Tuesday, 21 Apr 2026 | 10:04 PM

Trending :

EXCLUSIVE

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले पर कहा कि बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं होती। घर संभालना, बच्चों की देखभाल और परिवार की मदद करना भी काम है, भले ही वह बैंक खाते में नजर न आए। ऐसे में गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करना गलत है। जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने 16 फरवरी को दिए इस फैसले में कहा कि घरेलू काम का भी आर्थिक महत्व होता है और इसे नजरअंदाज करना नाइंसाफी है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी खाली नहीं बैठती, वह ऐसा काम करती है जिससे कमाने वाला पति सही तरीके से काम कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में अक्सर शादी के बाद महिला से नौकरी छोड़ने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बाद में उसी बात को लेकर पति भत्ता देने से बचते हैं। ऐसी दलील को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। क्या है मामला मामला 2012 में हुई शादी से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि 2020 में पति ने उसे और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत अंतरिम मेंटेनेंस की मांग की। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि पत्नी शिक्षित और सक्षम है, लेकिन उसने नौकरी नहीं की। अपीलीय अदालत ने भी कोई राहत नहीं दी। हाईकोर्ट में पति ने दलील दी कि वह बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रहा है और पत्नी खाली बैठकर मेंटेनेंस नहीं मांग सकती। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई दो अलग बातें हैं। केवल इस आधार पर पत्नी को मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह कमाने में सक्षम है। पत्नी को ₹50 हजार मेंटेनेंस का आदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं काम करना चाहती हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, लेकिन सिर्फ इस आधार पर भत्ता रोकना कि वह कमाने लायक है, गलत सोच है। घर संभालना, बच्चों की देखभाल करना, परिवार का साथ देना और पति के ट्रांसफर के हिसाब से खुद को ढालना, ये सब भी काम ही हैं। कोर्ट ने आगे कहा- कानून को यह देखना होगा कि जिसने सालों परिवार के लिए मेहनत की, वह आर्थिक रूप से असहाय न रह जाए। कोर्ट ने माना कि शादी या परिवार के कारण करियर छोड़ने वाली महिला बाद में उसी स्तर और सैलरी पर नौकरी शुरू नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में महिला की कोई कमाई साबित नहीं हुई, इसलिए उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत 50,000 रुपये देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गुजारा भत्ता के मामले अक्सर बहुत ज्यादा विवादित और टकराव वाले बन जाते हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में लंबी लड़ाई की बजाय आपसी बातचीत और सुलह का रास्ता बेहतर होता है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमेबाजी में अक्सर पत्नी खर्च बढ़ाकर बताती है और पति अपनी कमाई कम बताता है, जिससे सुलह मुश्किल हो जाती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
अपने ही विभाग को खोखला कर रहा था एकाउंटेंट:शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला,सैलरी के नाम पर निकाल लिए 1 करोड़ 11 लाख;14 पर एफआईआर दर्ज

March 21, 2026/
12:20 am

जबलपुर में शिक्षा विभाग के पनागर विकासखंड में पदस्थ एकाउंटेंट ने शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाकर ना सिर्फ...

बंगाल चुनाव 2026: 'पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार नहीं...', हुसैन दलवाई का बड़ा बयान

April 13, 2026/
11:31 am

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर मोदी की सिलीगुड़ी में हुई चुनावी सभा के बाद बीजेपी ने दावा किया कि...

जारा ने चीन में आधी दुकानें बंद की:फास्ट फैशन की जंग में चीनी ब्रांड शीन-टेमू को दी मात, प्रीमियम कस्टमर पर फोकस, रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ की बिक्री

March 23, 2026/
12:24 pm

फैशन जगत में जब शीन और टेमू जैसे चीनी ब्रांड्स ने ‘अल्ट्रा-चीप’ मॉडल से तहलका मचाया, तो माना गया कि...

RCB Captain Rajat Patidar. (AP Images)

April 12, 2026/
8:50 pm

आखरी अपडेट:12 अप्रैल, 2026, 20:50 IST कम से कम 40 वरिष्ठ विधायकों का एक समूह कांग्रेस आलाकमान से मिलने और...

शादी के बाद इमोशनल हुईं रश्मिका मंदाना:सोशल मीडिया पोस्ट पर रिएक्ट किया; बोलीं- ऐसा प्यार ढूंढो जो आपको आजाद कर दे

March 10, 2026/
2:15 pm

साउथ और बॉलीवुड एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना एक सोशल मीडिया नोट को पढ़कर भावुक हो गईं। ये नोट रश्मिका और विजय...

लाहौर हाई कोर्ट में सरबजीत कौर केस पर सुनवाई आज:पति करनैल सिंह की याचिका पर होगा विचार, फैसले में देरी पर कोर्ट जता चुका नाराजगी

April 7, 2026/
7:45 am

भारत से पाकिस्तान जाकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत कौर के फैसले में लाहौर हाई कोर्ट...

हैदराबाद में हुआ विजय-रश्मिका का रिसेप्शन:लाल साड़ी में एक्ट्रेस ने रखा ट्रेडिशनल लुक, कर्नाटक के डिप्टी CM समेत कई बड़े स्टार्स पहुंचे, PHOTOS

March 5, 2026/
4:30 am

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का रिसेप्शन 4 मार्च, गुरुवार को हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में हुआ। कपल ने...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता से जुड़े एक मामले पर कहा कि बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं होती। घर संभालना, बच्चों की देखभाल और परिवार की मदद करना भी काम है, भले ही वह बैंक खाते में नजर न आए। ऐसे में गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के योगदान को नजरअंदाज करना गलत है। जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने 16 फरवरी को दिए इस फैसले में कहा कि घरेलू काम का भी आर्थिक महत्व होता है और इसे नजरअंदाज करना नाइंसाफी है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी खाली नहीं बैठती, वह ऐसा काम करती है जिससे कमाने वाला पति सही तरीके से काम कर पाता है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में अक्सर शादी के बाद महिला से नौकरी छोड़ने की उम्मीद की जाती है, लेकिन बाद में उसी बात को लेकर पति भत्ता देने से बचते हैं। ऐसी दलील को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। क्या है मामला मामला 2012 में हुई शादी से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि 2020 में पति ने उसे और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत अंतरिम मेंटेनेंस की मांग की। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि पत्नी शिक्षित और सक्षम है, लेकिन उसने नौकरी नहीं की। अपीलीय अदालत ने भी कोई राहत नहीं दी। हाईकोर्ट में पति ने दलील दी कि वह बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रहा है और पत्नी खाली बैठकर मेंटेनेंस नहीं मांग सकती। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई दो अलग बातें हैं। केवल इस आधार पर पत्नी को मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह कमाने में सक्षम है। पत्नी को ₹50 हजार मेंटेनेंस का आदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं काम करना चाहती हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, लेकिन सिर्फ इस आधार पर भत्ता रोकना कि वह कमाने लायक है, गलत सोच है। घर संभालना, बच्चों की देखभाल करना, परिवार का साथ देना और पति के ट्रांसफर के हिसाब से खुद को ढालना, ये सब भी काम ही हैं। कोर्ट ने आगे कहा- कानून को यह देखना होगा कि जिसने सालों परिवार के लिए मेहनत की, वह आर्थिक रूप से असहाय न रह जाए। कोर्ट ने माना कि शादी या परिवार के कारण करियर छोड़ने वाली महिला बाद में उसी स्तर और सैलरी पर नौकरी शुरू नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में महिला की कोई कमाई साबित नहीं हुई, इसलिए उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत 50,000 रुपये देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गुजारा भत्ता के मामले अक्सर बहुत ज्यादा विवादित और टकराव वाले बन जाते हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में लंबी लड़ाई की बजाय आपसी बातचीत और सुलह का रास्ता बेहतर होता है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमेबाजी में अक्सर पत्नी खर्च बढ़ाकर बताती है और पति अपनी कमाई कम बताता है, जिससे सुलह मुश्किल हो जाती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.