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Reliance Top Loser, Market Cap Down ₹89K Cr; HDFC Bank Also Falls

Reliance Top Loser, Market Cap Down ₹89K Cr; HDFC Bank Also Falls

मुंबई10 मिनट पहले

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मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1.75 लाख करोड़ रुपए घट गई। मिडिल ईस्ट में तनाव और इजराइल-ईरान जंग की वजह से यह गिरावट आई है।

इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। रिलायंस का मार्केट कैप 89,720 करोड़ रुपए घटकर ₹18.24 लाख करोड़ पर आ गया।

HDFC का मार्केट कैप 37,248 करोड़ रुपए घटकर ₹11.64 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं SBI की मार्केट वैल्यू ₹35,399 करोड़ घटकर ₹9.41 लाख करोड़ पर आ गई।

इनके अलावा बीते हफ्ते ICICI बैंक, भारती एयरटेल, HUL और TCS का मर्केट कैप भी घटा है। वहीं लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस और इंफोसिस का मार्केट कैप बढ़ा है।

बीते हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी 1.27% तक गिरा था

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच पिछले हफ्ते सेंसेक्स 949.74 (1.27%) और निफ्टी 294.9 (1.27%) अंक गिरा था। वहीं शेयर बाजार में 27 मार्च यानी शुक्रवार को गिरावट रही थी।

सेंसेक्स 1690 अंक (2.25%) की गिरावट के साथ 73,583 पर आ गया। वहीं निफ्टी में भी 486 अंक (2.09%) की गिरावट रही, ये 22,820 पर बंद हुआ था।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझें…

मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…

बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब
शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे
पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट
पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट
हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग

मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।

उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। रिलायंस का मार्केट कैप 89,720 करोड़ रुपए घटकर ₹18.24 लाख करोड़ पर आ गया।

HDFC का मार्केट कैप 37,248 करोड़ रुपए घटकर ₹11.64 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं SBI की मार्केट वैल्यू ₹35,399 करोड़ घटकर ₹9.41 लाख करोड़ पर आ गई।

इनके अलावा बीते हफ्ते ICICI बैंक, भारती एयरटेल, HUL और TCS का मर्केट कैप भी घटा है। वहीं लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस और इंफोसिस का मार्केट कैप बढ़ा है।

बीते हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी 1.27% तक गिरा था

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच पिछले हफ्ते सेंसेक्स 949.74 (1.27%) और निफ्टी 294.9 (1.27%) अंक गिरा था। वहीं शेयर बाजार में 27 मार्च यानी शुक्रवार को गिरावट रही थी।

सेंसेक्स 1690 अंक (2.25%) की गिरावट के साथ 73,583 पर आ गया। वहीं निफ्टी में भी 486 अंक (2.09%) की गिरावट रही, ये 22,820 पर बंद हुआ था।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझें…

मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…

बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब
शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे
पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट
पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट
हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग

मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।

उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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