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Health Tips : पहाड़ों की ये जड़ी संजीवनी, चुटकियों में कम होगा यूरिक एसिड, तेजी से बढ़ रही मांग

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Kilomoda Root Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों पर उगने वाली जड़ी किलोमोड़ा स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका इस्तेमाल सदियों से होता आया है. यह जड़ी पहाड़ों की ताजगी और प्राकृतिक पोषण से भरपूर है. लोकल 18 से ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि किलोमोड़ा की जड़ को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीते हैं. यह रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करती है. यूरिक एसिड की समस्या में भी यह जड़ी रामबाण है. जोड़ों में सूजन और दर्द को भी कम करती है. 

ऋषिकेश. उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली जड़ी किलोमोड़ा अब स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका इस्तेमाल पारंपरिक आयुर्वेद में सदियों से किया जाता रहा है और आधुनिक समय में भी लोग इसके औषधीय गुणों के कारण इसे अपनाने लगे हैं. स्थानीय लोग इसे “पर्वतीय औषधि” भी कहते हैं क्योंकि यह जड़ी पहाड़ों की ताजगी और प्राकृतिक पोषण से भरपूर होती है.

लोकल 18 के साथ बातचीत में ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि किलोमोड़ा की प्रमुख विशेषता इसकी जड़ है. इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीते हैं. ऐसा करने से यह शरीर के कई अंगों और रोगों पर लाभ पहुंचाती है. सबसे पहले यह रक्तचाप (बीपी) को संतुलित रखने में मदद करती है. इसके नियमित सेवन से उच्च रक्तचाप के मरीजों को फायदा मिल सकता है. यूरिक एसिड की समस्या में भी यह जड़ी असरदार है. यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करके यह जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करती है.

किलोमोड़ा केवल बीपी और यूरिक एसिड तक ही सीमित नहीं है. इसे पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, गैस या अपच में राहत देने के लिए भी उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, यह जड़ी शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालती है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. कई लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं और दिन भर हल्का और ऊर्जा से भरा महसूस करते हैं.

हर उम्र के लिए रामबाण

स्थानीय लोग किलोमोड़ा का इस्तेमाल अपनी परंपरा के अनुसार करते हैं और इसे प्राकृतिक तरीके से उगाया जाता है. किलोमोड़ा की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यह हर उम्र के लोग आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि इसके सेवन का सही तरीका और मात्रा जानना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य लाभ अधिकतम हो और किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट से बचा जा सके.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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ऋषिकेश. उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली जड़ी किलोमोड़ा अब स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका इस्तेमाल पारंपरिक आयुर्वेद में सदियों से किया जाता रहा है और आधुनिक समय में भी लोग इसके औषधीय गुणों के कारण इसे अपनाने लगे हैं. स्थानीय लोग इसे “पर्वतीय औषधि” भी कहते हैं क्योंकि यह जड़ी पहाड़ों की ताजगी और प्राकृतिक पोषण से भरपूर होती है.

लोकल 18 के साथ बातचीत में ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि किलोमोड़ा की प्रमुख विशेषता इसकी जड़ है. इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीते हैं. ऐसा करने से यह शरीर के कई अंगों और रोगों पर लाभ पहुंचाती है. सबसे पहले यह रक्तचाप (बीपी) को संतुलित रखने में मदद करती है. इसके नियमित सेवन से उच्च रक्तचाप के मरीजों को फायदा मिल सकता है. यूरिक एसिड की समस्या में भी यह जड़ी असरदार है. यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करके यह जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करती है.

किलोमोड़ा केवल बीपी और यूरिक एसिड तक ही सीमित नहीं है. इसे पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, गैस या अपच में राहत देने के लिए भी उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, यह जड़ी शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालती है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. कई लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं और दिन भर हल्का और ऊर्जा से भरा महसूस करते हैं.

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