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Vikram Bhatt Success Story Facts; Aamir Khan Ghulam – Movies List

Vikram Bhatt Success Story Facts; Aamir Khan Ghulam - Movies List

27 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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विक्रम भट्ट का मानना है कि कई बार निर्देशक के काम को वह पहचान नहीं मिलती, जिसका वह हकदार होता है।

हिट फिल्म हो तो तालियां स्टार्स के हिस्से आती हैं, लेकिन फ्लॉप होते ही सबसे पहले कटघरे में डायरेक्टर खड़ा होता है। विक्रम भट्ट इसे फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा और सबसे पुराना सच मानते हैं। वह कहते हैं, “हमें फ्लॉप फिल्मों की लाश उठाने के पैसे दिए जाते हैं।” यह उनके चार दशक लंबे करियर का अनुभव है।

हॉरर फिल्मों को हिंदी सिनेमा में नई पहचान दिलाने वाले विक्रम भट्ट ने सुपरहिट फिल्मों के साथ फ्लॉप दौर भी देखा। उन्होंने बड़े सितारों के साथ काम किया, नए कलाकारों को लॉन्च किया, निजी विवादों का सामना किया और जेल तक का सफर भी तय किया।

इसके बावजूद उनका मानना है कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए सफलता नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों पर कायम रहना सबसे जरूरी है। यही वजह है कि उन्होंने स्टार सिस्टम, फिल्मों के क्रेडिट, आमिर खान के साथ दोबारा काम न करने की वजह, अपने संघर्ष और विवादों पर बेबाकी से बात की।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं विक्रम भट्ट के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें।

शुरुआती मौके से लेकर अलग पहचान बनाने तक

विक्रम भट्ट फिल्मी माहौल में बड़े हुए और कम उम्र में ही फिल्म निर्माण से जुड़ गए। शुरुआती दौर में उन्होंने निर्देशन की बारीकियां सीखीं और अपनी फिल्मों के जरिए अलग पहचान बनाई। रोमांटिक और थ्रिलर फिल्मों के बाद उन्होंने हॉरर जॉनर में ऐसा प्रयोग किया, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में अलग मुकाम दिलाया।

‘राज’, ‘1920’, ‘शापित’ और ‘हॉन्टेड 3डी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हॉरर फिल्मों का बड़ा चेहरा बना दिया। उनकी फिल्मों ने साबित किया कि दमदार कहानी और ट्रीटमेंट के दम पर हॉरर भी बॉक्स ऑफिस पर सफल हो सकता है।

डायरेक्टर के तौर पर नए और बड़े स्टार्स के साथ काम करने का फर्क

अपने लंबे करियर में विक्रम भट्ट ने अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, आमिर खान, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी जैसे बड़े सितारों के साथ-साथ नए कलाकारों के साथ भी काम किया है। उनके मुताबिक दोनों की अपनी-अपनी खूबियां होती हैं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर के तौर पर नए और बड़े स्टार्स के साथ काम करने में क्या फर्क होता है।

विक्रम भट्ट कहते हैं कि नए कलाकार उतने ट्रेंड या मंझे हुए नहीं होते, जितने अनुभवी कलाकार होते हैं। लेकिन उनमें सीखने की इच्छा होती है, जो कई बार स्टार्स में नहीं होती। स्टार्स अपनी तय शैली में काम करना पसंद करते हैं, जबकि डायरेक्टर कई बार कुछ अलग करना चाहता है।

इसलिए दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। स्टार्स के साथ काम करने पर फिल्म को अच्छी ओपनिंग और अनुभवी अभिनेता मिलता है। वहीं, नए कलाकारों के साथ एक उत्साही और कुछ कर दिखाने का जज्बा रखने वाला इंसान मिलता है। इसलिए दोनों के अपने-अपने एडवांटेज हैं।

विक्रम भट्ट का मानना है कि फिल्म की जिम्मेदारी आखिरकार निर्देशक की होती है। हालांकि सफलता और असफलता का श्रेय बराबर नहीं बंटता।

विक्रम भट्ट का मानना है कि फिल्म की जिम्मेदारी आखिरकार निर्देशक की होती है। हालांकि सफलता और असफलता का श्रेय बराबर नहीं बंटता।

फिल्म की जिम्मेदारी हमेशा डायरेक्टर की होती है

विक्रम भट्ट का मानना है कि स्टार हो या न हो, फिल्म की जिम्मेदारी आखिरकार डायरेक्टर की ही होती है। हालांकि बदकिस्मती यह है कि जब किसी स्टार की फिल्म हिट होती है, तो डायरेक्टर को उतना श्रेय नहीं मिलता। काम वह उतना ही करता है, लेकिन फिल्म स्टार की हिट कहलाती है।

वह कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि फिल्म ‘धुरंधर’ के मामले में उसके डायरेक्टर आदित्य धर का भी नाम लिया जा रहा है। सिर्फ कलाकारों की ही नहीं, बल्कि डायरेक्टर की भी चर्चा हो रही है। वरना अक्सर लोग कहते हैं कि यह फलां स्टार की हिट फिल्म है। यही सबसे बड़ी दिक्कत है।

उनके मुताबिक मेहनत सभी बराबर करते हैं। लेकिन जब स्टार की फिल्म नहीं चलती, तब सबसे पहले डायरेक्टर का नाम आता है कि इतने बड़े स्टार के साथ भी फ्लॉप फिल्म बना दी। इसलिए वह मजाक में कहते हैं कि डायरेक्टर को पैसे फ्लॉप फिल्म की लाश उठाने के लिए दिए जाते हैं। हिट सबकी होती है, लेकिन फ्लॉप सिर्फ डायरेक्टर की मानी जाती है।

हिट का क्रेडिट स्टार को, फ्लॉप का ठीकरा डायरेक्टर पर

विक्रम भट्ट कहते हैं कि यह कोई नई बात नहीं, बल्कि हमेशा से ऐसा ही होता आया है। स्टार एक साथ कई फिल्में करते हैं। अगर उनकी चार फिल्मों में से तीन हिट हो जाएं और आपकी फिल्म फ्लॉप हो जाए, तो लोग यही मानते हैं कि कमी डायरेक्टर में रही होगी।

वह कहते हैं कि लोग यह नहीं समझते कि किसी फिल्म को सफल बनाने में सिर्फ स्टार नहीं होता। कोई राइटर कहानी लिखता है, कोई अच्छे डायलॉग देता है, कोई बेहतरीन सीन बनाता है, अच्छे गाने बनते हैं और सही पब्लिसिटी होती है। तब जाकर एक स्टार बनता है। लेकिन जब फिल्म हिट होती है, तो लोग मान लेते हैं कि सिर्फ स्टार ने ही सब कुछ किया है।

उनके मुताबिक यह बरसों से चला आ रहा सच है और इसे बदला नहीं जा सकता। यही इंडस्ट्री की हकीकत है, इसलिए इससे लड़ने का कोई मतलब नहीं है।

मुझे हमेशा मेरा क्रेडिट मिला

विक्रम भट्ट कहते हैं कि खुशकिस्मती से उनके साथ कभी ऐसा नहीं हुआ कि उनका श्रेय किसी और को मिल गया हो। आमिर खान के साथ काम करने के दौरान भी लोग कहते थे कि हमेशा आमिर को ही क्रेडिट मिलता है, लेकिन ‘गुलाम’ ने उन्हें भी पूरा सम्मान दिया।

वह बताते हैं कि किसी ने कभी यह नहीं कहा कि फिल्म आमिर खान ने डायरेक्ट की थी। उन्हें जितना क्रेडिट मिलना चाहिए था, उतना मिला। ‘ आवारा पागल दीवाना’ के लिए भी उन्हें पूरा श्रेय मिला। इसलिए वह मानते हैं कि इस मामले में उनकी किस्मत अच्छी रही।

आमिर खान के साथ दोबारा काम क्यों नहीं हुआ?

विक्रम भट्ट बताते हैं कि ‘गुलाम’ के समय मुकेश भट्ट और आमिर खान के रिश्ते अच्छे नहीं थे। आमिर शायद उनके साथ आगे काम नहीं करना चाहते थे। यह कोई निजी दुश्मनी नहीं थी, बल्कि दोनों का स्वभाव मेल नहीं खा रहा था।

वह कहते हैं कि वह मुकेश भट्ट के लिए काम करते थे और ‘गुलाम’ भी उन्हें मुकेश भट्ट ने ही दी थी। ऐसे में उन्हें लगा कि अगर वह मुकेश भट्ट को छोड़कर आमिर खान के साथ चले जाएं, तो यह बेवफाई होगी। बाद में फिर कभी ऐसा मौका ही नहीं आया। वह दूसरी दिशा में चले गए और आमिर खान दूसरी राह पर।

भगवान पर भरोसा रखने वाला इंसान बेवफाई नहीं कर सकता

हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा बहुत कम होता है। आमतौर पर लोग बड़े स्टार्स के साथ ही खड़े नजर आते हैं। लेकिन विक्रम भट्ट हमेशा मुकेश भट्ट के ही साथ खड़े रहे। विक्रम भट्ट से जब पूछा गया कि इसकी ताकत और हिम्मत कहां से आई कि किसी को धोखा नहीं देना है?

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि इसके लिए किसी खास हिम्मत या ताकत की जरूरत होती है। उनका मानना है कि जो इंसान सच में भगवान पर भरोसा रखता है, वह ऐसे काम नहीं कर सकता।

वह बताते हैं कि उन्होंने ‘गुलाम’ मुकेश भट्ट के लिए बनाई थी, जिसमें आमिर खान थे। इससे पहले मुकेश भट्ट ने ही उन्हें ‘जानम’ जैसी पहली फिल्म और ‘फरेब’ जैसी पहली हिट फिल्म दी थी। ऐसे इंसान को सिर्फ इसलिए छोड़ देना कि कहीं और काम मिल रहा है, उन्हें सही नहीं लगा।

उनका कहना है कि जो इंसान सिर्फ मौके देखकर रिश्ते बदलता है, वह बिन पेंदी का लोटा होता है और ऐसे लोग इस इंडस्ट्री में ज्यादा समय तक टिक नहीं पाते। अगर आपके अपने सिद्धांत नहीं हैं, तो आप बहुत आगे नहीं जा सकते।

मेरे करियर में ऊंचाइयां भी आईं और बड़े उतार भी

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उनके करियर ने ऊंचाइयां भी देखी हैं और बड़े उतार भी। कभी लगातार छह-सात फिल्में हिट हुईं, तो कभी लगातार छह-सात फिल्में फ्लॉप भी रहीं। फिर दोबारा हिट फिल्मों का दौर आया और उसके बाद फिर फ्लॉप फिल्मों का दौर।

वह अपने करियर की तुलना ऊंट की चाल से करते हैं, जो कभी ऊपर जाती है, कभी नीचे। उनका कहना है कि शायद अब फिर से ऊपर वाला दौर आया है। यह कितना लंबा चलेगा, यह ऊपरवाला ही जानता है। उनकी बस यही दुआ है कि जितना हो सके, यह दौर चलता रहे।

अगर मेरी जिंदगी पर फिल्म बने तो उसका नाम ‘संघर्ष’ होगा

विक्रम भट्ट कहते हैं कि अगर उनकी जिंदगी पर फिल्म बने, तो उसका नाम ‘संघर्ष’ होना चाहिए। उन्होंने हर चीज के लिए संघर्ष किया है- निजी जिंदगी, फिल्मी करियर और आध्यात्मिक यात्रा में भी। उनके मुताबिक संघर्ष उनकी सबसे बड़ी पहचान रहा है।

मेरी फिल्में रिलीज के समय नहीं, समय बीतने के बाद पसंद की जाती हैं

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उनकी फिल्मों के साथ अजीब बात होती है। जब फिल्म रिलीज होती है, तब लोगों को पसंद नहीं आती, लेकिन कुछ साल बाद वही फिल्म कल्ट क्लासिक बन जाती है।

वह उदाहरण देते हैं कि ‘राज’ को रिलीज के समय किसी ने जीरो स्टार दिए, किसी ने एक स्टार और किसी ने डेढ़ स्टार। लेकिन कुछ साल बाद वही फिल्म क्लासिक कहलाने लगी। इसी तरह ‘हॉन्टेड’ के रिलीज होने पर लोगों ने उसकी काफी आलोचना की थी, लेकिन आज वही लोग उसे क्लासिक कहते हैं।

वह कहते हैं कि आज जो फिल्म क्लासिक है, रिलीज के समय वह क्लासिक नहीं थी। और जो आज नई फिल्म है, अगर चल गई तो चार साल बाद उसे भी क्लासिक कहा जाएगा। इसी बात को वह अंग्रेजी की एक लाइन से समझाते हैं- “Durability is acceptability.” यानी जो समय की कसौटी पर टिकता है, वही स्वीकार किया जाता है। जो टिक नहीं पाता, वह समय के साथ खत्म हो जाता है।

धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिन

विक्रम भट्ट के करियर में सिर्फ फिल्मी उतार-चढ़ाव ही नहीं आए। उनकी निजी जिंदगी भी कई बार विवादों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई, जब उन्हें और उनकी पत्नी को एक कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया।

विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को उदयपुर के ‘इंदिरा आईवीएफ’ ग्रुप के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया से जुड़े ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी और ठगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने मुर्डिया की दिवंगत पत्नी पर बायोपिक बनाने के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपए लिए और प्रोजेक्ट बीच में रोक दिया गया। इस गिरफ्तारी ने मीडिया का ध्यान खींचा।

विक्रम भट्ट से जब पूछा गया कि क्या सेलिब्रिटी होने के कारण उन्हें टारगेट किया गया होगा, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब इस तरह दिया।

सेलिब्रिटी होने की वजह से मामला बड़ा बन गया

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें सेलिब्रिटी होने की वजह से टारगेट किया गया या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि सेलिब्रिटी होने की वजह से हर बात ज्यादा चर्चा में आ जाती है। वह अखबारों की सुर्खियां बन जाती है और जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाता है।

उनका कहना है कि अगर यही घटना किसी कम जाने-पहचाने व्यक्ति के साथ हुई होती, तो शायद इतना बड़ा रूप नहीं लेती। लेकिन अब वह अपनी पहचान या अपना ओहदा तो बदल नहीं सकते, इसलिए जो है, उसे स्वीकार करना ही पड़ता है।

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राजनीति

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27 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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हॉरर फिल्मों को हिंदी सिनेमा में नई पहचान दिलाने वाले विक्रम भट्ट ने सुपरहिट फिल्मों के साथ फ्लॉप दौर भी देखा। उन्होंने बड़े सितारों के साथ काम किया, नए कलाकारों को लॉन्च किया, निजी विवादों का सामना किया और जेल तक का सफर भी तय किया।

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‘राज’, ‘1920’, ‘शापित’ और ‘हॉन्टेड 3डी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हॉरर फिल्मों का बड़ा चेहरा बना दिया। उनकी फिल्मों ने साबित किया कि दमदार कहानी और ट्रीटमेंट के दम पर हॉरर भी बॉक्स ऑफिस पर सफल हो सकता है।

डायरेक्टर के तौर पर नए और बड़े स्टार्स के साथ काम करने का फर्क

अपने लंबे करियर में विक्रम भट्ट ने अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, आमिर खान, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी जैसे बड़े सितारों के साथ-साथ नए कलाकारों के साथ भी काम किया है। उनके मुताबिक दोनों की अपनी-अपनी खूबियां होती हैं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर के तौर पर नए और बड़े स्टार्स के साथ काम करने में क्या फर्क होता है।

विक्रम भट्ट कहते हैं कि नए कलाकार उतने ट्रेंड या मंझे हुए नहीं होते, जितने अनुभवी कलाकार होते हैं। लेकिन उनमें सीखने की इच्छा होती है, जो कई बार स्टार्स में नहीं होती। स्टार्स अपनी तय शैली में काम करना पसंद करते हैं, जबकि डायरेक्टर कई बार कुछ अलग करना चाहता है।

इसलिए दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। स्टार्स के साथ काम करने पर फिल्म को अच्छी ओपनिंग और अनुभवी अभिनेता मिलता है। वहीं, नए कलाकारों के साथ एक उत्साही और कुछ कर दिखाने का जज्बा रखने वाला इंसान मिलता है। इसलिए दोनों के अपने-अपने एडवांटेज हैं।

विक्रम भट्ट का मानना है कि फिल्म की जिम्मेदारी आखिरकार निर्देशक की होती है। हालांकि सफलता और असफलता का श्रेय बराबर नहीं बंटता।

विक्रम भट्ट का मानना है कि फिल्म की जिम्मेदारी आखिरकार निर्देशक की होती है। हालांकि सफलता और असफलता का श्रेय बराबर नहीं बंटता।

फिल्म की जिम्मेदारी हमेशा डायरेक्टर की होती है

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वह कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि फिल्म ‘धुरंधर’ के मामले में उसके डायरेक्टर आदित्य धर का भी नाम लिया जा रहा है। सिर्फ कलाकारों की ही नहीं, बल्कि डायरेक्टर की भी चर्चा हो रही है। वरना अक्सर लोग कहते हैं कि यह फलां स्टार की हिट फिल्म है। यही सबसे बड़ी दिक्कत है।

उनके मुताबिक मेहनत सभी बराबर करते हैं। लेकिन जब स्टार की फिल्म नहीं चलती, तब सबसे पहले डायरेक्टर का नाम आता है कि इतने बड़े स्टार के साथ भी फ्लॉप फिल्म बना दी। इसलिए वह मजाक में कहते हैं कि डायरेक्टर को पैसे फ्लॉप फिल्म की लाश उठाने के लिए दिए जाते हैं। हिट सबकी होती है, लेकिन फ्लॉप सिर्फ डायरेक्टर की मानी जाती है।

हिट का क्रेडिट स्टार को, फ्लॉप का ठीकरा डायरेक्टर पर

विक्रम भट्ट कहते हैं कि यह कोई नई बात नहीं, बल्कि हमेशा से ऐसा ही होता आया है। स्टार एक साथ कई फिल्में करते हैं। अगर उनकी चार फिल्मों में से तीन हिट हो जाएं और आपकी फिल्म फ्लॉप हो जाए, तो लोग यही मानते हैं कि कमी डायरेक्टर में रही होगी।

वह कहते हैं कि लोग यह नहीं समझते कि किसी फिल्म को सफल बनाने में सिर्फ स्टार नहीं होता। कोई राइटर कहानी लिखता है, कोई अच्छे डायलॉग देता है, कोई बेहतरीन सीन बनाता है, अच्छे गाने बनते हैं और सही पब्लिसिटी होती है। तब जाकर एक स्टार बनता है। लेकिन जब फिल्म हिट होती है, तो लोग मान लेते हैं कि सिर्फ स्टार ने ही सब कुछ किया है।

उनके मुताबिक यह बरसों से चला आ रहा सच है और इसे बदला नहीं जा सकता। यही इंडस्ट्री की हकीकत है, इसलिए इससे लड़ने का कोई मतलब नहीं है।

मुझे हमेशा मेरा क्रेडिट मिला

विक्रम भट्ट कहते हैं कि खुशकिस्मती से उनके साथ कभी ऐसा नहीं हुआ कि उनका श्रेय किसी और को मिल गया हो। आमिर खान के साथ काम करने के दौरान भी लोग कहते थे कि हमेशा आमिर को ही क्रेडिट मिलता है, लेकिन ‘गुलाम’ ने उन्हें भी पूरा सम्मान दिया।

वह बताते हैं कि किसी ने कभी यह नहीं कहा कि फिल्म आमिर खान ने डायरेक्ट की थी। उन्हें जितना क्रेडिट मिलना चाहिए था, उतना मिला। ‘ आवारा पागल दीवाना’ के लिए भी उन्हें पूरा श्रेय मिला। इसलिए वह मानते हैं कि इस मामले में उनकी किस्मत अच्छी रही।

आमिर खान के साथ दोबारा काम क्यों नहीं हुआ?

विक्रम भट्ट बताते हैं कि ‘गुलाम’ के समय मुकेश भट्ट और आमिर खान के रिश्ते अच्छे नहीं थे। आमिर शायद उनके साथ आगे काम नहीं करना चाहते थे। यह कोई निजी दुश्मनी नहीं थी, बल्कि दोनों का स्वभाव मेल नहीं खा रहा था।

वह कहते हैं कि वह मुकेश भट्ट के लिए काम करते थे और ‘गुलाम’ भी उन्हें मुकेश भट्ट ने ही दी थी। ऐसे में उन्हें लगा कि अगर वह मुकेश भट्ट को छोड़कर आमिर खान के साथ चले जाएं, तो यह बेवफाई होगी। बाद में फिर कभी ऐसा मौका ही नहीं आया। वह दूसरी दिशा में चले गए और आमिर खान दूसरी राह पर।

भगवान पर भरोसा रखने वाला इंसान बेवफाई नहीं कर सकता

हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा बहुत कम होता है। आमतौर पर लोग बड़े स्टार्स के साथ ही खड़े नजर आते हैं। लेकिन विक्रम भट्ट हमेशा मुकेश भट्ट के ही साथ खड़े रहे। विक्रम भट्ट से जब पूछा गया कि इसकी ताकत और हिम्मत कहां से आई कि किसी को धोखा नहीं देना है?

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि इसके लिए किसी खास हिम्मत या ताकत की जरूरत होती है। उनका मानना है कि जो इंसान सच में भगवान पर भरोसा रखता है, वह ऐसे काम नहीं कर सकता।

वह बताते हैं कि उन्होंने ‘गुलाम’ मुकेश भट्ट के लिए बनाई थी, जिसमें आमिर खान थे। इससे पहले मुकेश भट्ट ने ही उन्हें ‘जानम’ जैसी पहली फिल्म और ‘फरेब’ जैसी पहली हिट फिल्म दी थी। ऐसे इंसान को सिर्फ इसलिए छोड़ देना कि कहीं और काम मिल रहा है, उन्हें सही नहीं लगा।

उनका कहना है कि जो इंसान सिर्फ मौके देखकर रिश्ते बदलता है, वह बिन पेंदी का लोटा होता है और ऐसे लोग इस इंडस्ट्री में ज्यादा समय तक टिक नहीं पाते। अगर आपके अपने सिद्धांत नहीं हैं, तो आप बहुत आगे नहीं जा सकते।

मेरे करियर में ऊंचाइयां भी आईं और बड़े उतार भी

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उनके करियर ने ऊंचाइयां भी देखी हैं और बड़े उतार भी। कभी लगातार छह-सात फिल्में हिट हुईं, तो कभी लगातार छह-सात फिल्में फ्लॉप भी रहीं। फिर दोबारा हिट फिल्मों का दौर आया और उसके बाद फिर फ्लॉप फिल्मों का दौर।

वह अपने करियर की तुलना ऊंट की चाल से करते हैं, जो कभी ऊपर जाती है, कभी नीचे। उनका कहना है कि शायद अब फिर से ऊपर वाला दौर आया है। यह कितना लंबा चलेगा, यह ऊपरवाला ही जानता है। उनकी बस यही दुआ है कि जितना हो सके, यह दौर चलता रहे।

अगर मेरी जिंदगी पर फिल्म बने तो उसका नाम ‘संघर्ष’ होगा

विक्रम भट्ट कहते हैं कि अगर उनकी जिंदगी पर फिल्म बने, तो उसका नाम ‘संघर्ष’ होना चाहिए। उन्होंने हर चीज के लिए संघर्ष किया है- निजी जिंदगी, फिल्मी करियर और आध्यात्मिक यात्रा में भी। उनके मुताबिक संघर्ष उनकी सबसे बड़ी पहचान रहा है।

मेरी फिल्में रिलीज के समय नहीं, समय बीतने के बाद पसंद की जाती हैं

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उनकी फिल्मों के साथ अजीब बात होती है। जब फिल्म रिलीज होती है, तब लोगों को पसंद नहीं आती, लेकिन कुछ साल बाद वही फिल्म कल्ट क्लासिक बन जाती है।

वह उदाहरण देते हैं कि ‘राज’ को रिलीज के समय किसी ने जीरो स्टार दिए, किसी ने एक स्टार और किसी ने डेढ़ स्टार। लेकिन कुछ साल बाद वही फिल्म क्लासिक कहलाने लगी। इसी तरह ‘हॉन्टेड’ के रिलीज होने पर लोगों ने उसकी काफी आलोचना की थी, लेकिन आज वही लोग उसे क्लासिक कहते हैं।

वह कहते हैं कि आज जो फिल्म क्लासिक है, रिलीज के समय वह क्लासिक नहीं थी। और जो आज नई फिल्म है, अगर चल गई तो चार साल बाद उसे भी क्लासिक कहा जाएगा। इसी बात को वह अंग्रेजी की एक लाइन से समझाते हैं- “Durability is acceptability.” यानी जो समय की कसौटी पर टिकता है, वही स्वीकार किया जाता है। जो टिक नहीं पाता, वह समय के साथ खत्म हो जाता है।

धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिन

विक्रम भट्ट के करियर में सिर्फ फिल्मी उतार-चढ़ाव ही नहीं आए। उनकी निजी जिंदगी भी कई बार विवादों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई, जब उन्हें और उनकी पत्नी को एक कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया।

विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को उदयपुर के ‘इंदिरा आईवीएफ’ ग्रुप के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया से जुड़े ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी और ठगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने मुर्डिया की दिवंगत पत्नी पर बायोपिक बनाने के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपए लिए और प्रोजेक्ट बीच में रोक दिया गया। इस गिरफ्तारी ने मीडिया का ध्यान खींचा।

विक्रम भट्ट से जब पूछा गया कि क्या सेलिब्रिटी होने के कारण उन्हें टारगेट किया गया होगा, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब इस तरह दिया।

सेलिब्रिटी होने की वजह से मामला बड़ा बन गया

विक्रम भट्ट कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें सेलिब्रिटी होने की वजह से टारगेट किया गया या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि सेलिब्रिटी होने की वजह से हर बात ज्यादा चर्चा में आ जाती है। वह अखबारों की सुर्खियां बन जाती है और जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाता है।

उनका कहना है कि अगर यही घटना किसी कम जाने-पहचाने व्यक्ति के साथ हुई होती, तो शायद इतना बड़ा रूप नहीं लेती। लेकिन अब वह अपनी पहचान या अपना ओहदा तो बदल नहीं सकते, इसलिए जो है, उसे स्वीकार करना ही पड़ता है।

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‘मॉम, क्या लगती हैं आप?’:14 साल के बेटे की बात सुनकर शिल्पा शेट्टी बोलीं- लगा, अब सच में जिंदगी में कुछ हासिल किया है

हर सफलता की कहानी सिर्फ तालियों और शोहरत से नहीं बनती। इसके पीछे ऐसे दौर भी होते हैं जब मौके छूटते हैं, फैसले गलत साबित होते हैं और फिर खुद को साबित करना पड़ता है। शिल्पा शेट्टी की कहानी भी ऐसी ही रही।पूरी खबर पढ़ें..

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