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अडाणी केस तुरंत खारिज करने से अमेरिकी जज का इनकार:बोले- सिर्फ सपाट बयान से केस नहीं हटेगा; सरकार को पूरा एक्सप्लेनेशन देना होगा

अडाणी केस तुरंत खारिज करने से अमेरिकी जज का इनकार:बोले- सिर्फ सपाट बयान से केस नहीं हटेगा; सरकार को पूरा एक्सप्लेनेशन देना होगा

अमेरिकी जज ने शुक्रवार को जस्टिस डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि वे भारतीय बिजनेसमैन और बिलिनेयर गौतम अडाणी के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेने के अपने फैसले को सही ठहराने वाली वजह बताएं। कोर्ट ने अडाणी के वकीलों द्वारा मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने के अनुरोध पर तुरंत फैसला सुनाने से इनकार कर दिया है। फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स यानी सरकारी वकीलों ने 18 मई को घोषणा की थी कि वे इस मामले में आगे मुकदमा नहीं चलाएंगे। मामले में अडाणी पर रिश्वतखोरी प्लान से जुड़े सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोप थे। इसके बाद अडाणी के वकीलों ने बुधवार को ब्रुकलिन के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस से मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने का अनुरोध किया था। हालांकि, जज ने कहा कि प्रॉसिक्यूटर्स का नोटिस इस फैसले का पूरा एक्सप्लेनेशन नहीं देता है। गराउफिस ने कहा कि सरकार का संक्षिप्त, सपाट और निष्कर्ष निकालने वाला बयान अदालत को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का पर्याप्त आधार नहीं देता है। इसके साथ ही यह केस की बर्खास्तगी के सरकारी अनुरोध का विश्लेषण करने का अवसर भी नहीं प्रदान करता है। दो राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के बीच बदला फैसला अडाणी पर यह मामला 2024 में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के आखिरी में दर्ज किया गया था। आरोपों को हटाने का यह फैसला रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में दूसरे कार्यकाल के दौरान आया है, जहां जस्टिस डिपार्टमेंट ने एक और हाई-प्रोफाइल व्हाइट कॉलर क्रिमिनल केस को समाप्त करने की मांग की है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी जजों के पास प्रॉसिक्यूटर्स को उन मामलों को जारी रखने के लिए मजबूर करने का बहुत कम अधिकार होता है जिन्हें वे आगे नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन जब तक गराउफिस इसे खारिज नहीं करते, तब तक आरोप आधिकारिक तौर पर लंबित रहेंगे। ब्रुकलिन अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के स्पोक्सपर्सन ने इस पर कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया है। क्या है पूरा मामला और क्या हुए समझौते? गौतम अडाणी पर 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट डेवलप करने की मंजूरी मिल सके। इसके बाद उन पर अपनी कंपनी की एंटी करप्शन प्रैक्टिसेस के बारे में आश्वस्त करने वाली जानकारी देकर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप था। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने हमेशा इन गलत कामों से इनकार किया है और अडाणी खुद इस मामले में कभी अमेरिकी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। इस मामले में अन्य मोर्चों पर ये बड़ी बातें सामने आई हैं SEC के साथ सेटलमेंट: अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भी सिविल चार्ज लगाए थे। इसके तहत एक समझौता हुआ है, जिसमें गौतम अडाणी 6 मिलियन डॉलर और उनके भतीजे सागर अडाणी 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे। प्रतिबंधों के उल्लंघन पर जुर्माना: अडाणी एंटरप्राइजेस लिमिटेड ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले को सुलझाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट को 275 मिलियन डॉलर देने पर अलग से सहमति जताई है। अडाणी के वकील रॉबर्ट गियुफ्रा का मामले पर तर्क अडाणी के वकील रॉबर्ट गियुफ्रा ने जज गराउफिस को 24 जून को लिखे पत्र में तर्क दिया कि यह मामला अमेरिकी कानून के दायरे से बाहर का है और अभियोजक भारत में कथित तौर पर हुई रिश्वतखोरी को साबित करने में असमर्थ रहेंगे। वकील ने बताया कि अडाणी और उनके सह-आरोपियों के वकीलों ने जस्टिस डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं और मामले की कमियों को समझाने के लिए लगभग 500 पन्नों के दस्तावेज सौंपे थे। गियुफ्रा के अनुसार, DOJ का यह फैसला इस केस की कानूनी और तथ्यात्मक कमजोरियों पर सावधानीपूर्वक विचार करने को दर्शाता है। अधिकारियों और करियर प्रोसिक्यूटर्स के बीच मतभेद पिछले महीने जज को भेजे एक लेटर में सीनियर अधिकारियों ने कहा था कि जस्टिस डिपार्टमेंट ने व्यक्तिगत प्रतिवादियों के खिलाफ इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन न लगाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि इस केस को लाने वाले रैंक-एंड-फाइल (करियर) अभियोजकों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इससे पहले पिछले साल भी वॉशिंगटन में जस्टिस डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने न्यूयॉर्क के तत्कालीन मेयर एरिक एडम्स पर बाइडेन के कार्यकाल में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को करियर अभियोजकों के कड़े विरोध के बावजूद हटा दिया था, जिसके बाद कई करियर अभियोजकों ने इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल जज ने इस मामले में अधिक जानकारी देने के लिए 13 जुलाई तक की डेडलाइन तय की है।

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अडाणी केस तुरंत खारिज करने से अमेरिकी जज का इनकार:बोले- सिर्फ सपाट बयान से केस नहीं हटेगा; सरकार को पूरा एक्सप्लेनेशन देना होगा

अमेरिकी जज ने शुक्रवार को जस्टिस डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि वे भारतीय बिजनेसमैन और बिलिनेयर गौतम अडाणी के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेने के अपने फैसले को सही ठहराने वाली वजह बताएं। कोर्ट ने अडाणी के वकीलों द्वारा मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने के अनुरोध पर तुरंत फैसला सुनाने से इनकार कर दिया है। फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स यानी सरकारी वकीलों ने 18 मई को घोषणा की थी कि वे इस मामले में आगे मुकदमा नहीं चलाएंगे। मामले में अडाणी पर रिश्वतखोरी प्लान से जुड़े सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोप थे। इसके बाद अडाणी के वकीलों ने बुधवार को ब्रुकलिन के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस से मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने का अनुरोध किया था। हालांकि, जज ने कहा कि प्रॉसिक्यूटर्स का नोटिस इस फैसले का पूरा एक्सप्लेनेशन नहीं देता है। गराउफिस ने कहा कि सरकार का संक्षिप्त, सपाट और निष्कर्ष निकालने वाला बयान अदालत को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का पर्याप्त आधार नहीं देता है। इसके साथ ही यह केस की बर्खास्तगी के सरकारी अनुरोध का विश्लेषण करने का अवसर भी नहीं प्रदान करता है। दो राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के बीच बदला फैसला अडाणी पर यह मामला 2024 में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के आखिरी में दर्ज किया गया था। आरोपों को हटाने का यह फैसला रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में दूसरे कार्यकाल के दौरान आया है, जहां जस्टिस डिपार्टमेंट ने एक और हाई-प्रोफाइल व्हाइट कॉलर क्रिमिनल केस को समाप्त करने की मांग की है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी जजों के पास प्रॉसिक्यूटर्स को उन मामलों को जारी रखने के लिए मजबूर करने का बहुत कम अधिकार होता है जिन्हें वे आगे नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन जब तक गराउफिस इसे खारिज नहीं करते, तब तक आरोप आधिकारिक तौर पर लंबित रहेंगे। ब्रुकलिन अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के स्पोक्सपर्सन ने इस पर कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया है। क्या है पूरा मामला और क्या हुए समझौते? गौतम अडाणी पर 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट डेवलप करने की मंजूरी मिल सके। इसके बाद उन पर अपनी कंपनी की एंटी करप्शन प्रैक्टिसेस के बारे में आश्वस्त करने वाली जानकारी देकर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप था। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने हमेशा इन गलत कामों से इनकार किया है और अडाणी खुद इस मामले में कभी अमेरिकी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। इस मामले में अन्य मोर्चों पर ये बड़ी बातें सामने आई हैं SEC के साथ सेटलमेंट: अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भी सिविल चार्ज लगाए थे। इसके तहत एक समझौता हुआ है, जिसमें गौतम अडाणी 6 मिलियन डॉलर और उनके भतीजे सागर अडाणी 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे। प्रतिबंधों के उल्लंघन पर जुर्माना: अडाणी एंटरप्राइजेस लिमिटेड ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले को सुलझाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट को 275 मिलियन डॉलर देने पर अलग से सहमति जताई है। अडाणी के वकील रॉबर्ट गियुफ्रा का मामले पर तर्क अडाणी के वकील रॉबर्ट गियुफ्रा ने जज गराउफिस को 24 जून को लिखे पत्र में तर्क दिया कि यह मामला अमेरिकी कानून के दायरे से बाहर का है और अभियोजक भारत में कथित तौर पर हुई रिश्वतखोरी को साबित करने में असमर्थ रहेंगे। वकील ने बताया कि अडाणी और उनके सह-आरोपियों के वकीलों ने जस्टिस डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं और मामले की कमियों को समझाने के लिए लगभग 500 पन्नों के दस्तावेज सौंपे थे। गियुफ्रा के अनुसार, DOJ का यह फैसला इस केस की कानूनी और तथ्यात्मक कमजोरियों पर सावधानीपूर्वक विचार करने को दर्शाता है। अधिकारियों और करियर प्रोसिक्यूटर्स के बीच मतभेद पिछले महीने जज को भेजे एक लेटर में सीनियर अधिकारियों ने कहा था कि जस्टिस डिपार्टमेंट ने व्यक्तिगत प्रतिवादियों के खिलाफ इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन न लगाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि इस केस को लाने वाले रैंक-एंड-फाइल (करियर) अभियोजकों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। इससे पहले पिछले साल भी वॉशिंगटन में जस्टिस डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने न्यूयॉर्क के तत्कालीन मेयर एरिक एडम्स पर बाइडेन के कार्यकाल में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को करियर अभियोजकों के कड़े विरोध के बावजूद हटा दिया था, जिसके बाद कई करियर अभियोजकों ने इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल जज ने इस मामले में अधिक जानकारी देने के लिए 13 जुलाई तक की डेडलाइन तय की है।

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