Saturday, 13 Jun 2026 | 08:31 PM

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midland texas shooting 1 dead 9 wounded after gunman fires

midland texas shooting 1 dead 9 wounded after gunman fires

टेक्सास29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में टेक्सास के मिडलैंड शहर में एक सिरफिरे युवक की फायरिंग में 1 शख्स की मौत हो गई, जबकि 9 घायल हो गए। वारदात के करीब दो घंटे बाद तक हमलावर बंदूकधारी एक जगह छिपा रहा और पुलिस से उसकी मुठभेड़ चलती रही, जिसे काबू करने के लिए रोबोट्स तक की मदद ली गई। इसके बाद मुठभेड़ में उसे ढेर कर दिया गया। टेक्सास के पुलिस अधिकारी ने कहा- हमें सुबह करीब 8 बजे गोलीबारी की सूचना मिली थी। कॉल के बाद ही तुरंत ही पुलिस घटना स्थल पर पहुंची। इसके बाद स्वाट और अन्य एजेंसियां भी वहां पहुंचीं। सुरक्षाबलों और आरोपी के बीच में सीधी फायरिंग शुरू हो गई और आरोपी को मार गिराया गया। घटनास्थल की 2 तस्वीरें… इस घटना के बाद मिडलेंड शहर की मेयर लोरी ब्लांग ने भी लोगों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “गोलीबारी की जगह पर अभी सुरक्षाकर्मी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। हालांकि, इसके बाद भी मैं लोगों से अपील करती हूं कि वह उस इलाके में जाने से बचें। ब्लांग के इस पोस्ट के बाद मिडलैंड पुलिस ने भी फेसबुक पर एक पोस्ट करते हुए घटना की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने आरोपी के मारे जाने की भी पुष्टि की। हालांकि, पुलिस ने घटना को लेकर कहा है कि अभी तक इस हमले का उद्देश्य सामने नहीं आया है। पुलिस लगातार छानबीन कर रही है। 6 साल पहले भी हुई थी ऐसी वारदात मिडलैंड में करीब 6 साल पहले भी यहां ऐसी ही एक घटना हुई थी। नौकरी से निकाले गए एक तेल कर्मचारी ने सड़क पर गाड़ी चलाते हुए अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 7 लोगों की हत्या कर दी थी और दो दर्जन से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था। —————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका की सैन डिएगो मस्जिद में गोलीबारी, 5 की मौत:इनमें एक गार्ड और 2 संदिग्ध; धार्मिक नफरत से जुड़े हमले की आशंका अमेरिका के सैन डिएगो स्थित मस्जिद में सोमवार को गोलीबारी में 5 लोगों की मौत हो गई। इनमें एक सिक्योरिटी गार्ड और दो संदिग्ध शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्ध किशोर थे। एक की उम्र 17 साल और दूसरे की 19 साल थी। दोनों के शव मस्जिद के पास एक वाहन में मिले। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलाकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलाकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।

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वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… 3 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहीं थाई राजकुमारी बज्रकिटियाभा का निधन थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकिटियाभा का 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं। थाई शाही परिवार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि लगातार चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती रही और गुरुवार शाम बैंकॉक के चुलालॉन्गकॉर्न अस्पताल में उनका निधन हो गया। राजकुमारी बज्रकिटियाभा दिसंबर 2022 में अपने कुत्तों के साथ व्यायाम कर रही थीं, तभी अचानक बेहोश हो गई थीं। डॉक्टरों ने बाद में बताया कि उनके हृदय में मायकोप्लाज्मा संक्रमण हुआ था, जिससे गंभीर अनियमित धड़कन की समस्या पैदा हुई और वह कोमा में चली गईं। 7 दिसंबर 1978 को जन्मीं बज्रकिटियाभा, थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी संतान थीं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से दो स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल कीं। संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के साथ काम करने के बाद उन्होंने थाईलैंड में अटॉर्नी जनरल कार्यालय में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 से 2014 तक वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इस दौरान उन्होंने जेल सुधार और महिला कैदियों के अधिकारों के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में वह संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की ‘रूल ऑफ लॉ’ एम्बेसडर भी रहीं। 2021 में राजा वजिरालोंगकोर्न ने उन्हें अपनी निजी सुरक्षा इकाई का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया और जनरल का दर्जा दिया। उनकी प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक छवि के कारण उन्हें थाई राजशाही के संभावित उत्तराधिकारियों में भी देखा जाता था। राजा ने अब तक अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। ऐसे में राजकुमारी बज्रकिटियाभा के निधन ने थाई राजपरिवार में उत्तराधिकार को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। कई राजभक्त उन्हें भविष्य में रानी या रीजेंट की भूमिका निभाने वाली संभावित शख्सियत मानते थे। उ. कोरिया में ड्रोन भेजने पर द. कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 30 साल अतिरिक्त जेल दक्षिण कोरिया की सियोल जिला अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजकर तनाव भड़काने के मामले में 30 साल अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि इस अभियान का मकसद उत्तर कोरिया को उकसाकर आपात स्थिति पैदा करना और बाद में मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल तैयार करना था। अदालत ने यून सुक योल, पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून, डिफेंस काउंटर इंटेलिजेंस कमांड के पूर्व प्रमुख यो इन-ह्युंग और ड्रोन ऑपरेशन कमांड के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों ने सैन्य अभियान की आड़ में उत्तर कोरिया को उकसाया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ गया। फैसले में कहा गया कि अक्टूबर 2024 में प्योंगयांग में प्रचार सामग्री गिराने के लिए ड्रोन भेजे गए थे। अदालत के अनुसार यह कार्रवाई यून सुक योल के निर्देश पर हुई थी और उन्हें उम्मीद थी कि उत्तर कोरिया जवाबी प्रतिक्रिया देगा। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह अभियान दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की तैयारी का हिस्सा था। यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करते हुए कहा था कि देश को “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” से बचाने की जरूरत है, लेकिन भारी जनविरोध के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। यून सुक योल पहले ही विद्रोह के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसके अलावा उन्हें सत्ता के दुरुपयोग और गिरफ्तारी में बाधा डालने के मामले में पांच साल की अलग सजा भी मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि ड्रोन अभियान उत्तर कोरिया द्वारा कचरे से भरे गुब्बारे भेजने की कार्रवाई का जवाब था। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही माना। इस मामले ने दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया था। बाद में हुए चुनाव में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे-म्युंग सत्ता में आए और देश में राजनीतिक नेतृत्व बदल गया।

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ट्रम्प का दावा- ईरान के सुप्रीम लीडर को डील मंजूर:नए हमले रद्द; कहा- समझौता पूरी तरह तय होने तक नाकेबंदी लागू रहेगी

ट्रम्प का दावा- ईरान के सुप्रीम लीडर को डील मंजूर:नए हमले रद्द; कहा- समझौता पूरी तरह तय होने तक नाकेबंदी लागू रहेगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने नई डील पर मंजूरी दे दी है। हालांकि, ईरान ने अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टी नहीं की है। व्हाइट हाउस में एक रिपोर्टर से बाद करते हुए ट्रम्प ने कहा- नई डील के मुताबिक ईरान ने मंजूर किया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा और डील होते ही होर्मुज स्ट्रेट को भी खोल दिया जाएगा। इससे पहले, ट्रम्प ने ईरान पर शुक्रवार को भीषण बमबारी करने और उसके तेल निर्यात के मुख्य केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी दी थी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले और बमबारी रद्द कर दी हैं। उन्होंने फैसला बदलने की वजह ईरानी नेतृत्व से बातचीत को सबसे ऊंचे स्तर पर पहुचंना बताया। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि जब तक समझौता पूरी तरह तय नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकेबंदी लागू रहेगी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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उम्र रोकने की दवा के पहली बार इंसान पर परीक्षण:ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया इंजेक्शन

उम्र रोकने की दवा के पहली बार इंसान पर परीक्षण:ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया इंजेक्शन

मेडिकल साइंस के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक ‘रिवर्स-एजिंग’ यानी बुढ़ापा रोकने की दवा का इंसानों पर पहला ट्रायल शुरू हो गया है। दावा है कि पहली बार उम्र के असर को उलटने वाला इंजेक्शन किसी इंसान को लगाया गया है। इसे लॉन्गेविटी साइंस में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अमेरिका के बोस्टन स्थित बायोटेक स्टार्टअप ‘लाइफ बायोसाइंसेज’ ने बताया कि उनके पहले मरीज को सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग का इंजेक्शन दे दिया गया है। परीक्षण के तहत यह इंजेक्शन ग्लूकोमा (काला मोतिया) से पीड़ित एक मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य उम्र बढ़ने के कारण कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है। अगले 6 महीने तक वैज्ञानिक इसके असर और साइड इफेक्ट्स पर नजर रखेंगे। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हो चुका है सफल टेस्ट इस प्रयोग के पहले चरण में ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की एक आंख में सीधे यह प्रयोगात्मक जीन थेरेपी इंजेक्ट की गई है। अब डॉक्टर और वैज्ञानिक आने वाले कई महीनों तक मरीज की बारीकी से निगरानी करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह तकनीक इंसानी शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। इस थेरेपी में सबसे पहले मरीज की आंख में एक सिंगल जीन थेरेपी इंजेक्शन दिया जाता है। इसके बाद कुछ हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विशेष कोर्स कराया जाता है। यह एंटीबायोटिक दवा शरीर के भीतर जाकर उन तीन इलाज करने वाले जीनों के लिए ‘ऑन स्विच’ का काम करती है जो कोशिकाओं को रीप्रोग्राम (युवा) करना शुरू करते हैं। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हुए टेस्ट में इसने उनकी रोशनी सफलतापूर्वक वापस लौटा दी थी। इस थैरेपी के लिए इंसानों की आंख को इसलिए चुना गया है, क्योंकि आंख शरीर के बाकी हिस्सों से अलग और सुरक्षित होती है। इससे साइड इफेक्ट्स पर नजर रखना भी आसान होता है। परीक्षण सफल रहा तो एजिंग थेरेपी का नया दौर लाइफ बायोसाइंसेज के सीईओ जेरी मैकलॉघलिन ने कहा कि यह उनकी कंपनी या एजिंग बायोलॉजी ही नहीं, पूरे चिकित्सा विज्ञान के लिए संभावित रूप से बड़ा और परिवर्तनकारी पल है। अगर यह क्लिनिकल ट्रायल सफल रहा, तो एजिंग थेरेपी में नया युग शुरू हो सकता है। लक्ष्य पूरे शरीर की कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है, ताकि उम्र बढ़ने के साथ डीएनए के काम करने और उसके एक्सप्रेशन के तरीके में सुधार हो सके। अरबपतियों और फार्मा कंपनियों का निवेश इस तकनीक में अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन समेत कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। एली लिली और मर्क जैसी दवा कंपनियां भी इस आइडिया में निवेश बढ़ा रही हैं। इंसानों पर ट्रायल से पहले यह रिसर्च चूहों और बंदरों तक सीमित थी। ————- ये खबरें भी पढ़ें… रूस बुढ़ापा रोकने की तकनीक बना रहा:सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने पर काम जारी, ₹2.47 लाख करोड़ का एंटी एजिंग प्रोजेक्ट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र और शरीर की कमजोरी को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है। ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम के इस प्रोग्राम में विशेष प्रजाति के सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने जैसे तकनीकों पर काम किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… ‘जीन क्लॉक’ बताएगी किस उम्र में थमेगी जिंदगी:शोध में दावा- जीन गतिविधि से उम्र जानना पुराने तरीकों से ज्यादा कारगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘मॉलिक्यूलर क्लॉक’ (आणविक घड़ी) तैयार की है, जो इंसानों की जीन गतिविधि के आधार पर उनकी वास्तविक जैविक (बायोलॉजिकल) उम्र और यहां तक कि उनकी मौत के संभावित समय की भविष्यवाणी कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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उम्र रोकने की दवा का पहली बार इंसान पर परीक्षण:ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की आंख की पुतली में लगाया गया इंजेक्शन

उम्र रोकने की दवा का पहली बार इंसान पर परीक्षण:ग्लूकोमा से पीड़ित एक मरीज की आंख की पुतली में लगाया गया इंजेक्शन

मेडिकल साइंस के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक ‘रिवर्स-एजिंग’ यानी बुढ़ापा रोकने की दवा का इंसानों पर पहला ट्रायल शुरू हो गया है। पहली बार उम्र के असर को उलटने वाला इंजेक्शन किसी इंसान को लगाया गया है। अमेरिका के बोस्टन स्थित बायोटेक स्टार्टअप ‘लाइफ बायोसाइंसेज’ ने बताया कि उनके पहले मरीज को सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग का इंजेक्शन दे दिया गया है। परीक्षण के तहत यह इंजेक्शन ग्लूकोमा (काला मोतिया) से पीड़ित मरीज की एक आंख की पुतली में लगाया गया है। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य उम्र बढ़ने के कारण कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है। अगले 6 महीने तक वैज्ञानिक इसके असर और साइड इफेक्ट्स पर नजर रखेंगे। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हो चुका है सफल टेस्ट अब डॉक्टर और वैज्ञानिक आने वाले कई महीनों तक मरीज की बारीकी से निगरानी करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह तकनीक इंसानी शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। इस थेरेपी में सबसे पहले मरीज की आंख में एक सिंगल जीन थेरेपी इंजेक्शन दिया गया है। इसके बाद कुछ हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विशेष कोर्स कराया जाएगा। यह एंटीबायोटिक दवा शरीर के भीतर जाकर उन तीन इलाज करने वाले जीनों के लिए ‘ऑन स्विच’ का काम करेगी, जो कोशिकाओं को रीप्रोग्राम (युवा) करना शुरू करते हैं। इससे पहले चूहों और बंदरों पर हुए टेस्ट में इसने उनकी रोशनी सफलतापूर्वक वापस लौटा दी थी। इस थैरेपी के लिए इंसानों की आंख को इसलिए चुना गया है, क्योंकि आंख शरीर के बाकी हिस्सों से अलग और सुरक्षित होती है। इससे साइड इफेक्ट्स पर नजर रखना भी आसान होता है। परीक्षण सफल रहा तो एजिंग थेरेपी का नया दौर लाइफ बायोसाइंसेज के सीईओ जेरी मैकलॉघलिन ने कहा कि यह उनकी कंपनी या एजिंग बायोलॉजी ही नहीं, पूरे मेडिकल साइंस के लिए संभावित रूप से बड़ा और परिवर्तनकारी पल है। अगर यह क्लिनिकल ट्रायल सफल रहा, तो एजिंग थेरेपी में नया युग शुरू हो सकता है। लक्ष्य पूरे शरीर की कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाना है, ताकि उम्र बढ़ने के साथ डीएनए के काम करने और उसके एक्सप्रेशन के तरीके में सुधार हो सके। अरबपतियों और फार्मा कंपनियों का निवेश इस तकनीक में अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन समेत कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया है। एली लिली और मर्क जैसी दवा कंपनियां भी इस आइडिया में निवेश बढ़ा रही हैं। इंसानों पर ट्रायल से पहले यह रिसर्च चूहों और बंदरों तक ही सीमित थी, जो अब इंसानों तक पहुंच गई है। ————- ये खबरें भी पढ़ें… रूस बुढ़ापा रोकने की तकनीक बना रहा: सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने पर काम जारी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र और शरीर की कमजोरी को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है। ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम के इस प्रोग्राम में विशेष प्रजाति के सुअर के अंदर इंसानी अंग उगाने जैसे तकनीकों पर काम किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… ‘जीन क्लॉक’ बताएगी किस उम्र में थमेगी जिंदगी: शोध में दावा- जीन गतिविधि से उम्र जानना पुराने तरीकों से ज्यादा कारगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ‘मॉलिक्यूलर क्लॉक’ (आणविक घड़ी) तैयार की है, जो इंसानों की जीन गतिविधि के आधार पर उनकी वास्तविक जैविक (बायोलॉजिकल) उम्र और यहां तक कि उनकी मौत के संभावित समय की भविष्यवाणी कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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होर्मुज में 90 दिन फंसे रहे रायपुर के रुद्रांश:जहाज के ऊपर से गुजरती थीं मिसाइलें-ड्रोन, सायरन बजते ही इंजन रूम में छिपते थे

होर्मुज में 90 दिन फंसे रहे रायपुर के रुद्रांश:जहाज के ऊपर से गुजरती थीं मिसाइलें-ड्रोन, सायरन बजते ही इंजन रूम में छिपते थे

जैसे ही हमले का सायरन बजता, जहाज के सभी 22 कर्मचारी भागकर नीचे इंजन रूम में छिप जाते थे। आसमान में मिसाइलें, ड्रोन और फाइटर जेट चक्कर काट रहे होते थे और अंदर सब अपनी जान बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते थे। रायपुर के रहने वाले रुद्रांश चौबे इस कार्गो शिप में असिस्टेंट कैप्टन और चीफ ऑफिसर हैं। उन्होंने मौत के इसी खौफ के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में 3 महीने बिताए, ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग के दौरान उनका जहाज ठीक उसी इलाके में फंस गया जहां लड़ाई चल रही थी। कई बार मिसाइलें जहाज के बिल्कुल ऊपर से गुजरीं, एक ड्रोन का टूटा हुआ मलबा भी उनके जहाज पर आकर गिरा। 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद कंपनी ने एक स्पेशल बोट (नाव) भेजकर रुद्रांश और उनके साथियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। पढ़िए पूरा इंटरव्यू:- सवाल: उस समय वहां की स्थिति कैसी थी और आप कैसे फंस गए? जवाब: हम अपना कार्गो डिस्चार्ज करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट में गए थे। इसके बाद हमें अगला कार्गो लेना था, तभी पता चला कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है और होर्मुज में आवाजाही बंद कर दी गई है। इसके बाद करीब 3 महीने तक हम उसी क्षेत्र में रहे। इस दौरान हमने कार्गो लोड और डिस्चार्ज भी किया और भारत लाने के लिए एक और कार्गो लोड किया। लंबे समय तक जहाज एंकर पर खड़ा रहा और हम वहीं फंसे रहे। सवाल: समुद्र के बीच 24 घंटे रहना पड़ता था, उस दौरान स्थिति कैसी थी? जवाब: समुद्र में रहने के दौरान हर समय सतर्क रहना पड़ता था। युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों की गतिविधियां दिखाई देती थीं। रेडियो पर लगातार अलग-अलग तरह के अलर्ट और सूचनाएं मिल रही थीं। जीपीएस स्पूफिंग जैसी घटनाएं भी हो रही थीं। शुरुआत में स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि हमें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है और कहां जाना है। बाद में डीजी शिपिंग, इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन और हमारी कंपनी की ओर से जारी सुरक्षा दिशा निर्देशों का पालन कर हमने स्थिति का सामना किया। सवाल: पहली ही नौकरी और घर से दूर सीधे युद्ध के मैदान में एंट्री, मौत के इस साए के बीच खुद को और घर वालों की चिंता को कैसे संभाला? जवाब: मेरी कोशिश रहती थी कि हर दिन घरवालों को अपनी स्थिति की जानकारी दूं। समाचारों में वे लगातार हमले और तनाव की खबरें देखते थे, इसलिए उन्हें यह बताना जरूरी था कि मैं सुरक्षित हूं। सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए हम संपर्क में रहते थे। हालांकि कई बार जीपीएस स्पूफिंग और तकनीकी समस्याओं के कारण चार-पांच दिन तक बात नहीं हो पाती थी, लेकिन हम किसी तरह एक छोटा मैसेज भेजकर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दे देते थे। सवाल: क्या कभी ऐसा हुआ कि ड्रोन या मिसाइल का खतरा आपके जहाज के बेहद करीब पहुंच गया हो? जवाब: जी हां, एक बार जब हमारा जहाज बहरीन के आसपास था, तब हमारे जहाज के ऊपर एक ड्रोन विस्फोट हुआ था। उसके कुछ अवशेष जहाज पर आकर गिरे थे। इस घटना के बाद सभी लोगों को महसूस हुआ कि स्थिति वास्तव में गंभीर है। इसके अलावा मिसाइलें, ड्रोन और लड़ाकू विमान लगातार हमारे ऊपर से गुजरते दिखाई देते थे। शुरुआत में इससे काफी डर लगा, लेकिन बाद में हमने सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया और खुद को संभाला। सवाल: उस समय सबसे ज्यादा डर किस बात का लगता था? जवाब: डर यही था कि कहीं कोई मिसाइल या ड्रोन गलती से हमारे जहाज को निशाना न बना ले। रात में जब अलर्ट आते थे या ऊपर से लड़ाकू विमान गुजरते थे, तब मन में कई तरह के विचार आते थे। ऐसे समय में हम ईश्वर को याद करते थे और सुरक्षित रहने की प्रार्थना करते थे। सवाल: समुद्र में उतरते वक्त बड़े-बड़े सपने रहे होंगे और वहां जाकर मिसाइलें देखनी पड़ीं, पहली नौकरी का यह अनुभव कैसा रहा? जवाब: कॉलेज और एनसीसी के दौरान हमने कई आपात परिस्थितियों के बारे में पढ़ा और प्रशिक्षण लिया था कि संकट के समय कैसे काम करना चाहिए। लेकिन यह पहली बार था जब हमने ऐसी स्थिति को करीब से देखा। शुरुआत में काफी घबराहट थी और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। बाद में सुरक्षा नियमों का पालन किया, आपात स्थिति में वहां से सुरक्षित निकलने की तैयारियां समझीं और एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाकर हालातों का सामना किया। सवाल: उस समय जहाज पर कितने लोग थे और आप लोग एक-दूसरे का मनोबल कैसे बढ़ाते थे? जवाब: हमारे जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर थे। उनमें सबसे कम अनुभव मेरा ही था, क्योंकि यह मेरी पहली समुद्री यात्रा और पहली नौकरी थी। हमने एक सरल तरीका अपनाया था कि युद्ध और तनाव के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। हमारा मानना था कि अगर हम अपना काम ठीक से करते रहेंगे तो डर हम पर हावी नहीं होगा। हमने स्थिति को एक समस्या की तरह देखा और उसके समाधान पर ध्यान दिया। इसी सोच के कारण हम युद्ध की परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे पाए। सवाल: क्या जहाज पर खाने-पीने या दूसरी जरूरतों की कोई समस्या हुई? जवाब: नहीं, जहाज में पर्याप्त राशन और जरूरी सामान मौजूद था। असली चुनौती मानसिक दबाव था। हर दिन अनिश्चितता के बीच गुजर रहा था और किसी को नहीं पता था कि हालात कब सामान्य होंगे। सवाल: फिर आप वहां से बाहर कैसे निकले? जवाब: मेरा 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो चुका था। इसी दौरान कंपनी ने हमारे लिए खास व्यवस्था की। एक सर्विस बोट के जरिए हमें बंदरगाह तक पहुंचाया गया। मैं और मेरे साथ नौ अन्य क्रू मेंबर जहाज से उतरे। इसके बाद हम दुबई पहुंचे और वहां से हवाई मार्ग से अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए। सवाल: अब होर्मुज फिर से बंद हो गया है, जब आप वहां फंसे थे तो आपका कैसा एक्सपीरियंस रहा था? जवाब: वह ऐसा एक्सपीरियंस था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। उस संकट के समय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरी टीम को

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Oman oil tanker attack Himachal crew member Aditya Sharma death Hamirpur

Oman oil tanker attack Himachal crew member Aditya Sharma death Hamirpur

आदित्य शर्मा, जिसकी होर्मुज में अमेरिकी हमले में मौत हो गई। फाइल फोटो हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले वाले आदित्य शर्मा (23) की अमेरिकी हमले में मौत हो गई। वह तेल टैंकर ‘MT सेत्तेबेल्लो’ पर डेक कैडेट के पद पर तैनात थे। केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने इसकी पुष्टि की है। . विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, जहाज पर सवार 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, ओमान स्थित भारतीय दूतावास लापता लोगों की तलाश के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। आदित्य शर्मा के पिता राजेश कुमार ने X (ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा- मैं उन तीन क्रू सदस्यों में से एक का पिता हूं जो लापता हैं। आदित्य शर्मा मेरा बेटा है। कृपया उसे खोजने और उसका पता लगाने में मदद करें। मेरे बेटे ने शिप पर सीनियर द्वारा शोषण की शिकायत की थी और वह अप्रैल में यह शिप छोड़ना चाहता है। हमारे पास सारी बातचीत का रिकॉर्ड मौजूद है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आदित्य शर्मा के परिजनों से फोन पर बात की और उन्हें ढांढस बंधाया। सीएम ने कहा कि वह मुख्य सचिव को निर्देश देंगे कि आदित्य के शव को जल्दी घर लाने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करें। इस दौरान आदित्य के पिता ने बताया कि रविवार को उनकी बेटे से बात हुई थी। तब बेटे ने कहा कि वह अभी डेंजर जोन में है। आदित्य शर्मा अप्रैल में यह शिप छोड़ना चाहता था (फाइल फोटो) इकलौती संतान, ट्रेनिंग पीरियड पर था आदित्य आदित्य शर्मा हमीरपुर जिले की पंचायत हड़ेटा के गांव भालू के रहने वाले हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे, उनके पिता पंजाब के जालंधर में व्यवसाय करते हैं। जालंधर से ही उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई। इसके बाद स्कॉटलैंड से नॉटिकल इंजीनियरिंग की। इसके बाद जालंधर से ही आदित्य ने मर्चेंट नेवी का कोर्स किया। फिर 24 नवंबर 2025 को मर्चेंट नेवी में उन्हें नौकरी मिली। उनका 15 महीने का ट्रेनिंग पीरियड चल रहा था। आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल ने बताया कि वह छह महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर जहाज में ड्यूटी के लिए गए थे और 24 मई को वापस लौटने वाले थे। हालांकि, कुछ समय पहले आदित्य ने परिवार को बताया था कि वह आधी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ही घर आएंगे। इसी कारण उनका कॉन्ट्रैक्ट दो महीने के लिए बढ़ा दिया गया था। संजीव लखनपाल के अनुसार, जिस कंपनी में आदित्य कार्यरत थे, उसने मंगलवार शाम हमले की जानकारी दी थी। उस समय आदित्य को लापता बताया गया था, जबकि बुधवार को उनके शव मिलने की सूचना परिवार को दी गई। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आदित्य का पार्थिव शरीर कब तक भारत लाया जाएगा। परिवार ने केंद्र सरकार से पार्थिव शरीर जल्द स्वदेश पहुंचाने की मांग की है। आदित्य शर्मा की मौत के बाद घर पर लोग जुटने लगे। सीएम ने आदित्य शर्मा के निधन पर जताया शोक सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने होर्मुज में हुए अमेरिकी हमले में तेल टैंकर पर तैनात नाविक आदित्य शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया। सीएम ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में प्रदेश सरकार परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन को परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए। बेटे का शव घर लाने के लिए डीसी को पत्र लिखा 3 दिन में भारतीय क्रू वाले 2 जहाजों पर हमला अमेरिका ने पिछले 3 दिनों में भारतीय क्रू वाले दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। पहला हमला 8 जून को एमटी मैरीवेक्स पर हुआ। इस पर 28 नाविक सवार थे जिसमें 24 भारतीय थे। भारतीय तटरक्षक बल और ओमान की एजेंसियों ने सभी को सुरक्षित निकाला। इसके बाद 10 जून को एमटी सेत्तेबेल्लो पर हमला हुआ। यह पलाऊ के झंडे के तहत चल रहा था। इस पर भी 24 क्रू मेंबर्स थे। इनमें से 3 भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की और अमेरिका के दूतावास के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया। **************** ये खबर भी पढ़ें: जबरन रूसी सेनी में भर्ती लुधियाना के समरजीत की मौत: टेक्निशियन का लिया था डिप्लोमा, कर्ज लेकर गया था करिअर बनाने, 10 सितंबर को मौत, एक हफ्ते पहले सूचना रूस जबरन सेना में भर्ती किए गए पंजाब के लुधियाना के युवक समरजीत सिंह की रूस में मौत हो गई। 21 वर्षीय समरजीत करियर बनाने के लिए रूस पहुंचे थे। लेकिन उन्हें जबरन आर्मी में भर्ती किया गया। 8 सितंबर के बाद उसका परिवार से संपर्क टूट गया और 10 सितंबर को उसकी मौत हो गई। (पढ़ें पूरी खबर)

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वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल

वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल

चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

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वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल

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चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

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