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पेट और ब्रेन के तनाव को दूर करता है त्रिफला चूर्ण! आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए फायदे, घर पर बनाने का तरीका – Madhya Pradesh News

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Triphala Powder Making Mehtod: कब्ज दूर करने के अलावा, आयुर्वेद में कई रोगों को दूर करने के लिए सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का प्रयोग होता है. इसे घर पर बनाना भी आसान है. तो आइए मध्य प्रदेश रीवा में स्थित आयुर्वेदिक हॉस्पिटल के डॉक्टर से जानते हैं त्रिफला के फायदे और इसे तैयार करने की विधि…

Health Tips: आयुर्वेद में सबसे अधिक जिस हर्बल का प्रयोग होता है, वह है त्रिफला चूर्ण. यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की जड़ी-बूटियों से मिल कर तैयार होता है. यह कई प्रकार के रोगों को दूर कर शरीर को स्वस्थ बनाता है, इसलिए आयुर्वेद में सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का ही प्रयोग होता है. रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सक डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि इस चूर्ण पर सबसे अधिक रिसर्च हुए हैं. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि त्रिफला चूर्ण के फायदे और घर पर तैयार करने की विधि…

त्रिफला चूर्ण के तत्व
त्रिफला चूर्ण को पॉली हर्बल भी कहा जाता है. इसमें आंवला, बहेड़ा और हडरा (हरितकी) को शामिल किया जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल्स, सोडियम, आहार फाइबर के अलावा शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गैलिक एसिड, चेबुलजिक एसिड भी पाए जाते हैं. बायोएक्टिव फ्लेवोनोइड्स जैसे कि क्वेरसेटिन और ल्यूटोलिन, सैपोनिन्स, एंथ्राक्विनोन, अमीनो एसिड, फैटी एसिड भी पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी में कमी, एंटीपायरेटिक, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, एंटीमुटाजेनिक गुण पाए जाते हैं. इसमें हाइपोग्लाइसेमिक, एंटीकैंसर, हेपेटोप्रोटेक्टिव, केमोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव भी पाए जाते हैं.

कितना फायदेमंद त्रिफला चूर्ण
डॉक्टर के अनुसार, त्रिफला भोजन के उचित पाचन और अवशोषण को भी बढ़ावा दे सकता है. सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है. परिसंचरण में सुधार कर सकता है. पित्त नलिकाओं को शिथिल कर सकता है. यह होमियोस्टैसिस को बनाए रख सकता है. त्रिफला गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य में उपयोग के लिए सबसे प्रसिद्ध है. त्रिफला के जलीय और अल्कोहल-आधारित दोनों अर्क दस्त को रोकते हैं.

तनाव कम करता है 
पशु अध्ययनों से पता चला है कि त्रिफला ठंड से प्रेरित तनाव से बचाता है. तनाव से प्रेरित व्यवहार परिवर्तन और जैव रासायनिक परिवर्तन जैसे कि लिपिड पेरोक्सीडेशन और कॉर्टिकोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि करता है. इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण तनाव को कम करने में सक्षम हैं.

डायबिटीज में भी फायदेमंद
एक पशु अध्ययन में त्रिफला को 10 सप्ताह के लिए मोटापे से ग्रस्त चूहों को दिया गया. इससे शरीर में वसा का संचयन, वजन कम हुआ. इससे कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया गया. शुगर की दवा के साथ त्रिफला का सेवन फास्टिंग ब्लड शुगर और फास्टिंग सीरम इंसुलिन का लेवल भी कम हो गया.

इस विधि से तैयार करें त्रिफला चूर्ण

  • आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए तीन तरह की जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है. ये हैं हरड़, बहेड़ा और आंवला.
  • इसे बनाने के लिए 1 भाग हरड़, 2 भाग बहेड़ा और 3 भाग आंवला लें.
  • चूर्ण बनाने के लिए यह जरूरी है कि इन तीनों को खूब सुखाया जाए.
  • सूखने के बाद आप आसानी से इनमें मौजूद गुठली को निकाल कर अलग कर सकती हैं.
  • अब ये तीनों सामग्री चूर्ण बनने के लिए तैयार हैं. अब इन तीनों को खूब बारीक पीसकर उसका चूर्ण बना लें.
  • लीजिए आपका त्रिफला चूर्ण तैयार हो गया है. इस चूर्ण को एयर टाइट कंटेनर में रख लें.
  • रोज रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लें.
  • सुबह इसका सेवन कर रहे हैं तो शहद के साथ ले सकते हैं.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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Health Tips: आयुर्वेद में सबसे अधिक जिस हर्बल का प्रयोग होता है, वह है त्रिफला चूर्ण. यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की जड़ी-बूटियों से मिल कर तैयार होता है. यह कई प्रकार के रोगों को दूर कर शरीर को स्वस्थ बनाता है, इसलिए आयुर्वेद में सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का ही प्रयोग होता है. रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सक डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि इस चूर्ण पर सबसे अधिक रिसर्च हुए हैं. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि त्रिफला चूर्ण के फायदे और घर पर तैयार करने की विधि…

त्रिफला चूर्ण के तत्व
त्रिफला चूर्ण को पॉली हर्बल भी कहा जाता है. इसमें आंवला, बहेड़ा और हडरा (हरितकी) को शामिल किया जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल्स, सोडियम, आहार फाइबर के अलावा शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गैलिक एसिड, चेबुलजिक एसिड भी पाए जाते हैं. बायोएक्टिव फ्लेवोनोइड्स जैसे कि क्वेरसेटिन और ल्यूटोलिन, सैपोनिन्स, एंथ्राक्विनोन, अमीनो एसिड, फैटी एसिड भी पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी में कमी, एंटीपायरेटिक, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, एंटीमुटाजेनिक गुण पाए जाते हैं. इसमें हाइपोग्लाइसेमिक, एंटीकैंसर, हेपेटोप्रोटेक्टिव, केमोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव भी पाए जाते हैं.

कितना फायदेमंद त्रिफला चूर्ण
डॉक्टर के अनुसार, त्रिफला भोजन के उचित पाचन और अवशोषण को भी बढ़ावा दे सकता है. सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है. परिसंचरण में सुधार कर सकता है. पित्त नलिकाओं को शिथिल कर सकता है. यह होमियोस्टैसिस को बनाए रख सकता है. त्रिफला गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य में उपयोग के लिए सबसे प्रसिद्ध है. त्रिफला के जलीय और अल्कोहल-आधारित दोनों अर्क दस्त को रोकते हैं.

तनाव कम करता है 
पशु अध्ययनों से पता चला है कि त्रिफला ठंड से प्रेरित तनाव से बचाता है. तनाव से प्रेरित व्यवहार परिवर्तन और जैव रासायनिक परिवर्तन जैसे कि लिपिड पेरोक्सीडेशन और कॉर्टिकोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि करता है. इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण तनाव को कम करने में सक्षम हैं.

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  • आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए तीन तरह की जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है. ये हैं हरड़, बहेड़ा और आंवला.
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  • चूर्ण बनाने के लिए यह जरूरी है कि इन तीनों को खूब सुखाया जाए.
  • सूखने के बाद आप आसानी से इनमें मौजूद गुठली को निकाल कर अलग कर सकती हैं.
  • अब ये तीनों सामग्री चूर्ण बनने के लिए तैयार हैं. अब इन तीनों को खूब बारीक पीसकर उसका चूर्ण बना लें.
  • लीजिए आपका त्रिफला चूर्ण तैयार हो गया है. इस चूर्ण को एयर टाइट कंटेनर में रख लें.
  • रोज रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लें.
  • सुबह इसका सेवन कर रहे हैं तो शहद के साथ ले सकते हैं.

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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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