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15 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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डिजिटल दौर में आइडेंटिटी ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। लेकिन क्या हो, जब हमारी आइडेंटिटी का दुरुपयोग हो रहा हो और हमें पता भी न चले। हाल ही में फेक आईडी पर सिम कार्ड खरीदने-बेचने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
बीते दिनों डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन ने ऑपरेशन ‘FACE’ (फेशियल ऑथेंटिकेशन एंड कंप्लायंस एनफोर्समेंट) चलाया। इसके तहत 880 संदिग्ध चेहरों पर 1.21 लाख सिम कार्ड जारी होने का खुलासा किया। इनमें मध्यप्रदेश में 700 लोगों के नाम पर करीब 1 लाख सिम और छत्तीसगढ़ में 180 लोगों के नाम पर 21 हजार सिम एक्टिव मिले।
इसलिए ये जानना जरूरी है कि कहीं हमारे नाम पर भी कोई फर्जी सिम तो नहीं चल रहा।
आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में हम फर्जी सिम कार्ड के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-
- कैसे पता करें कि आपके नाम पर कितने सिम एक्टिव हैं?
- फर्जी सिम कार्ड फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस
सवाल- फर्जी सिम कार्ड क्या है?
जवाब- फर्जी सिम कार्ड किसी व्यक्ति की पहचान (जैसे आधार, आईडी या फेस ऑथेंटिकेशन) का गलत या बिना अनुमति इस्तेमाल करके जारी कराया जाता है।
- इसमें फर्जी डॉक्यूमेंट्स, फर्जी आइडेंटिटी या किसी अनजान व्यक्ति के डेटा का दुरुपयोग किया जाता है।
- ऐसे सिम का इस्तेमाल अक्सर साइबर फ्रॉड, ठगी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जाता है।

सवाल- यूजर की सहमति के बिना सिम कार्ड कैसे इश्यू हो जाते हैं?
जवाब- सिम जारी करने की प्रक्रिया में लापरवाही या धोखाधड़ी के कारण ऐसा होता है।
- कुछ मामलों में सिम विक्रेता चोरी या लीक हुए डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल कर देते हैं।
- कई बार फर्जी केवाईसी या फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए सिम एक्टिव कर दिए जाते हैं।
- यूजर की जानकारी किसी एप, वेबसाइट या साइबर ठगी के जरिए हासिल कर ली जाती है और उसी का दुरुपयोग किया जाता है।
- कमजोर मॉनिटरिंग और सिस्टम की खामियां भी इस तरह के फ्रॉड को आसान बना देती हैं।
सवाल- फर्जी सिम का इस्तेमाल किन कामों में किया जाता है?
जवाब- फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल आमतौर पर ऐसी गतिविधियों में किया जाता है, जहां असली पहचान छिपानी होती है। इससे अपराधी धोखा देकर बच निकलते हैं। नीचे ग्राफिक में फर्जी सिम के यूज देखिए-

सवाल- एक आम इंसान के लिए उसके नाम से फर्जी सिम होना कितना खतरनाक हो सकता है?
जवाब- यह व्यक्ति की पहचान और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसके कई रिस्क हो सकते हैं। जैसेकि-
- आइडेंटिटी चोरी हो सकती है।
- किसी अपराध में नाम आ सकता है।
- बैंक अकाउंट हैक हो सकता है।
- OTP के जरिए पैसों की ठगी हो सकती है।
- लोन या फाइनेंशियल फ्रॉड हो सकता है।
- सोशल मीडिया अकाउंट का गलत यूज हो सकता है।
- फर्जी वेरिफिकेशन कॉल/मैसेज आ सकते हैं।
सवाल- एक ID पर कितने सिम लेने की लिमिट है?
जवाब- डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन (DOT) के नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति अपनी एक आईडी पर अधिकतम 9 सिम कार्ड ले सकता है। जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्व के राज्यों में 6 सिम की सीमा निर्धारित है।
सवाल- आपके नाम पर कितने सिम एक्टिव हैं, कैसे पता करें?
जवाब- ऑनलाइन चेक कर सकते हैं कि आपकी आईडी पर कितने सिम एक्टिव हैं। इसके लिए सरकार ने ‘संचार साथी’ वेबसाइट में सुविधा दी है। नीचे ग्राफिक में इसका स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस समझें।

सवाल- अगर आपके नाम पर फर्जी सिम मिले तो तुरंत क्या करें?
जवाब- सबसे पहले घबराएं नहीं। तुरंत ‘संचार साथी’ पोर्टल पर जाकर संदिग्ध नंबर को ‘नॉट माय नंबर’ पर जाकर रिपोर्ट करें। पूरा प्रोसेस ग्राफिक में देखिए-

सवाल- सिम खरीदते समय क्या सावधानियां रखें?
जवाब- सिम लेते समय छोटी-सी लापरवाही भी बड़े फ्रॉड का कारण बन सकती है, इसलिए ये सावधानियां जरूर रखें-
- सिर्फ ऑथराइज्ड स्टोर से सिम लें।
- खुद KYC प्रोसेस पूरा करें।
- OTP किसी को शेयर न करें।
- अपनी ID की कॉपी किसी को न दें।
- सिम एक्टिवेशन मैसेज और नंबर तुरंत चेक करें।
- अनयूज्ड या अतिरिक्त सिम तुरंत बंद करवाएं।
- सिम लेते समय रसीद/डॉक्यूमेंट जरूर लें।
- किसी और के कहने पर अपने नाम से सिम न लें।
- फोन खो जाए तो तुरंत सिम ब्लॉक करवाएं।
- समय-समय पर चेक करें कि आपके नाम पर कितने सिम एक्टिव हैं।
सवाल- फर्जी सिम कार्ड के फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
जवाब- थोड़ी सावधानी और नियमित जांच से आप इस तरह के फ्रॉड से खुद को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं। सभी सेफ्टी टिप्स ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर फर्जी सिम से फ्रॉड का शक हो तो क्या करें?
जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत एक्शन लेना जरूरी है, ताकि नुकसान बढ़ने से रोका जा सके। इसके लिए ये कदम उठाएं-
- साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत करें।
- साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन रिपोर्ट करें।
- नजदीकी थाने में सूचना दर्ज कराएं।
- संबंधित टेलीकॉम कंपनी को तुरंत जानकारी दें।
- कॉल, मैसेज, ट्रांजैक्शन जैसे सबूत सुरक्षित रखें।
- अपने बैंक और UPI अकाउंट चेक करें।
- सभी पासवर्ड और PIN बदल दें।
- हो सके तो अस्थाई रूप से ब्लॉक कराएं।
- संदिग्ध नंबर को ब्लॉक करें।
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