मॉस्को7 मिनट पहले
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बढ़ती उम्र और शरीर की कमजोरी को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए का बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है।
‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम के इस प्रोग्राम में मिनी-पिग्स (विशेष प्रजाति के सुअर) के अंदर इंसानी अंग उगाने जैसे तकनीकों पर काम किया जाएगा।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में जीन थेरेपी, लैब में इंसानी अंग तैयार करना और बेहद कम तापमान वाली क्रायोथेरेपी जैसी तकनीकों पर भी काम होगा।
रूसी सरकार का दावा है कि इस मिशन का मकसद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और दशक के अंत तक करीब 1.75 लाख लोगों की जान बचाना है।

जीन थेरेपी से सेल्स की उम्र रोकने की कोशिश
रूस के डिप्टी साइंस मिनिस्टर डेनिस सेकिरीनस्की ने अप्रैल में कहा था कि वैज्ञानिक ऐसी जीन थेरेपी तैयार कर रहे हैं, जो शरीर की कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सके। उन्होंने इसे एंटी-एजिंग की दिशा में सबसे अहम रिसर्च में से एक बताया।
इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा हिस्सा बायोप्रिंटिंग पर आधारित है। इसमें 3D प्रिंटर की मदद से जीवित टिश्यू और अंग तैयार किए जाते हैं। रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि वे इंसानी कार्टिलेज और चूहे की थायरॉयड ग्लैंड तैयार कर चुके हैं। लक्ष्य है कि 2030 तक इंसानी अंगों का पूरी तरह रिप्लेसमेंट किया जा सके।
इसके साथ ही रूस जेनिटिकली मॉडिफाइड मिनी-पिग्स के अंदर इंसानी लिवर, किडनी और दिल को विकसित करने पर भी काम कर रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की कमी दूर हो सकती है।
पुतिन क्रायोथेरेपी और पेप्टाइड थेरेपी लेते रहे है
पुतिन काफी समय से क्रायोथेरेपी और पेप्टाइड थेरेपी लेते रहे है। रूस के वैज्ञानिक व्लादिमिर खाविंसन पुतिन को बछड़ों के टिशू से बने खास पेप्टाइड्स देते थे। वे पेप्टाइड थेरेपी के जरिए एंटी-एजिंग इलाज का समर्थन करते थे। उनका दावा था कि इंसान 120 साल तक जी सकता है।
पुतिन खुद को जवान रखने के लिए क्रायोथेरेपी का इस्तेमाल भी करते हैं। इसमें शरीर को करीब माइनस 112 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में कुछ समय रखा जाता है।
ऑस्ट्रिया के पूर्व चांसलर सेबास्टियन कुर्ज ने बताया था कि 2018 में क्रेमलिन की एक बैठक के दौरान पुतिन ने उन्हें इस थेरेपी के फायदे विस्तार से बताए थे।

पुतिन खुद को जवान रखने के लिए -112 डिग्री सेल्सियस ठंडे पानी में रहते है। इसे क्रायोथेरेपी या कोल्ड-थेरेपी कहा जाता है।
शी जिनपिंग के साथ ‘150 साल जीने’ की चर्चा हुई थी
पिछले साल बीजिंग में सैन्य परेड के दौरान पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत भी चर्चा में आई थी। एक हॉट-माइक रिकॉर्डिंग में पुतिन इंसानी अंग बदलकर जीवन बढ़ाने और इंसानों के 150 साल तक जीने की संभावना पर बात करते सुनाई दिए थे।
उस समय इसे दो उम्रदराज नेताओं की सामान्य बातचीत माना गया, लेकिन अब इसे रूस की लंबी उम्र वाली सरकारी योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।

रूस के के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 3 सितम्बर 2025 को चीन में विक्ट्री डे परेड के दौरान। (फाइल फोटो)
73 साल के पुतिन खुद को फिट नेता के रूप में पेश करते हैं
73 साल के पुतिन लंबे समय से खुद को ताकतवर और फिट नेता के रूप में पेश करते रहे हैं। घुड़सवारी, आइस हॉकी, शिकार और मोटरसाइकिल चलाते हुए उनकी तस्वीरें अक्सर सामने आती रही हैं।
पुतिन के कई करीबी सहयोगी भी अब 70 साल से ज्यादा उम्र के हो चुके हैं। ऐसे में यह एंटी-एजिंग मिशन सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि रूस की सत्ता के टॉप लीडरशिप की निजी चिंताओं से भी जुड़ा माना जा रहा है।
रूस में पुरुषों की औसत उम्र सिर्फ 68 साल है, जो अमेरिका (76 साल) और यूरोप (80 साल) की तुलना में बहुत कम है।

राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को घुड़सवारी काफी पसंद है।
पुतिन की बेटी भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी
पुतिन के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को उनकी डॉक्टर बेटी मारिया वोरोत्सोवा और उनके सबसे करीबी वैज्ञानिक मिखाइल कोवलचुक संभाल रहे हैं। मारिया वोरोन्त्सोवा एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (हार्मोन और डायबिटीज की विशेष डॉक्टर) हैं और रूस के कई सरकारी जेनेटिक्स प्रोग्राम्स से जुड़ी हैं।
दूसरे बड़े चेहरे मिखाइल कोवालचुक हैं, जो सोवियत दौर के कुर्चातोव इंस्टीट्यूट के चीफ हैं। उन्हें इस एंटी-एजिंग मिशन का मुख्य वैचारिक चेहरा माना जाता है। कोवालचुक कई बार कह चुके हैं कि विज्ञान जल्द इंसानों को शरीर के अंग लगातार बदलने और रिपेयर करने की क्षमता देगा।
पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा हार्मोन और डायबिटीज की विशेष डॉक्टर हैं।
वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल
रूस की इस परियोजना पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। बायोप्रिंटिंग रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक अलेक्जेंडर ओस्त्रोव्स्की का कहना है कि अगर रिसर्च के नतीजे बड़े इंटरनेशनल जर्नल्स में प्रकाशित नहीं हो रहे, तो इन दावों पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है।
ओस्त्रोव्स्की ने कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से रूसी वैज्ञानिक दुनिया से काफी हद तक कट गए हैं। दुनिया से अलग रहकर साइंस में आगे बढ़ना आसान नहीं है, हो सकता है कि फंडिंग पाने के लिए पुतिन को वही बातें बताई जा रही हों, जो वह सुनना चाहते हैं।
वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस की एंटी-एजिंग रिसर्च पश्चिमी देशों की तुलना में कम जांची-परखी स्टडीज पर आधारित है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक रूस में काफी ताकतवर और प्रभावशाली माने जाते हैं।
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