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Meira Paibis The Women’s Collective Leading the Manipur Protests

Meira Paibis The Women's Collective Leading the Manipur Protests

इंफाल2 मिनट पहलेलेखक: फुलैरात्मप केनी देवी

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मेइरा पाईबी मैतेई महिलाओं का एक प्रमुख सामाजिक आंदोलन और समूह है।

मणिपुर में बीते 7 अप्रैल को रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों में 3 मौतें हो गई थीं। तबसे विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अशांति के बीच 18 अप्रैल से पूर्ण बंद लागू है। सामान्य जीवन ठप है।

इस पूरे आंदोलन में महिलाएं मुख्य भूमिका में हैं, जो न केवल सड़कों पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर लोगों को जोड़कर आंदोलन आगे भी बढ़ा रही हैं। राज्य में तीन साल से जारी​ हिंसा में संभवत: यह पहली बार हैं, जब मेइरा पाइबी समूह की महिलाएं इतने उग्र तरीके से आगे आई हैं।

ये महिलाएं दिन में रास्ते रोक रही हैं, धरना दे रही हैं। वहां से न पुलिस निकल सकती है, न कोई और। वहीं, रात में मशाल रैलियों का नेतृत्व कर रही हैं। इम्फाल वेस्ट में सड़क जाम कर रहीं रीमा ने बताया कि हर इलाके के अपने क्लब और मीरा पाइबी समूह हैं, जो अन्य महिलाओं को जोड़कर आंदोलन को मजबूत बना रही हैं।

एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया- घर संभालना, आंदोलन में जाना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं हर चीज संतुलित कर रही हूं।

मेइरा पाईबी मणिपुर में शांति की बहाली की मांग करते हुए सड़कों पर उतरी हैं।

मेइरा पाईबी मणिपुर में शांति की बहाली की मांग करते हुए सड़कों पर उतरी हैं।

बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी

– लगातार बंद के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ख्वैरामबंद इमा मार्केट में कुछ महिला विक्रेता दुकानें खोलने को मजबूर हुई हैं। अनीता लौरेंबम ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं। वे इस काम के बाद आंदोलन में शामिल होंगी। – नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है।

मेइरा पाईबी मुख्य रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

मेइरा पाईबी मुख्य रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

46 सालों से सक्रिय है ‘मेइरा पाइबी’

– 80 के दशक में शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए यह आंदोलन बना। तब भी मशाल से गश्त की जाती थी। – उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना था, ताकि मुद्दे सुलझाने के लिए लोग मिलकर काम करें। – इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन, अफस्पा के तहत कार्रवाई के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया। – इरोम शर्मिला इस आंदोलन का सबसे उल्लेखनीय चेहरा रही हैं, जिनके आंदोलन ने दुनिया का ध्यान मणिपुर की ओर खींचा।

अब समझें 6-7 अप्रैल को क्या हुआ…

बम हमले में 2 बच्चों की मौत, फिर प्रदर्शनकारियों का CRPF कैंप पर हमला

6 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में देर रात उग्रवादियों ने एक घर में बम फेंक दिया था। इसमें 5 साल के एक लड़के और छह महीने की बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ऑफिसर ने बताया कि जब घर में बम फटा, तब बच्चे अपनी मां के साथ बेडरूम में सो रहे थे।

इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर CRPF कैंप पर भी हमला कर दिया। जवाबी फायरिंग में 2 की मौत हो गई, पांच घायल हो गए। मणिपुर सरकार ने मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 3 दिनों के लिए बंद कर दिया था।

मणिपुर में एक साल तक राष्ट्रपति शासन लगा था, बाद में नए सीएम बने

मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए।

मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। बाद में वाई खेमचंद सिंह नए सीएम बने।

———————-

मणिपुर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

मणिपुर में प्रदर्शनकारियों-सुरक्षा बलों में झड़प, आंसू गैस छोड़ी:मशाल रैली रोकने पर टकराव हुआ

मणिपुर में शटडाउन के बीच रविवार रात कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। इंफाल ईस्ट के कोईरेंगेई, इंफाल वेस्ट के उरिपोक और कक्चिंग जिले में मशाल रैलियां निकाली गईं। कक्चिंग में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई। पूरी खबर पढ़ें…

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मणिपुर में बीते 7 अप्रैल को रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों में 3 मौतें हो गई थीं। तबसे विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अशांति के बीच 18 अप्रैल से पूर्ण बंद लागू है। सामान्य जीवन ठप है।

इस पूरे आंदोलन में महिलाएं मुख्य भूमिका में हैं, जो न केवल सड़कों पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर लोगों को जोड़कर आंदोलन आगे भी बढ़ा रही हैं। राज्य में तीन साल से जारी​ हिंसा में संभवत: यह पहली बार हैं, जब मेइरा पाइबी समूह की महिलाएं इतने उग्र तरीके से आगे आई हैं।

ये महिलाएं दिन में रास्ते रोक रही हैं, धरना दे रही हैं। वहां से न पुलिस निकल सकती है, न कोई और। वहीं, रात में मशाल रैलियों का नेतृत्व कर रही हैं। इम्फाल वेस्ट में सड़क जाम कर रहीं रीमा ने बताया कि हर इलाके के अपने क्लब और मीरा पाइबी समूह हैं, जो अन्य महिलाओं को जोड़कर आंदोलन को मजबूत बना रही हैं।

एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया- घर संभालना, आंदोलन में जाना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं हर चीज संतुलित कर रही हूं।

मेइरा पाईबी मणिपुर में शांति की बहाली की मांग करते हुए सड़कों पर उतरी हैं।

मेइरा पाईबी मणिपुर में शांति की बहाली की मांग करते हुए सड़कों पर उतरी हैं।

बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी

– लगातार बंद के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ख्वैरामबंद इमा मार्केट में कुछ महिला विक्रेता दुकानें खोलने को मजबूर हुई हैं। अनीता लौरेंबम ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं। वे इस काम के बाद आंदोलन में शामिल होंगी। – नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है।

मेइरा पाईबी मुख्य रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

मेइरा पाईबी मुख्य रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

46 सालों से सक्रिय है ‘मेइरा पाइबी’

– 80 के दशक में शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए यह आंदोलन बना। तब भी मशाल से गश्त की जाती थी। – उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना था, ताकि मुद्दे सुलझाने के लिए लोग मिलकर काम करें। – इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन, अफस्पा के तहत कार्रवाई के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया। – इरोम शर्मिला इस आंदोलन का सबसे उल्लेखनीय चेहरा रही हैं, जिनके आंदोलन ने दुनिया का ध्यान मणिपुर की ओर खींचा।

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इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर CRPF कैंप पर भी हमला कर दिया। जवाबी फायरिंग में 2 की मौत हो गई, पांच घायल हो गए। मणिपुर सरकार ने मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 3 दिनों के लिए बंद कर दिया था।

मणिपुर में एक साल तक राष्ट्रपति शासन लगा था, बाद में नए सीएम बने

मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए।

मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। बाद में वाई खेमचंद सिंह नए सीएम बने।

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