजित ऑपरेशन जैसा है, जहां टाइमिंग, कॉमेडी और एस्केप सब कुछ हासिल था। अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ चौथे को गोली मारने की नहीं, बल्कि उस मकसद की झलक सामने आई है, जिसने इस हत्या को अंजाम तक पहुंचाया। क्योंकि समय अभी सत्ता के स्थानांतरण का है, राजनीतिक आरोप सत्ता से बेदख़ल पार्टी पर लग रहे हैं और जो सत्ता में आ रहा है, वो पीड़ित है। ये भी पढ़ें: ‘धार्मिक रीति-रिवाजों पर सवाल उठे तो धर्म और संप्रदायों का विभाजन…’, सबरीमाला मंदिर मामले पर सुनवाई में क्या बोला SC? (टैग्सटूट्रांसलेट)सुवेंदु अधिकारी(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल का अगला सीएम 2026(टी)सुवेंदु अधिकारी पीए मर्डर(टी)सुवेंदु अधिकारी पीए मर्डर केस(टी)सुवेंदु पीए मर्डर सुवेंदु अधिकारी पीए मर्डर ताजा खबर(टी)शुभेंदु अधिकारी(टी)शुभेंदु अधिकारी पीए मार्जिन(टी)शुभेंदु अधिकारी पी.ए. केस(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026

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'टीवीके को सरकार के लिए न बुलाया जाए, नामांकन का अपमान', डीएमके-एमएनएम और वीसीके की जीत पर राज्यपाल की शर्त

‘टीवीके को सरकार के लिए न बुलाया जाए, नामांकन का अपमान’, डीएमके-एमएनएम और वीसीके की जीत पर राज्यपाल की शर्त

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित गवर्नर के नियम स्कूलके पर, एमएनएम ने गेमप्ले की कड़ी देखी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भी राज्य में अब तक नई सरकार के गठन को लेकर घमाघामी बनी हुई है। राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर की तरफ से थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) को 108 पर जीत हासिल करने के बावजूद सरकार गठन करने की अनुमति न देने से इनकार कर दिया गया है। इस बीच तमिल की पूर्व सुपरमार्केट पार्टी के शिक्षकों में कमल हासन की एमएनएम, वीसीके और सी वीके जैसी कंपनी ने एकजुट होकर विक्ट्री और टीवीके का समर्थन किया है। तमिल के राजनीतिक वृत्तचित्र ने गवर्नर की ओर से विजय प्राप्त करने के लिए सरकार बनाने के लिए आमंत्रण जारी किया और उस पर प्रतिबंध का आरोप लगाया है। त्रिपुरा, विधानसभा चुनाव में विजय की तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) 108 पर जीत हासिल कर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी उभरी। हालाँकि, तमिल विधानसभा में बहुमत का पात्र 118 का है। ऐसे में विजय के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 में से 10 पद कम हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के समर्थन के बाद अब टीवी के पास कुल 113 सदस्य हैं, हालांकि अभी भी बहुमत से 5 पद कम हैं। जिसके बाद तमिलनाडु के गवर्नर विश्वनाथन अर्लेकर ने सबसे पहले बहुमत को स्पष्ट करने के लिए विजय प्राप्त की। विजय के समर्थकों ने क्या कहा? राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर ने गुरुवार (7 मई, 2026) को टीवी के विजय प्रमुखों से मुलाकात के दौरान कहा कि वे सरकार पहले अपना बहुमत साबित करें। जबकि विजय और उनके अन्य समर्थकों का कहना है कि संविधान के अनुसार उन्हें (राज्यपाल को) पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जानी चाहिए और बाद में विधानसभा में फ्लोर टेस्ट बनाया जाना चाहिए। वहीं, एमएनएम प्रमुख और अभिनेता कमल हासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि विजय को सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाया जाएगा, जनता का उत्साह बढ़ेगा। उन्होंने कहा, ‘तमिलनाडु के लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए।’ टीवीके की सबसे बड़ी पार्टी उभरकर सामने आई है। ऐसे में विजय को आमंत्रित करना लोकतंत्र को नष्ट करने जैसा होगा।’ वे शिक्षक के नेता एमके स्टालिन की भी डॉक्टर की, अर्थशास्त्री में बैठने की बात कही। यह भी पढ़ें: ‘विजय तभी ले जाएगी शपथ जब…’, तमिल के गवर्नर ने टीवीके प्रमुख के सामने रखी ये शर्त वीसीके और सी बिजनेस ने भी दिया समर्थन वीसीके प्रमुख थोलोलमवलवन ने कहा कि गवर्नर की यह मांग पूरी तरह से अस्वीकृत है। उनकी तरफ से विधानसभा में विजय प्राप्त करने के लिए बहुमत साबित करने का मौका मिलना चाहिए, न कि पहले से नंबर साबित करने की शर्त रखना चाहिए। जबकि सी.ई.वी. के.टी.एम. सचिव एम. वीरपांडियन ने यह भी कहा कि चूंकि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और टीवीके सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए संवैधानिक परंपरा के विजय को सबसे पहले सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। राज्यपाल की विचारधारा पर शिक्षकों ने क्या कहा? शिक्षक नेता ए. सरवनन ने कहा कि जब कोई प्री-पोल गठबंधन बहुमत में नहीं होता है, तब सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का पहला मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी दल ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है, जबकि टीवीके ने 113 दावे का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा है। बीजेपी ने मामले पर क्या दी प्रतिक्रिया? वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता नारायणन आश्रम ने कहा कि टीवीके के पास बहुमत है. यदि विजय बहुमत सिद्ध कर देते हैं, तो राज्यपाल उसे स्वीकार कर लेंगे। जो संवैधानिक के अनुसार होगा, वही किया जाएगा। यह भी पढ़ें: ‘राज्यपाल बीजेपी के एजेंट, विजय को बुलाओ’, तमिलनाडु में गवर्नर ने टीवीके प्रमुख को लौटाया तो भड़के कपिल सिब्बल

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शुभेंदु अधिकारी के पी.ए. को मारने के पीछे क्या कारण था? बीजेपी नेताओं का बड़ा खुलासा

शुभेंदु अधिकारी के पी.ए. को मारने के पीछे क्या कारण था? बीजेपी नेताओं का बड़ा खुलासा

पश्चिम बंगाल समाचार अपडेट: पश्चिम बंगाल में रविवार को हुई तबाही ने देश की राजनीति में काला अध्याय जोड़ दिया है। भाजपा के नेता और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ के अज्ञात लोगों ने गोली मार दी। यह वैश्वीकरण और सत्ता परिवर्तन के दो दिन बाद हुई है। अब इस पर सामने बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी का बयान आया है. शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि शुभेंदु का करीबी होने की वजह से यह हुआ है. क्योंकि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया था। हत्या के पीछे यही कारण हो सकता है. चन्द्रनाथ की बॉडी से चार मूर्तियाँ निकलीं। उनका कई रहस्योद्घाटन किया गया है। हत्या करने वाला खूनी है. अपराधी है. जैसे यूपी में सड़कें बदली हैं, बिहार में भी बदली हैं। इसी तरह यहां भी दरवाजों को बदला जाएगा। पूरी तरह से कैसे हुई है घटना देर रात की है. जब बंगाल सेसेक्सुअल खबर वाली. यहां शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा है। घटना नाथ 24 परगना जिले के मध्यमग्राम के डोहरिया मोड़ पर हुई। उस समय चंद्रनाथ रथ अपनी गाड़ी में मौजूद थे। अपने घर के पास ही थे. हमलावर बाइक पर सवार होकर आये थे। उन्होंने पहले अपनी गाड़ी रोकवाई और फिर एक के बाद एक तीन राउंड गोलियाँ चलाईं। गोली सीधे उनके सीने में मारी गयी। इससे उनकी मशीन पर ही मृत्यु हो गई। घटना के वक्त गाड़ी में एक शख्स और थे, जो इस दौरान घायल हो गए। इस मामले में पुलिस जांच में पूछताछ हुई है। जांच का फोकस एक सिल्वर कलर की गाड़ी है। इसी से चन्द्रनाथ रथ की गाड़ी निकली थी। यह रात 10 बजे 20 मिनट पर चंद्रनाथ की गाड़ी उनके घर की गली की तरफ मुड़ी हुई थी। घर से 100 मीटर लंबी इस सिल्वर कलर की गाड़ी (WB 74 AK 2270) पर सवार ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी सामने रखी थी। इससे चंद्रनाथ रथ की गाड़ी रुक गई। माउके का फ़ायदाद ऑर्केस्ट्रा ने आक्रमण कर दिया। ये भी पढ़ें: बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद शुभेंदु अधिकारी के पीए की गोली मारकर हत्या, टीएमसी का पहला बयान, जानिए क्या कहा? (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)चंद्रनाथ रथ(टी)सुवेंदु अधिकारी मर्डर केस(टी)सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में पीए मर्डर पर प्रतिक्रिया(टी)कोलकाता समाचार(टी)ट्रेंडिंग न्यू(टी)हिंदी समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बीजेपी और नरेंद्र मोदी रथ(टी)सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया(टी)कोलकाता समाचार(टी)ट्रेंडिंग न्यू(टी)हिंदी समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव

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“मोदी का नाम लेकर सीएम मांगिए!” केरल में कांग्रेस के प्रमुख भूचाल, श्रीशेषन की नियुक्ति से नामांकन

“मोदी का नाम लेकर सीएम मांगिए!” केरल में कांग्रेस के प्रमुख भूचाल, श्रीशेषन की नियुक्ति से नामांकन

केरल में प्रचंड सरकार के गठन के बाद कांग्रेस के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं वी डी शेशन अब अपने एक बयान को लेकर धरने पर बैठे हैं और यह बयान सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ से आया है। एक मीडिया हाउस को दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि “प्रशासनिक अनुभव की कोई संभावना नहीं है। वी एस अच्युतानंद के पास क्या अनुभव था? जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने, तब उनके पास क्या अनुभव था? वह एक पार्टी ऑर्गनाइजेशन के समर्थक थे, वरिष्ठ सांसद भी नहीं थे।” यानि कि सिद्धार्थन ने अपने पक्ष में तर्क देते हुए मोदी के उदाहरण का सहारा लिया। लेकिन यही दांव अब उनके लिए साइंटिस्ट वैक्टिव दिख रहे हैं। “मोदी का उदाहरण बड़ा रेड टैग”-सोशल मीडिया पर विरोध शृष्णिण की इस टिप्पणी को लेकर पार्टी के अंदर और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई दावों का मानना ​​है कि स्टालिनवादी राजनीतिक तानाशाही में मोदी की प्रशंसा करना और उन्हें अपनी दावेदारी के लिए इस्तेमाल करना “बड़ा रेड टैग” करना है। केरल कांग्रेस के नेता वीडी सतीसन मोदी की तारीफ कर रहे हैं और उनके उदाहरण का इस्तेमाल कर केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं. यह मेरे लिए एक बड़ा ख़तरा है, खासकर उस समय के लिए जब हम जी रहे हैं। https://t.co/DlXqw82p1M – रोशन राय (@RoशनKrRaii) 6 मई 2026 यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस आलाकमान केरल में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मंथन कर रही है. यानी, एक कथन ने ऑब्जेक्टिव गुणांकों को और जटिल बना दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस के नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए तो कुछ और भी वीडियो वॉयरल हो रही है। कांग्रेस नेता वीडी सतीसन का एक वीडियो भाषण है। यहां पर वो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की क्षमता की सराहना कर रहे हैं? यह व्यक्तिगत राय क्या है या पार्टी की सोच क्या है? और जब दूसरी तरफ राहुल गांधी… pic.twitter.com/pXVvYtXrpc – प्रो.अंलाहली (نور) (@ProfNoorul) 6 मई 2026 “सीएम नहीं तो मंत्री भी नहीं”- श्रीशन का कड़ा रुख इस पूरी घटना के बीच श्रीशचन के रुख को लेकर भी खबरें सामने आई हैं. ब्रांड की माने तो बताया जा रहा है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे आकार का हिस्सा नहीं बनेंगे और सिर्फ अध्यक्ष बने रहेंगे। श्रीशन और उनके समर्थक सख्त रुख अख्तियार किये हुए हैं और सीएलपी की बैठक के बाद नकली समय के अनुरूप बात भी नहीं की। #घड़ी | तिरुवनंतपुरम, केरलम | कांग्रेस के निर्वाचित विधायक वीडी सतीसन केपीसीसी कार्यालय से निकले। केरलम के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों के साथ सीएलपी की बैठक चल रही है और प्रत्येक विधायक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की जा रही है pic.twitter.com/5JCW0CqpVV – एएनआई (@ANI) 7 मई 2026 यह संकेत साफ करता है कि श्रीशेषन अब अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना रहे हैं-जो पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं। इस बीच “राहुल गांधी, वीडियो श्रीशेषन को मुख्यमंत्री बनाओ” संदेश सोशल मीडिया पर 1 लाख से अधिक कमेंट्स के साथ, वीडियो श्रीशेषन के समर्थन में समर्थक सोशल मीडिया रैली कर रहे हैं। 102 की जीत, लेकिन श्रेष्ठतम 140 केरला खण्ड में यू.एस. फ़्लिक ने 102 रेज़्यूमे में प्रवेश किया, जबकि एल 35 फ़्रांसीसी खण्डों में प्रवेश किया। यह कांग्रेस की जीत के लिए वापसी का बड़ा मौका लेकर आया है। परावूर सीट से भारी अंतर से मरने वाले अभिषेकन को इस जीत का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। उनके दावे का तर्क है कि 2021 की हार के बाद श्रीशेषन ने ही संगठन को खड़ा किया और पार्टी को सत्ता तक कायम रखा, समाजवादी मुख्यमंत्री पद पर उनका दावा सबसे मजबूत है। सीएलपी बैठक और अलकमान की भूमिका केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (KPCC) की नवीनीकृत CLP बैठक में सभी पार्टियों से व्यक्तिगत राय ली गई। इस प्रक्रिया के तहत पार्टी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने नेताओं से मुलाकात की। ओमन चंदी के बेटे और विधायक चंदी ओमन ने सार्वजनिक रूप से किसी के नाम का समर्थन करते हुए बचते हुए कहा, “मैं पार्टी नेतृत्व को अपनी बात बताना चाहता हूं। मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहना चाहता। नेतृत्व पर सही समय पर निर्णय लेना चाहता हूं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कांग्रेस का एक तय एसओपी है। हम जनता द्वारा चुने गए नेता हैं। हमने अपनी राय दी है और पार्टी एक ही आधार पर सही निर्णय लेगी।” अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस के आलाकमान इस पूरे विवाद को कैसे संभालेंगे. एक तरफा अभिषेक का मजबूत दावा और दूसरी तरफ का दबाव, दूसरी तरफ उपजा विवाद- दोनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। यह सिर्फ नेतृत्व चयन का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के पक्षधर संदेश और राजनीतिक लाइन से भी टकराव हुआ है। यदि श्रीशेषन को नियुक्त किया जाता है, तो असंतोष का खतरा है। अगर उन्हें चुना जाता है, तो उनके बयान पर उठाए गए सवालों का जवाब देना होगा। यह भी पढ़ें: ‘विजय तभी ले जाएगी शपथ जब…’, तमिल के गवर्नर ने टीवीके प्रमुख के सामने रखी ये शर्त (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल सीएम रेस 2026(टी)वीडी सतीसन विवाद(टी)कांग्रेस नेतृत्व संकट(टी)केरल राजनीति समाचार(टी)केरल सीएम रेस कांग्रेस(टी)वीडी सतीसन बयान मोदी विवाद(टी)केरल चुनाव 2026 यूडीएफ जीत(टी)कांग्रेस नेतृत्व निर्णय केरल(टी)केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्निथला सीएम रेस(टी)केपीसीसी सीएलपी बैठक समाचार(टी)केरल राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राहुल गांधी सीएम निर्णय केरल(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष भारत(टी)केरल सरकार गठन समाचार(टी)केरल सीएम(टी)वीडी शृंखला विवाद(टी)कांग्रेस नेतृत्व संकट(टी)केरल राजनीति समाचार(टी)वीडी शशिसन का बयान मोदी विवाद(टी)केरल चुनाव 2026 यूडीएफ की जीत(टी)केरल में कांग्रेस नेतृत्व का फैसला(टी)केसी वेणुगोपाल चेन्निथला सीएम की दौड़(टी)केपीसीसी सीएलपी बैठक समाचार(टी)केरल के राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राहुल गांधी का केरल सीएम पर निर्णय

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बीजेपी ने बनाई 5 प्राचीन भाषा में लिखी 'ममता के बेदखली' की कहानी! किन 5 प्लास्टर पर फेल टीएमसी, सुवेंदु अधिकारी ने कैसे उखाड़ी असली सत्ता?

बीजेपी ने बनाई 5 प्राचीन भाषा में लिखी ‘ममता के बेदखली’ की कहानी! किन 5 प्लास्टर पर फेल टीएमसी, सुवेंदु अधिकारी ने कैसे उखाड़ी असली सत्ता?

पश्चिम बंगाल की राजनीति 2026 में एक बड़ा भूचाल आया, जिसने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी के 15 साल पुराने किले को ढहा दिया। एक ऐसे नेता जो कभी अपने दम पर वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को उखाड़ फेंकते थे। आज उनकी पार्टी मोरचा 80 पार्टी की पार्टी बनी और वे खुद अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव हार गये। यह अचानक नहीं हुआ, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में कई भयानक घटनाएं हुईं और गहरी शासन विफलताओं का नतीजा निकला, ममता बनर्जी की मजबूत पकड़ को खत्म कर दिया गया। 1. महिला सुरक्षा एवं आर.जी. कर कांड: वोट बैंक में बड़ा संदेश ममता बनर्जी की नामांकित सूची का एक बड़ा आधार हमेशा के लिए महिला नाम रखने वाली थीं, जिनमें ‘लक्ष्मीर भंडार’ जैसी सूची में शामिल आवास शामिल थे। लेकिन आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या कांड ने इस पूरे स्कूल को बर्बाद कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा की, बल्कि एक बड़े जनाक्रोश को जन्म दिया। नागरिक समाज ने लैंडिंग पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। इस घटना ने ममता सरकार के लिए महिलाओं के बीच एक विश्वास का संकट खड़ा कर दिया। अविश्वास संकेत मिला कि महिलाओं की मताधिकार पात्रता से हटकर अब आपकी सुरक्षा पर ध्यान दिया गया था। 2. कारीगरों के कई घोटाले: पार्टी और सरकार के सिस्टम पर सवाल ममता बनर्जी के 15 साल के शासनकाल में कलाकारों के तीन आरोप लगे कि यह उनकी सरकार की ‘पहचान’ बन गई, जिसे ममता बनर्जी ने ‘भ्रष्टाचार उद्योग’ का नाम दे दिया। शुरूआती दौर में सारदा चिट फंड घोटालेबाज और नारदा स्टिंग ऑपरेशन ने अपनी छवि को झटका दिया, लेकिन इसके बाद शिक्षक भर्ती घोटाला (एस.एस.सी. घोटाला) सामने आया। इस फैकल्टी ने हजारों पढ़े-लिखे युवाओं के सपनों को तोड़ दिया, इनमें से एक को मिलाकर पास करने के बाद भी बचपन नहीं मिला। सरेआम की थोक वसूली से यह बात घर-घर तक पहुंच गई कि थोक बिक्री हो रही है। इसके अलावा, राशन वितरण गोदाम, नगरपालिका भर्ती गोदाम, कोयला और कारखाने के सामानों को एक प्रणाली के रूप में स्थापित किया गया। पार्टी के कई बड़े नेताओं और विधायकों के समर्थकों ने आम जनता में यह धारणा पक्की कर दी है कि सरकार पूरी तरह से नष्ट हो गयी है. 3. ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण के आरोप: सामाजिक ताने-बाने में दरार ममता बनर्जी की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण पर केंद्रित है, लेकिन धीरे-धीरे इसे ‘तुष्टिकरण’ के रूप में देखा जाने लगा। 2019 में उन्होंने बयान देते हुए कहा था कि ‘वे ‘उस गाय की कॉकटेल खाने को तैयार कर रहे हैं जो दूध वाले हैं’, उन्होंने आग में घी का काम किया और बीजेपी ने इसे बहुत अलग तरीके से पेश किया। इसके बाद आसनसोल, मालदा, मुर्शिदाबाद और बशीरहाट जैसे अपवित्र में हुई सांप्रदायिक हिंसा और संदेशखाली जैसी घटनाओं ने हिंदू बहुल एशिया में इस धारणा को और मजबूत किया कि प्रशासन सिर्फ एक तरफा कार्रवाई करता है। 2026 में ममता बनर्जी ने कहा था कि उनकी सरकार के बिना एक समुदाय ‘कुछ ही सेकंड में’ बहुसंख्यकों को खत्म कर सकता है। इस बयान ने स्थिति को और आकर्षक बना दिया। नतीजा बहुसांख्यिक सीट का भारी ध्रुवीकरण हुआ और टीएमसी के लिए मुस्लिम सीट में भी दरार आई। 4. शासन की विफलता और पलायन: दर्शनशास्त्र पर खरी नहीं उतरी सरकार विकास के वादे पर ममता सरकार पूरी तरह से विफल रही। राज्य में आम लोगों की कमी और ‘सिंडिकेट राज’ (बाहुबलियों और स्थानीय गुंडों का शासन) के बड़े पैमाने पर साम्राज्य ने बंगाल से दूरी बना ली। इससे रोजगार के अवसर कम हुए और कुशल युवाओं की संख्या राज्य से बाहर बढ़ी। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की समरूप स्थिति ने मध्यम वर्ग में जन्म लिया, जिसका प्रभाव साक्षात दर्शन को मिला। खासतौर पर कोलकाता की वेबसाइट पर जहां बीजेपी ने सफाया कर दिया। इसके अलावा, लगातार 15 संतों की सत्ता से उपजी एंटी-इंकंबेंसी ने जनता की विचारधारा को और हवा दी। पार्टी के अंदर की बेहतर कलह और कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल होकर भी संगठन के मजबूत होने की बड़ी वजह बने। 5. सर ने तोड़ी कमर: 91 लाख वोटर्स का बड़ा झटका 2026 के चुनाव से ठीक पहले, चुनाव आयोग ने सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटाये, जो कुल का लगभग 12% था। इन निकाले गए बस्तियों में बड़ी संख्या में उन लोगों की संख्या बताई गई है जो या तो मृत हो गए हैं या राज्य से बाहर पलायन कर गए हैं, लेकिन टीएमसी ने ‘अवैध द्वीप समूह’ यानी अल्पसंख्यक मतदाताओं को लक्षित करने वाला कदम बताया। इस विवाद ने एक ऐसा माहौल बना दिया जिसमें टीएमसी के समर्थकों में भ्रम और अविश्वास फैल गया, जबकि बीजेपी के पक्ष में 93 फीसदी की रिकॉर्ड वोटिंग हुई. वोट प्रतिशत में यह ताकतवर उछाल ही वह अंतिम झटका साबित हुआ, जिसने 15 साल पुराने किले को 15 साल पुराने किले को तोड़ दिया। ये सभी घटनाएं और मुद्दा संयोजन एक ऐसे राजनीतिक तूफ़ान में बदल गया, जिसने ममता बनर्जी के 15 साल पुराने किले को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने की राह तैयार की।

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West Bengal Mamata Banerjee election defeat now begin another level of game opines Shivaji Sarkar खेल शुरू हुआ, अभी और खेला होगा, क्या ममता संभल लेगी?

खेल शुरू हुआ, अभी और खेला जाएगा, क्या ममता हैंडलबाम?

पश्चिम बंगाल में आख़िरकार सत्ता परिवर्तन हो गया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने लंबे समय तक राज्य में सरकार बनाने का इंतजार किया। अब मुख्यमंत्री कौन होंगे, इसका विज्ञापन जारी होना बाकी है। लेकिन असली सवाल सरकार बनने का नहीं, बल्कि ये है कि ममता बनर्जी जैसे लोकप्रिय नेता सत्ता से बाहर कैसे हो जाएं। उनकी शाही क्षमता और प्रधानता पर उनके विरोधी भी प्रश्न चिह्न नहीं, फिर भी वे जमीन क्यों खोएं, यही संकेत की जरूरत है। पिछले 15 सालों में 2000 करोड़ रुपये की आय हुई है 2021 के बाद बीजेपी कॉन्स्टैंट अभियान मूड में रही और समाजवादी कांग्रेस पर आरोप लगाए गए। शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में अदालत के माध्यम से हजारों की संख्या में बंदियों को हटा दिया गया और पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी को जेल भेज दिया गया। इन घटनाओं में जनता के बीच सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया गया है। जिन लोगों की बेरोजगारी बढ़ गई, उनमें असंतोष बढ़ गया और उन्हें लगा कि सरकार की स्थिति बहाल हो गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की मंजूरी के तहत मिलने वाले फंडों में भी बाधाएं आईं, जैसे कि लाभार्थियों के भुगतान में देरी हुई, जिससे लाखों श्रमिक प्रभावित हुए। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव घटक के रूप में सामने आया। इसके अलावा, एडी एज़ाइली फिल्म की कार्रवाई और नेताओं की जांच में डीवीडी की साख को और कमजोर किया गया, भले ही कोई ठोस सबूत सामने न आया हो। राजनीति में छवि खराब होने से कई बार वास्तविक दोष से भी बड़ा नुकसान होता है। विभाग ने की छवि खराब धार्मिक और स्थानीय स्तर पर सातालियों के कुछ साथियों ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही कलाकारों की सूची के पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में नाम कटने का अनुपात भी सामने आया, जिससे नामांकन प्रभावित हुए। हालाँकि, कुछ सिद्धांतों का मानना ​​है कि अगर सरकार की सामाजिक मंजूरी, जैसे लक्ष्मी भंडार, की मूर्तियाँ तो महिला मतदाताओं का रुझान बदल सकती थीं। अब सवाल यह है कि क्या पेट्रोलियम कांग्रेस खत्म हो जाएगी? ऐसा कुछ भी नहीं लगता है, लेकिन पार्टी के नेताओं पर दबाव बढ़ता है और विविधता उभरती हुई दिखाई देती है, विशेष रूप से अभिवंदन के लिए. आने वाले समय में ममता बनर्जी पार्टी को कैसे समर्थन दिया जाए, यह काफी महत्वपूर्ण होगा। अंततः, यह स्पष्ट है कि राजनीतिक ‘खेला’ अभी समाप्त नहीं हुआ है – यह आगे भी जारी रहेगा और जनता को इसके अगले चरण का इंतजार रहेगा। (ये लेखक के निजी विचार हैं।) (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल परिणाम 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)सुवेंदु अधिकारी

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समझाया: हिमंत बिस्वा सरमा की तीसरी पारी 'मियां' के दुश्मन! बदरुद्दीन की जीत से 34.22% मुस्लिम आबादी को फ़ायदा क्यों नहीं?

समझाया: हिमंत बिस्वा सरमा की तीसरी पारी ‘मियां’ के दुश्मन! बदरुद्दीन की जीत से 34.22% मुस्लिम आबादी को फ़ायदा क्यों नहीं?

असम में हिमंत बिस्वा सरमा की तीसरी जीत में सिर्फ सत्य ही नहीं बची, बल्कि एक नए और नाटकीय राजनीतिक युग की शुरुआत भी की गई है। 126 में से 82 में शामिल होने वाली बीजेपी के सीएम हिमंत ने सोलो में सोलो के खिलाफ कई दावे किए। दूसरी ओर, बदरुद्दीन अजमल की जीत और उनकी पार्टी एआईयूडीएफ के सफा ने असम की मुस्लिम राजनीति में एक अहम बदलाव का संकेत दिया है। लेकिन इससे कम्यूनिटी को फ़ायदा उठाने वाला अब एक बड़ा सवाल बदल गया है। कैसे? हिमंत बिस्वा सरमा ने आदिवासियों के खिलाफ दिया बड़ा बयान हिमंत बिस्वा सरमा ने दादी को ‘मियां’ कहा और एक के बाद एक कई सिद्धांत और सख्त बातें बताईं: गोली मारने का संकेत: उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया (बाद में इसे हटा दिया गया), जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों पर राइफल से गोली चलाने का आरोप लगाया गया था। इस पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. ‘जेल जाने को तैयार’: ओलाज़ी की याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए सरमा ने कहा, ‘मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं, मुझे क्या करना है? मुझे किसी भी वीडियो के बारे में नहीं पता…लेकिन मैं बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ हूं और उनके बारे में बताता हूं।’ ‘नॉन-कोऑपरेशन’ की खोज: फरवरी 2026 में उन्होंने ‘गैर-सहयोग’ (असहयोग) और ‘सविनय अज्ञेय’ का विरोध करते हुए बैलर मूल के नारे लगाए, ताकि ऐसा रंगीन बनाया जाए जिसमें ‘वे असम में न रह जाएं’। उन्होंने लोगों से अपील की, ‘रिक्शा पर सवार होने से पहले सोचिए कि आप लोग रिश्तेदार रिक्शा पर चढ़ रहे हैं।’ ‘खुद ही चले जाओ’ की रणनीति: मार्च 2026 में उन्होंने कहा कि वे ऐसा ‘दबाव’ बनाना चाहते हैं ताकि बंगाली भाषी मुस्लिम ‘खुद ही चले जाएं।’ उन्होंने कहा कि बेदाखली, सरकारी खजाने से निवेशकों और अवैध घुसपैठियों पर रबर की गोलियां चलाने जैसे उपाय किए जा सकते हैं। विशेष चेतावनी: सरमा ने यह भी कहा, ‘अगर असम में मुस्लिम आबादी 50% पार कर गई तो गैर-मुस्लिम जीवित नहीं बचेंगे।’ क्या मुख्यमंत्री की तीसरी पारी की मुश्किलें और बढ़ेंगी? सरमा और उनकी सरकार की क्लस्टर कंपार्टमेंट और भविष्य के वादों को देखते हुए, असम के पैरालिड, बैलर मूल के पैरालिड के लिए अगले पांच साल 3 कारणों से बेहद मुश्किल हो सकती है: विधानसभा में राजनीतिक हाशियाकरण: 2023 के प्रिसिमन के बाद, जिन प्रिस्क्राइब पर क्लासिक्स का प्रभाव पड़ा, उनकी संख्या 35 से 35 के रूप में 20 रह गयी। बीजेपी ने 2026 के चुनाव में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया. मुस्लिम वोट पूरी तरह से विभाजित पार्टी कांग्रेस और एआईयूडीएफ की तरह ही अलग-अलग हिस्सों में बंटे हुए हैं। कठोर वाल्व का प्रभाव: भाजपा के संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के खिलाफ ‘लव जिहाद’ और ‘भूमि जिहाद’ को खत्म करने वाला कानून बनाने का वादा किया गया है। साथ ही, अवैध घुसपैठियों (जिसका समुद्री तट पर मुस्लिम होते हैं) से जमीन खाली कराना और ‘मिशन बससंधारा’ के तहत भूमि अधिकार देने की बात कही गई है। बेख़ौफ़ और प्रोडक्शन का जारी रहना: सरमा ने सबसे पहले ही साफ कहा था कि पिछले साल 1.5 लाख की राहत में से ज्यादा जमीन को हटा दिया गया था और यह अभियान जारी रहेगा। ‘पुशबैक’ नीति के तहत हजारों लोगों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है, जिसमें कई भारतीय नागरिक भी पीड़ित हैं। तो क्या बदरुद्दीन अजमल की जीत का फायदा नहीं मिलेगा? बदरुद्दीन अजमल ने नव-निर्मित बिन्ना कांड़ी सीट से 35,380 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन यह उनकी पार्टी एआईयूडीएफ के लिए एक बड़ी तबाही को छुपाना नहीं है। पार्टी को केवल 2 सर्वश्रेष्ठ मिलीं, जिसने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है। इससे: सीमित लाभ: 2024 के आम चुनाव में अपनी धुबरी सीट के बाद राज्य की राजनीति में वापसी के लिए अजमल के लिए एक बड़ी जीत है। लेकिन सिर्फ दो नामचीन विधानसभाओं के साथ मजबूत प्रतिरोध कायम करना बेहद मुश्किल है। ऐतिहासिक गिरावट: कभी प्रतिभा के ‘रक्षक’ के रूप में देखने वाली एआईयूडीएफ का पतन 2018 में एनआरसी का ड्राफ्ट जारी होने के बाद शुरू हुआ। इसमें करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए थे, जिनमें शामिल थे बंगाली मुसलमान। पार्टी अपने इसी वोट बैंक की रक्षा करने में नाकाम रही। कांग्रेस की ओर पलायन: असम कांग्रेस ने बीजेपी के ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ से बचने के लिए एआईयूडीएफ से गठबंधन तोड़ने की घोषणा की. नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम मौलाना ने एआईयूडीएफ को कांग्रेस से अलग करने का रुख अपनाया। बीजेपी के प्रचंड जीत और हिमंत बिस्वा सरमा की बेबाक रणनीति ने एक ऐसा माहौल जरूर बनाया है, जहां वे अपने जमींन को और जगह से लागू कर सकते हैं। बदरुद्दीन अजमल की जीत एक मशहूर फिल्म जरूर है, लेकिन असम की मशहूर हस्तियों से किसी बड़े राजनीतिक फायदे की उम्मीद बहुत कम है। अगले पाँच पूर्वी समुदायों के सामने राजनीतिक हाशियाकरण और कठोर विरोधियों की चुनौती सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

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तमिलनाडु में सरकार ने बनाई दौड़ तेज, विजय ने पेश किया दावा, जानें क्या है यहां नंबर गेम?

तमिलनाडु में सरकार ने बनाई दौड़ तेज, विजय ने पेश किया दावा, जानें क्या है यहां नंबर गेम?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद मोटरसाइकिल की हलचल तेज हो गई। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने रविवार को राज्य सरकार में पद से हटाये जाने का दावा पेश किया. उनकी पार्टीगा तमिल वेत्री कज़गम (टीवीके) 234 रथ असेंबली में सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई है, जिससे नई सरकार के गठन को लेकर नई सरकार बनी और तेजी से उभरी। राज्यपाल से मुलाकात, प्रस्तुत सरकार बनाने का दावाविजय चेन्नई स्थित लोक भवन स्थापना के गवर्नर आर.एन. रवि से मिले। इस दौरान उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की सरकार बनाने का दावा पेश किया और सहायक समर्थकों को अपनी पार्टी में समय-समय पर विधानसभा में बहुमत साबित करने का प्रस्ताव दिया। इस बैठक में नई सरकार गठन की दिशा में पहला बड़ा संवैधानिक कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूरहाल ही में चुनाव में टीवीके ने 108वीं बार शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालाँकि, सरकार ने पार्टी के लिए ज़रूरी 118 दस्तावेज़ के दस्तावेज़ अभी भी दूर हैं, जिससे उसे सहयोगी संस्थान के समर्थन की ज़रूरत है। विधायक दल के नेताओं ने जीत हासिल कीचुनाव के बाद विजय ने अपने नवनिर्वाचित और वरिष्ठ नेताओं की एक साथ बैठक की। इसके बाद सभी बैश ने एकमत से अपने विधायक दल का नेता चुना, जिससे गवर्नर के सामने दावा पेश करने का रास्ता साफ हो गया। समर्थन के लिए तेज़ हुई अनौपचारिक बातचीतचुनाव के बाद चेन्नई में राजनीतिक सहयोगी तेज हैं। कांग्रेस ने पहले ही टीवीके को समर्थकों के साथ समर्थन देने का संकेत दे दिया है, जबकि बाहुबली दल और अन्य छोटे क्षेत्रीय दल भी अधिक चर्चा कर रहे हैं। वहीं, फिलीपीन डीएमके, जिसे इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, ने भी हार के बाद अपनी रणनीति पर विचार शुरू किया है। अन्य वाद्ययंत्रों का प्रदर्शनइस चुनाव में डीएमके ने 59, एआईएडीएमके ने 47, कांग्रेस ने 5 और 4 पायदान बनाए हैं. इसके अलावा IUML, CPI, VCK और CPM को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी, DMDK और AMMK ने 1-1 सीट पर जीत दर्ज की।

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समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

वर्ष 1951-52 में देश का पहला आम चुनाव हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 489 में से 364 पर कब्ज़ा जमाया था और उसका वोट शेयर करीब 45% था। यह वह दौर था जब एक विचारधारा पार्टी पूरे देश की साक्षात् मूर्ति पर थी। लेकिन आज 70 साल बाद, वामपंथी कांग्रेस चार राज्यों की सरकार से सीमेन्ट तक जा पहुंची है। कभी देश की दिशा और दशा करने वाली यह 140 साल पुरानी पार्टी की गिनती अब आखिरी सांसों में हो रही है या यह एक नई शुरुआत का इंतजार है? 400 से अधिक सबसे पवित्र कैथोलिक गांव-गांव उपनगरीय कांग्रेस कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुसार नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेताओं को तैयार किया। 1952 से 2014 के बीच करीब 50 साल तक सबसे ज्यादा समय तक पार्टी ने केंद्र की सत्ता संभाली। 1984 के चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड 400 से अधिक वोट मिले। यह वह समय था जब कांग्रेस का जनाधार हिंदू बहुसंख्यक समाज से लेकर अल्पसंख्यकों और ईसाई समुदाय तक का विघटन हुआ था। पार्टी का संगठन गांव-गांव तक मजबूत था और ‘कांग्रेस व्यवस्था’ नाम से एक संपूर्ण व्यवस्था व्यवस्था थी। कांग्रेस पार्टी की शुरुआत कब और कैसे हुई? मान्यताओं का मानना ​​है कि कांग्रेस का वास्तविक पतन 1989 के बाद शुरू हुआ, जब वह केंद्र की पूर्ण बहुमत की सत्ता से बाहर हो गई और उसे गठबंधन की राजनीति पर अविश्वास प्रस्ताव मिला। संगठन के आरोप, संगठन में आंतरिक गुटबाजी और क्षेत्रीय आश्रमों के उदय ने पार्टी की जड़ों को खोखला करना शुरू कर दिया। फिर 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस का तख्तापलट हो गया और वह सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गईं, जबकि उनका वोट शेयर 19.3% रह गया था। 2019 में मामूली सुधार के बाद 2024 में पार्टी ने 99 सीटें और 21.26% वोट शेयर हासिल किया, लेकिन फिर भी वह मोदी लहर के आगे बौनी साबित हुई। असली हकीकत: सिर्फ 4 राज्यों की सरकार 2026 की ताजा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास इस वक्त सिर्फ चार राज्यों में ही अपनी सरकार है। 2026 के चुनाव में केरल में बड़ी जीत के बाद, कांग्रेस को अब तीन दक्षिण राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के अलावा उत्तर भारत में सिर्फ हिमाचल प्रदेश की सत्ता हासिल है। झारखंड में वह झामुमो के साथ गठबंधन में सरकार का हिस्सा है, लेकिन वहां नेतृत्व रसेल सोरेन के पास है। बिहार और तमिल जैसे राज्यों में पार्टी या तो छोटे सहयोगियों की भूमिका है या पूरी तरह से हाशिए पर है। वहीं, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में कांग्रेस का जनाधार या तो खत्म हो चुका है या बेहद कमजोर है। कांग्रेस के पांच बड़े कारण क्या हैं? कांग्रेस के पतन को किन्हीं एक-दो कारणों से नहीं समझा जा सकता है, इसके पीछे एक सु-संयुक्त लोकोमोटिव प्रक्रिया है: आदर्श नेतृत्व और मार्गदर्शन कलह: राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी को 95वीं बहुमत से हार का सामना करना पड़ रहा है। आंतरिक गुटबाजी और हाईकमैन का ग्राउंड स्ट्रिप से कटाव पार्टी लगातार खराब हो रही है। आपदा का संकट: भाजपा ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति के रूप में पेश किया, जिससे हिंदू बहुल मुस्लिमों का विश्वास खोद दिया गया। भाजपा का उदय और ध्रुवीकरण: 2014 के बाद कांग्रेस को उत्तर भारत में किसी भी तरह से गठबंधन में डायरेक्ट सीट नहीं मिली, क्योंकि बीजेपी धार्मिक आधार पर मजबूत ध्रुवीकरण करने में सफल रही है। दल-बदल और पार्टी छोड़ने का नारा: 2014 के बाद सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। यह रुझान 2017 से 2021 के बीच अपने चरम पर था। गठबंधन की राजनीति में विश्वास: इंडिया अलायंस के सहयोगी दल, नैयर वह सैद्धांतिक कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जिससे कि एकजुटता एकता खत्म हो गई है। तो क्या ख़त्म होने वाली है कांग्रेस पार्टी? इस सवाल का जवाब आसान नहीं है. हालांकि इंडिया गठबंधन सिर्फ 6 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश तक पहुंच गया है और कई बीजेपी नेता इसे ‘केरल के बाहर न के बराबर’ बता रहे हैं। इसके बावजूद राजनीति में भविष्यवाणी करना मुश्किल है। 2024 के आम चुनाव में मिल 99 ने यह साबित कर दिया कि पार्टी में अभी भी लड़ने की ताकतें बाकी हैं। दक्षिण भारत में पार्टी का जबरदस्त प्रभाव और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी पार्टियों ने जोश भरा है। लेकिन पार्टी के भविष्य के बारे में वह इस बात पर अड़े हुए हैं कि अपनी योजनाओं को कितनी जल्दी दूर किया जाए। कांग्रेस को एक मजबूत संगठन खड़ा करना, जातिगत और क्षेत्रीय ग्राफों को फिर से साधना और एक स्पष्ट परिभाषा तय करना होगा। ये वे कलाकार हैं जो राष्ट्रवादी पार्टी में शामिल होंगे। अगर यह कांग्रेस कर पाती नाकाम रही, तो इतिहास की कहानी में अपनी कहानी एक ‘हरे अतीत’ तक सीमेन्ट कर रहेगी।

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