Monday, 27 Jul 2026 | 06:45 PM

Trending :

EXCLUSIVE

आंतों की सेहत है खराब तो बुढ़ापे में मांसपेशियां की बीमारी सारकोपेनिया का बढ़ता है रिस्क, 30-40% लोग होते हैं प्रभावित-स्टडी

authorimg

अक्सर बुजुर्गावस्था में कुछ लोगों को चलने-फिरने में समस्या आने लगती है. धीरे-धीरे शारीरिक ताकत खो देते हैं. कभी सोचा है कि आखिर ऐसा बुजुर्गों में क्यों होता है? दरअसल, हाल ही में एम्स में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों की कमजोरी का संबंध आंतों (गट) की सेहत हो सकती है. बढ़ती उम्र में काफी लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी देखी जाती है, इसका सीधा संबंध आंतों के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों से हो सकता है. ये अध्ययन जेरियाट्रिक्स एंड जेरॉनटोलॉजी इंटरनेशनल (Geriatrics & Gerontology International) में प्रकाशित की गई है.

इस अध्ययन का नेतृत्व सुदीप मैथ्यू जॉर्ज और प्रसून चटर्जी ने किया है. इस स्टडी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 30 लोगों को शामिल किया गया. जिन लोगों को सारकोपेनिया या sarcopenia (मांसपेशियों का धीरे-धीरे कम होना) था, उनकी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या और विविधता कम पाई गई. यह एक खराब सेहत का संकेत है.

सारकोपेनिया कितना कॉमन है?

डॉ. प्रसून चटर्जी के अनुसार, सारकोपेनिया एक बेहद ही कॉमन प्रॉब्लम है. लगभग 30 से 40% बुजुर्ग इससे प्रभावित होते हैं. इससे गिरने, हड्डी टूटने और दूसरों पर निर्भर होने का खतरा बढ़ जाता है. फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन हमारी स्टडी ‘गट-मसल एक्सिस’ एक नई उम्मीद के रूप में सामने आ रहा है.

अच्छे बैक्टीरिया की कमी
अध्ययन में ये भी पाया गया कि सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों में बिफिडोबैक्टीरियम और लैक्टोबैसिलस जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया कम थे. ये बैक्टीरिया मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा, अन्य बैक्टीरिया समूहों में भी बदलाव देखे गए, जो इन्फ्लेमेशन से जुड़े होते हैं. यह सूजन उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या मांसपेशियों की कमजोरी रोकी जा सकती है?

अध्ययन के अनुसार, आंतों का स्वास्थ्य सुधारकर मांसपेशियों के कमजोर होने को कुछ हद तक रोका या धीमा किया जा सकता है. डॉ. चटर्जी का कहना है कि आंतों के बैक्टीरिया में ये बदलाव सूजन, मेटाबॉलिज्म और पोषण के जरिए मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि उम्र के साथ मांसपेशियों का कम होना पूरी तरह से अपरिहार्य नहीं है, बल्कि कुछ हद तक इसे बदला जा सकता है.

यह अध्ययन ‘गट-मसल एक्सिस’ की उभरती अवधारणा का समर्थन करता है, जिसके अनुसार आंतों के माइक्रोब्स में गड़बड़ी, इम्यून, मेटाबॉलिक और पोषण संबंधी रास्तों के जरिए मांसपेशियों की ताकत को प्रभावित कर सकती है. अध्ययन में ये बात भी सामने आई कि इन प्रतिभागियों में से कोई भी हेल्दी नहीं थे. उनके खानपान के पैटर्न भी अलग-अलग थे. इससे ये साफ संकेत मिलता है कि आप जो भी डाइट लेते हैं, उसका आंतों की सेहत पर भी प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में सही डाइट आंतों और मांसपेशियों दोनों के लिए जरूरी है. क्लिनिकल रूप से, सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कम था. उनकी पकड़ (ग्रिप स्ट्रेंथ) कमजोर थी. उनकी चलने-फिरने की गति भी धीमी थी.

अध्ययन का निष्कर्ष
इस स्टडी से ये पता चलता है कि आंतों के बैक्टीरिया, पोषण और सूजन मिलकर मांसपेशियों की सेहत को प्रभावित करते हैं, इसलिए बढ़ती उम्र में फिट रहने के लिए सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि गट हेल्थ का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
शाह बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे:राहुल आज मुर्शिदाबाद सहित 3 जिलों में जाएंगे; EC ने वोटरों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया

April 14, 2026/
5:03 am

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के रानीगंज में चुनावी सभा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि...

इंदौर के डेली कॉलेज बोर्ड चुनाव का शेड्यूल जारी:21 मई को होगी वोटिंग, विवादित संविधान संशोधन फिलहाल लागू नहीं

April 21, 2026/
1:16 pm

इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज (DC) में बोर्ड चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लंबे समय से चल रहे...

‘धुरंधर 2’ की सफलता के बीच कॉन्सर्ट में दिखीं दीपिका:रणवीर सिंह की मां और बहन भी रहीं मौजूद

March 21, 2026/
9:01 am

19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर 2 को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने...

पंजाबी युवती ने कनाडा पुलिस से मांगा ₹558 करोड़ हर्जाना:बोली- इनकी वजह से माता-पिता मरे, मुझे 13 गोलियां लगीं; हमलावरों ने ड्रग सप्लायर समझा था

May 22, 2026/
5:33 am

पंजाबी युवती ने अपने माता-पिता की हत्या के मामले में कनाडा पुलिस पर 558.4 करोड़ रुपए के हर्जाने का केस...

छवि अपलोड की गई

May 19, 2026/
8:11 pm

नौतपा 2026 जानिए क्या करें और क्या नहीं: मई होने का आधा हिस्सा चुकाया गया है और सूर्य देवता के...

CNG-रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं:कतर में गैस उत्पादन बंद, भारत में 40% सप्लाई घटी; मिडिल-ईस्ट युद्ध के कारण संकट

March 4, 2026/
6:55 pm

मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतें...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

आंतों की सेहत है खराब तो बुढ़ापे में मांसपेशियां की बीमारी सारकोपेनिया का बढ़ता है रिस्क, 30-40% लोग होते हैं प्रभावित-स्टडी

authorimg

अक्सर बुजुर्गावस्था में कुछ लोगों को चलने-फिरने में समस्या आने लगती है. धीरे-धीरे शारीरिक ताकत खो देते हैं. कभी सोचा है कि आखिर ऐसा बुजुर्गों में क्यों होता है? दरअसल, हाल ही में एम्स में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों की कमजोरी का संबंध आंतों (गट) की सेहत हो सकती है. बढ़ती उम्र में काफी लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी देखी जाती है, इसका सीधा संबंध आंतों के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों से हो सकता है. ये अध्ययन जेरियाट्रिक्स एंड जेरॉनटोलॉजी इंटरनेशनल (Geriatrics & Gerontology International) में प्रकाशित की गई है.

इस अध्ययन का नेतृत्व सुदीप मैथ्यू जॉर्ज और प्रसून चटर्जी ने किया है. इस स्टडी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 30 लोगों को शामिल किया गया. जिन लोगों को सारकोपेनिया या sarcopenia (मांसपेशियों का धीरे-धीरे कम होना) था, उनकी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या और विविधता कम पाई गई. यह एक खराब सेहत का संकेत है.

सारकोपेनिया कितना कॉमन है?

डॉ. प्रसून चटर्जी के अनुसार, सारकोपेनिया एक बेहद ही कॉमन प्रॉब्लम है. लगभग 30 से 40% बुजुर्ग इससे प्रभावित होते हैं. इससे गिरने, हड्डी टूटने और दूसरों पर निर्भर होने का खतरा बढ़ जाता है. फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन हमारी स्टडी ‘गट-मसल एक्सिस’ एक नई उम्मीद के रूप में सामने आ रहा है.

अच्छे बैक्टीरिया की कमी
अध्ययन में ये भी पाया गया कि सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों में बिफिडोबैक्टीरियम और लैक्टोबैसिलस जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया कम थे. ये बैक्टीरिया मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा, अन्य बैक्टीरिया समूहों में भी बदलाव देखे गए, जो इन्फ्लेमेशन से जुड़े होते हैं. यह सूजन उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

क्या मांसपेशियों की कमजोरी रोकी जा सकती है?

अध्ययन के अनुसार, आंतों का स्वास्थ्य सुधारकर मांसपेशियों के कमजोर होने को कुछ हद तक रोका या धीमा किया जा सकता है. डॉ. चटर्जी का कहना है कि आंतों के बैक्टीरिया में ये बदलाव सूजन, मेटाबॉलिज्म और पोषण के जरिए मांसपेशियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि उम्र के साथ मांसपेशियों का कम होना पूरी तरह से अपरिहार्य नहीं है, बल्कि कुछ हद तक इसे बदला जा सकता है.

यह अध्ययन ‘गट-मसल एक्सिस’ की उभरती अवधारणा का समर्थन करता है, जिसके अनुसार आंतों के माइक्रोब्स में गड़बड़ी, इम्यून, मेटाबॉलिक और पोषण संबंधी रास्तों के जरिए मांसपेशियों की ताकत को प्रभावित कर सकती है. अध्ययन में ये बात भी सामने आई कि इन प्रतिभागियों में से कोई भी हेल्दी नहीं थे. उनके खानपान के पैटर्न भी अलग-अलग थे. इससे ये साफ संकेत मिलता है कि आप जो भी डाइट लेते हैं, उसका आंतों की सेहत पर भी प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में सही डाइट आंतों और मांसपेशियों दोनों के लिए जरूरी है. क्लिनिकल रूप से, सारकोपेनिया से ग्रस्त लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कम था. उनकी पकड़ (ग्रिप स्ट्रेंथ) कमजोर थी. उनकी चलने-फिरने की गति भी धीमी थी.

अध्ययन का निष्कर्ष
इस स्टडी से ये पता चलता है कि आंतों के बैक्टीरिया, पोषण और सूजन मिलकर मांसपेशियों की सेहत को प्रभावित करते हैं, इसलिए बढ़ती उम्र में फिट रहने के लिए सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि गट हेल्थ का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.