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FASTag Annual Recharge Scam; NHAI Farzi Google Ads

FASTag Annual Recharge Scam; NHAI Farzi Google Ads

48 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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डिजिटल टोल सिस्टम ने नेशनल हाइवे पर सफर को आसान बनाया है। लेकिन साइबर ठग अब इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। इसके चलते बीते कुछ दिनों में FASTag (फास्टैग) रीचार्ज और एनुअल पास के नाम पर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आए हैं।

स्कैमर्स NHAI (नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के नाम व लोगो का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया और गूगल पर फर्जी विज्ञापन चलाते हैं। इस पर क्लिक करने से फर्जी वेबसाइट खुलती है। ये वेबसाइट इस तरह डिजाइन की जाती हैं कि ओरिजिनल वेबसाइट जैसी ही लगती हैं, इसलिए लोग इसके झांसे में आ जाते हैं।

इस खतरे को देखते हुए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट के जरिए लोगों को सतर्क किया है। साथ ही इससे बचने के कुछ जरूरी तरीके भी शेयर किए हैं।

आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में हम ‘फास्टैग स्कैम’ के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • साइबर ठग फास्टैग के नाम पर स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?
  • इस तरह की ऑनलाइन ठगी से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- ’फास्टैग स्कैम’ क्या है?

जवाब- यह एक ऑनलाइन ठगी है, जिसमें साइबर अपराधी फास्टैग रीचार्ज या एनुअल पास पर भारी छूट का लालच देकर लोगों को फर्जी वेबसाइट या लिंक पर ले जाते हैं। इसके जरिए पैसे ठग लेते हैं। स्कैमर फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड के बहाने इस स्कैम में लोगों को फंसाते हैं।

सवाल- साइबर ठग फास्टैग के नाम पर स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?

जवाब- इसके लिए साइबर ठग NHAI के नाम और लोगो का दुरुपयोग करते हैं, जिससे वेबसाइट रियल दिखती है। जैसे ही यूजर फर्जी वेबसाइट पर वाहन नंबर, मोबाइल नंबर और पेमेंट डिटेल दर्ज करता है, पैसे ठगों के खाते में चले जाते हैं और रीचार्ज भी नहीं होता। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

सवाल- लोग कैसे इतनी आसानी से ‘फास्टैग स्कैम’ के झांसे में फंस जाते हैं?

जवाब- इसके कई कारण हैं-

  • अवेयरनेस की कमी।
  • डिस्काउंट का लालच।
  • बिना जांचे लिंक पर क्लिक करना।
  • बिना वेरिफिकेशन के भुगतान करना।
  • गूगल सर्च पर दिख रही हर चीज को सही मानना।

सवाल- फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड में लापरवाही करने पर क्या नुकसान हो सकते हैं?

जवाब- फास्टैग से जुड़ी सर्विसेज में छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसके सभी रिस्क नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- फास्टैग स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- फास्टैग से जुड़े किसी भी काम के लिए आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें। गूगल सर्च में ऊपर दिखने वाले हर लिंक पर भरोसा न करें। किसी भी अनरियल डिस्काउंट से सावधान रहें। साथ ही कुछ और बातों का भी ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड का सही तरीका क्या है?

जवाब- फास्टैग से जुड़ी हर प्रक्रिया ऑथराइज्ड बैंक या आधिकारिक एप/वेबसाइट के माध्यम से ही करें। नीचे एक्टिवेशन, रीचार्ज और रिफंड के सही और सुरक्षित तरीके बताए गए हैं-

एक्टिवेशन

  • फास्टैग इश्यूअर (जारीकर्ता) बैंक या ऑथराइज्ड आधिकारिक एप/वेबसाइट से ही एक्टिवेट करें।
  • एप में ‘Activate FASTag’ विकल्प चुनकर वाहन की डिटेल्स दर्ज करें।
  • ‘न्यू टैग‘ पर मौजूद QR कोड को एप से स्कैन करके भी एक्टिवेशन किया जा सकता है।
  • ऑफलाइन विकल्प के लिए बैंक शाखा या ऑथराइज्ड POS (पॉइंट ऑफ सेल) पर वाहन के जरूरी दस्तावेज जमा करें।

रीचार्ज

  • ऑथराइज्ड मोबाइल एप या वेबसाइट से सीधे रीचार्ज करें।
  • इश्यूअर बैंक की नेटबैंकिंग सुविधा से भी रीचार्ज कर सकते हैं।
  • गूगल पर दिख रहे अनजान लिंक से रीचार्ज न करें।

रिफंड

  • रिफंड के लिए तुरंत अपने इश्यूअर बैंक के कस्टमर केयर में शिकायत दर्ज कराएं।
  • आमतौर पर 3–10 वर्किंग-डे में पैसा वापस आ जाता है।
  • फास्टैग बंद करना हो तो बैंक पोर्टल/एप पर ‘Close Account‘ या ‘Refund Request‘ ऑप्शन से आवेदन करें।
  • रिफंड के लिए किसी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर बैंक डिटेल शेयर न करें।

सवाल- अगर फास्टैग स्कैम का शिकार हो जाएं तुरंत तो क्या करें?

जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत कुछ एक्शन लें-

  • सबसे पहले अपने बैंक या जिस पेमेंट एप से भुगतान किया है, उससे तुरंत संपर्क करें और संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ब्लॉक करवाएं।
  • साथ ही नेटबैंकिंग का पासवर्ड, UPI पिन और अन्य लॉगिन डिटेल तुरंत बदल दें, ताकि आगे कोई अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन न हो सके।
  • साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • अगर ठगी फर्जी कॉल, SMS या नकली वेबसाइट के माध्यम से हुई है, तो उसकी जानकारी sancharsaathi.gov.in पर शेयर करें। यहां संदिग्ध नंबर, मैसेज या लिंक की रिपोर्ट की जा सकती है।
  • याद रखें, जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे, रकम वापस मिलने और दोषियों तक पहुंचने की संभावना उतनी अधिक होगी।

………………………..

साइबर लिटरेसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

साइबर लिटरेसी- रिफंड के नाम पर 80,000 का चूना: जानें क्या है ये स्कैम, लोग क्यों होते शिकार, कैसे बचें, फर्जी नंबर कैसे पहचानें

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48 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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डिजिटल टोल सिस्टम ने नेशनल हाइवे पर सफर को आसान बनाया है। लेकिन साइबर ठग अब इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। इसके चलते बीते कुछ दिनों में FASTag (फास्टैग) रीचार्ज और एनुअल पास के नाम पर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आए हैं।

स्कैमर्स NHAI (नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के नाम व लोगो का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया और गूगल पर फर्जी विज्ञापन चलाते हैं। इस पर क्लिक करने से फर्जी वेबसाइट खुलती है। ये वेबसाइट इस तरह डिजाइन की जाती हैं कि ओरिजिनल वेबसाइट जैसी ही लगती हैं, इसलिए लोग इसके झांसे में आ जाते हैं।

इस खतरे को देखते हुए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट के जरिए लोगों को सतर्क किया है। साथ ही इससे बचने के कुछ जरूरी तरीके भी शेयर किए हैं।

आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में हम ‘फास्टैग स्कैम’ के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • साइबर ठग फास्टैग के नाम पर स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?
  • इस तरह की ऑनलाइन ठगी से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- ’फास्टैग स्कैम’ क्या है?

जवाब- यह एक ऑनलाइन ठगी है, जिसमें साइबर अपराधी फास्टैग रीचार्ज या एनुअल पास पर भारी छूट का लालच देकर लोगों को फर्जी वेबसाइट या लिंक पर ले जाते हैं। इसके जरिए पैसे ठग लेते हैं। स्कैमर फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड के बहाने इस स्कैम में लोगों को फंसाते हैं।

सवाल- साइबर ठग फास्टैग के नाम पर स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?

जवाब- इसके लिए साइबर ठग NHAI के नाम और लोगो का दुरुपयोग करते हैं, जिससे वेबसाइट रियल दिखती है। जैसे ही यूजर फर्जी वेबसाइट पर वाहन नंबर, मोबाइल नंबर और पेमेंट डिटेल दर्ज करता है, पैसे ठगों के खाते में चले जाते हैं और रीचार्ज भी नहीं होता। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

सवाल- लोग कैसे इतनी आसानी से ‘फास्टैग स्कैम’ के झांसे में फंस जाते हैं?

जवाब- इसके कई कारण हैं-

  • अवेयरनेस की कमी।
  • डिस्काउंट का लालच।
  • बिना जांचे लिंक पर क्लिक करना।
  • बिना वेरिफिकेशन के भुगतान करना।
  • गूगल सर्च पर दिख रही हर चीज को सही मानना।

सवाल- फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड में लापरवाही करने पर क्या नुकसान हो सकते हैं?

जवाब- फास्टैग से जुड़ी सर्विसेज में छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसके सभी रिस्क नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- फास्टैग स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- फास्टैग से जुड़े किसी भी काम के लिए आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें। गूगल सर्च में ऊपर दिखने वाले हर लिंक पर भरोसा न करें। किसी भी अनरियल डिस्काउंट से सावधान रहें। साथ ही कुछ और बातों का भी ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- फास्टैग रीचार्ज, एक्टिवेशन और रिफंड का सही तरीका क्या है?

जवाब- फास्टैग से जुड़ी हर प्रक्रिया ऑथराइज्ड बैंक या आधिकारिक एप/वेबसाइट के माध्यम से ही करें। नीचे एक्टिवेशन, रीचार्ज और रिफंड के सही और सुरक्षित तरीके बताए गए हैं-

एक्टिवेशन

  • फास्टैग इश्यूअर (जारीकर्ता) बैंक या ऑथराइज्ड आधिकारिक एप/वेबसाइट से ही एक्टिवेट करें।
  • एप में ‘Activate FASTag’ विकल्प चुनकर वाहन की डिटेल्स दर्ज करें।
  • ‘न्यू टैग‘ पर मौजूद QR कोड को एप से स्कैन करके भी एक्टिवेशन किया जा सकता है।
  • ऑफलाइन विकल्प के लिए बैंक शाखा या ऑथराइज्ड POS (पॉइंट ऑफ सेल) पर वाहन के जरूरी दस्तावेज जमा करें।

रीचार्ज

  • ऑथराइज्ड मोबाइल एप या वेबसाइट से सीधे रीचार्ज करें।
  • इश्यूअर बैंक की नेटबैंकिंग सुविधा से भी रीचार्ज कर सकते हैं।
  • गूगल पर दिख रहे अनजान लिंक से रीचार्ज न करें।

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  • रिफंड के लिए तुरंत अपने इश्यूअर बैंक के कस्टमर केयर में शिकायत दर्ज कराएं।
  • आमतौर पर 3–10 वर्किंग-डे में पैसा वापस आ जाता है।
  • फास्टैग बंद करना हो तो बैंक पोर्टल/एप पर ‘Close Account‘ या ‘Refund Request‘ ऑप्शन से आवेदन करें।
  • रिफंड के लिए किसी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर बैंक डिटेल शेयर न करें।

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  • सबसे पहले अपने बैंक या जिस पेमेंट एप से भुगतान किया है, उससे तुरंत संपर्क करें और संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ब्लॉक करवाएं।
  • साथ ही नेटबैंकिंग का पासवर्ड, UPI पिन और अन्य लॉगिन डिटेल तुरंत बदल दें, ताकि आगे कोई अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन न हो सके।
  • साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • अगर ठगी फर्जी कॉल, SMS या नकली वेबसाइट के माध्यम से हुई है, तो उसकी जानकारी sancharsaathi.gov.in पर शेयर करें। यहां संदिग्ध नंबर, मैसेज या लिंक की रिपोर्ट की जा सकती है।
  • याद रखें, जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे, रकम वापस मिलने और दोषियों तक पहुंचने की संभावना उतनी अधिक होगी।

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आजकल रिफंड के नाम पर स्कैम की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी खतरे को देखते हुए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने एक अलर्ट जारी किया है। पूरी खबर पढ़िए…

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