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ISRO Opens Astronaut Cadre to Public for Gaganyaan Mission

ISRO Opens Astronaut Cadre to Public for Gaganyaan Mission
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  • ISRO Opens Astronaut Cadre To Public For Gaganyaan Mission | STEM Experts Join

12 मिनट पहले

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट कैडर को आम नागरिकों के लिए खोलेगा। इस शुरुआत के बाद ISRO भविष्य में गगनयान मिशन के साथ-साथ आगे भी इंसानों को स्पेस में भेजने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ISRO की कमेटी ने ये प्रस्ताव दिया है।

STEM एक्सपर्ट्स शामिल होंगे

रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार इंडियन एस्ट्रोनॉट्स कैडर आम लोगों के लिए खोला जाएगा। ISRO गगनयान मिशन से पहले इसमें आम लोगों को शामिल किया जा सकता है।

ISRO कमेटी ने इस पर विचार किया है कि जल्दी ही एस्ट्रोनॉट के अलावा ऐसे लोग जो STEM ( साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनयरिंग और मैथमेटिक्स) बैकग्राउंड से आते हैं, इसमें शामिल हो सकेंगे।

इस फैसले के बाद आने वाले समय में प्रोफेशनल साइंटिस्ट, इंजीनियर, डॉक्टर सिर्फ मिलिट्री पायलट ही नहीं बल्कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री भी बन सकते हैं। हालांकि इसका क्राइटेरिया अभी जारी नहीं किया गया है।

नागरिकों को शामिल करने का ये कदम ISRO में मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए टेक्नोलॉजी, मिशनों और उनसे जुड़े साइंटिफिक कार्यों के लिए इन्हें तैयार किया जाएगा।

कमेटी के मुताबिक, दूसरे बैच में 4 लोग होंगे जो सीधा 4 क्रू मेंबर गगनयान मिशन से शामिल हो सकेंगे।

पहले क्रू में 4 एस्ट्रोनॉट्स शामिल

मिशन गगनयान ISRO का पहला क्रू वाला स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम है, जो 2027 तक लॉन्च होगा। ये 3 दिन का एक मिशन होगा। इसमें 3 एस्ट्रोनॉट्स 400 किमी की यात्रा कर अंतरिक्ष में जाएंगे। उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए डिजाइन किया गया है।

पहले बैच में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं। ISRO के पहले बैच में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के टेस्ट पायलट शामिल थे। इसमें चार एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट किया गया था। इन एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट करने का उद्देशय पहले क्रू मिशन को सुरक्षित पहुंचाना है।

पहले बैच में फाइटर प्लेन के एयर कमांडर प्रशांत बी नायर, जीपी कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जीपी कैप्टन अजीत कृष्णन, जीपी कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हुए थे। दूसरे बैच में इंडियन आर्मी के फाइटर जेट के लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी शामिल हो सकते हैं।

एक साल में 2 क्रू मिशन होंगे

ISRO कमेटी के प्रपोजल के मुताबिक, कमेटी ये उम्मीद कर रही है कि एक साल में 2 क्रू मिशन किए जा सकें, जिसमें अंतरिक्ष यात्री संभावित रूप से एक मिशन से लौटने के बाद दो साल के अंतर में फिर से भेजे जा सकें। इससे आम लोगों को शामिल करना मिशन में तेजी लाएगा।

एक एस्ट्रोनॉट के स्पेस में भेजने के पूरे प्रोसेस में लगभग 5 साल का समय लगता है, जिसमें सिलेक्शन, ट्रेनिंग और मिशन शामिल है।

कमेटी के मुताबिक शुरू में सात एस्ट्रोनोट्स दूसरे बैच के लिए पर्याप्त होंगे, लेकिन दूसरे बैच में संभावित ये संख्या बढ़ाकर 10 कर दी गई है।

तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट्स भेजे जाएंगे

इस क्रू मिशन से एक और बड़े बदलाव की योजना बनाई गई है, जिसमें गगनयान क्रू मॉड्यूल की क्षमता के मुताबिक एस्ट्रोनॉट्स की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने का प्रस्ताव रखा गया है।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है, जहां ज्यादा संख्या में साइंटिस्ट और अलग-अलग अंतरिक्ष यात्री पूल की जरूरत होगी।

तीसरे बैच के लिए कमेटी ने 12 एस्ट्रोनॉट्स की जरूरत का अनुमान लगाया है। इस पूल में, सैन्य पृष्ठभूमि वाले अंतरिक्ष यात्रियों और नागरिकों के अनुपात में बड़ा बदलाव किया जा सकता है।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है।

6 साल में तैयार होंगे एस्ट्रोनॉट्स

रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ने दो मिशन पायलटों और 10 स्पेशलिस्ट की सिफारिश की है। कमेटी ने ने 40 एस्ट्रोनॉट्स का प्रस्ताव दिया है। कमेटी ने इसे लंबे समय के लिए जरूरी बताया है। साथ ही दूसरे बैच को तैयार करने में 72 महीने यानी 6 साल और तीसरे बैच को तैयार करने में 96 महीनों यानी 8 साल का लक्ष्य रखा गया है।

इसका उद्देश्य साइंटिस्ट एक्सपर्टीज को शामिल करना, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च को बढ़ाना, लॉन्ग टर्म स्पेस एक्सपलोरेशन को बढ़ाना है ताकि विशेष नागरिकों को मिलिट्री क्रू में बदला जा सके।

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STEM एक्सपर्ट्स शामिल होंगे

रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार इंडियन एस्ट्रोनॉट्स कैडर आम लोगों के लिए खोला जाएगा। ISRO गगनयान मिशन से पहले इसमें आम लोगों को शामिल किया जा सकता है।

ISRO कमेटी ने इस पर विचार किया है कि जल्दी ही एस्ट्रोनॉट के अलावा ऐसे लोग जो STEM ( साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनयरिंग और मैथमेटिक्स) बैकग्राउंड से आते हैं, इसमें शामिल हो सकेंगे।

इस फैसले के बाद आने वाले समय में प्रोफेशनल साइंटिस्ट, इंजीनियर, डॉक्टर सिर्फ मिलिट्री पायलट ही नहीं बल्कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री भी बन सकते हैं। हालांकि इसका क्राइटेरिया अभी जारी नहीं किया गया है।

नागरिकों को शामिल करने का ये कदम ISRO में मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए टेक्नोलॉजी, मिशनों और उनसे जुड़े साइंटिफिक कार्यों के लिए इन्हें तैयार किया जाएगा।

कमेटी के मुताबिक, दूसरे बैच में 4 लोग होंगे जो सीधा 4 क्रू मेंबर गगनयान मिशन से शामिल हो सकेंगे।

पहले क्रू में 4 एस्ट्रोनॉट्स शामिल

मिशन गगनयान ISRO का पहला क्रू वाला स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम है, जो 2027 तक लॉन्च होगा। ये 3 दिन का एक मिशन होगा। इसमें 3 एस्ट्रोनॉट्स 400 किमी की यात्रा कर अंतरिक्ष में जाएंगे। उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने के लिए डिजाइन किया गया है।

पहले बैच में चार एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं। ISRO के पहले बैच में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के टेस्ट पायलट शामिल थे। इसमें चार एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट किया गया था। इन एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट करने का उद्देशय पहले क्रू मिशन को सुरक्षित पहुंचाना है।

पहले बैच में फाइटर प्लेन के एयर कमांडर प्रशांत बी नायर, जीपी कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जीपी कैप्टन अजीत कृष्णन, जीपी कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हुए थे। दूसरे बैच में इंडियन आर्मी के फाइटर जेट के लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी शामिल हो सकते हैं।

एक साल में 2 क्रू मिशन होंगे

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एक एस्ट्रोनॉट के स्पेस में भेजने के पूरे प्रोसेस में लगभग 5 साल का समय लगता है, जिसमें सिलेक्शन, ट्रेनिंग और मिशन शामिल है।

कमेटी के मुताबिक शुरू में सात एस्ट्रोनोट्स दूसरे बैच के लिए पर्याप्त होंगे, लेकिन दूसरे बैच में संभावित ये संख्या बढ़ाकर 10 कर दी गई है।

तीसरे बैच में 12 एस्ट्रोनॉट्स भेजे जाएंगे

इस क्रू मिशन से एक और बड़े बदलाव की योजना बनाई गई है, जिसमें गगनयान क्रू मॉड्यूल की क्षमता के मुताबिक एस्ट्रोनॉट्स की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने का प्रस्ताव रखा गया है।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है, जहां ज्यादा संख्या में साइंटिस्ट और अलग-अलग अंतरिक्ष यात्री पूल की जरूरत होगी।

तीसरे बैच के लिए कमेटी ने 12 एस्ट्रोनॉट्स की जरूरत का अनुमान लगाया है। इस पूल में, सैन्य पृष्ठभूमि वाले अंतरिक्ष यात्रियों और नागरिकों के अनुपात में बड़ा बदलाव किया जा सकता है।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है।

ये विस्तार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की बड़ी योजनाओं से जुड़ा है।

6 साल में तैयार होंगे एस्ट्रोनॉट्स

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इसका उद्देश्य साइंटिस्ट एक्सपर्टीज को शामिल करना, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च को बढ़ाना, लॉन्ग टर्म स्पेस एक्सपलोरेशन को बढ़ाना है ताकि विशेष नागरिकों को मिलिट्री क्रू में बदला जा सके।

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