Wednesday, 10 Jun 2026 | 01:35 PM

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ईरान बोला- दोबारा जंग नहीं चाहते:लेकिन हमला हुआ तो पूरी ताकत से जवाब देंगे; अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए

ईरान बोला- दोबारा जंग नहीं चाहते:लेकिन हमला हुआ तो पूरी ताकत से जवाब देंगे; अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए

ईरान ने कहा है कि वह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहता, लेकिन उस पर हमला हुआ तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। देश पर किसी भी तरह का हमला या दबाव डाला गया तो तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। उधर, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के ऊर्जा और बैंकिंग सेक्टर को निशाना बनाते हुए नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा कि उसने ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की है, जो दक्षिण और पूर्वी एशिया में करोड़ों डॉलर मूल्य की ईरानी LPG बेच रहा था। अमेरिका का आरोप है कि ईरानी गैस को जानबूझकर ओमान की LPG बताकर बेचा जा रहा था, ताकि उसकी असली पहचान छिपाई जा सके। कुल 12 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें 5 कंपनियां मार्शल आइलैंड्स, 4 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और 1 चीन में स्थित हैं। इसके अलावा 6 जहाजों पर भी कार्रवाई की गई है, जिनमें 4 पनामा-फ्लैग्ड टैंकर शामिल हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; वहां 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; वहां 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इसलिए पाकिस्तान को उन क्षेत्रों में किसी भी तरह की राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। चुनाव कराने जैसी गतिविधियां वहां की जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकतीं। गिलगित-बाल्टिस्तान में रविवार को 10 जिलों की 24 सामान्य सीटों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है और विभिन्न राजनीतिक दल जोर-शोर से प्रचार अभियान चला रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन भारत इसे अपने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा मानता है। इसी वजह से वहां होने वाले हर चुनाव या राजनीतिक कदम पर भारत आमतौर पर आपत्ति दर्ज कराता है। साढ़े पांच साल बाद हो रहे चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान में साढ़े पांच साल बाद हो रहे हैं। इससे पहले यहां नवंबर 2020 में चुनाव हुए थे, जिनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जीत हासिल की थी। यहां का कार्यकाल 5 साल का होता है। 2020 में चुनी गई विधानसभा ने नवंबर 2025 में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। नियमों के मुताबिक इसके बाद नए चुनाव कराए जाने थे, लेकिन खराब मौसम और प्रशासनिक कारणों से मतदान समय पर नहीं हो सका। क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हो जाता है। इसी वजह से चुनाव को टाल दिया गया और बाद में 7 जून 2026 की तारीख तय की गई। गिलगित-बाल्टिस्तान में दूसरा चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान और Pok (जिसे पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर कहता है) की प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग रही है। Pok का अपना अलग संविधान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा है। पाकिस्तान Pok को कुछ स्वायत्तता देता है, हालांकि वास्तविक शक्ति काफी हद तक इस्लामाबाद के पास रहती है। लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति अलग थी। 1947 से लेकर कई दशकों तक इसे पाकिस्तान ने सीधे संघीय सरकार के जरिए चलाया। यहां न तो प्रांत का दर्जा था और न ही पाकिस्तान की संसद में पूरा प्रतिनिधित्व था। फिर 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुए और एक स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि तब भी विधानसभा के अधिकार सीमित थे और अहम फैसले प्रधानमंत्री लेता था। इसके बाद 2018 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018 लागू किया। इसमें स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को कई शक्तियां दी गईं। यानी कि गिलगित-बाल्टिस्तान में ‘ऑर्डर ऑफ 2018’ के तहत यह दूसरा चुनाव कराया जा रहा है।

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पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इसलिए पाकिस्तान को उन क्षेत्रों में किसी भी तरह की राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। चुनाव कराने जैसी गतिविधियां वहां की जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकतीं। गिलगित-बाल्टिस्तान में रविवार को 10 जिलों की 24 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। यह भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा है। हालांकि, यह पाकिस्तान के कब्जे में है। इसी वजह से वहां होने वाले हर चुनाव या राजनीतिक कदम पर भारत आमतौर पर आपत्ति दर्ज कराता है। साढ़े पांच साल बाद हो रहे चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान में साढ़े पांच साल बाद हो रहे हैं। इससे पहले यहां नवंबर 2020 में चुनाव हुए थे, जिनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जीत हासिल की थी। यहां का कार्यकाल 5 साल का होता है। 2020 में चुनी गई विधानसभा ने नवंबर 2025 में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। नियमों के मुताबिक इसके बाद नए चुनाव कराए जाने थे, लेकिन खराब मौसम और प्रशासनिक कारणों से मतदान समय पर नहीं हो सका। क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जिससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हो जाता है। इसी वजह से चुनाव को टाल दिया गया और बाद में 7 जून 2026 की तारीख तय की गई। गिलगित-बाल्टिस्तान में दूसरा चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान और Pok (जिसे पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर कहता है) की प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग रही है। Pok का अपना अलग संविधान, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा है। पाकिस्तान Pok को कुछ स्वायत्तता देता है, हालांकि वास्तविक शक्ति काफी हद तक इस्लामाबाद के पास रहती है। लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति अलग थी। 1947 से लेकर कई दशकों तक इसे पाकिस्तान ने सीधे संघीय सरकार के जरिए चलाया। यहां न तो प्रांत का दर्जा था और न ही पाकिस्तान की संसद में पूरा प्रतिनिधित्व था। फिर 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुए और एक स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि तब भी विधानसभा के अधिकार सीमित थे और अहम फैसले प्रधानमंत्री लेता था। इसके बाद 2018 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018 लागू किया। इसमें स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को कई शक्तियां दी गईं। यानी कि गिलगित-बाल्टिस्तान में ‘ऑर्डर ऑफ 2018’ के तहत यह दूसरा चुनाव कराया जा रहा है। PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होंगे गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। बाद में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और अन्य दलों के समर्थन से उनकी सरकार चलती रही। इस दौरान PoK में महंगाई, बिजली दरों और आटे की कीमतों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुए। 2024 में कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान की संघीय सरकार को सब्सिडी और आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करनी पड़ी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें रिजर्व 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद बने परिसीमन ढांचे के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर चुनाव नहीं होते क्योंकि ये क्षेत्र फिलहाल पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं। इसलिए इन्हें खाली रखा जाता है। ——————————– यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में ट्रम्प जैसे दिखने वाले भैंसे की कुर्बानी रुकी:तीन लाख रुपए में ईद के लिए नीलाम हुआ था, अब नेशनल जू भेजा गया बांग्लादेश में डोनाल्ड ट्रम्प नाम से मशहूर सफेद भैंसे की ईद पर कुर्बानी रोक दी गई है। इस भैंसे को 3.85 लाख टका (करीब 3 लाख रूपए) में बेचा गया था। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, भैंसे को जिंजिरा के रसूलपुर इलाके के रहने वाले मोहम्मद शोरोन ने 23 मई को ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के लिए खरीदा था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद

ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार को लेकर कहा कि लंबे समय तक भारत ने अमेरिका पर ऊंचे टैरिफ लगाए और उसका फायदा उठाया। ट्रम्प ने दावा किया कि अब स्थिति बदल गई है और अमेरिका भारत से अच्छी कमाई कर रहा है। ट्रम्प ने आगे कहा कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता भी हो सकता है क्योंति मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूं। मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारे संबंध अच्छे हैं और हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूं। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की एक टीम हाल ही में नई दिल्ली में भारत सरकार के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत कर चुकी है। दोनों देश एक अस्थायी व्यापार समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि व्यापार से जुड़े कुछ मुद्दों का जल्द समाधान किया जा सके। भारत के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों देश ऐसा समझौता करना चाहते हैं जिससे भारत और अमेरिका, दोनों को फायदा हो। यानी दोनों पक्ष अभी भी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी में समझौतों को लेकर बातचीत के बीच एक नई मुश्किल भी खड़ी हो गई है। अमेरिका ने कुछ देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का कहना है कि ये देश जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। इस प्रस्तावित सूची में भारत का नाम भी शामिल है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं और निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार का कहना है कि अभी इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अमेरिका पहले इस प्रस्ताव पर लोगों और संबंधित पक्षों की राय लेगा, उसके बाद ही अंतिम निर्णय करेगा। भारत का यह भी कहना है कि इस मुद्दे के बावजूद दोनों देशों के बीच बड़े व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-US में ट्रेड डील पर फ्रेमवर्क तैयार भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में इस बात पर सहमति बनाई थी कि दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौता (इंटरिम ट्रेड डील) करेंगे। इसका मकसद उन व्यापारिक मुद्दों को जल्दी सुलझाना था जिन पर लंबे समय से बातचीत चल रही है। दोनों देश चाहते थे कि व्यापक और बड़े व्यापार समझौते से पहले एक शुरुआती समझौता कर लिया जाए, जिससे व्यापार बढ़ाने और टैरिफ विवाद कम करने का रास्ता खुले। हालांकि बाद में अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया। एक अमेरिकी अदालत ने ट्रम्प सरकार के लगाए गए कुछ टैरिफ पर सवाल उठाए और उसे रद्द कर दिया। इसके बाद यह साफ नहीं रहा कि अमेरिका भविष्य में कौन से टैरिफ लागू रख पाएगा और कौन से नहीं। इस कानूनी अनिश्चितता का असर अमेरिका के दूसरे देशों के साथ चल रहे व्यापारिक वार्ताओं पर भी पड़ा। इसी दौरान भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ, बाजार पहुंच, कृषि उत्पादों, ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स और डिजिटल व्यापार जैसे कई मुद्दों पर बातचीत जारी रही, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन, जिस समयसीमा के भीतर अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाना था, वह पूरी नहीं हो सकी। अब दोनों देश बातचीत जारी रखे हुए हैं और कोशिश कर रहे हैं कि पहले एक सीमित या अंतरिम समझौता हो जाए। इसके बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर आगे बढ़ा जाए, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और बढ़ाया जा सके।

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ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद

ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार को लेकर कहा कि लंबे समय तक भारत ने अमेरिका पर ऊंचे टैरिफ लगाए और उसका फायदा उठाया। ट्रम्प ने दावा किया कि अब स्थिति बदल गई है और अमेरिका भारत से अच्छी कमाई कर रहा है। ट्रम्प ने आगे कहा कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता भी हो सकता है क्योंति मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूं। मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारे संबंध अच्छे हैं और हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूं। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की एक टीम हाल ही में नई दिल्ली में भारत सरकार के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत कर चुकी है। दोनों देश एक अस्थायी व्यापार समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि व्यापार से जुड़े कुछ मुद्दों का जल्द समाधान किया जा सके। भारत के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों देश ऐसा समझौता करना चाहते हैं जिससे भारत और अमेरिका, दोनों को फायदा हो। यानी दोनों पक्ष अभी भी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी में समझौतों को लेकर बातचीत के बीच एक नई मुश्किल भी खड़ी हो गई है। अमेरिका ने कुछ देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का कहना है कि ये देश जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। इस प्रस्तावित सूची में भारत का नाम भी शामिल है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं और निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार का कहना है कि अभी इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अमेरिका पहले इस प्रस्ताव पर लोगों और संबंधित पक्षों की राय लेगा, उसके बाद ही अंतिम निर्णय करेगा। भारत का यह भी कहना है कि इस मुद्दे के बावजूद दोनों देशों के बीच बड़े व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-US में ट्रेड डील पर फ्रेमवर्क तैयार भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में इस बात पर सहमति बनाई थी कि दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौता (इंटरिम ट्रेड डील) करेंगे। इसका मकसद उन व्यापारिक मुद्दों को जल्दी सुलझाना था जिन पर लंबे समय से बातचीत चल रही है। दोनों देश चाहते थे कि व्यापक और बड़े व्यापार समझौते से पहले एक शुरुआती समझौता कर लिया जाए, जिससे व्यापार बढ़ाने और टैरिफ विवाद कम करने का रास्ता खुले। हालांकि बाद में अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया। एक अमेरिकी अदालत ने ट्रम्प सरकार के लगाए गए कुछ टैरिफ पर सवाल उठाए और उसे रद्द कर दिया। इसके बाद यह साफ नहीं रहा कि अमेरिका भविष्य में कौन से टैरिफ लागू रख पाएगा और कौन से नहीं। इस कानूनी अनिश्चितता का असर अमेरिका के दूसरे देशों के साथ चल रहे व्यापारिक वार्ताओं पर भी पड़ा। इसी दौरान भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ, बाजार पहुंच, कृषि उत्पादों, ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स और डिजिटल व्यापार जैसे कई मुद्दों पर बातचीत जारी रही, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन, जिस समयसीमा के भीतर अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाना था, वह पूरी नहीं हो सकी। अब दोनों देश बातचीत जारी रखे हुए हैं और कोशिश कर रहे हैं कि पहले एक सीमित या अंतरिम समझौता हो जाए। इसके बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर आगे बढ़ा जाए, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और बढ़ाया जा सके।

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इजराइल बोला- पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं:वहां हमास नेता बहुत दौरे कर रहे; ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो पलटवार करेंगे

इजराइल बोला- पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं:वहां हमास नेता बहुत दौरे कर रहे; ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो पलटवार करेंगे

भारत में इजराइल के राजदूत रियुवेन अजार ने पाकिस्तान को समस्याग्रस्त देश बताते हुए कहा है कि उस पर क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता। PTI को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर उनके मन में सवाल हैं। अगर कोई मध्यस्थ किसी एक पक्ष के ज्यादा करीब हो जाए, तो बातचीत मुश्किल हो सकती है। अजार ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ सालों में हमास नेताओं की पाकिस्तान और बांग्लादेश यात्राएं बढ़ी हैं। भारत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इजराइल जिन सुरक्षा खतरों का सामना कर रहा है, उनसे दूसरे देश भी सीख ले सकते हैं। वहीं, ईरान का कहना है कि अगर उसके ऊपर हमला किया जाता है तो वह उसका जवाब जरूर देगा। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कुवैत और बहरीन भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, क्योंकि उन्होंने अमेरिका को अपनी जमीन और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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World News Updates; Trump India| Russia

World News Updates; Trump India| Russia

20 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता हो सकता है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारे संबंध अच्छे हैं और हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी कहा कि भारत ने कई सालों तक अमेरिका का फायदा उठाया। उन्होंने कहा- भारत अमेरिका पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाता था, जबकि अमेरिका को उससे ज्यादा फायदा नहीं मिलता था। ट्रम्प ने दावा किया कि अब स्थिति बदल गई है और अमेरिका भारत के साथ व्यापार से अच्छा पैसा कमा रहा है। उन्होंने कहा- हमें एक समझौते तक पहुंचना है क्योंकि मैं PM मोदी को बहुत पसंद करता हूं। ट्रम्प के बयान के बीच अमेरिका ने भारत सहित 54 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इन देशों में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक नहीं है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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पुतिन बोले- अमेरिका का मोदी पर दबाव डालना बेकार:भारत महान देश, रूस को उसपर भरोसा है, US से उसकी नजदीकी पर हमें दिक्कत नहीं

Putin: Russia Trusts India; US Proximity No Issue

सेंट पीटर्सबर्ग4 घंटे पहले कॉपी लिंक रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने 4 जून को सेंट पीटर्सबर्ग में दुनियाभर के न्यूज एजेंसियों के हेड से बात की। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका भारत पर रूस के साथ उसके रिश्ते सहित कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस तरह की कोशिशें बेकार हैं। भारत इसका विरोध करेगा। पुतिन ने PTI समेत दुनिया की प्रमुख न्यूज एजेंसियों के हेड से बातचीत के दौरान भारत और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा- भारत एक महान देश है। भारत एक महान देश और लोकतंत्र है। रूस उसे अपना भरोसेमंद पार्टनर मानता है। रूसी राष्ट्रपति ने आगे कहा- भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। अमेरिका से उसके बढ़ते संबंधों से भारत-रूस की पार्टनरशिप पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रूस के साथ उसके रिश्ते पहले की तरह मजबूत रहेंगे। पुतिन बोले- भारत-रूस के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर पहुंचेगा पुतिन ने कहा- हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ संबंध बढ़ा रहा है, जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी मानता है। पुतिन ने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में भारत और रूस के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा- भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सबसे तेज विकास दर वाले देशों में गिना जाता है। यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की लगातार मेहनत और नीतियों का परिणाम है। ‘भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक’ रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस के साथ सहयोग कम करने का दबाव बनाने की कोशिश की थी। हालांकि अब सभी को समझ आ गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। सितबंर में पुतिन का भारत दौरा, मोदी भी रूस जाएंगे पुतिन का बयान भारत दौरे से पहले आया है। वे पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में हिस्सा लेंगे। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। पीएम मोदी भी इसी साल रूस दौरे पर जाएंगे। रूसी राष्ट्रपति 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 4 दिसंबर 2025 को भारत आए थे। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा था। इससे पहले वह आखिरी बार 2021 में भारत आए थे। दिल्ली पहुंचने के बाद दोनों नेता एक ही टोयोटा SUV में पीएम आवास गए थे। भारत-रूस के बीच दिसंबर 2025 में हुए अहम समझौते ऊर्जा सहयोग:रूस ने भरोसा दिलाया कि वह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लगातार और बिना रुकावट ईंधन की सप्लाई करता रहेगा। उद्योगिक साझेदारी:भारतीय कंपनियों ने रूस की URALCHEM के साथ एक यूरिया प्लांट रूस में ही स्थापित करने का समझौता किया। फूड सेफ्टी:भारत की FSSAI और रूस की उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसी के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों को मजबूत करने के लिए औपचारिक समझौते हुए। हेल्थकेयर सहयोग:मेडिकल रिसर्च और हेल्थ सर्विस में सहयोग बढ़ाने के लिए कई MoU साइन किए गए। समुद्री लॉजिस्टिक्स:बंदरगाह और शिपिंग ऑपरेशन में भारत-रूस के सहयोग को बढ़ाने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर हुए। माइग्रेशन और मोबिलिटी:दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और माइग्रेशन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए समझौते किए। ———————- ये खबर भी पढ़ें… भारत रूसी कच्चा तेल खरीदता रहेगा:सरकार बोली- अमेरिकी प्रतिबंध बेअसर; फंसे जहाजों से तेल खरीदने के लिए US की 30 दिन की राहत अमेरिका की तरफ से मिलने वाली प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों से हमारे इम्पोर्ट प्लान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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पुतिन बोले- अमेरिका का मोदी पर दबाव डालना बेकार:भारत महान देश, रूस को उसपर भरोसा है, US से उसकी नजदीकी पर हमें दिक्कत नहीं

पुतिन बोले- अमेरिका का मोदी पर दबाव डालना बेकार:भारत महान देश, रूस को उसपर भरोसा है, US से उसकी नजदीकी पर हमें दिक्कत नहीं

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका भारत पर रूस के साथ उसके रिश्ते सहित कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस तरह की कोशिशें बेकार हैं। भारत इसका विरोध करेगा। पुतिन ने PTI समेत दुनिया की प्रमुख न्यूज एजेंसियों के हेड से बातचीत के दौरान भारत और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा- भारत एक महान देश है। भारत एक महान देश और लोकतंत्र है। रूस उसे अपना भरोसेमंद पार्टनर मानता है। रूसी राष्ट्रपति ने आगे कहा- भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। अमेरिका से उसके बढ़ते संबंधों का भारत-रूस साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रूस के साथ भारत के रिश्ते पहले की तरह मजबूत रहेंगे। पुतिन ने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में भारत और रूस के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। PTI के सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सबसे तेज विकास दर वाले देशों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की लगातार मेहनत और नीतियों का परिणाम है। पुतिन ने कहा- हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ संबंध बढ़ा रहा है, जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा कि रूस के साथ सहयोग को लेकर भारत पर पश्चिमी देशों की ओर से दबाव बनाने की कोशिशें हुई हैं। पुरूसी राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस के साथ सहयोग कम करने का दबाव बनाने की कोशिश की थी। हालांकि अब सभी को समझ आ गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक साबित होगा।

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कनाडा में स्विमिंग पूल में डूबने से युवक की मौत:कुरुक्षेत्र से 2 साल पहले गया, ₹14 लाख में डेडबॉडी इंडिया पहुंची; दिसंबर में होनी थी शादी

कनाडा में स्विमिंग पूल में डूबने से युवक की मौत:कुरुक्षेत्र से 2 साल पहले गया, ₹14 लाख में डेडबॉडी इंडिया पहुंची; दिसंबर में होनी थी शादी

हरियाणा के कुरुक्षेत्र के युवक की कनाडा में स्वीमिंग पूल में डूबने से मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ, जब युवक नहाने के लिए स्वीमिंग में उतरा, लेकिन पैर फिसलने से वह गहरे पानी में चला गया। जब तक उसे बाहर निकाला जाता, वह बेसुध हो चुका था। साथियों ने उसे तुरंत ही हॉस्पिटल में एडमिट कराया, जहां वह करीब तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इसकी सूचना मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक युवक की पहचान मंदीप सिंह (21) निवासी लाडवा के रूप में हुई। मंदीप सिंह करीब दो साल पहले स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। वह ब्रैम्पटन शहर में रहकर बच्चों की हेल्थ केयर से जुड़े फील्ड में काम कर रहा था। परिवार ने कनाडा से बॉडी पहुंचने के बाद आज उसका दाह संस्कार कर दिया। परिवार के मुताबिक, मंदीप को इसी साल दिसंबर में आना था। उसकी सगाई हो चुकी थी, दिसंबर में परिवार ने उसकी शादी करने के लिए तैयारी कर रखी थी। मगर, इससे पहले ही वह हादसे का शिकार हो गया। कनाडा में युवक के साथ कैसे हुआ हादसा… मंदीप सिंह के बारे में परिवार ने बताईं ये बातें… परिवार में माता-पिता और बड़ा भाई : मंदीप अपने पीछे माता-पिता, बड़े भाई और उसके परिवार को छोड़ गया है। उसके चाचा राम कुमार श्री सनातन धर्म महाबीर दल लाड़वा के उपप्रधान हैं। उन्होंने बताया कि पूरे परिवार को इस घटना से गहरा सदमा लगा है। रिश्तेदारों और परिचितों का परिवार को सांत्वना देने के लिए लगातार घर पहुंचना जारी है। दिसंबर में हुआ था 21 साल का : मंदीप सिंह ने पिछले साल 3 दिसंबर को अपना 21वां जन्मदिन मनाया था। वह पढ़ाई पूरी करने के बाद बेहतर करियर की उम्मीद लेकर कनाडा गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह अपने भविष्य को संवारकर घर लौटेगा, लेकिन उसकी असमय मौत ने सभी सपने अधूरे छोड़ दिए। 14 लाख रुपए में डेडबॉडी इंडिया पहुंची चाचा राम कुमार ने बताया कि मंदीप अपने कुछ दोस्तों के साथ हेमिल्टन शहर में घूमने आया था। मंदीप को तैरना नहीं आता था। यहां अचानक पैर फिसलने से गहरे पानी में चला गया। करीब 14 लाख रुपए में मंदीप की बॉडी वापस भारत पहुंची। मंदीप का बड़ा भाई नरेश प्राइवेट सेक्टर में जॉब करता है। सगाई हो चुकी, दिसंबर में शादी होनी थी चाचा राम कुमार ने आगे बताया कि मंदीप के पिता खेती-बाड़ी का काम करते हैं। मंदीप की जाने से पहले से पास के गांव के हलालपुर की लड़की के साथ सगाई हो चुकी थी। अब मंदीप को दिसंबर को वापस आना था। उसी महीने में उसकी शादी तय हो रखी थी।

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