Thursday, 29 Oct 2026 | 04:53 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Joint Parliamentary Committee on ‘One Nation One Election’ held meeting in gandhinagar

Joint Parliamentary Committee on ‘One Nation One Election’ held meeting in gandhinagar
  • Hindi News
  • National
  • Joint Parliamentary Committee On ‘One Nation One Election’ Held Meeting In Gandhinagar

गांधीनगर6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे रहे हैं।

जेपीसी सदस्य मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और राज्य के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उनके विचार जानेंगे। समिति की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस शाम 5:30 बजे गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में होगी।

वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता वकील पीपी चौधरी कर रहे हैं। इसके अलावा, इसमें कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।

वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर। सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था।

वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर। सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था।

शीर्ष अधिकारियों को मीटिंग में उपस्थित रहने के निर्देश

गुजरात की न्यायिक परिषद ने राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को मीटिंग में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। समिति ने मुख्य सचिव मनोज दास, डीजीपी केएनएल राव, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी नटराजन और 10 से अधिक वरिष्ठ सचिवों को बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि जेपीसी और राज्य के अधिकारियों के बीच तीन से चार घंटे तक चर्चा हो सकती है।

समिति ने सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए 20 मई को आमंत्रित किया है। इस मुद्दे पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल पटेल ने कहा- गुजरात भाजपा एक राष्ट्र-एक चुनाव का पूरी तरह से समर्थन करती है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा- कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने विचार रखेगी। यह मुद्दा जनता के अधिकारों से जुड़ा है और हमारी सभी चिंताओं को समिति के समक्ष रखा जाएगा।

तस्वीर 23 सितंबर, 2024 की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी।

तस्वीर 23 सितंबर, 2024 की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी।

एक देश-एक चुनाव क्या है

भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे।

आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

एक साथ चुनाव करवाने के 4 बड़े फायदे-

रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एकसाथ चुनाव करवाए जाने के पक्ष में ये तर्क दिए हैं…

1. शासन में निरंतरता आएगी: देश के विभिन्न भागों में चुनावों के चल रहे चक्रों के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव करवाने से सरकारों का फोकस विकासात्मक गतिविधियों और जनकल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा।

2. अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे: चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे।

3. पॉलिसी पैरालिसिस रुकेगा: चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां और विकास कार्य बाधित हो जाते हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लंबे समय तक लागू रहने की अवधि कम होगी, जिससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा।

4. वित्तीय बोझ में कमी आएगी: एकसाथ चुनाव कराने से खर्च में काफी कमी आ सकती है। जब भी चुनाव होते हैं, मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों को भी काफी खर्च करना पड़ता है।

ये आंकड़े करते हैं एकसाथ चुनावों का समर्थन

• 2019-2024 के दौरान भारत में 676 दिन आचार संहिता लागू रही, यानी हर साल करीब 113 दिन।

• अकेले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही एक अनुमान के मुताबिक करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए।

————— वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

एक देश-एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे:JPC की मीटिंग में पहुंचे पूर्व CJI बीआर गवई

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई ने गुरुवार को वन नेशन, वन इलेक्शन (ONOE) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक देश एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे और संघीय ढांचे पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सैफ-अमृता की शादी में नहीं पहुंचीं सोहा-सबा:स्कूल प्रिंसिपल ने दी खबर, सबा ने बताया 19 की उम्र में रिश्ता टूटने के बाद क्यों सिंगल रहीं

August 7, 2026/
10:02 am

सोहा अली खान और सबा अली खान ने हाल ही में बताया है कि वह भाई सैफ अली खान की...

पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे 2026: बंगाल की रिपोर्टिंग पर टीएमसी का पहला रिएक्शन- 'हम बंदूक लेकर नहीं आए, बिना पूछे हमसे...'

May 4, 2026/
8:53 am

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सैद्धांतिक पर सैद्धांतिक कांग्रेस (टीएमसी) की पहली प्रतिक्रिया आई है। उम्मीदवार उम्मीदवार शशि पांजा ने...

भवानीपुर को लेकर एग्जिट पोल में दिग्गजों वाला ताजा खबर, जानें ममता बनर्जी जीत रही हैं या हार, पढ़ें अनुमान

May 1, 2026/
1:44 pm

भवानीपुर एग्जिट पोल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में, 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को संपन्न होगा।...

NZ Vs ENG Live Cricket Score, 2nd Test Day 3: Follow latest updates from London. (AP Photo)

June 19, 2026/
8:48 pm

आखरी अपडेट:19 जून, 2026, 20:48 IST एकनाथ शिंदे ने मराठी अस्मिता पर शिवसेना के फोकस की पुष्टि की, सांसदों और...

हूती विद्रोहियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला:2 पाकिस्तानी समेत 3 की मौत; रेड सी में अब तक 8 जहाजों को निशाना बनाया

August 11, 2026/
4:38 pm

यमनी सरकार से जुड़े मीडिया के मुताबिक, ईरान समर्थित हूतियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में एक जहाज पर हमला किया।...

भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

April 29, 2026/
7:26 pm

भोपाल के एमपी नगर जोन-2 के सागर प्लाजा के लिफ्ट बुधवार की शाम को तीसरी मंजिल से गिर गई। इस...

राजनीति

Joint Parliamentary Committee on ‘One Nation One Election’ held meeting in gandhinagar

Joint Parliamentary Committee on ‘One Nation One Election’ held meeting in gandhinagar
  • Hindi News
  • National
  • Joint Parliamentary Committee On ‘One Nation One Election’ Held Meeting In Gandhinagar

गांधीनगर6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे रहे हैं।

जेपीसी सदस्य मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और राज्य के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उनके विचार जानेंगे। समिति की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस शाम 5:30 बजे गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में होगी।

वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता वकील पीपी चौधरी कर रहे हैं। इसके अलावा, इसमें कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।

वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर। सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था।

वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर। सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था।

शीर्ष अधिकारियों को मीटिंग में उपस्थित रहने के निर्देश

गुजरात की न्यायिक परिषद ने राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को मीटिंग में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। समिति ने मुख्य सचिव मनोज दास, डीजीपी केएनएल राव, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी नटराजन और 10 से अधिक वरिष्ठ सचिवों को बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि जेपीसी और राज्य के अधिकारियों के बीच तीन से चार घंटे तक चर्चा हो सकती है।

समिति ने सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए 20 मई को आमंत्रित किया है। इस मुद्दे पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल पटेल ने कहा- गुजरात भाजपा एक राष्ट्र-एक चुनाव का पूरी तरह से समर्थन करती है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा- कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने विचार रखेगी। यह मुद्दा जनता के अधिकारों से जुड़ा है और हमारी सभी चिंताओं को समिति के समक्ष रखा जाएगा।

तस्वीर 23 सितंबर, 2024 की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी।

तस्वीर 23 सितंबर, 2024 की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी।

एक देश-एक चुनाव क्या है

भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे।

आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

एक साथ चुनाव करवाने के 4 बड़े फायदे-

रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एकसाथ चुनाव करवाए जाने के पक्ष में ये तर्क दिए हैं…

1. शासन में निरंतरता आएगी: देश के विभिन्न भागों में चुनावों के चल रहे चक्रों के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव करवाने से सरकारों का फोकस विकासात्मक गतिविधियों और जनकल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा।

2. अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे: चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे।

3. पॉलिसी पैरालिसिस रुकेगा: चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां और विकास कार्य बाधित हो जाते हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लंबे समय तक लागू रहने की अवधि कम होगी, जिससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा।

4. वित्तीय बोझ में कमी आएगी: एकसाथ चुनाव कराने से खर्च में काफी कमी आ सकती है। जब भी चुनाव होते हैं, मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों को भी काफी खर्च करना पड़ता है।

ये आंकड़े करते हैं एकसाथ चुनावों का समर्थन

• 2019-2024 के दौरान भारत में 676 दिन आचार संहिता लागू रही, यानी हर साल करीब 113 दिन।

• अकेले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही एक अनुमान के मुताबिक करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए।

————— वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

एक देश-एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे:JPC की मीटिंग में पहुंचे पूर्व CJI बीआर गवई

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई ने गुरुवार को वन नेशन, वन इलेक्शन (ONOE) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक देश एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे और संघीय ढांचे पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.