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US to Bury 408 kg Time Capsule on 250th Independence Anniversary, Opens in 2276

US to Bury 408 kg Time Capsule on 250th Independence Anniversary, Opens in 2276

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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अमेरिकाज टाइम कैप्सूल में 50 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से भेजी गई खास चीजें रखी गई हैं।

4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा।

इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें।

इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं।

टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।

कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें

टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले।

इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके।

यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।

टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया?

कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा।

कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है।

कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।

250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी।

यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी।

इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा,

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अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी।

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दुनिया के सबसे चर्चित टाइम कैप्सूल

  • दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में सबसे पहला नाम क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन का आता है। इसे 6,000 साल तक बंद रखने के लिए बनाया गया है।
  • इसे अमेरिका के अटलांटा राज्य के ओगलेथॉर्प यूनिवर्सिटी के परिसर में जमीन के नीचे बनाया गया था और उसी दिन स्टेनलेस स्टील का दरवाजा वेल्ड करके हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
  • इसमें उस दौर किताबें, फिल्में, ऑडियो रिकॉर्डिंग, घरेलू सामान, अखबार, वैज्ञानिक उपकरण और रोजमर्रा की वस्तुएं रखी गई हैं। इसे साल 8113 में खोला जाएगा।
  • इसी तरह न्यूयॉर्क में वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल को 1939 में दफनाया गया था। इसमें भी उस दौर के रोजमर्रा की चीजें रखी गई हैं। इसे साल 6939 में खोलने की योजना है।
  • भारत में भी टाइम कैप्सूल दफन किए गए हैं। सबसे चर्चित उदाहरण 1973 का है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास एक टाइम कैप्सूल दफन कराया था। इसका नाम ‘कलपात्र’ रखा गया था।
  • इसमें स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे। हालांकि 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे जमीन से निकाल लिया गया। बाद में इसकी सामग्री को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ।

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ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जून को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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अमेरिकाज टाइम कैप्सूल में 50 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से भेजी गई खास चीजें रखी गई हैं।

4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा।

इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें।

इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं।

टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।

कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें

टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले।

इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके।

यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।

टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया?

कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा।

कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है।

कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।

250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी।

यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी।

इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा,

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अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी।

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दुनिया के सबसे चर्चित टाइम कैप्सूल

  • दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में सबसे पहला नाम क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन का आता है। इसे 6,000 साल तक बंद रखने के लिए बनाया गया है।
  • इसे अमेरिका के अटलांटा राज्य के ओगलेथॉर्प यूनिवर्सिटी के परिसर में जमीन के नीचे बनाया गया था और उसी दिन स्टेनलेस स्टील का दरवाजा वेल्ड करके हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
  • इसमें उस दौर किताबें, फिल्में, ऑडियो रिकॉर्डिंग, घरेलू सामान, अखबार, वैज्ञानिक उपकरण और रोजमर्रा की वस्तुएं रखी गई हैं। इसे साल 8113 में खोला जाएगा।
  • इसी तरह न्यूयॉर्क में वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल को 1939 में दफनाया गया था। इसमें भी उस दौर के रोजमर्रा की चीजें रखी गई हैं। इसे साल 6939 में खोलने की योजना है।
  • भारत में भी टाइम कैप्सूल दफन किए गए हैं। सबसे चर्चित उदाहरण 1973 का है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास एक टाइम कैप्सूल दफन कराया था। इसका नाम ‘कलपात्र’ रखा गया था।
  • इसमें स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे। हालांकि 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे जमीन से निकाल लिया गया। बाद में इसकी सामग्री को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ।

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