Saturday, 12 Sep 2026 | 01:14 PM

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पार्टनर झगड़े के बाद चुप है तो पीछे न पड़ें:शांत होने का समय दें, भरोसा रखें; बार-बार हो तो खुलकर बात करें

पार्टनर झगड़े के बाद चुप है तो पीछे न पड़ें:शांत होने का समय दें, भरोसा रखें; बार-बार हो तो खुलकर बात करें

झगड़े के बाद पार्टनर अचानक बात करना बंद कर दे तो मन में कई सवाल आने लगते हैं- आखिर हुआ क्या, गलती किसकी थी और अब रिश्ता किस दिशा में जाएगा? विशेषज्ञों के मुताबिक, हर चुप्पी ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ यानी दबाव बनाने की कोशिश नहीं होती। कई बार इंसान गुस्से या भावनाओं से इतना भर जाता है कि तुरंत बात नहीं कर पाता। कुछ लोग इस डर से भी बातचीत रोक देते हैं कि गुस्से में ऐसी बात न कह दें, जिसका बाद में पछतावा हो। इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि पार्टनर शांत होने के लिए समय मांग रहा है या बिना बताए बात बंद कर रहा है। बिना बताए लंबे समय तक चुप रहना परेशानी बनता है अगर पार्टनर बिना बताए लंबे समय तक बात न करे, तो दूसरे व्यक्ति को समझ नहीं आता कि वह नाराज है, दुखी है या रिश्ता खत्म करना चाहता है। यही अनिश्चितता बेचैनी और असुरक्षा बढ़ाती है। मनोवैज्ञानिक रेचल नीडल के मुताबिक, चुप्पी सामने वाले को इस तरह महसूस करा सकती है जैसे उसे ठुकरा दिया गया हो। मैसेज पर यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है, क्योंकि सामने वाले की आवाज, चेहरे के भाव और तुरंत मिलने वाले संकेत नहीं होते। ऐसे में छोटी बात भी बड़ी गलतफहमी बन सकती है। बार-बार जवाब मांगने से दूरी बढ़ सकती है ऐसी स्थिति में अक्सर एक व्यक्ति तुरंत बात करके झगड़ा सुलझाना चाहता है, जबकि दूसरा तनाव से बचने के लिए और दूर चला जाता है। पहला जितना ज्यादा फोन या मैसेज करता है, दूसरे को उतना ही ज्यादा दबाव महसूस हो सकता है। इसलिए पार्टनर को एक साफ संदेश देने के बाद थोड़ा समय दें। बार-बार फोन या मैसेज करने और बदले में खुद भी चुप हो जाने से बचें। इस दौरान टहलना, किसी भरोसेमंद दोस्त से बात करना या किसी दूसरे काम में ध्यान लगाना बेचैनी कम करने में मदद कर सकता है। बार-बार हो तो अपनी सीमा साफ बताएं एक बार की चुप्पी से पूरे रिश्ते को खराब नहीं मानना चाहिए। लेकिन अगर बिना बताए बात बंद करना बार-बार हो और बातचीत के बाद भी व्यवहार न बदले, तो अपनी सीमा साफ बताना जरूरी है। ऐसे में कह सकते हैं- “अगर तुम्हें समय चाहिए तो मैं दूंगा, लेकिन अनिश्चित समय तक बात बंद रहना मेरे लिए ठीक नहीं है।” सीमा तय करने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं है। इसका मतलब है कि दोनों के लिए यह साफ हो कि शांत होने के लिए स्पेस मिलेगा, लेकिन दूसरे को अनिश्चितता में छोड़ना रिश्ते का तरीका नहीं बनेगा। बात दोबारा शुरू होने पर पुराने झगड़े का पूरा हिसाब लगाने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि उस समय पार्टनर को किस चीज की जरूरत थी। इससे अगली बार ऐसी स्थिति को संभालना आसान हो सकता है।

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मस्क पर डॉक्यूमेंट्री, पूर्व पत्नी-करीबियों के आरोप:सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं; महिलाओं को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं

मस्क पर डॉक्यूमेंट्री, पूर्व पत्नी-करीबियों के आरोप:सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं; महिलाओं को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं

वेनिस फिल्म फेस्टिवल में ऑस्कर विजेता निर्देशक एलेक्स गिब्नी की करीब चार घंटे लंबी डॉक्यूमेंट्री ने इलॉन मस्क की कहानी को अलग नजरिए से पेश किया है। फिल्म में मस्क की पूर्व पत्नी, पूर्व गर्लफ्रेंड और पुराने सहयोगियों ने उनके व्यवहार, सोच और सत्ता के प्रति रवैये को लेकर कई दावे किए हैं। डॉक्यूमेंट्री की कहानी 1990 के दशक से शुरू होती है, जब मस्क महत्वाकांक्षी कारोबारी के तौर पर आगे बढ़ रहे थे। उस समय उनके लक्ष्य जलवायु संकट से लड़ना और अंतरिक्ष यात्रा को सस्ता बनाना जैसे विचारों से जुड़े थे। हालांकि, गिब्नी का दावा है कि समय के साथ मस्क की महत्वाकांक्षा ऐसी स्थिति में पहुंच गई, जहां उन्होंने अपने लक्ष्यों को नैतिकता और कानून से ऊपर रखना शुरू कर दिया। फिल्म में मंगल पर बस्ती बसाने और ऑटोनॉमस कारों जैसे मस्क के वादों पर भी सवाल उठाए गए हैं। गिब्नी का दावा है कि ये वादे निवेशकों को आकर्षित करने और मस्क की छवि मजबूत करने का जरिया बन गए। ‘इतनी शक्ति किसी एक व्यक्ति के पास होना खतरनाक’ गिब्नी कहते हैं, “लोग मान लेते हैं कि बेहद अमीर व्यक्ति सनकी नहीं हो सकता। लेकिन असल चिंता तब होती है, जब कोई शख्स बेहद अमीर और ताकतवर होने के साथ असामान्य सोच भी रखता हो।” मस्क के करीबी रहे न्यूरोसाइंटिस्ट सैम हैरिस कहते हैं, “बिना जनता के चुने गए व्यक्ति के पास इतनी शक्ति होना खतरनाक है, क्योंकि इसका असर राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक समीकरणों तक पड़ता है।” इंसानों को पेट्स की तरह कंट्रोल करेंगी मशीनें डॉक्यूमेंट्री में मस्क की पहली पत्नी जस्टिन विल्सन का दावा है कि मस्क महिलाओं को बच्चे पैदा करने वाली मशीन के तौर पर देखते हैं। उनके मुताबिक, मस्क मानते हैं कि एक महिला की जगह दूसरी महिला आसानी से ले सकती है। फिल्म में मस्क के AI और भविष्य को लेकर विचारों का भी जिक्र है। उनके मुताबिक, इंसान किसी कृत्रिम सिमुलेशन में रह रहे हो सकते हैं और भविष्य में मशीनें इंसानों को पालतू जानवरों की तरह नियंत्रित कर सकती हैं। डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, मस्क ने कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन के साथ भी ऐसे विचार साझा किए थे।

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Trump Promises 5000 Dollar Dividend If Republicans Win Midterms

Trump Promises 5000 Dollar Dividend If Republicans Win Midterms

19 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत बरकरार रखती है, तो वे अमेरिका के हर बालिग नागरिक को 5000 डॉलर (करीब 4.2 लाख रुपए) देंगे। डलास में रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म कन्वेंशन में ट्रम्प ने कहा, “अगर रिपब्लिकन प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में जीतते हैं, तो आपको 5,000 डॉलर मिलेंगे।” उन्होंने इस भुगतान को ‘ट्रम्प डिविडेंड’ नाम दिया। ट्रम्प ने कहा कि यह डिविडेंड अमेरिका की “आर्थिक ताकत और सफलता” की वजह से दिया जाएगा। उन्होंने इसकी तुलना किसी कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड से की। रकम सिर्फ अमेरिका में खर्च करनी होगी ट्रम्प ने डिविडेंड के साथ एक शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि यह पैसा अमेरिका में ही खर्च करना होगा। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि भुगतान के लिए पैसा कहां से आएगा, किसे मिलेगा और इसे किस तरीके से वितरित किया जाएगा। 5 हजार डॉलर देने पर 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हर बालिग अमेरिकी को 5,000 डॉलर देने पर सरकार को 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इस योजना को लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी। यह रकम ऐसे समय देने की बात कही गई है, जब अमेरिका का सालाना बजट घाटा करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर है। इतनी बड़ी राशि के भुगतान से सरकारी घाटे और महंगाई को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज भी पिछले महीने पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। JD वेंस बोले- अमीरों को नहीं मिलेगा पैसा ट्रम्प के ऐलान के करीब एक घंटे बाद उपराष्ट्रपति JD वेंस ने इस प्रस्ताव को लेकर कुछ स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने संकेत दिया कि इस भुगतान का लाभ अमीर लोगों को नहीं मिलेगा। वेंस ने कहा कि डिविडेंड के लिए सरकार को मिलने वाले टैरिफ राजस्व का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिका को टैरिफ से मिलने वाला राजस्व 5,000 डॉलर प्रति बालिग के भुगतान की अनुमानित लागत से काफी कम है। व्हाइट हाउस ने योजना की लागत, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर पूछे गए सवालों का तत्काल जवाब नहीं दिया। ट्रम्प पहले भी कर चुके हैं सीधे भुगतान का प्रस्ताव ट्रम्प इससे पहले भी अमेरिकी नागरिकों को सीधे पैसा देने की बात कर चुके हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने 2,000 डॉलर के डिविडेंड का प्रस्ताव रखा था। उस समय उन्होंने कहा था कि इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी नहीं होगी। पिछले साल ट्रम्प ने अमेरिकी सैनिकों को 1,776 डॉलर का भुगतान किया था, जिसे उन्होंने ‘वॉरियर डिविडेंड’ कहा था। रिपब्लिकन सीनेटर बर्नी मोरेनो ने ट्रम्प के ऐलान के बाद कहा कि वह 3 नवंबर के चुनाव के तुरंत बाद ‘ट्रम्प डिविडेंड’ को लागू करने के लिए बिल तैयार करेंगे। मिडटर्म में रिपब्लिकन के सामने बहुमत बचाने की चुनौती अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होते हैं। इसमें प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की करीब एक-तिहाई सीटों के लिए चुनाव होता है। रिपब्लिकन इस बार प्रतिनिधि सभा में अपने बेहद मामूली बहुमत को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सीनेट में भी पार्टी को चुनौती मिल रही है। ट्रम्प अक्सर कहते रहे हैं कि आधुनिक दौर में राष्ट्रपति की पार्टी आमतौर पर मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस की सीटें गंवाती है। डलास में उन्होंने कहा कि वह इस परंपरा को बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हम इसे बदलने जा रहे हैं। ऐसा होने की कोई वजह नहीं है।” दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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नॉर्वे PM बोले-जेलेंस्की का विमान ड्रोन हमले से बाल-बाल बचा:मोल्दोवा से उड़ान भरते वक्त घटना; अंतिम संस्कार में शामिल होने ओस्लो जा रहे थे

नॉर्वे PM बोले-जेलेंस्की का विमान ड्रोन हमले से बाल-बाल बचा:मोल्दोवा से उड़ान भरते वक्त घटना; अंतिम संस्कार में शामिल होने ओस्लो जा रहे थे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का विमान मंगलवार को मोल्दोवा से उड़ान भरते समय ड्रोन की चपेट में आने से बाल-बाल बचा। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने बुधवार को सरकारी प्रसारक NRK से यह दावा किया। स्टोरे ने कहा कि विमान उड़ान भरने ही वाला था, तभी वह लगभग ड्रोन की चपेट में आ गया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि जानकारी का स्रोत क्या था या ड्रोन विमान के कितने करीब आया। जेलेंस्की नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम के अंतिम संस्कार में शामिल होने ओस्लो जा रहे थे। मोल्दोवा सरकार के मुताबिक, मंगलवार को ड्रोन अलर्ट के चलते देश का एयरस्पेस बंद कर दिया गया था, जिससे उनके विमान की उड़ान में देरी हुई। बाद में मोल्दोवा की जमीन पर एक रूसी ड्रोन के गिरने की पुष्टि के बाद विमान को उड़ान की मंजूरी दी गई। यूक्रेन सरकार ने अभी तक ड्रोन के विमान के करीब आने की घटना की पुष्टि नहीं की है। खबर अपडेट हो रही है…

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नॉर्वे PM बोले-जेलेंस्की का विमान ड्रोन हमले से बाल-बाल बचा:मोल्दोवा से उड़ान भरते वक्त घटना; अंतिम संस्कार में शामिल होने ओस्लो जा रहे थे

नॉर्वे PM बोले-जेलेंस्की का विमान ड्रोन हमले से बाल-बाल बचा:मोल्दोवा से उड़ान भरते वक्त घटना; अंतिम संस्कार में शामिल होने ओस्लो जा रहे थे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का विमान मंगलवार को मोल्दोवा से उड़ान भरते समय ड्रोन हमले की चपेट में आने से बच गया। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने बुधवार को सरकारी टीवी से बातचीत में यह दावा किया। स्टोरे के मुताबिक, जेलेंस्की का विमान मोल्दोवा से उड़ान भरने ही वाला था, तभी ड्रोन उसके करीब आ गया। हालांकि, उन्होंने ड्रोन की दूरी और जानकारी के स्रोत का खुलासा नहीं किया। जेलेंस्की नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम के अंतिम संस्कार में शामिल होने ओस्लो जा रहे थे। ड्रोन गिरने के बाद जेलेंस्की के विमान ने भरी उड़ान जेलेंस्की का विमान चिशिनाउ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा था। ड्रोन अलर्ट के बाद मोल्दोवा ने एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे विमान की उड़ान में देरी हुई। बाद में अधिकारियों ने रूसी ड्रोन के मोल्दोवा में गिरने की पुष्टि की, जिसके बाद विमान को उड़ान भरने की मंजूरी दी गई। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन एयरपोर्ट से करीब 160 किमी दूर गिरकर फट गया। खबर अपडेट हो रही है…

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UP Flight Training Schools Grounded for Delhi BRICS Summit

UP Flight Training Schools Grounded for Delhi BRICS Summit

नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के दौरान उत्तर प्रदेश से काम करने वाले फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTOs) को उड़ान भरने की इजाजत नहीं होगी। DGCA ने ट्रेनिंग सेंटर्स को भेजे एक मैसेज में कहा है कि ये पाबंदियां 11 सितंबर की सुबह 7 बजे से 13 सितंबर की रात 11 बजे तक लागू रहेंगी। इस आदेश के तहत हल्के/माइक्रो-लाइट एयरक्राफ्ट, हैंग ग्लाइडर, हेलीकॉप्टर वगैरह समेत किसी भी एयरक्राफ्ट को उड़ान भरने या शुरू करने की परमिशन नहीं होगी। उत्तर प्रदेश के अलावा यह पाबंदी पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में मौजूद ट्रेनिंग सेंटर्स पर भी लागू होगी। BRICS समिट 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली है। इस साल की थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” है। दिल्ली में सजावट और सुरक्षा, 4 तस्वीरें… रेल भवन में की गई सजावट। कई स्पॉट्स पर दिल्ली पुलिस के अस्थायी बंकर बने हैं। VVIP मूवमेंट के इलाके में पुलिस लगातार पेट्रोलिंग कर रही है। बैरिकेड्स पर ब्रिक्स के लोगो का पोस्टर लगाता एक व्यक्ति। स्ट्रीट वेंडर्स को स्टॉल न लगाने का निर्देश नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (NASVI) का दावा है कि ब्रिक्स समिट से पहले दिल्ली के कई इलाकों में स्ट्रीट वेंडर्स से अपना काम रोकने के लिए कहा जा रहा है। संगठन ने अधिकारियों से अपील की है कि वे यह पक्का करें कि सुरक्षा इंतजामों की वजह से वेंडर्स की रोजी-रोटी पर असर न पड़े। NASVI के मुताबिक, इंडिया गेट, मदनगीर, भीकाजी कामा प्लेस, वसंत विहार, साकेत और आरके पुरम जैसे इलाकों में वेंडर्स ने बताया है कि पुलिस वालों ने उनसे अपने स्टॉल न लगाने या अपना काम न करने के लिए कहा है। एक्सपर्ट की राय- साझा सिद्धांतों पर अमल हुआ तो भारत को मिलेंगे ब्रिक्स के 10 नए बाजार ब्रिक्स में क्या फैसला होगा: 11 देशों में सीमा पार डिजिटल सेवा सुगम बनाने के सिद्धांत मंजूर होेंगे। ऐसे में, बेंगलुरु की कोई छोटी कंपनी ब्राजील के कारोबारी का सॉफ्टवेयर संभाल सकेगी। गुरुग्राम का फिनटेक स्टार्टअप यूएई में सेवाएं दे पाएगा। भारत की स्थिति क्या है: 2024 में ​दूसरे देशों में 269 अरब डॉलर (~24 लाख करोड़) की डिजिटल सेवाएं दीं। भारत का ग्लोबल शेयर 5.8% था। अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड और जर्मनी के बाद पांचवें स्थान पर है। चीन छठे स्थान पर है। नए सिद्धांत अहम क्यों हैं: ब्रिक्स में बड़ा बाजार मिलेगा। 11 ब्रिक्स देशों की दुनिया में डिजिटल सेवा निर्यात में हिस्सेदारी 14% है। इसमें अकेले भारत की हिस्सेदारी 48% है। सर्विस सुगम होने का सबसे ज्यादा फायदा भारत को संभव है। आम लोगों को क्या लाभ: छोटे कारोबार और पेशेवरों के लिए संभावनाएं बनेंगी। भारत में बैठ विदेशी ग्राहक से कमाई करने वालों का दायरा बढ़ सकता है। क्या नौकरियां भी बढ़ेंगी: कंपनियों को नए बाजार मिले तो सॉफ्टवेयर, प्रबंधन, एआई, साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, वित्तीय तकनीक और पेशेवर सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। क्या ईयू जैसा बाजार बनेगा: नहीं। यूरोपीय संघ (ईयू) में सदस्यों के बीच व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा है। ब्रिक्स में भारत, चीन, रूस, ब्राजील जैसे बिल्कुल अलग राजनीतिक, कानूनी व आर्थिक मॉडल वाले देश हैं। भारत-चीन की होड़ बढ़ेगी: दोनों देशों में डेटा और डिजिटल मंचों से जुड़े नियम अलग हैं। भारत ऐसा ढांचा नहीं चाहेगा जिसमें किसी देश के डिजिटल मानक ब्रिक्स के साझा मानक बनें। काजिम रिजवी (डिजिटल और आईटी एक्सपर्ट) के मुताबिक ये सभी राय दिए गए है। BRIC से BRICS तक ऐसे बढ़ा समूह BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के BRIC गठबंधन के तौर पर हुई थी। इन देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में BRIC का पहला शिखर सम्मेलन हुआ। दक्षिण अफ्रीका के 2011 में शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE को पूर्ण सदस्य बनाया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बना। अब BRICS में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। इसके साथ साझेदार देशों की संख्या भी बढ़ रही है। यह समूह वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… ब्रिक्स देश डिजिटल करेंसी से कारोबार की तैयारी में: छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत; बिना कुछ गिरवी रखे ब्रिक्स देशों में कारोबार कर पाएंगे भारत ब्रिक्स समिट के दौरान डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने वाले एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। चीन और रूस,भारत के साथ मिलकर इसका ट्रायल करेंगे। इसका मकसद ब्रिक्स देशों के बीच कारोबार में अमेरिकी डॉलर जैसी किसी तीसरी करेंसी पर निर्भरता कम करना है। यानी देश आपस में सीधे अपनी-अपनी करेंसी में पेमेंट कर सकें। हालांकि कोई नई साझा करेंसी शुरू नहीं की जाएगी। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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भारत ने नेपाल के लिए 8वीं राहत खेप भेजी:35 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंची; बाढ़ में अब तक 1367 शव बरामद

भारत ने नेपाल के लिए 8वीं राहत खेप भेजी:35 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंची; बाढ़ में अब तक 1367 शव बरामद

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद भारत ने 35 टन राहत और बचाव सामग्री की 8वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना का विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। इसके साथ भारत अब तक 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेज चुका है। खेप में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं और रेस्क्यू उपकरण शामिल हैं। भारत ने राहत अभियान 26 अगस्त को शुरू किया था। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 1367 शव बरामद हुए हैं। 102 शवों की पहचान हो चुकी है। पहचान के लिए DNA सैंपल जुटाए जा रहे हैं और भारत समेत कई देशों के फोरेंसिक विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं। नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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बांग्लादेश सेना का चीनी टैंक फायरिंग अभ्यास में फटा:2 सैनिकों की मौत, एक अधिकारी गंभीर; हादसे की वजह अभी साफ नहीं

बांग्लादेश सेना का चीनी टैंक फायरिंग अभ्यास में फटा:2 सैनिकों की मौत, एक अधिकारी गंभीर; हादसे की वजह अभी साफ नहीं

बांग्लादेश के चटगांव में बुधवार को सेना के फायरिंग अभ्यास के दौरान चीन में बना टाइप 59 टैंक फट गया। हादसे में टैंक के अंदर मौजूद दो सैनिकों की मौत हो गई। एक सैन्य अधिकारी गंभीर रूप से घायल है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस डायरेक्टोरेट (ISPR) के मुताबिक, सैनिक टैंक से फायरिंग कर रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। घायल अधिकारी को बेहतर इलाज के लिए ढाका के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) ले जाया जा रहा है। हादसे की वजह अभी तक साफ नहीं है। हादसे के दौरान की तस्वीरें… खबर लगातार अपडेट हो रही है…

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बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से साझा करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है।

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बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से शेयर करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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