Saturday, 25 Jul 2026 | 04:57 PM

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नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:सरकार ने नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया; इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया

नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:सरकार ने नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया; इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया

नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय मानचित्र हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। कैबिनेट ने नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) की नई डिजाइन को मंजूरी देने से इनकार करते हुए संशोधन के लिए वापस भेज दिया। सरकार ने निर्देश दिया है कि नए सिक्के पर लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर के साथ नेपाल का आधिकारिक राष्ट्रीय मानचित्र भी शामिल किया जाए। यही वह मानचित्र है, जिसमें भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। यह जानकारी सरकारी अधिकारियों और नेपाल राष्ट्र बैंक के अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। नेपाल राष्ट्र बैंक की नोट और सिक्का डिजाइन समिति ने एक रुपये के सिक्के पर मुस्तांग के ऐतिहासिक लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था। NRB बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसे वित्त मंत्रालय के जरिए अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिपरिषद के पास भेजा गया था। 22020 के नक्शे के बाद उठा विवाद नेपाल ने 2020 में संविधान संशोधन के जरिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया था। इसके बाद यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, 1 और 2 रुपये के सिक्कों तथा 100 रुपये के नोट पर इस्तेमाल हो रहा है। नए प्रस्ताव की जानकारी सामने आते ही सवाल उठने लगे कि सिक्के से राष्ट्रीय मानचित्र हटाने का क्या संदेश जाएगा। हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक और प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसी भी राजनीतिक मंशा से इनकार किया है। NRB बोला- बौद्ध विरासत को भी देना चाहते थे जगह अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। मकसद करेंसी पर सांस्कृतिक विरासत को संतुलित तरीके से दिखाना था। NRB का कहना है कि मौजूदा नोटों और सिक्कों पर पशुपतिनाथ और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक स्थल हैं, जबकि बौद्ध विरासत कम दिखाई देती है। इसी वजह से नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में शामिल लो घेकर मठ को चुना गया। इससे मुस्तांग में पर्यटन बढ़ने की भी उम्मीद है। अब सिक्के की सिर्फ डिजाइन नहीं, धातु भी बदलेगी नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय मानचित्र और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपये के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। फिलहाल एक रुपये का सिक्का बनाने में 2 रुपये से ज्यादा खर्च आता है। लागत कम करने के लिए इसे सफेद धातु से बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 10 रुपये के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

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नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:सरकार ने नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया; इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया

नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:सरकार ने नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया; इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया

नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। कैबिनेट ने नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) की नई डिजाइन को मंजूरी देने से इनकार करते हुए संशोधन के लिए वापस भेज दिया। सरकार ने निर्देश दिया है कि नए सिक्के पर लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर के साथ नेपाल का आधिकारिक राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाए। यही वह नक्शा है, जिसमें भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। यह जानकारी सरकारी अधिकारियों और नेपाल राष्ट्र बैंक के अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। नेपाल राष्ट्र बैंक की नोट और सिक्का डिजाइन समिति ने एक रुपये के सिक्के पर मुस्तांग के ऐतिहासिक लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था। NRB बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसे वित्त मंत्रालय के जरिए अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिपरिषद के पास भेजा गया था। 22020 के नक्शे के बाद उठा विवाद नेपाल ने 2020 में संविधान संशोधन के जरिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को आधिकारिक नक्शा में शामिल किया था। इसके बाद यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, 1 और 2 रुपये के सिक्कों तथा 100 रुपये के नोट पर इस्तेमाल हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। मकसद करेंसी पर सांस्कृतिक विरासत को संतुलित तरीके से दिखाना था। NRB का कहना है कि मौजूदा नोटों और सिक्कों पर पशुपतिनाथ और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक स्थल हैं, जबकि बौद्ध विरासत कम दिखाई देती है। इसी वजह से नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में शामिल लो घेकर मठ को चुना गया। इससे मुस्तांग में पर्यटन बढ़ने की भी उम्मीद है। अब सिक्के की सिर्फ डिजाइन नहीं, धातु भी बदलेगी नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय नक्शा और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपये के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। फिलहाल एक रुपये का सिक्का बनाने में 2 रुपये से ज्यादा खर्च आता है। लागत कम करने के लिए इसे सफेद धातु से बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 10 रुपये के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचार चल रहा है।

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वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया; 30 दिन बाद लागू होगा फैसला

वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया; 30 दिन बाद लागू होगा फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% नया टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। नया टैरिफ 30 दिन बाद लागू होगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक एनर्जी, पोटाश और पहले से सेक्टर-विशेष टैरिफ के दायरे में आने वाले उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। सबसे अहम बात यह है कि USMCA (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता) के तहत आने वाले कई उत्पाद भी अब इस नए टैरिफ के दायरे में आएंगे। ट्रम्प ने इस फैसले के लिए 1930 के टैरिफ एक्ट की धारा-338 का इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहली बार इस प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के साथ बातचीत तेज करने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पहले भी USMCA का उल्लंघन करते हुए एकतरफा टैरिफ लगाता रहा है और कनाडा ने सिर्फ उसका जवाब दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला अमेरिका-कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ा सकता है। अमेरिकी शराब उद्योग ने भी चिंता जताई है कि जवाबी कार्रवाई से दोनों देशों के कारोबार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर असर पड़ सकता है।

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वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया; 30 दिन बाद लागू होगा फैसला

वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया; 30 दिन बाद लागू होगा फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% नया टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। नया टैरिफ 30 दिन बाद लागू होगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक एनर्जी, पोटाश और पहले से सेक्टर-विशेष टैरिफ के दायरे में आने वाले उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। सबसे अहम बात यह है कि USMCA (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता) के तहत आने वाले कई उत्पाद भी अब इस नए टैरिफ के दायरे में आएंगे। ट्रम्प ने इस फैसले के लिए 1930 के टैरिफ एक्ट की धारा-338 का इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहली बार इस प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के साथ बातचीत तेज करने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पहले भी USMCA का उल्लंघन करते हुए एकतरफा टैरिफ लगाता रहा है और कनाडा ने सिर्फ उसका जवाब दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला अमेरिका-कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ा सकता है। अमेरिकी शराब उद्योग ने भी चिंता जताई है कि जवाबी कार्रवाई से दोनों देशों के कारोबार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर असर पड़ सकता है।

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Houthi Rebels Blockade Red Sea

Houthi Rebels Blockade Red Sea

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी7 मिनट पहले कॉपी लिंक यमन की राजधानी सना में ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों के समर्थक रैली निकालते हुए। अमेरिका ने मंगलवार को लगातार 10वीं रात ईरान के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, चाबहार और कोनारक समेत कई इलाकों में विस्फोट हुए। दूसरी ओर, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने हाल के घंटों में कुवैत के कैंप अरिफजान में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर तैनात HIMARS मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। उधर, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। हूतियों ने कहा कि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को सऊदी जहाजों के लिए बंद किया जाएगा और उनके सारे जहाज हमारे निशाने पर रहेंगे। यह जलमार्ग लाल सागर का एंट्री गेट है, जहां से दुनिया का करीब 10% वैश्विक व्यापार गुजरता है। ईरान जंग से जुड़े सभी अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 18 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान पर लगातार 10वीं रात अमेरिकी हमले अमेरिका ने सोमवार रात लगातार 10वीं बार ईरान के कई इलाकों पर हवाई हमले किए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिक, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, चाबहार और कोनारक के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौत का ईरान को कई गुना ज्यादा जवाब दिया जाएगा। पिछले एक सप्ताह में कम से कम तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Australia Punjabi Truck Driver Racist Attack & Threats

Australia Punjabi Truck Driver Racist Attack & Threats

ऑस्ट्रेलिया में सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर संभालने में भूमिका ड्राइवरों की अहम भूमिका है। ऑस्ट्रेलिया में रोजी-रोटी कमाने गए भारतीय खासकर पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवरों को नस्लीय दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी बोलने पर ट्रक ड्राइवर पर थूका गया। रेडियो पर पत्नियों को गुलाम . ऑस्ट्रेलियाई मीडिया संस्थान ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ड्राइवरों को पगड़ी पहनने और आपस में पंजाबी में बात करने पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऑस्ट्रेलियन ट्रकिंग एसोसिएशन (ATA) और नेशनल हेवी व्हीकल रेगुलेटर (NHVR) ने इस तरह के व्यवहार की निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का मानसिक तनाव ड्राइवरों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। इससे उनका ध्यान बंटता है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के ठीक बाद ऑस्ट्रेलिया के के गृह मंत्री टोनी बर्क ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बर्क ने माना कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों और ट्रकों के अंदर इस्तेमाल होने वाले सीबी रेडियो पर भारतीय ड्राइवरों को निशाना बनाना एक कड़वी सच्चाई है। बता दें, ऑस्ट्रेलिया में 5 हजार के करीब पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवर हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने सरकारी कागजों में अपनी मातृ भाषा पंजाबी लिखवाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि असल संख्या 7 से 8 हजार के करीब हो सकती है। सिख ड्राइवरों पर इस तरह की नस्लीय टिप्पणियां की जा रही हैं। धमकी भरे ऑडियो में क्या कहा गया इंस्टाग्राम पर यह ऑडियो क्रिएटर एगी (@babysoftarms) ने शेयर किया है। यह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) की जांच का हिस्सा है। ट्रक ड्राइवरों के बीच रेडियो पर आमतौर पर सड़क सुरक्षा या रूट की बात होती है, लेकिन इस क्लिप में नफरत भरी आवाजें आ रही हैं। एक व्यक्ति कहता है- भारतीयों को मार डालो। श्वेत आदमी के लिए खड़े हो। गृह युद्ध आने वाला है। हम सभी भारतीय पुरुषों को मार डालेंगे, उनके बच्चों को पानी में डुबो देंगे और उनकी औरतों को गुलामी के लिए बेच देंगे। लहजे के आधार पर गालियां ABC की रिपोर्ट में कई भारतीय ड्राइवरों ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों पर नस्लवाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। एक ड्राइवर ने कहा कि अगर आपका लहजा ऑस्ट्रेलियाई है तो कोई समस्या नहीं, लेकिन अगर पंजाबी या भारतीय अंदाज में बोलते हो तो रेडियो पर भारी गालियां मिलती हैं। इन लगातार धमकियों से परेशान होकर कई भारतीय ड्राइवरों ने रेडियो का इस्तेमाल करना ही छोड़ दिया है। वे अब इस तरह की बातचीत से दूर रहते हैं। पंजाबी ड्राइवर जसविंदर बोपाराय अपनी बात बताते हुए। पंजाबी ड्राइवरों ने ये दिक्कतें बताईं… फोन पर पंजाबी बोली तो थूक दिया: ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ड्राइवरों को पगड़ी पहनने और आपस में पंजाबी में बात करने पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में एक ट्रक स्टॉप पर 2 हफ्ते पहले जब एक पंजाबी ड्राइवर जसविंदर बोपाराय फोन पर अपनी पत्नी से पंजाबी में बात कर रहे थे, तो उस पर एक शख्स ने थूक दिया। थूकने से पहले उसे कहा कि ये ऑस्ट्रेलिया है, यहां इंग्लिश में बात करो। ये बात खुद बोपाराय ने मीडिया को बताई। नस्लीय दुर्व्यवहार झेलना पड़ रहा: उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी घटना है जिसे वह कभी नहीं भूल सकते, क्योंकि यह बेहद अपमानजनक थी। दो बच्चों के पिता और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बोपाराय ने बताया कि परिवहन उद्योग में एक दशक से अधिक समय तक काम करने के दौरान उन्हें जितना नस्लीय दुर्व्यवहार अब झेलना पड़ रहा है, वह उनके पूरे करियर में सबसे खराब है। वह एक छोटी ट्रकिंग कंपनी संचालित करते हैं। नस्लीय टिप्पणियों के चलते छोड़ी नौकरी: अन्य ट्रक चालक नरिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने न्यूजीलैंड में 10 वर्षों तक ट्रक चलाने का अनुभव होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के माल परिवहन उद्योग में केवल 8 महीने काम करने के बाद नौकरी छोड़ दी। उन्होंने ABC को बताया कि उन्हें नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, पगड़ी पहनने को लेकर उनका मजाक उड़ाया गया और कार्यस्थल पर छोटी-छोटी गलतियों के बाद उन्हें बार-बार अपने देश वापस जाओ जैसी बातें कही गईं। ट्रक ड्राइवर पिप्पल सिंह ने रेडियो पर मिलने वाली धमकियों की बात बताई। रेडियो का गलत इस्तेमाल हो रहा: ट्रक चालक पिप्पल सिंह ने बताया कि उन्होंने सीबी रेडियो चैनलों पर भारतीयों के खिलाफ हिंसक धमकियां प्रसारित होते हुए सुनी हैं। इनक उपयोग ट्रक ड्राइवर आमतौर पर सड़क सुरक्षा संबंधी जानकारी शेयर करने के लिए करते हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई ड्राइवरों ने डर के मारे गाड़ी चलाते समय रेडियो ऑन करना ही बंद कर दिया है। रेडियो पर कहा जा रहा है कि जल्द ही गृहयुद्ध आएगा, हम सभी भारतीय पुरुषों को मार डालेंगे और बच्चों को डुबो देंगे। भारतीय ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार क्या कर रही हर बड़े शहर में बनेंगे प्रवासी मदद केंद्र: ऑस्ट्रेलिया के गृहमंत्री टोनी बर्क ने बताया कि सरकार ने ऑस्ट्रेलिया के सभी बड़े शहरों में माइग्रेंट वर्कर सपोर्ट सेंटर शुरू किए हैं। यहां वीजा या काम से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे प्रवासी ड्राइवर बिना किसी झिझक के गोपनीय तरीके से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नौकरी या वीजा छीनने की धमकी नहीं चलेगी: अक्सर देखा गया है कि शिकायत करने पर मालिक वीजा रद्द कराने की धमकी देते हैं। बर्क ने कहा कि नए नियमों के तहत अब शोषण की शिकायत करने वाले ड्राइवरों पर मालिक ऐसा दबाव नहीं बना पाएंगे। समाज को बांटने वाली राजनीति पर हमला: बर्क ने बिना नाम लिए दक्षिणपंथी पार्टियों (लिबरल, नेशनल और वन नेशन) के कुछ नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़का रहे हैं, जिससे ऐसी नफरत फैल रही है। ऑस्ट्रेलिया एक ऑर्केस्ट्रा की तरह है, जहां हर संस्कृति की अपनी जगह गृहमंत्री टोनी बर्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कभी किसी एक समाज का देश नहीं रहा है। हम एक ऑर्केस्ट्रा (संगीत मंडली) की तरह हैं। इसमें कई अलग-अलग तरह के यंत्र होते हैं, लेकिन जब सब मिलकर बजते हैं

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यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना निंदनीय; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना निंदनीय; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह निंदनीय है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

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यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना निंदनीय; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

Ukraine Port Attack | Indian Sailors Killed in MV Golden Leo Strike

कीव9 मिनट पहले कॉपी लिंक यूक्रेन से रवाना हुआ MV गोल्डन लियो रविवार को हमले का शिकार हो गया। यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। हमले के बाद की 3 तस्वीरें… घटना के बाद जहाज से धुएं का गुबार उठता नजर आया। हमले में जहाज पर आग लग गई थी। BBC के मुताबिक, कुल 10 लोगों की मौत हुई है। जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है। यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया। वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है। दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है, “किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।” वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। एक कविता से मिली पहचान 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन पुरस्कार चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

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चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है, “किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।” वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। एक कविता से मिली पहचान 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस किताब की एक कविता में वह लिखते हैं, सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। 6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके वांग अब तक वह 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वांग कहते हैं, “लोग शायद मुझे याद न रखें, लेकिन उन्हें तेज रफ्तार से गुजरता एक फूड डिलीवरी राइडर जरूर याद रहता है।” यही सोच उन्हें लाखों डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी पर किताब लिखने की प्रेरणा बनी। वांग का कहना है, मैं चाहता हूं कि इस किताब को पढ़ने के बाद लोग डिलीवरी राइडर्स के प्रति ज्यादा समझदारी और धैर्य दिखाएं, ताकि उनके साथ होने वाले विवाद कम हों। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

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