Tuesday, 07 Apr 2026 | 03:54 PM

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MATRIX Hits 559+ From 200; Historic Jump!

MATRIX Hits 559+ From 200; Historic Jump!

5 घंटे पहले कॉपी लिंक आज मेडिकल फील्ड में करियर बनाना लाखों स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स का सबसे बड़ा ड्रीम बन चुका है। डॉक्टर बनने की जर्नी आसान नहीं होती और इसकी पहली बड़ी सीढ़ी है NEET (National Eligibility cum Entrance Test). हर साल करीब 23 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स सिक्योर फ्यूचर की उम्मीद के साथ इस एंट्रेंस एग्जाम में बैठते हैं। लेकिन अब यह परीक्षा पहले जैसी नहीं रही। कम्पटीशन लगातार बढ़ रहा है, सिलेबस काफी वास्ट है और मज़बूत कॉन्सेप्ट क्लैरिटी के बिना आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। यह सिर्फ नॉलेज की नहीं, बल्कि कंसिस्टेंसी, फोकस और स्मार्ट स्टडी की भी असली परीक्षा है। तैयारी का तरीका भी समय के साथ पूरी तरह बदल गया है। आज सिर्फ किताब पढ़ लेना या नोट्स बना लेना काफी नहीं है। रेगुलर प्रैक्टिस, मॉक टेस्ट, डीटेल्ड टेस्ट एनालिसिस, टाइम मैनेजमेंट के साथ-साथ मेंटल स्ट्रेंथ भी उतनी ही जरूरी है। इसीलिए आज सही गाइडेंस, स्ट्रक्चर्ड एकेडमिक सिस्टम, लगातार परफॉर्मेंस ट्रैकिंग और सही कोचिंग सेलेक्शन NEET में सफलता की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं। NEET में भी MATRIX का लगातार शानदार प्रदर्शन MATRIX सीकर, जिसने पिछले 9 वर्षों में JEE परिणामों के माध्यम से सीकर में अपनी एक मजबूत आइडेंटिटी स्थापित करने के पश्चात वर्ष 2022 में अपने NEET DIVISION की शुरुआत कर सफलता की इस परंपरा को कायम रखा है। JEE की तरह रिजल्ट-ओरिएंटेड सिस्टम, स्ट्रक्चर्ड टीचिंग मेथडोलॉजी और स्टूडेंट-सेंट्रिक अप्रोच को आगे बढ़ाते हुए MATRIX NEET DIVISION ने मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी में भी वही कमिटमेंट और क्वालिटी बनाए रखी। JEE की तरह NEET में भी MATRIX का फोकस हर स्टूडेंट के रिजल्ट पर रहा है। सभी टीचर्स और डायरेक्टर्स को क्लैरिटी है कि परसेंटेज रिजल्ट्स के मामले में MATRIX NEET सबसे ऊपर रहना चाहिए। जहां कुल सेलेक्शन्स की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि प्रविष्ट स्टूडेंट्स कितने हैं, वहीं असली पहचान परसेंट सक्सेस से बनती है और इसी परसेंट सक्सेस में MATRIX देश में सबसे शिखर पर रिजल्ट दे रहा है। संपूर्ण देश में जहां नीट की सक्सेस रेट 1–2% है, वहीं MATRIX में यही सक्सेस रेट लगभग 18% के आसपास है, जो अन्य कोचिंग इंस्टिट्यूट्स की सक्सेस रेट के मुकाबले काफी ज्यादा है। MATRIX NEET DIVISION के पहले ही वर्ष 2023 में लगभग 200 विद्यार्थियों का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सिलेक्शन हुआ। 2024 में यह संख्या बढ़कर 400+ सीटों तक पहुंची, जहां कई विद्यार्थियों ने 700+ मार्क्स अर्जित कर शानदार प्रदर्शन किया। 2025 में मैट्रिक्स ने नई ऊंचाई स्थापित करते हुए 559+ विद्यार्थियों का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयन सुनिश्चित किया, जो अपने आप में एक शानदार सफलता है। इतना ही नहीं, इस बैच के सात विद्यार्थियों ने Top 1000 AIR और 65 विद्यार्थियों ने Top 5000 AIR में स्थान बनाया। स्थायी फैकल्टी और ‘जीरो इग्नोर पॉलिसी’ मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में MATRIX NEET DIVISION एक स्थापित नाम बन रहा है। यहां की फैकल्टी टीम अनुभवी होने के साथ-साथ ऊर्जावान और स्टूडेंट्स की सफलता के लिए समर्पित मानी जाती है। खास बात यह है कि संस्थान में स्थायी फैकल्टी सिस्टम है, जिससे पढ़ाई का स्तर लगातार बेहतर बना रहता है। NEET DIVISION में 100 से अधिक टीचर्स की टीम है, जिनमें से 90% के पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। लगभग 60% टीचर्स खुद टॉप IITs और NITs से पढ़े हुए हैं। यही वजह है कि ये टीचर्स अच्छे से समझते हैं कि पूरे सेशन में स्टूडेंट्स को किस तरह से स्टेप-बाय-स्टेप तैयार करना है, ताकि एग्जाम के समय तक उनमें पूरा कॉन्फिडेंस आ सके। यहां साप्ताहिक टेस्ट्स का लेवल भी सोच-समझकर सेट किया जाता है। टेस्ट्स ऐसे बनाए जाते हैं कि स्टूडेंट्स अपनी गलतियों को पकड़ सकें और धीरे-धीरे सुधार करते जाएं। जैसे-जैसे एग्जाम नजदीक आता है, वैसे-वैसे स्टूडेंट्स का आत्मविश्वास भी बढ़ता जाता है और उनमें यह भरोसा बन जाता है कि वो एग्जाम क्रैक कर लेंगे। MATRIX NEET DIVISION की सफलता के पीछे एक खास वजह इसकी ‘Zero Ignore Policy भी है। यहां एक भी स्टूडेंट को नजरअंदाज नहीं किया जाता। चाहे कोई स्टूडेंट कम नंबर लाने वाला हो या टॉप करने वाला, हर एक पर बराबर ध्यान दिया जाता है। इसके साथ-साथ सिलेबस भी समय पर पूरा कर लिया जाता है। सिलेबस खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स को त्रि-स्तरीय टेस्ट सीरीज प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें लगातार रिवीजन कराया जाता है। करीब 70 दिनों तक चलने वाली इस खास प्रक्रिया में स्टूडेंट्स अपनी तैयारी को अंतिम रूप देते हैं और हर टॉपिक को मजबूती से दोहराते हैं। इसी अप्रोच का नतीजा है कि यहां से निकलने वाला हर बैच मजबूत बनकर निकलता है। स्टूडेंट्स को मिल रही पर्सनल अटेंशन और सही गाइडेंस ही MATRIX को कम समय में एक भरोसेमंद नाम बना रही है। MATRIX JEE के सिस्टम एंड लर्निंग्स का NEET प्रिपरेशन में समावेश MATRIX की सबसे बड़ी ताकत है। गौरतलब हो कि अगर केवल क्वेश्चन्स के लेवल की बात करें, तो JEE में क्वेश्चन्स नीट के मुकाबले काफी टफ आते हैं। और यही कारण है कि NEET के स्टूडेंट्स खासकर फिजिक्स को लेकर अक्सर चिंतित रहते हैं। लेकिन MATRIX NEET DIVISION के स्टूडेंट्स के लिए यही चुनौती एक बड़ा एडवांटेज बन जाती है। MATRIX के 15 साल के JEE एक्सपीरियंस और मजबूत सिस्टम का सीधा बेनिफिट NEET स्टूडेंट्स को मिलता है। JEE के साथ शानदार को-ऑर्डिनेशन के कारण MATRIX में पढ़ने वाले NEET स्टूडेंट्स के लिए फिजिक्स बाकी इंस्टिट्यूट्स के स्टूडेंट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो जाती है। AI और मशीन लर्निंग(ML) टेक्नोलॉजी से बदल रही है नीट प्रिपरेशन की दिशा MATRIX में AI और मशीन लर्निंग(ML) के माध्यम से हर स्टूडेंट के परफॉर्मेंस का गहराई से एनालिसिस किया जाता है। इससे स्टूडेंट की स्ट्रेंथ और वीक एरियाज की सटीक पहचान होती है और उसी के अनुसार पर्सनलाइज्ड प्रिपरेशन स्ट्रेटेजी बनाई जाती है, जिससे हर स्टूडेंट को स्मार्ट लर्निंग के साथ बेहतर और फास्ट रिजल्ट हासिल करने में मदद मिलती है। क्या कहते हैं पेरेन्ट्स NEET की तैयारी के दौरान परिवारों का सहयोग भी छात्र की प्रगति में बड़ा रोल निभाता है। NEET रैंक होल्डर रही निकिता के पिता बताते हैं कि ‘‘MATRIX ने सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं करवाई, बल्कि निकिता को

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Gold Down ₹16K, Silver ₹42K; Today ₹3,263 & ₹13K Fall

Gold Down ₹16K, Silver ₹42K; Today ₹3,263 & ₹13K Fall

Hindi News Business Iran War Impact: Gold Down ₹16K, Silver ₹42K; Today ₹3,263 & ₹13K Fall नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग के बीच गुरुवार को भी सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, गुरुवार को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 4,245 रुपए घटकर 1.47 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले बुधवार को यह 1.51 लाख पर था। वहीं, एक किलो चांदी 12,023 रुपए घटकर 2.28 लाख रुपए रह गई, जो 25 मार्च को 2.40 लाख रुपए पर थी। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 34 दिन में 12,489 और चांदी 38,887 सस्ती हुई है। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं। खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत (करीब 40%) के कारण ज्वेलर्स बड़ी खरीद करते हैं, लेकिन छूट का फायदा सीमित रहता है। लोकल ज्वेलर्स एसोसिएशन: राज्य और शहर के ज्वेलर्स एसोसिएशन स्थानीय मांग-सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स का खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में बेचेंगे। सोना ऑल टाइम हाई से ₹30 हजार सस्ता हुआ साल की शुरुआत में सोने में तेजी थी, लेकिन हाल के हफ्तों में मुनाफावसूली और ईरान जंग से गिरावट आई है। शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹1.33 लाख ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक ₹30 हजार सस्ता हो चुका है। चांदी में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.28 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा और यह ऑल टाइम हाई से तेजी से नीचे आई है। शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹2.30 लाख ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹3.86 लाख गिरावट का आंकड़ा: पिछले 63 दिन में चांदी ₹1.58 लाख सस्ती हो गई है। गिरावट के मुख्य कारण: कैश पर भरोसा बढ़ा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग में निवेशक जोखिम से बचते हुए गोल्ड-सिल्वर बेचकर कैश इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि अनिश्चितता में लिक्विडिटी बनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में रिकॉर्ड कीमतों पर बड़े निवेशकों ने होल्डिंग बेची, जिससे सप्लाई बढ़ी और कीमतें गिरीं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका के फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से कीमती धातुओं की चमक फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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WhatsApp SIM Binding Rule Jan 2027 Update

WhatsApp SIM Binding Rule Jan 2027 Update

नई दिल्ली8 घंटे पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ के नियमों को लागू करने की डेडलाइन को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया है। यानी नए नियम अब 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इंडस्ट्री की मांग को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। 6 सवालों के जवाब से समझिए क्या है नया नियम और आप पर कैसे होगा असर? सवाल 1. क्या है सिम बाइंडिंग? जवाब. सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा कवच है। यह आपके मैसेजिंग एप को आपके फिजिकल सिम कार्ड के साथ ‘लॉक’ कर देता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का इस्तेमाल किसी दूसरे डिवाइस पर बैठकर नहीं कर पाएगा। सवाल 2. सिम बाइंडिंग का नया नियम कब से लागू होगा? जवाब. जब आप किसी एप को सिम बाइंडिंग से जोड़ते हैं, तो वह एप तभी खुलेगा जब आपका रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी फोन के अंदर मौजूद होगा। यह नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। सवाल 3. सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना क्यों किया? जवाब. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि फिलहाल नियमों को मानने की समय-सीमा आगे बढ़ाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। सवाल 4. 1 जनवरी से यूजर्स को क्या करना होगा? जवाब. यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वॉट्सएप जिस नंबर पर है, वह सिम उसी फोन में लगा हो। अगर सिम कार्ड फोन से बाहर निकाला तो मैसेजिंग एप काम करना बंद कर सकता है। सवाल 5. टेक कंपनियों और संस्थाओं का इस पर क्या रुख है? जवाब. इंडस्ट्री एसोसिएशन (IAMAI) ने सरकार को चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट करने का नियम प्रोफेशनल्स के लिए परेशानी भरा होगा। साथ ही उन यूजर्स को भी दिक्कत होगी जो एक ही अकाउंट शेयर करते हैं। सवाल 6. कंपनियों ने नियम नहीं माना तो क्या कार्रवाई होगी? जवाब. केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक ​​कंपनियों को ​120 दिन के भीतर इसको लेकर रिपोर्ट देनी होगी। नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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PPF अकाउंट से हर महीने ₹61 हजार की कमाई:₹1.03 करोड़ का फंड भी तैयार हो जाएगा, जानें क्या है इसका 15+5+5 फॉर्मूला

PPF अकाउंट से हर महीने ₹61 हजार की कमाई:₹1.03 करोड़ का फंड भी तैयार हो जाएगा, जानें क्या है इसका 15+5+5 फॉर्मूला

सरकार ने अप्रैल-जून (Q1FY27) के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। यानी आपको पहले जितना ही ब्याज मिलता रहेगा। अगर आप रिटायरमेंट के लिए एक स्मार्ट फंड बनाना चाहते हैं तो यह पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है। PPF में निवेश की 15+5+5 रणनीति से आप 25 साल में 1.03 करोड़ का फंड बना सकते हैं। इस रकम पर मिलने वाले ब्याज से हर माह 61 हजार रुपए की पेंशन बना सकते हैं। PPF सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित निवेश योजनाओं में से एक है। PPF में 7.1% के गारंटेड ब्याज के साथ निवेश पूरी तरह जोखिम फ्री है। यह ब्याज हर साल कंपाउंड होता है, यानी आपके पैसे पर ब्याज मिलता है और फिर उस ब्याज पर भी ब्याज जुड़ता जाता है। यही कंपाउंडिंग की ताकत PPF को इतना खास बनाती है। इसमें मिलने वाला ब्याज और मेच्योरिटी पर मिलने वाली रकम टैक्स-फ्री होती है। इस स्कीम में आप हर साल न्यूनतम 500 रुपए और अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक निवेश कर सकते हैं। सालाना 1.5 लाख निवेश से 15+5+5 फॉर्मूले से 1.03 करोड़ बनेंगे, ब्याज से 65 लाख बनेंगे… पीपीएफ का 15+5+5 फॉर्मूला एक तरह का निवेश प्लान है, जिसमें आप 25 साल तक अपने पैसे को बढ़ने देते हैं। PPF स्कीम का मूल पीरियड 15 साल होता है। लेकिन 15 साल पूरे होने पर आपके पास 3 विकल्प होते हैं। पहला: आप अपना पूरा पैसा निकाल सकते हैं। दूसरा: आप अपना सारा पैसा निकाल लें या फिर 5-5 साल के दो एक्सटेंशन ले लें। आप इन 10 सालों में बिना निवेश किए भी अपना पैसा छोड़ सकते हैं। तीसरा: आप 5-5 साल के लिए निवेश जारी रख सकते हैं। 15 साल बाद 5-5 साल का एक्सटेंशन लीजिए 61,000 रुपए की मंथली इनकम कैसे मिलेगी? 25 साल पूरे होने पर आप अपने PPF खाते में 1.03 करोड़ रुपए के फंड को जारी रख सकते हैं। इस राशि पर आपको हर साल 7.1% का ब्याज मिलता रहेगा। हर साल 7.1% सालाना ब्याज पर लगभग 7.31 लाख रुपए बनेंगे। यानी हर महीने करीब 60,941 रुपए (7.31 लाख ÷ 12) मिलेंगे। खास बात यह है कि आपका मूल फंड 1.03 करोड़ जस का तस बना रहेगा। आपकी नियमित कमाई शुरू हो जाएगी। साल में 1.5 लाख निवेश कर सकते हैं निवेश, ब्याज से लेकर मैच्योरिटी टैक्स फ्री कौन खोल सकता है PPF अकाउंट? कोई भी व्यक्ति किसी पोस्ट ऑफिस या बैंक में अपने नाम पर यह अकाउंट खोल सकता है। इसके अलावा नाबालिग की तरफ से किसी और व्यक्ति द्वारा भी से खाता खोला जा सकता है।

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Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Hindi News Business Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief | Petrochemical Import Duty Cut नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने बुधवार यानी 1 अप्रैल को चुनिंदा क्रिटिकल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को पूरी तरह से माफ कर दिया है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच में जारी तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कच्चे माल की सप्लाई लगातर मिलना और बढ़ती लागत को कम करना है। इंडस्ट्री को सप्लाई चेन की दिक्कतों से बचाना लक्ष्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है और सप्लाई चेन में दिक्कत आई है। इस फैसले से घरेलू उद्योगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। प्लास्टिक से लेकर दवाओं तक, इन सेक्टर्स को होगा फायदा कस्टम ड्यूटी हटने से उन सभी उद्योगों को राहत मिलेगी जो पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में करते हैं। इसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल (कपड़ा), फार्मास्यूटिकल्स (दवा), केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि इनपुट कॉस्ट कम होने से फाइनल प्रोडक्ट्स की कीमतें भी स्थिर रहेंगी। इससे आम आदमी को महंगाई से राहत मिल सकती है। इन प्रमुख प्रोडक्ट्स पर अब नहीं लगेगी ड्यूटी सरकार ने छूट वाली लिस्ट में कई महत्वपूर्ण रसायनों और कच्चे माल को शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: केमिकल इनपुट्स: एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यूनि, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर। इंटरमीडिएट्स: मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फिनोल, एसिटिक एसिड और प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA)। स्पेशियलिटी केमिकल्स: एपॉक्सी रेजिन, पॉलीयुरेथेन, फॉर्मेल्डिहाइड डेरिवेटिव्स और पॉलीओल्स। पॉलीमर और इंजीनियरिंग प्लास्टिक भी हुए सस्ते आम तौर पर पैकेजिंग और ऑटो सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर कैटेगरी को भी इस छूट के दायरे में रखा गया है। इसमें पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पीवीसी (PVC) और पीईटी (PET) चिप्स शामिल हैं। साथ ही एबीएस (ABS) और पॉलीकार्बोनेट जैसे इंजीनियरिंग प्लास्टिक पर भी इंपोर्ट ड्यूटी माफ कर दी है। जून 2026 तक मिलेगी राहत सरकार ने साफ किया है कि यह एक अस्थायी उपाय है जिसे मौजूदा ग्लोबल टेंशन्स को देखते हुए लिया गया है। इस छूट की डेडलाइन 30 जून 2026 तय की गई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे जियो पॉलिटिकल हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में सप्लाई चेन की स्थिति को देखते हुए और भी कदम उठाए जा सकते हैं। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है पेट्रोकेमिकल इंटरमीडिएट? आसान भाषा में समझें तो क्रूड ऑयल या नेचुरल गैस से जो बुनियादी रसायन निकलते हैं, उन्हें रिफाइन करके इंटरमीडिएट्स बनाए जाते हैं। ये सीधे इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि इनसे आगे चलकर प्लास्टिक, फाइबर, पेंट और दवाएं बनाई जाती हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से इंपोर्ट करता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief

Hindi News Business Govt Big Decision: Plastic, Textile & Auto Sectors Get Relief | Petrochemical Import Duty Cut नई दिल्ली10 घंटे पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने बुधवार यानी 1 अप्रैल को 40 क्रिटिकल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को पूरी तरह से माफ कर दिया है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच में जारी तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कच्चे माल की सप्लाई लगातर मिलना और बढ़ती लागत को कम करना है। इससे सरकारी खजाने पर 1,800 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। इंडस्ट्री को सप्लाई चेन की दिक्कतों से बचाना लक्ष्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है और सप्लाई चेन में दिक्कत आई है। इस फैसले से घरेलू उद्योगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। प्लास्टिक से लेकर दवाओं तक, इन सेक्टर्स को होगा फायदा कस्टम ड्यूटी हटने से उन सभी उद्योगों को राहत मिलेगी जो पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में करते हैं। इसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल (कपड़ा), फार्मास्यूटिकल्स (दवा), केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि इनपुट कॉस्ट कम होने से फाइनल प्रोडक्ट्स की कीमतें भी स्थिर रहेंगी। इससे आम आदमी को महंगाई से राहत मिल सकती है। इन प्रमुख प्रोडक्ट्स पर अब नहीं लगेगी ड्यूटी सरकार ने छूट वाली लिस्ट में कई महत्वपूर्ण रसायनों और कच्चे माल को शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: केमिकल इनपुट्स: एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यूनि, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर। इंटरमीडिएट्स: मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फिनोल, एसिटिक एसिड और प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA)। स्पेशियलिटी केमिकल्स: एपॉक्सी रेजिन, पॉलीयुरेथेन, फॉर्मेल्डिहाइड डेरिवेटिव्स और पॉलीओल्स। पॉलीमर और इंजीनियरिंग प्लास्टिक भी हुए सस्ते आम तौर पर पैकेजिंग और ऑटो सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर कैटेगरी को भी इस छूट के दायरे में रखा गया है। इसमें पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पीवीसी (PVC) और पीईटी (PET) चिप्स शामिल हैं। साथ ही एबीएस (ABS) और पॉलीकार्बोनेट जैसे इंजीनियरिंग प्लास्टिक पर भी इंपोर्ट ड्यूटी माफ कर दी है। जून 2026 तक मिलेगी राहत सरकार ने साफ किया है कि यह एक अस्थायी उपाय है जिसे मौजूदा ग्लोबल टेंशन्स को देखते हुए लिया गया है। इस छूट की डेडलाइन 30 जून 2026 तय की गई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे जियो पॉलिटिकल हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में सप्लाई चेन की स्थिति को देखते हुए और भी कदम उठाए जा सकते हैं। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है पेट्रोकेमिकल इंटरमीडिएट? आसान भाषा में समझें तो क्रूड ऑयल या नेचुरल गैस से जो बुनियादी रसायन निकलते हैं, उन्हें रिफाइन करके इंटरमीडिएट्स बनाए जाते हैं। ये सीधे इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि इनसे आगे चलकर प्लास्टिक, फाइबर, पेंट और दवाएं बनाई जाती हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से इंपोर्ट करता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Nifty Falls 400 Points | Banking, Energy, Auto Stocks Dip

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मुंबई13 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 2 अप्रैल को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक (2%) की गिरावट के साथ 71,700 के स्तर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 400 अंक (1.90%) की बढ़त है, ये 22,250 के स्तर पर है। आज बैंकिंग, मेटल, फार्मा और ऑटो शेयर्स में ज्यादा गिरावट है। सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में गिरावट है। बाजार गिरने की 3 बड़ी वजहें… अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ गई है। कच्चे तेल के दाम बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर भी दिख रहा। एशियाई बाजार में भी गिरावट साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4% गिरकर 5,268 पर कारोबार कर रहा है। जापान का निक्केई इंडेक्स 2% गिरकर 52,557 पर कारोबार कर रहा है। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 1% गिरकर 25,012 पर कारोबार कर रहा है। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.5% गिरकर 3,927 पर कारोबार कर रहा है। अमेरिकी बाजार में 1 अप्रैल को रही बढ़त डाउ जोन्स 224 अंक (0.48%) बढ़कर 46,565 के स्तर पर बंद हुआ। टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.16% बढ़कर 21,840 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 46 अंक (0.72%) बढ़कर 6,575 पर बंद हुआ। क्रूड 5% बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल पर आया आज कच्चा तेल करीब 5% ऊपर है। ये 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को ईरान जंग शुरू होने से पहले कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास थे। कल बाजार में रही थी तेजी इससे पहले कल यानी 1 अप्रैल को बाजार में तेजी रही थी। सेंसेक्स 1,187 अंक (1.65%) की तेजी के साथ 73,134 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 348 अंक (1.56%) की बढ़त रही, ये 22,679 के स्तर पर बंद हुआ। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Gold Up ₹4120, Silver ₹9701; Indigo Flights ₹950 Costlier

Gold Up ₹4120, Silver ₹9701; Indigo Flights ₹950 Costlier

नई दिल्ली16 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर एयरलाइन, LPG सिलेंडर और सोना-चांदी की कीमत से जुड़ी रही। इंडिगो ने घरेलू उड़ानों में अधिकतम ₹950 तक और इंटरनेशनल फ्लाइट्स में ₹10,000 तक एक्स्ट्रा फ्यूल चार्ज बढ़ा दिया है। वहीं, सोना एक दिन में ₹4,120 और चांदी ₹9,701 महंगी हुई है। इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा अब रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल कर पाएंगे। आज से फास्टैग, टोल टैक्स के साथ इनकम टैक्स से जुड़े नियम मिलाकर कुल 15 बदलाव हो रहे हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. इंडिगो की घरेलू उड़ानें ₹950, इंटरनेशनल ₹10,000 तक महंगी: 18 दिन में दूसरी बार किराया बढ़ा; फ्यूल महंगा होने से एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो की फ्लाइट्स गुरुवार से महंगी हो जाएंगी। एयरलाइन ने घरेलू उड़ानों में अधिकतम ₹950 तक और इंटरनेशनल फ्लाइट्स में ₹10,000 तक एक्स्ट्रा फ्यूल चार्ज लगाया है। नई कीमतें 2 अप्रैल रात 12:01 बजे से लागू होंगी। इंडिगो ने 18 दिन में दूसरी बार घरेलू और इंटरनेशनल उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे पहले कंपनी ने 14 मार्च को भी किराए में बढ़ोतरी की थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. सोना आज ₹4,120 बढ़कर ₹1.51 लाख पर पहुंचा: इस साल कीमत में ₹18 हजार का इजाफा; चांदी ₹9,701 महंगी होकर ₹2.40 लाख/किलो हुई सोना-चांदी के दाम में गुरुवार को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 4,120 रुपए बढ़कर 1.51 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 9,701 रुपए बढ़कर 2.40 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले इसकी कीमत 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. ₹218 तक महंगा हुआ कॉमर्शियल सिलेंडर: रेल टिकट रिफंड और टोल के नियम बदले, इनहैंड सैलरी भी घटेगी; अप्रैल में 15 बदलाव 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने से हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा अब रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल कर पाएंगे। आज से फास्टैग, टोल टैक्स के साथ इनकम टैक्स से जुड़े नियम मिलाकर कुल 15 बदलाव हो रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अनिल अंबानी के खिलाफ CBI ने नया केस दर्ज किया: LIC से ₹3,750 करोड़ के फ्रॉड का आरोप; झूठी जानकारी देकर निवेश कराया CBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ एक नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई LIC की शिकायत पर की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने मिलीभगत कर LIC से करीब ₹3,750 करोड़ का फ्रॉड किया है। RCom और अनिल अंबानी के खिलाफ यह चौथा मामला है। CBI ने इस केस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. सरकार ने मार्च में ₹2 लाख करोड़ GST वसूला: यह 10 महीने में सबसे ज्यादा; वित्त वर्ष 2025-26 में ₹22 लाख करोड़ कलेक्शन हुआ इस साल मार्च में ग्रॉस GST कलेक्शन सालाना आधार पर 8.8% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ के पार निकल गया। एक साल पहले मार्च 2025 में यह ₹1.83 लाख करोड़ था। वहीं नेट GST कलेक्शन सालाना आधार पर 8.2% बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए रहा। मार्च 2025 में यह आंकड़ा ₹1.64 लाख करोड़ रहा था। आज 1 अप्रैल को ये आंकड़े जारी किए गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… सोमवार के सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Indigo Flights Fare Hike | Jet Fuel Surge Impacts Travel

Indigo Flights Fare Hike | Jet Fuel Surge Impacts Travel

नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। इंडिगो की फ्लाइट्स कल से महंगी हो जाएंगी। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी ने 18 दिन में दूसरी बार सभी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर ‘फ्यूल सरचार्ज’ लगाने की घोषणा की है। कंपनी ने इससे पहले 14 मार्च को फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया था। एयरलाइन ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से यह फैसला लिया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा के अनुसार, पिछले एक महीने में फ्यूल की कीमतें 130% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। एक्सट्रा फ्यूल चार्ज के साथ टिकटों की नई कीमतें 2 अप्रैल रात 12:01 बजे से लागू हो जाएंगी। यानी घरेलू उड़ानों के लिए आपको अधिकतम 950 रुपए तक और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए अधिकतम 10 हजार रुपए तक ज्यादा चार्ज देना होगा। दूरी के हिसाब से लगेगा चार्ज जेट फ्यूल की कीमतें 130% बढ़ने के बाद भी राहत की बात यह है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस को पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने से रोक दिया है। सरकार ने अभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए सिर्फ 25% आंशिक बढ़ोत्तरी की ही अनुमति दी है। इंडिगो के अनुसार, उन्होंने दूरी के अनुसार फ्यूल चार्ज को ‘री-कैलिब्रेट’ किया है, यानी आपका सफर जितना लंबा होगा, टिकट के लिए फ्यूल चार्ज भी उतना ही ज्यादा देना होगा। इंटरनेशनल रूट पर खर्च बढ़ा एयरलाइन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागत का दबाव बहुत ज्यादा है। पिछले एक महीने में ही ग्लोबल मार्केट में जेट फ्यूल के दाम दोगुने से ज्यादा हो गए हैं, जिससे विमान उड़ाने का खर्च काफी बढ़ गया है। फ्यूल महंगा होने की सबसे बड़ी वजह ईरान जंग और कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता है। हॉर्मुज रूट से सप्लाई रुकने के डर ने कीमतें बढ़ा दी हैं। भारत तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक हलचल का सीधा असर यहां की एयरलाइंस पर हो रहा है। फ्यूल पर ₹50 प्रति लीटर अतिरिक्त ड्यूटी को मंजूरी लागत बढ़ने की एक और बड़ी वजह टैक्स में बढ़ोतरी है। बुधवार को राज्यसभा में विमान ईंधन पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव पास हो गया। पंकज चौधरी द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में 26 मार्च 2026 के एक नोटिफिकेशन को मंजूरी दी गई। इसके तहत फाइनेंस एक्ट 2002 में बदलाव कर एटीएफ पर ₹50 प्रति लीटर की ‘स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी’ लगाने का फैसला किया गया है। एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है जेट-फ्यूल जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनियाभर की एयरलाइंस ने न सिर्फ टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। तेल की कीमतों में आए इस अचानक बदलाव ने एयरलाइंस के बजट को बिगाड़ दिया है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी बड़ी कंपनियों ने भी साफ कर दिया है कि वे बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे। दुनियाभर में इन एयरलाइंस ने भी किराया बढ़ाया एयर न्यूजीलैंड: एयर न्यूजीलैंड ने मंगलवार को अपने टिकटों के दाम में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने घरेलू उड़ानों के लिए एक तरफ का किराया 10 न्यूजीलैंड डॉलर बढ़ा दिया है। वहीं शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए 20 डॉलर और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 90 डॉलर की बढ़ोतरी की गई है। कंपनी ने 2026 के लिए अपना कमाई का अनुमान भी वापस ले लिया है, क्योंकि मार्केट में भारी अस्थिरता है। हांगकांग एयरलाइंस: हांगकांग एयरलाइंस गुरुवार से फ्यूल सरचार्ज में 35.2% तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के लिए यह सरचार्ज 284 हांगकांग डॉलर से बढ़ाकर 384 हांगकांग डॉलर कर दिया गया है। वहीं कैथे पैसिफिक ने मार्च में लंदन और ज्यूरिख के लिए एक्स्ट्रा फ्लाइट्स शुरू की हैं ताकि प्रभावित रूट्स के यात्रियों को ऑप्शन मिल सके। कंपनी फिलहाल हर महीने फ्यूल सरचार्ज का रिव्यू कर रही है। क्वांटास और SAS: ऑस्ट्रेलिया की फ्लैग कैरियर क्वांटास एयरवेज ने अपने इंटरनेशनल रूट्स पर किराया बढ़ा दिया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स 90% से ज्यादा फुल चल रही हैं, इसलिए वे आने वाले महीनों में कैपेसिटी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। नॉर्डिक देशों यानी उत्तरी यूरोप की प्रमुख एयरलाइन SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस) ने भी बढ़ती लागत को देखते हुए अस्थायी प्राइस एडजस्टमेंट लागू किया है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट ₹399 महंगी: भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया; ईरान जंग से जेट फ्यूल के दाम दोगुने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। एअर इंडिया 12 मार्च से घरेलू फ्लाइट टिकटों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएगी। यानी टिकट खरीदते समय अब आपको 399 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, एअर इंडिया इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी सरचार्ज लगेगा। ब्लूमबर्ग ने भी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Anil Ambani LIC ₹3,750 Cr Fraud Case

Anil Ambani LIC ₹3,750 Cr Fraud Case

नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक RCom और अनिल अंबानी के खिलाफ यह चौथा केस है। CBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ एक नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई LIC की शिकायत पर की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने मिलीभगत कर LIC से करीब ₹3,750 करोड़ का फ्रॉड किया है। RCom और अनिल अंबानी के खिलाफ यह चौथा मामला है। CBI ने इस केस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। झूठी जानकारी देकर LIC से निवेश कराया CBI की जांच में सामने आया है कि 2009 से 2012 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस ने LIC को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में ₹4,500 करोड़ निवेश करने के लिए राजी किया था। आरोप है कि कंपनी के मैनेजमेंट ने LIC के सामने अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर झूठे दावे किए थे। इसके अलावा निवेश के बदले जो सिक्योरिटी और एसेट कवर का भरोसा दिया गया था, वह भी पूरी तरह गलत था। फॉरेंसिक ऑडिट में हुआ फंड की हेराफेरी का खुलासा इस मामले में LIC की शिकायत के बाद एक फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया था। 15 अक्टूबर 2020 को आई BDO इंडिया LLP की ऑडिट रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं… फंड का गलत इस्तेमाल: बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए पैसों को कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य के बजाय दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किया। शेल कंपनियों का इस्तेमाल: फंड को इधर-उधर करने के लिए कई सब्सिडियरी और शेल (नकली) कंपनियों का सहारा लिया गया। फर्जी बिलिंग: सेल इनवॉइस फाइनेंसिंग का गलत इस्तेमाल हुआ और फर्जी बिलों के जरिए पैसे निकाले गए। कागजी देनदार: कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को बेहतर दिखाने के लिए फर्जी देनदार और रिसीवेबल्स खड़े किए और बाद में उन्हें राइट-ऑफ कर दिया। RCom ने संपत्तियों की वैल्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, RCom ने अपनी संपत्तियों यानी एसेट्स की वैल्यू को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। असल में उन संपत्तियों और उन पर लिए गए कर्ज के बीच कोई कनेक्शन नहीं था। CBI का कहना है कि इसी धोखाधड़ी की वजह से LIC को ₹3,750 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ है। क्या होते हैं नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs)? यह एक तरह का लोन इंस्ट्रूमेंट होता है जिसे कंपनियां जनता या संस्थाओं से पैसा जुटाने के लिए जारी करती हैं। इसमें निवेश करने वालों को एक तय दर से ब्याज मिलता है। इन्हें शेयरों में नहीं बदला जा सकता, इसलिए इन्हें ‘नॉन-कन्वर्टिबल’ कहा जाता है। ये खबर भी पढ़ें… अनिल अंबानी से दूसरे-दिन CBI-हेडक्वार्टर में 6 घंटे पूछताछ: SBI से ₹2,929 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला; पहले दिन 8 घंटे तक सवाल-जवाब हुए थे रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड यानी RCOM से जुड़े 2,929 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी शुक्रवार (20 मार्च) को दूसरे दिन की पूछताछ के लिए दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय पहुंचे। जांच अधिकारियों ने उनसे आज करीब 6 घंटे तक सवाल-जवाब किए। वे सुबह 10 बजे CBI मुख्यालय पहुंचे और वहां से शाम को 5.15 बजे निकले। इससे पहले गुरुवार को भी उनसे करीब 8 घंटे तक पूछताछ की थी। यह पूरी कार्रवाई SBI की शिकायत पर दर्ज की गई FIR के आधार पर की जा रही है। CBI ने यह आपराधिक मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, अनिल अंबानी और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ दर्ज किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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