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RBI Caps Banks’ NOP-INR Limit at $100 Million to Curb Rupee Fall

RBI Caps Banks' NOP-INR Limit at $100 Million to Curb Rupee Fall

नई दिल्ली8 घंटे पहले

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RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अब हर दिन अपने पास 100 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपए) से ज्यादा नहीं रख सकेंगे। इससे पहले बैंक हर दिन 300 से 500 मिलियन डॉलर (2,845-4,743 करोड़ रुपए) होल्ड कर रहे थे।

फॉरेक्स एनालिस्ट के मुताबिक, निर्देश का असर यह होगा कि बैंक अब उनके पास मौजूद एक्स्ट्रा डॉलर को मार्केट में बेचेंगे तो इससे रुपया मजबूत होगा। जिससे विदेशी सामान खरीदना, विदेश में पढ़ना और घूमना सस्ता हो सकता है।

इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं। RBI के यह निर्देश जारी करने के एक दिन पहले ही रुपया डॉलर के मुकाबले ₹94.59 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का निर्देश।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का निर्देश।

रुपए में गिरावट को देखते हुए RBI ने यह फैसला लिया

RBI ने डॉलर के मुकाबले रुपए में आ रही गिरावट और बाजार की अस्थिरता को देखते हुए यह फैसला लिया है। निर्देश जारी करते हुए RBI ने सभी बैंकों को कहा कि वे हर कारोबारी दिन के आखिरी में ऑनशोर डिलीवरेबल मार्केट में भारतीय मुद्रा पर अपनी नेट ओपन पोजिशन (NOP-INR) को 100 मिलियन डॉलर के अंदर सीमित रखें। यानी बैंकों को हर कारोबारी दिन के आखिरी में अपने फॉरेन करेंसी एक्सपोजर को इसी दायरे में रखना होगा।

RBI ने बैंकों को 10 अप्रैल तक का समय दिया

RBI ने सभी ऑथराइज्ड फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स को इस नए नियम का पालन करने के लिए 10 अप्रैल तक का समय दिया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एफएक्स एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, इस कदम से शेयर बाजार में बैंकों की डॉलर में ली जाने वाली लॉन्ग पोजीशन (सट्टेबाजी) कम होगी। इससे बाजार खुलने पर रुपए में होने वाली अचानक और बड़ी गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी।

क्या होती है नेट ओपन पोजीशन (NOP)?

नेट ओपन पोजीशन का मतलब उस कुल विदेशी मुद्रा से है जिसे बैंकों ने खरीदा या बेचा है, लेकिन उसे हेज (सुरक्षित) नहीं किया है। मौजूदा नियमों के अनुसार, बैंक अपनी कुल पूंजी के 25% तक की लिमिट खुद तय कर सकते थे। लेकिन अब RBI ने इसे सीधे तौर पर 100 मिलियन डॉलर पर कैप कर दिया है।

दिलीप परमार ने बताया कि बैंक अक्सर बड़े फॉरेक्स पोर्टफोलियो रखते हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल आर्बिट्राज (मुनाफाखोरी) के लिए किया जाता है। जब बैंक बड़े पैमाने पर अनहेजेड पोजीशन (बिना सुरक्षा वाली ट्रेडिंग) रखते हैं, तो इससे इंट्राडे ट्रेडिंग में रुपए में तेज उतार-चढ़ाव आता है। RBI ने पहले बैंकों को चेतावनी दी थी, लेकिन अब इसे आधिकारिक आदेश में बदल दिया गया है।

₹95 के स्तर के करीब पहुंचा भारतीय रुपया

RBI के मुताबिक, शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले ₹94.59 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। पिछले 10 ट्रेडिंग सेशन में से 5 बार रुपए ने अपना ऑल-टाइम लो रिकॉर्ड बनाया है।

विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण अब रुपया ₹95 प्रति डॉलर के स्तर को छूने के बेहद करीब है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक, युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है।

ईरान युद्ध और कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर

रुपए की इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतों में आया उछाल है। फरवरी के आखिरी में अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारतीय करंसी में करीब 4% की गिरावट आ चुकी है।

2011-12 के बाद रुपए में सबसे बड़ी गिरावट

भारत का वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है। आंकड़ों के अनुसार, 14 साल में पहली बार रुपया एक साल में इतना गिरा है। इससे पहले 2011-12 में यूरोजोन संकट के दौरान करीब 14% गिरावट आई थी। वहीं 1 अप्रैल 2025 से अब तक यानी वित्त वर्ष-26 में रुपया 10% गिर चुका है।

डॉलर महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा

मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।

तेल की कीमतें: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा।

जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित।

महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है।

विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है।

क्या रुपया 98 प्रति डॉलर तक जाएगा?

एनालिस्ट्स ने GDP ग्रोथ अनुमान घटाने शुरू किए हैं। बर्नस्टीन के मुताबिक, युद्ध लंबा चला तो करंट अकाउंट बैलेंस पर दबाव बढ़ेगा और रुपया इस साल 98 के स्तर के पार जा सकता है।

कुछ एनालिस्ट्स ने अगले 12 महीनों में महंगाई काबू करने के लिए RBI द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना जताई है।

कैसे तय होती है करेंसी की कीमत ?

  • डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं।
  • हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है।
  • अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।

ये खबर भी पढ़ें…

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 50% से बढ़ाकर 70% किया: स्टील-ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता, रेस्टोरेंट्स के बाद बड़े उद्योगों को 20% अतिरिक्त सप्लाई

केंद्र सरकार ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च) को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के एलोकेशन यानी कोटा को 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन उद्योगों को मिलेगा जो पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अब हर दिन अपने पास 100 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपए) से ज्यादा नहीं रख सकेंगे। इससे पहले बैंक हर दिन 300 से 500 मिलियन डॉलर (2,845-4,743 करोड़ रुपए) होल्ड कर रहे थे।

फॉरेक्स एनालिस्ट के मुताबिक, निर्देश का असर यह होगा कि बैंक अब उनके पास मौजूद एक्स्ट्रा डॉलर को मार्केट में बेचेंगे तो इससे रुपया मजबूत होगा। जिससे विदेशी सामान खरीदना, विदेश में पढ़ना और घूमना सस्ता हो सकता है।

इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं। RBI के यह निर्देश जारी करने के एक दिन पहले ही रुपया डॉलर के मुकाबले ₹94.59 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का निर्देश।

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RBI ने बैंकों को 10 अप्रैल तक का समय दिया

RBI ने सभी ऑथराइज्ड फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स को इस नए नियम का पालन करने के लिए 10 अप्रैल तक का समय दिया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एफएक्स एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, इस कदम से शेयर बाजार में बैंकों की डॉलर में ली जाने वाली लॉन्ग पोजीशन (सट्टेबाजी) कम होगी। इससे बाजार खुलने पर रुपए में होने वाली अचानक और बड़ी गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी।

क्या होती है नेट ओपन पोजीशन (NOP)?

नेट ओपन पोजीशन का मतलब उस कुल विदेशी मुद्रा से है जिसे बैंकों ने खरीदा या बेचा है, लेकिन उसे हेज (सुरक्षित) नहीं किया है। मौजूदा नियमों के अनुसार, बैंक अपनी कुल पूंजी के 25% तक की लिमिट खुद तय कर सकते थे। लेकिन अब RBI ने इसे सीधे तौर पर 100 मिलियन डॉलर पर कैप कर दिया है।

दिलीप परमार ने बताया कि बैंक अक्सर बड़े फॉरेक्स पोर्टफोलियो रखते हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल आर्बिट्राज (मुनाफाखोरी) के लिए किया जाता है। जब बैंक बड़े पैमाने पर अनहेजेड पोजीशन (बिना सुरक्षा वाली ट्रेडिंग) रखते हैं, तो इससे इंट्राडे ट्रेडिंग में रुपए में तेज उतार-चढ़ाव आता है। RBI ने पहले बैंकों को चेतावनी दी थी, लेकिन अब इसे आधिकारिक आदेश में बदल दिया गया है।

₹95 के स्तर के करीब पहुंचा भारतीय रुपया

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विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण अब रुपया ₹95 प्रति डॉलर के स्तर को छूने के बेहद करीब है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक, युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है।

ईरान युद्ध और कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर

रुपए की इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतों में आया उछाल है। फरवरी के आखिरी में अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारतीय करंसी में करीब 4% की गिरावट आ चुकी है।

2011-12 के बाद रुपए में सबसे बड़ी गिरावट

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जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित।

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विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है।

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कुछ एनालिस्ट्स ने अगले 12 महीनों में महंगाई काबू करने के लिए RBI द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना जताई है।

कैसे तय होती है करेंसी की कीमत ?

  • डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं।
  • हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है।
  • अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।

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