Thursday, 17 Sep 2026 | 04:16 AM

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तांबे की बोतल की विषाक्तता: तांबे की बोतल में पानी पीने के हैं बहुत फायदे, लेकिन इन 3 चीजों को भूलकर भी ना खाएं सेहत को नुकसान

तांबे की बोतल की विषाक्तता: तांबे की बोतल में पानी पीने के हैं बहुत फायदे, लेकिन इन 3 चीजों को भूलकर भी ना खाएं सेहत को नुकसान

तांबे की बोतल विषाक्तता: इनवेस्टमेंट के लिए बोतल की बोतल में पानी पीने का चलन काफी बढ़ गया है। आयुर्वेद में प्लास्टिक की बोतलों में पानी की बोतलों का इस्तेमाल माना जाता है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग गलत कर रहे हैं। कई लोग टेम्पलेट में का पानी, जीरा पानी या फिर गर्म पानी के नारे रखते हैं। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। अगर आप भी कॉपर की बोतल का हमेशा इस्तेमाल करते हैं तो ये बातें आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। नींबू और जीरे में एसिडिटी होती है। जब भी रसायन की बोतल में डाला जाता है, तो ये कॉपर के साथ प्रतिक्रिया करके विषैले कॉपर साल्ट्स टूट जाते हैं। ये साल्ट्स पानी में घुस जाते हैं और शरीर में नुकसान पहुंचाते हैं। बोतल की बोतल में केवल न्यूनतम तापमान का पानी ही रखना चाहिए। इसमें कोई भी खट्टी या अम्लीय सामग्री नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इसके पानी में घुलनशील कॉपर लीचिंग काफी बढ़ जाती है। बोतल की बोतल में कभी भी गर्म या खाली पानी नहीं होना चाहिए। गर्म पानी में तांबे की मात्रा बहुत तेजी से बढ़ने लगती है, जिससे पानी में तांबे की मात्रा आरक्षित स्तर तक बढ़ सकती है। इसे कॉपर टॉक्सिसिटी कहा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। बोतल पर हरे निशान का क्या मतलब होता है यदि आपकी बोतल की बोतल के अंदर हरे रंग का निशान दिखाई दे रहा है, तो यह आयोडीनेशन का संकेत है। ये कॉपरेटिव सोलोमन्स होते हैं। बोतल के अंदर ऐसी परत जमने पर उसे अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है, अन्यथा यह स्वास्थ्य संबंधी समस्या खड़ी हो सकती है।जी मिचलाना, उल्टी आना, पेट में मरोड़ और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में यह ख़तरा और भी अधिक होता है क्योंकि उनके शरीर की तुलना में बच्चों में अधिक संवेदनशीलता होती है। बोतल की बोतल को सुरक्षित रखने का तरीका (टैग्सटूट्रांसलेट)तांबे की बोतल के साइड इफेक्ट्स(टी)तांबे के बर्तन से पानी पीना(टी)तांबा विषाक्तता के लक्षण(टी)स्वस्थ जीवन शैली युक्तियाँ(टी)आयुर्वेद जल युक्तियाँ(टी)तांबे की बोतल की सफाई(टी)क्या तांबे की बोतल में नींबू पानी सुरक्षित है(टी)तांबे के पानी के लाभ और जोखिम

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मॉर्निंग वॉक बनाम इवनिंग वॉक: कब टहलना है सबसे खतरनाक?

मॉर्निंग वॉक बनाम इवनिंग वॉक: कब टहलना है सबसे खतरनाक?

सुबह की सैर बनाम शाम की सैर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट रखने के लिए वॉक करना सबसे आसान और असरदार तरीका है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य के लिए सुबह चलना बेहतर है या इवानिंग वॉक? असल में, दोनों के अपने-अपने अलग-अलग फायदे हैं। आइये जानते हैं कि आपके लिए क्या सूची सही रहेगी। सुबह की सैर मेटाबॉलिज्म को तेज करने और पूरे दिन शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने का बेहतरीन तरीका है। ताजी हवा में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा आपके फेफड़े और मस्तिष्क के लिए बहुत अच्छी होती है। सुबह की धूप से मिलने वाला विटामिन-डी स्टॉक की सूची के लिए जरूरी है। जो लोग वजन कम कर रहे हैं, उनके लिए मॉर्निंग वॉक सबसे ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह शरीर की फैट बर्निंग प्रक्रिया को सुबह से ही सक्रिय कर देता है। साथ ही, यह आपके मूड को अच्छी रचना और मानसिक शांति प्रदान करता है। अगर आप सुबह जल्दी नहीं उठते हैं, तो शाम की सैर भी बहुत ही प्रभावशाली है। दिन भर की थकान और तनाव को दूर करने के लिए शाम की सैर एक बेहतरीन ‘स्ट्रेस बस्टर’ है। खाने के बाद फ्लेक्स वॉक पाचन क्रिया को सुधारा जाता है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। जिन लोगों को नींद की समस्या होती है, उनके लिए शाम की वॉक बॉडी को रिलैक्स करके गहरी नींद में सहायक होती है। वजन के लिए करें मॉर्निंग वॉक अगर आप वजन घटाना चाहते हैं तो आपके लिए मॉर्निंग वॉक सबसे बेस्ट है। मानसिक शांति के लिए इवानिंग वॉक अगर आप अपना तनाव कम करना चाहते हैं और अगर आपको नींद की कोई बीमारी नहीं है तो आपके लिए इवानिंग वॉक सबसे अच्छा है।

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कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है

आप कब तक कॉन्टैक्ट लेंस पहन सकते हैं: प्लांट के झंझट से बचने और अपने लुक को बेहतर बनाने के लिए कंसल्टेक्ट स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल काफी आम हो गया है। ऑफिस जाना हो, कोई पार्टी हो या फिर कॉलेज, बहुत से लोग रोज़ अपनी आँखों में प्लास्टिक लगाना पसंद करते हैं। यह तो शुरू हुआ है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक दिन या लगातार कई घंटों तक अपनी आंखें सुरक्षित रखें? तो जानें कि कंजेक्टेक्ट स्टॉक स्केल का सही तरीका और सुरक्षित समय क्या है। स्थिर को कितनी देर तक चलाना सुरक्षित है? आंखों के मूल्यांकन के अनुसार, कंसल्टैक्ट स्थिरता की एक निश्चित समय सीमा होती है। एक दिन में ज्यादातर 8 से 10 घंटे तक आपको हीकेंडेंट स्टेक-सेल्स की सुविधा मिलती है। कुछ विशेष प्रकार के सिलिकॉन सिलिकॉन जेल को 12 से 14 घंटे तक पहना जा सकता है, लेकिन यह आपके डॉक्टर की सलाह पर मान्य है।हमारी आंखों की पुतली को स्वस्थ रहने के लिए हवा से सीधे ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब हम लंबे समय तक स्टेरॉयड और लाल स्टॉल तक पहुंच गए, तो आंखों तक ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाई। कौन सा स्थिर उपकरण सोना सही है? यह सबसे बड़ी घटना एक है जो लोग अक्सर करते हैं। समय हमारे बंद हो गए हैं, और अगर अंदर स्टेकलेस लगा हो, तो आंखों को ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं मिलती। इससे आंखों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गंभीर मामलों में, जैसे कॉर्नियल अल्सर यानी आंखों की रोशनी पर घाव भी हो सकता है, जिससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है। अगर आपको झपकी भी लेनी है, तो पहले अपना स्थिरीकरण लें। किन बातों का रखना होगा खास तरीका? यदि आप नियमित रूप से इलेक्ट्रोस्टैटिक उपकरण रखते हैं, तो अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हाथों की सफाई: स्थिर को प्लास्टिक, ड्रेन या यूनिट से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोकर सुखा लें। सही समाधान का प्रयोग किया गया: स्थिर को साफ करने और स्टोर करने के लिए हमेशा अच्छे क्वालिटी के स्थिर समाधान का ही उपयोग करें। कभी भी पानी या प्लेस से प्लास्टिक को साफ न करें। पानी से दूरी: नहाते समय, पानी में तैरते समय या बारिश में भीगते समय, कभी भी स्थिर स्थिर स्थिर उपकरण। पानी में मौजूद स्थिर स्थिर उपकरणों से आंखों में गंभीर संक्रमण हो सकता है। मेकअप का सही तरीका: हमेशा पहले पोर्टेबल, और उसके बाद आंखों का मेकअप करें। इसी तरह, मेकअप हटाने से पहले हमेशा के लिए प्लास्टिक को हटा दें। इलेक्ट्रिकल की समाप्ति तिथि: हर स्थिर की एक लाइफ़ है। एक्सपायरी डेट के बाद कभी भी पुराने प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। डॉक्टर के पास कब जाएं? अगर आपको स्थिर दर्द या तकलीफ हो रही है या आंखें बहुत ज्यादा लाल हो गई हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसके अलावा अगर आपकी आंखें लगातार पानी में डूबी या खराब दिख रही हैं तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं। अगर आपकी आंखों में रोशनी कम हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इलेक्ट्रानिक इलेक्ट्रोस्टैटिक उपकरण पूरी तरह से सुरक्षित है, आप इसकी गुणवत्ता का सही से पालन करें। अपनी आंखों को आराम दें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और तय समय से ज्यादा न खरीदें। यह अवश्य पढ़ें: लौकी का जूस: किन लोगों को नहीं चाहिए लौकी का जूस? फायदे की जगह नुकसान हो सकता है; जानिए सेवन का सही तरीका अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

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कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं 'जड़ी-मजबूत की रानी' पद्मश्री यानुंग जामोह

कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह

कैंसर बहुत आम बीमारी बन गयी है। यह शरीर की ड्रिल में खराबी का कारण होता है। आम भारतीय घरों में जब तक इस बीमारी का पता चलता है, इलाज बहुत देर से होता है। इसका आधुनिक इलाज बहुत महंगा है और ज्यादातर केसों में पीड़ितों के बच निकलने की उम्मीद ना के बराबर है। एक पुरानी कहावत है “एल पैथी घाव पर मरहम है, तो आयुर्वेद और हर्बल जड़ से इलाज है।” अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध हर्बल चिकित्सक यानुंग जामोह लेगो (पद्म श्री यानुंग जामोह लेगो) स्वास्थ्य- उपचार और पारंपरिक चिकित्सा के मदद से कई दशकों से कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे प्लास्टिक चिकित्सक का इलाज कर रहे हैं। यानुंग जामोह लेगो को मिर्ज़ा- पारंपरिक चिकित्सा और खेती में उनके शानदार योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा 2024 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 3 लाख से अधिक मिलियन लोगों का इलाज किया है। इनमें कैंसर के कई मरीज भी शामिल हैं। उन्होंने पिता से सीखी पारंपरिक सामग्री-माता-पिता की मदद से पीड़ितों को राहत दी और कई मामलों में बीमारी को नियंत्रित करने या ठीक करने में सफलता पाई। यानुंग जमोह लेगो कौन हैं? यानुंग जामोह लेगो का जन्म 9 जुलाई 1963 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिका तोडे गांव में हुआ था। उनके पिता एक प्रसिद्ध लोक चिकित्सक थे। बचपन से ही उन्होंने पिता से चॉकलेट का इलाज बताया। उन्होंने असम कृषि विश्वविद्यालय से कृषि की पढ़ाई की। 1988 में यूक्रेन प्रदेश सरकार के कृषि विभाग में नौकरी शुरू हुई और 2023 में टूट गयी। लेकिन उनका असली जुनून हमेशा के लिए प्लांट मेडिसिन बना हुआ है। पिता के साथ 15 साल तक ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने लोगों का इलाज शुरू कर दिया। लाखों लोगों की जान बचाई यानुंग ने अब तक 3 लाख से ज्यादा गरीबों का इलाज किया है। इनमें कैंसर, कैंसर, उच्च रक्त रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियाँ शामिल हैं। वे सिर्फ सलाह नहीं देते, बल्कि शर्तिया को जड़ से खत्म करने पर जोर देते हैं। उनके इलाज से हजारों लोगों को नई जिंदगी मिली है। कैंसर के निदान हेतु सहायता यानुंग जामोह लेगो ने स्थानीय स्वाद- मसाले का इस्तेमाल करके कैंसर जैसे गंभीर सामानों को इकट्ठा करने में मदद की। उनके उपचार का आधार उनके वास्तुशिल्प पुराने पारंपरिक ज्ञान और यूक्रेनी प्रदेश की प्राकृतिक औषधि-बूटियां हैं। उन्होंने न सिर्फ इलाज किया, बल्कि बीमारी को रोकने के लिए भी लोगों से सलाह ली। उनका कहना है, सही प्रभाव- जड़ी-बूटियों के नियमित इस्तेमाल और स्वस्थ्य रसायन से शरीर के रोग विशेषज्ञ की क्षमता प्रबल होती है, जो कैंसर रोगियों से लेकर मांसपेशियों में कमजोरी तक हो सकती है। कैंसर जैसी तैलियाँ में आधुनिक स्त्रियाँ बहुत जरूरी हैं, लेकिन पारंपरिक बूटियों की भी सहायक भूमिका हो सकती है। लेगो ने बताया कि हमारे मित्र का ज्ञान आज भी कितना मूल्यवान है। 2009 में खास संस्था की शुरुआत हुई 2009 में उन्होंने “स्वदेशी हर्बल विरासत” नाम से एक संस्था बनाई। इस संस्था का उद्देश्य औषधीय विज्ञान की खेती को बढ़ावा देना और लोगों को हर्बल औषधि के बारे में सलाह देना है। अब तक 1 लाख से ज्यादा लोगों को प्लांट दवाओं के फायदे दिए जा रहे हैं। हर साल करीब 5,000 औषधीय नुस्खे सुझाए जाते हैं ताकि ये औषधि-बूटियां हमेशा उपलब्ध रहें। पहले भी मिल चुके हैं कई अवॉर्ड 2024 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे पहले 2019 में डेमोक्रेटिक प्रदेश राज्य पुरस्कार, 2007 में सृष्टि सम्मान पुरस्कार और 2013 में पारंपरिक वैद्यक रत्न पुरस्कार मिल चुका है। पद्म श्री पुरस्कार उनके दशकों की मेहनत और विरासत को दर्शाता है। यह बताता है कि हमारे देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आज भी बहुत उपयोगी और प्रभावशाली है। यानुंग जामोह लेगो हमें सिखाता है कि पुराने ज्ञान को आधुनिक तरीकों से अपनाकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं। वे सिर्फ इलाज नहीं करते हैं, बल्कि आने वाली दवाओं के लिए औषधीय औषध से भी छुटकारा पाने का काम कर रही हैं। अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में पाई जाने वाली लाल-बूटियां प्राकृतिक हैं और कई प्लास्टिक में कमाल साबित हुई हैं। इसका इस्तेमाल सही तरीके से और अनुभवी व्यक्ति की राय में करना चाहिए। यदि आप या आपके परिवार में कोई कैंसर जैसी बीमारी चल रही है, तो डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा के बारे में भी जानकारी लें। लेकिन याद रखें- बिना विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी इलाज शुरू न करें। ये भी पढ़ें: सास-ससुर के बाद मां-बाप को दिखे चकाचौंध पड़े अरमान आमिर की पहली पत्नी पायल के दोस्त, उनकी कृतिका के छूटे आंकड़े- वीडियो (टैग अनुवाद करने के लिए)पद्म श्री यानुंग जामोह लेगो(टी)पारंपरिक हर्बल चिकित्सा विशेषज्ञ(टी)कैंसर हर्बल उपचार(टी)कैंसर उपचार के लिए हर्बल थेरेपी(टी)यानुंग जामोह लेगो(टी)पद्म श्री 2024(टी)अरुणाचल प्रदेश हर्बल हीलर(टी)पारंपरिक चिकित्सा भारत(टी)आदि जनजाति हर्बल ज्ञान(टी)हर्बल उद्यान आंदोलन

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लव बाइट: लव बीटा कब होता है, किस समय का लाभ लेना बेहद जरूरी है? जानिए सब कुछ

लव बाइट: लव बीटा कब होता है, किस समय का लाभ लेना बेहद जरूरी है? जानिए सब कुछ

लव बाईट (लव बाइट या हिक्की) के बारे में तो हर कोई जानता होगा। इनसाइड के बीच पियाटर को स्पष्ट करने का आसान तरीका बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा सा निशान आपकी जान का दुश्मन बन सकता है? यह शायद आपको पता चल गया हो, लेकिन स्थिरता से मुंह मोड़ने में जरा भी समझदारी की बात नहीं है। तो आइए सबसे पहले कहते हैं लव बीटा क्या होता है और कैसे बनता है। लव बेबा का कहना है कि जो लंबे समय तक किसी भी तरह की त्वचा पर क्रीड़ा या फूल से बनी रहती है। यह त्वचा के नीचे की ओर छोटे पत्थर के टुकड़े और खून के जमाव से लाल-घरा दाग दिखता है। आमतौर पर यह मामूली घाव होता है जो कुछ दिनों से आपके लिए ठीक हो जाता है। यह कब सामान्य है और कब खतरा है? छोटे हिक्की आम होते हैं, दर्द होता है और रंग कुछ दिनों में खराब हो जाता है। ज्यादातर मामलों में किसी तरह का कोई खतरा नहीं होता। लेकिन जब निशान बहुत गहरे या नीले-नीले रंग के हों तो सावधान रहना चाहिए। निशान के आसपास सूजन बहुत अधिक हो। या फिर बोल में चक्कर आना लगे, सिरदर्द हो या शरीर के किसी भी हिस्से में झुनझुनी/सूनापन हो, चाल में परेशानी हो या किसी भी तरह की अचानक दुर्बलता महसूस हो तो डॉक्टर के डॉक्टर को दिखाना चाहिए। लवबेबी से कैसे जान पर खतरा मुखिया पर अधिक दबाव: गर्दन में कैरोटिड धमनी जैसी प्रमुख धमनियाँ होती हैं। बहुत जोर से और लंबे समय तक क्रीड़ा या स्क्रैच से इन धमनियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। धमनी की क्षति या फटना: दुर्लभ लेकिन संभव है कि अंदर की कोई धमनियां या नसें फैट। इससे खून का थक्का बन सकता है या खून के अंदर दबाव डाला जा सकता है। थक्का ब्रेन उभर कर आया (इस्केमिक स्ट्रोक): अगर किसी स्थान पर थक्का बना है और वह खून के साथ दिमाग की तरफ चला जाए तो दिमाग में रक्त का प्रवाह रुक सकता है। जिससे स्ट्रोक हो सकता है। ऐसी स्थिति चक्कर आना, अचानक बेहोशी, घुटने में दर्द, चेहरे की मुद्रा जैसी दिखाई देती है। ब्रांड का फटना और तेजी से टूटना: नाक के अंदर गंभीर दबाव से चर्बी हो सकती है, जिससे तेजी से खून बह सकता है और रक्तचाप में गिरावट/हृदय की दर पर असर पड़ सकता है। प्रारंभिक घरेलू उपचार (जब मार्क मार्जिन हो) तुरंत बर्फ़ की सिकाई: शुरुआत में 24-48 घंटे में बर्फ (कपड़े में लपेटकर) 10-15 मिनट के अंतराल पर 3-4 बार सूजन और दर्द कम हो जाता है। सीधी बर्फ त्वचा पर न रखें। 48-72 घंटे बाद गर्म सिकाई: प्रारंभिक सूजन कम होने पर प्रभाव गर्म-साधन (गर्मी का कपड़ा या हीट पैड, 10-15 मिनट) गठन से रक्त सर्कोलेशन बढ़ता है और तेजी से पीलिया के रूप में रंग के अवशोषण में मदद मिलती है। कब डॉक्टर का परिचय (इमरजेंसी संकेत) चक्कर आना, सिरदर्द या सिरदर्द महसूस होना। शरीर या शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक सुन्नपन या कमजोरी। अकेले या अलग होने में, चेहरे के एक हिस्से का झटकाना। घाव से तेज़ खून बहना या लगातार बढ़ता दर्द। इसे भी पढ़ें- अज्ञात राजघराने में सौतन विवाद, बाबा राजा की पहली पत्नी ने दूसरी बार मारी गोली, खूनी संघर्ष से कांप उठा राजपरिवार

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यूरिक एसिड कम करने के लिए खाद्य पदार्थ: यूरिक एसिड कम करना है तो इन 8 आदतों को आज ही शामिल करें, तुरंत मिलेगा आराम

यूरिक एसिड कम करने के लिए खाद्य पदार्थ: यूरिक एसिड कम करना है तो इन 8 आदतों को आज ही शामिल करें, तुरंत मिलेगा आराम

यूरिक एसिड कम करने के लिए खाद्य पदार्थ: टाइफाइड लाइफस्टाइल और खान-पान की गलत धारणा के कारण आज के समय में यूरिक एसिड की समस्या आम हो गई है। शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक होने से जोड़ों में दर्द, सूजन और सूजन-बैठने की समस्या हो जाती है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए, तो यह गठिया बन जाता है। अच्छा यह है कि सही आहार अपनाकर आप प्राकृतिक रूप से यूरिक एसिड की बात कम कर सकते हैं। आइये आपको इस लेख में यूरिक एसिड के बारे में कुछ ऐसे ही सैद्धांतिक विचारों के लिए बताते हैं। जिससे आप अपने शरीर को डिटॉक्स कर सकते हैं और यूरिक एसिड से रेचक पा सकते हैं। प्रतिदिन पीएंमेल पानी टेम्पलेट में साइट्रिक एसिड होता है, जो यूरिक एसिड को ग्लूकोज़ने में मदद करता है। प्रतिदिन सुबह गुणगुणे पानी में नींबू का सेवन करने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। रोज़ पीसेब का सिरका यह क्लींजर का काम करता है। एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच सिरका मिलाकर पीने से शरीर का पीएच स्तर स्थिर रहता है। चेरी और बेरीज़ स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और चेरी में ‘एंथोसाइनिन’ नामक तत्व होता है, जो सूजन को कम करता है और यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने में जादुई प्रभाव डालता है। प्रतिदिन पीएं ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में सहायक होता है। यूरिक एसिड कम करने के लिए सामान्य समाधान रामबाण के लिए यूरिक एसिड का पानी। रात भर पानी में भीगी वस्तु का खाली पेट सेवन करना काफी आरामदायक है। अन्य खाने से होगा फ़ायदा ओट्स में सबसे बड़ी मात्रा होती है। यह शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को जानने और उसे शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। खेडा और गाजर प्रभावी गाजर और गाजर का रस शरीर को सीरमयुक्त करता है और यूरिक एसिड की अतिरिक्त मात्रा को बाहर निकालने में मदद करता है। खाने में जैतून के तेल का इस्तेमाल करें खाना पकाने के लिए जैतून के तेल का उपयोग करें। इसमें मौजूद विटामिन-ई और एंटीऑक्सीडेंट सूजन कम करने में सहायक होते हैं। ये भी पढ़ें – शिव राजयोग 2026: 24 जून से बन रहा है शिव योग, इन 6 राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ; भाग्य का दरवाजा खुलना बंद हो गया (टैग्सटूट्रांसलेट)यूरिक एसिड(टी)उच्च यूरिक एसिड(टी)यूरिक एसिड कम करने वाले खाद्य पदार्थ(टी)यूरिक एसिड आहार(टी)यूरिक एसिड(टी)यूरिक एसिड सामग्री(टी)यूरिक एसिड नियंत्रण(टी)गाउट(टी)गाउट आहार(टी)कम प्यूरीन आहार

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शिगेला संक्रमण के लक्षण: केरल में शिगेला बीमारी का खतरा, जानिए क्या हैं उपाय, लक्षण और बचाव के उपाय

केरल में शिगेला संक्रमण: केरल में एक बार फिर स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कोज़ोकोड में शिगेला संक्रमण से एक 4 साल के बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से ठीक है। छोटे बच्चों में इस बीमारी के गंभीर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए सभी माता-पिता को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। तो जानें कि आखिर ये शिगेला क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और हम अपने परिवार को इससे कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। शिगेला संक्रमण क्या है? शिगेला एक अत्यंत संक्रामक निरपेक्ष संक्रमण है, जो मुख्य रूप से हमारे बड़े आंत को नुकसान पहुंचाता है। यह बीमारी दुनिया भर में डायरिया से जुड़ी प्रमुख वैज्ञानिक चुनौती में से एक है। यह रेस्तरां बहुत तेजी से विकसित होता है। छोटी सी भी गंदगी, सुपरमार्केट पानी या किसी पैट व्यक्ति के संपर्क में आकर यह आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है। जिन स्थानों पर साफ-सफाई की कमी होती है, वहां इस बीमारी के दुष्प्रभाव का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। शिगेला के मुख्य लक्षण अगर किसी को होता है शिगेला का संक्रमण तो आमतौर पर दिखते हैं ये लक्षण। दस्त: यह इसका सबसे आम लक्षण है। कुछ गंभीर मामलों में दस्त के साथ खून भी आ सकता है। पेट में दर्द: पेट में तेज ऐंठन और मरोड़ उठना। बुख़ार और कमज़ोरी: तेज बुखार के साथ जी मिचलाना और उल्टी होना। डिहाइड्रेशन: लगातार उल्टी-दस्त से शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है, जो खतरनाक साबित हो सकती है और मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इस बीमारी से सबसे ज्यादा खतरा होता है। केरल में अभी क्या हालात हैं? राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के अनुसार, केरल में अब तक शिगेला के 126 मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। कोज़ोकोड मेडिकल कॉलेज में तीन बच्चों की भर्ती की गई थी। इनमें से दो बच्चे ठीक होकर घर जा चुके हैं, लेकिन थलाकुलथुर की रहने वाली एक बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। वायनाड और सुल्तान बथेरी जैसे 164 छात्रों में भी उल्टे-दस्त के लक्षण मिलते हैं। हालाँकि, अभी जांच की जा रही है कि यह शिगेला ही है या कोई अन्य पेट का संक्रमण है। केरल में बार-बार संक्रामक रोग क्यों फैलते हैं? निपाह वायरस, ब्रेन-ईटिंग अमीबा, लेप्टोस्पायरोसिस, मेडिकल-ए और अब शिगेला केरल में लगातार ऐसी खतरनाक बीमारी क्यों आती है? विशेषज्ञ के अनुसार इसके कुछ मुख्य कारण हैं। मासूम और इंसानी जादू की दूरबीन: दक्षिण भारत में वनों की कटाई और तेजी से हो रही शहरी प्रकृति के कारण जंगली जानवर और इंसान बहुत करीब आ गए हैं। इससे जुड़े में मैथ्यू वाले वायरस और दुष्ट इंसानों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। बहस और मौसम: यहां के मौसम और बारिश भारी के कारण मच्छर, स्कूटर और अन्य संक्रमण फैलने वाले वाहक तेजी से बढ़ते और फैलते हैं। डिज़र्व के क्या उपाय हैं? शिगेला से डरने की नहीं, बल्कि निर्वाह की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण को रोकने के लिए कुछ बेहद आसान लेकिन जरूरी सावधानियां बताई हैं। पानी की खुराक: हमेशा पानी को अच्छी तरह से पसंद करें और उसे ठंडा करके ही पिएं। साफ-सफाई का खास ध्यान रखें: अपने आस-पास के गोदाम न जमा होने दें। शौच के बाद और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह से बदलें। निःसंदेह से अस्वीकृत: बाहर का खुला पानी, कोलोराडो जल भंडार और भंडारगृह में भोजन का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित। यह अवश्य पढ़ें: देसी Vs हाईब्रिड खीरा: बाजार में धोखा तो नहीं खा रहे? इन 3 सबसे आसान मासूम से झट से पहचानें देसी और संकर खीरा; जानिए फायदे अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

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वजन घटाने से लेकर ग्लोइंग स्किन तक के लिए बेस्ट है ये एक चीज, जानें कब और कैसे उपयोगी

वजन घटाने से लेकर ग्लोइंग स्किन तक के लिए बेस्ट है ये एक चीज, जानें कब और कैसे उपयोगी

आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम सभी अपनी सेहत और सुंदरता को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं। हम अक्सर ऐसे ही इंसानों की तलाश में रहते हैं जो स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी आशीर्वाद देते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद दो साइंटिफिक एनिमिया का कॉम्बिनेशन एक ‘सुपरफूड’ की तरह काम कर सकता है? अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर बेदाग और ग्लोइंग त्वचा की चाह रखते हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन और दमदार साबित हो सकता है। अब ऐसे में इसे किस तरह और कब खाना है? आइए जानते हैं। ओट्स बेरबेरी, विशेष रूप से ‘बीटा-ग्लूकन’ से अधिक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह भूखा लंबे समय तक पेट भरने का एहसास कराता है, जिससे भूख संतुलित नहीं रहती और वजन नियंत्रित रहता है। वहीं, एचआईवी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-डिजिटल गुण न केवल आपकी इम्युनिटी को दिखाते हैं, बल्कि शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहरी त्वचा को अंदर से प्राकृतिक चमक देते हैं। अक्सर हम सुबह के विज्ञापन में भारी-भरकम चीजें खा जाते हैं जो बाद में वजन बढ़ने का कारण बनती हैं। ओट्स का कम ग्लाइसेमिक ग्लूकोज़ लेवल में अचानक वृद्धि शुरू हो गई है। जब आप ओट्स में समग्र समीक्षा करते हैं, तो यह दिन भर ऊर्जावान बना रहता है। रात भर शहद में भीगे हुए ओट्स का सेवन करने से पाचन क्रिया में सुधार होता है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जो वजन के लिए फायदेमंद साबित होता है। ओट्स में मौजूद हैं जिओन और फिजिक्स के ग्रैजुएट गुण स्किन को मान्यता प्राप्त हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से त्वचा की रंगत साफ होती है और कील-मुंहों जैसी समस्याओं में भी कमी आती है। हाफ कप रोल्ड ओट्स लें में एक जार या बाउल। इसमें एक बड़ा मैगनेट शुद्ध शहद शामिल है। अब थोड़ा सा दूध या दही खरीदें। आप शुरुआत कर सकते हैं तो इसमें सीधे तौर पर ड्रूअल डॉक्स या चिया सीड्स भी डाल सकते हैं।इसे रात भर के लिए फ़्रिज़ में रख दें। सुबह तक ओट्स प्राकृतिक हो जाएंगे और शहद के पोषक तत्वों को पूरी तरह से सोख लेंगे।इसे सुबह खाली पेट या खाने के रूप में करना सबसे प्रभावशाली होता है।

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Liver Swelling: लीवर की सूजन से संबंधित चिंताएं? इनसाइड में शामिल हैं ये 6 सुपरफूड्स

Liver Swelling: लीवर की सूजन से संबंधित चिंताएं? इनसाइड में शामिल हैं ये 6 सुपरफूड्स

लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो डिटॉक्स से लेकर पाचन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने तक का काम करता है। इस भाग में भागदौड़ भरी जिंदगी, अनहेल्दी खान-पान और खराब जीवनशैली के कारण ‘लिवर की सूजन’ एक आम समस्या बन गई है। यदि इसे समय पर नियंत्रित न किया जाए, तो यह टेम्परेचर लिवर या गंभीर लिवर का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं उन 6 सुपरफूड्स के बारे में जो लिवर की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेट्री लिवर में होने वाली सूजन को कम करने और जोड़ों को नुकसान से उबरने में मदद करती है। रात को गुनगुने दूध में पिंच भर हल्दी प्लांट लिवर के लिए बहुत जादुई है। लहसुन में लिवर के एंजाइम्स सक्रिय हो जाते हैं। यह लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे सूजन तेजी से कम हो जाती है। चुकंदर में ‘बीटालिन्स’ नामक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो लिवर के डिटॉक्स एसोसिएटेड को बढ़ावा देते हैं। इसका कच्चा ढांचा या इसे कीक के रूप में शामिल करना लिवर की सूजन को रामबाण में साबित कर सकता है। पालक, मेथी और ब्रोकली जैसे स्ट्रॉबेरी और विटामिन-के बेहतरीन स्रोत हैं। ये लिवर में फटाफट जाम होने से रोकती हैं। ओमेगा-3 में ओमेगा-3 एसिडिटी और ग्लूटाथियोन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व लिवर को साफ करने और लिवर की समस्या को कम करने में मदद करते हैं। दिन में एक समुद्री डाकू समुद्र तट का सेवन लिवर के लिए मज़ेदार है। ग्रीन टी में मौजूद ‘कैटेचिन’लिवर में जाम को कम करने में मदद मिलती है। हालाँकि, दिन में 1-2 कप ही सेवन करें। (टैग्सटूट्रांसलेट)लिवर फैटी फूड्स(टी)स्वस्थ लिवर के लिए खाद्य पदार्थ(टी)फैटी लिवर में क्या खाएं(टी)फैटी लिवर के लिए खाद्य पदार्थ ग्रेड 1(टी)फैटी लिवर के लिए आहार योजना ग्रेड 1(टी)फैटी लिवर में शाकाहारी क्या खाएं(टी)अल्कोहलिक फैटी लिवर में क्या खाएं(टी)फैटी लिवर में क्या खाना चाहिए(टी)फैटी लिवर के लिए खाद्य पदार्थ

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पेट फूलना, एसिडिटी के उपाय: पेट फूलना जैसा फूल? गैस से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय

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सूजन अम्लता के उपचार: अक्सर हम पेट फूलना, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को बहुत ही इच्छाओं में लेते हैं। हमें लगता है कि शायद आज का खाना थोड़ा सा था, या फिर देर से खाना खाया, या फिर खाने के समय में कुछ गड़बड़ी हो गई। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सामान्य दिखने वाले लक्षण किसी गंभीर कमी के संकेत हो सकते हैं? बार-बार गैस बनाना केवल आपके खान-पान की गलती नहीं है, बल्कि शरीर में कुछ जरूरी विटामिन और तत्वों की कमी का परिणाम भी हो सकता है। आइए जानते हैं। पाचन तंत्र को सही से संचालित करने के लिए विटामिन बी12 अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल हमारे नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी है, बल्कि पेट की लाइनिंग भी स्वस्थ है। इसके कम होने से पाचन प्रक्रिया सामान्य हो जाती है, जिससे पाचन, पेट में भारीपन और गैस की समस्या बनी रहती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि साल में कम से कम एक बार अपने शरीर में विटामिन के स्तर की जांच अवश्य करवानी चाहिए। विटामिन डी को ‘सनशाइन विटामिन’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन इसका असर केवल यौगिकों तक ही सीमित नहीं है। विटामिन डी का सीधा संबंध हमारी कंपनी के स्वास्थ्य से है। यह शरीर में सूजन को कम करने का काम करता है। विटामिन डी की कमी से खुजली में जलन हो सकती है, जिससे गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। मैग्नीशियम हमारे शरीर में एक जरूरी जगह है। मैग्नीशियम हमारे पेट के मसालों को आराम देने में मदद करता है। अगर शरीर में इसकी कमी हो जाए, तो पेट की मांसपेशियां ठीक से रिलैक्स नहीं हो पातीं, जिससे गैस और ब्लोटिंग का रिसाव मुख्य रूप से होता है। गैस की समस्या से बचने के लिए करें ये काम विटामिन बी12 और डी की कमी को पूरा करने के लिए मांसाहारी लोग अंडा, मछली और मीट का सेवन कर सकते हैं। वहीं, शाकाहारी लोग अपने आहार में दूध, दही, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों को शामिल करते हैं।दही और छाछ को अपने अन्तर्विषय का नियमित हिस्सा बनायें। ये प्रोबायोटिक्स के रूप में काम करते हैं और पेट में ‘गुड क्रिएटर’ की मात्रा पचाने में सहायक होते हैं।कार्बोहाइड्रेट पाचन के लिए अच्छा है, लेकिन इसका बहुत अधिक या बहुत कम सेवन भी गैस का कारण बन सकता है। धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे की मात्राअगर आप जड़ी-बूटी वाली चीजें ले जा रहे हैं या फिर मंजीले ले जा रहे हैं तो पानी न भूलें। क्योंकि पर्याप्त पानी के बिना स्टार्च का जन्म हो सकता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)किस विटामिन की कमी से पेट में गैस बनती है(टी)क्या मल्टीविटामिन गैस और सूजन का कारण बन सकते हैं(टी)दवाओं के कारण होने वाली गैस से कैसे छुटकारा पाएं(टी)ब्लड प्रेशर की दवाएं जो गैस का कारण बनती हैं(टी)कौन से विटामिन गैस और सूजन का कारण बनते हैं(टी)दवाएं जो सूजन और वजन बढ़ाती हैं(टी)क्या विटामिन बी12 की कमी से गैस्ट्राइटिस हो सकता है(टी)क्या विटामिन डी गैस और सूजन का कारण बनता है(टी)कौन से विटामिन सबसे अधिक कारण बनते हैं गैस(टी)किस विटामिन की कमी से गैस बनती है

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